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रामायण में उल्लेखित रावण द्वारा सीताहरण करके श्रीलंका जाते समय पुष्पक विमान का मार्ग अर्थात …

रामायण में उल्लेखित रावण द्वारा सीताहरण करके श्रीलंका जाते समय पुष्पक विमान का मार्ग
अर्थात …

विश्लेषण :
उस मार्ग में कौन सा वैज्ञानिक रहस्य छुपा हुआ है..?
उस मार्ग के बारे में लाखों साल पहले कैसे जानकारी थी..?

पढ़िए इन प्रश्नों के उत्तर, जो आपको आश्चर्य में डाल देंगे ।

मित्रों !
रावण ने माँ सीता का अपहरण पंचवटी (नासिक, महाराष्ट्र) से किया और पुष्पक विमान द्वारा हम्पी (कर्नाटक), लेपक्षी (आँध्रप्रदेश ) होते हुए श्रीलंका पहुंचा ।
आश्चर्य होता है जब हम आधुनिक तकनीक से देखते हैं कि नासिक, हम्पी, लेपक्षी और श्रीलंका बिलकुल एक सीधी लाइन में हैं । अर्थात ये पंचवटी से श्रीलंका जाने का सबसे छोटा रास्ता है ।

अब आप ये सोचिये उस समय Google Map नहीं था जो Shortest Way बता देता । फिर कैसे उस समय ये पता किया गया कि सबसे छोटा और सीधा मार्ग कौनसा है ?

या अगर हम इसे कपोल कल्पित मानने वालों की अहम् संतुष्टि के लिए मान भी लें कि चलो रामायण केवल एक महाकाव्य है जो वाल्मीकि ने लिखा तो फिर ये बताओ कि उस ज़माने में भी गूगल मैप नहीं था तो रामायण लिखने वाले वाल्मीकि को कैसे पता लगा कि पंचवटी से श्रीलंका का सीधा छोटा रास्ता कौनसा है ?

महाकाव्य में तो किन्ही भी स्थानों का ज़िक्र घटनाओं को बताने के लिए आ जाता ।
लेकिन क्यों वाल्मीकि जी ने सीता हरण के लिए केवल उन्ही स्थानों का ज़िक्र किया जो पुष्पक विमान का सबसे छोटा और बिलकुल सीधा रास्ता था ?

ये ठीक वैसे ही है कि जैसे आज से 500 साल पहले गोस्वामी तुलसीदास जी को कैसे पता कि पृथ्वी से सूर्य की दूरी क्या है ? (जुग सहस्त्र जोजन पर भानु = 152 मिलियन किमी – हनुमानचालीसा),
जबकि नासा ने हाल ही कुछ वर्षों पूर्व में ही इस दूरी का पता लगाया है ।

अब आगे देखिये…
पंचवटी वो स्थान है जहां प्रभु श्री राम, माता जानकी और भ्राता लक्ष्मण वनवास के समय रह रहे थे ।
यहीं शूर्पणखा आई और लक्ष्मण से विवाह करने के लिए उपद्रव करने लगी । विवश होकर लक्ष्मण ने शूपर्णखा की नाक यानी नासिका काट दी ।
और आज इस स्थान को हम नासिक (महाराष्ट्र) के नाम से जानते हैं । आगे चलिए…

पुष्पक विमान में जाते हुए सीता ने नीचे देखा कि एक पर्वत के शिखर पर बैठे हुए कुछ वानर ऊपर की ओर कौतुहल से देख रहे हैं तो सीता ने अपने वस्त्र की कोर फाड़कर उसमें अपने कंगन बांधकर नीचे फ़ेंक दिए, ताकि राम को उन्हें ढूढ़ने में सहायता प्राप्त हो सके ।
जिस स्थान पर सीताजी ने उन वानरों को ये आभूषण फेंके वो स्थान था ‘ऋष्यमूक पर्वत’ जो आज के हम्पी (कर्नाटक) में स्थित है ।

इसके बाद, वृद्ध गिद्धराज जटायु ने रोती हुई सीता को देखा, देखा कि कोई राक्षस सीता माता को अपने विमान में ले के जा रहा है ।
जटायु ने सीता को छुड़ाने के लिए रावण से युद्ध किया । रावण ने तलवार से जटायु के पंख काट दिए ।
इसके बाद जब राम और लक्ष्मण सीता को ढूंढते हुए पहुंचे तो उन्होंने दूर से ही जटायु को सबसे पहला सम्बोधन ‘हे पक्षी’ कहते हुए किया और उस जगह का नाम दक्षिण भाषा में ‘लेपक्षी’ (आंधप्रदेश) है ।

अब क्या समझ आया आपको ? पंचवटी—हम्पी—लेपक्षी—श्रीलंका । सीधा रास्ता । सबसे छोटा रास्ता ।

अपने ज्ञान-विज्ञान, संस्कृति को भूल चुके भारतबन्धुओं रामायण कोई मायथोलोजी नहीं है ।
ये महर्षि वाल्मीकि द्वारा लिखा गया सत्य इतिहास है । जिसके समस्त वैज्ञानिक प्रमाण आज उपलब्ध हैं ।
इसलिए जब भी कोई हमारे इतिहास, संस्कृति, साहित्य को मायथोलोजी कहकर लोगो को भ्रमित करने का या खुद को विद्वान दिखाने का प्रयास करे तो उसको पकड़कर बिठा लेना और उससे इन सवालों के जवाब पूछना । विश्वास करो एक का भी जवाब नहीं दे पायेगा ।
अब इस सबमे आपकी ज़िम्मेदारी क्या है ?
आपके हिस्से की ज़िम्मेदारी ये है कि अब जब टीवी पर रामायण देखें तो ये ना सोचें कि कथा चल रही है बल्कि निरंतर ये ध्यान रखें कि ये हमारा इतिहास चल रहा है । इस दृष्टि से रामायण देखें और समझें ।

विशेष आवश्यक ये है कि यही दृष्टि हमारे बच्चों को दें, बच्चों को ये बात ‘बोलकर’ कहें कि ‘बच्चो ये कथा कहानी नहीं है, ये हमारा इतिहास है, जिसको मिटाने की कोशिश की गई है ।
🙏🏻

महिला आघाडी पुणे जिल्हा उपअध्यक्ष यांच्या कडुन महिलांना रोजगार उपलब्ध करून देण्यासाठी व महिलासक्षमीकरणासाठी सुंदर कार्य

महिला आघाडी पुणे जिल्हा उपअध्यक्ष यांच्या कडुन महिलांना रोजगार उपलब्ध करून देण्यासाठी व महिला सक्षमीकरणासाठी कोथरूड महिला आघाडी उपाध्यक्ष पल्लवीताई गाडगीळ यांनी भवानी माता मंदिर वस्ती मध्ये अगरबत्ती / उदबत्ती मेकिंग ची ट्रैनिंग ऍक्टिव्हिटी घेतली. याला अतिशय चांगला प्रतिसाद मिळाला.
या कार्यक्रमासाठी महिला मोर्चा सरचिटणीस सुरेखाताई जगताप,उपाध्यक्ष सुप्रियाताई माझिरे, वर्षाताई पाटील, social media प्रमुख कल्याणीताई खर्डेकर, रंजनाताई राहाणे, कैलासदादा माझिरे आदि मान्यवर उपस्थित होते.

8 ऑगस्ट अशी आहे इंदापूर कोरोना आकडेवारी..

8ऑगस्ट अशी आहे इंदापूर कोरोना आकडेवारी..

आज दिनांक 8 ऑगस्ट रोजी इंदापूर तालुक्यात कोरोना चे २० नवे रुग्ण आढळून आले आहेत. यामध्ये ग्रामीण भागातील 19 व शहरी भागातील 1 रुग्णांचा समावेश आहे.अशी माहिती इंदापूर चे तहसीलदार अनिल ठोंबरे यांनी दिली.

त्यापैकी ग्रामीण भागातील 47 तर शहरी भागातील 03 असे एकूण 50 रुग्ण बरे होऊन घरी परतले आहेत.

ग्रामीण भागातील २ तर तालुक्या बाहेरील एका रुग्णाचा दुर्दैवी मृत्यू झाला.

नागरिकांनी शासनाच्या नियमांचे पालन करावे मास्क सॅनिटायझर चा वापर करावा व आपल्या कुटुंबाचे आपली जबाबदारी घ्यावी आसे मार्गदर्शन तहसीलदार मा. श्री आनिल ठोंबरे यांनी केले.

इचलकरंजीच्या कन्येने घातली अमेरिकेला गवसणी ! हिने चक्क मेंदुमध्ये बसवण्याचे नविन तंत्रज्ञान विकसित केले !

इचलकरंजीच्या कन्येने घातली अमेरिकेला गवसणी ! हिने चक्क मेंदुमध्ये बसवण्याचे नविन तंत्रज्ञान विकसित केले !

हिचे नाव आहे सुरभि राजेंद्र निंबाळकर ! हिने सादर केलेला प्रबंध स्वीकारून तिला युनिव्हर्सिटी ऑफ कॅलिफोर्निया आणि सॅन-डिएगो स्टेट युनिव्हर्सिटी या अमेरिकेतील सुप्रसिद्ध विद्यापीठांनी संयुक्तपणे PhD प्रदान केली.

सुरभिने, बायो-मेडिकल इंजिनीअरिंग क्षेत्रात अत्यंत महत्त्वाचे संशोधन करत ग्राफिन पासून मेंदूमध्ये बसविण्या करीता implant बनविण्याचे तंत्रज्ञान विकसित केले. व त्याच्या यशस्वी चाचण्याही घेतल्या. तिचे अनेक संशोधन पेपर, Nature Scientific Report सह अनेक सुप्रसिद्ध journals मध्ये प्रसिद्ध झाले आहेत.

आज जगभरातील जवळजवळ १०० कोटी व्यक्ती पार्किन्सन, स्ट्रोक, एपिलेप्सी, कंपवात, इत्यादी सारख्या न्यूरोलॉजिकल विकारांनी ग्रस्त आहेत. त्यांच्याकरता हे नाविन्यपूर्ण probes व ब्रेन-कॉम्प्युटर इंटरफेसेस (BCI) महत्वाचे ठरणार आहेत. या संशोधना मुळे महत्त्वाची उपचार पद्धती तसेच संशोधनाच्या संधीही उपलब्ध होत आहेत. हे नव्याने विकसित केलेले कार्बन-आधारित न्यूरल-प्रोब मेंदूत implant करण्यायोग्य आहेत आणि हे मायक्रोइलेक्ट्रोड्स, पारंपारिक सोन्याच्या/ प्लॅटिनम/ इरिडियमच्या इलेक्ट्रोड्सपेक्षा ज्यास्ती उपयुक्त आहेत. त्यांचे इलेक्ट्रिकल आणि इलेक्ट्रोकेमिकल गुणधर्मही खूप चांगले दिसत आहेत आणि हे probes मेंदूमध्ये बसवण्यात अनेक फायदे मिळणार आहेत. हे नवीन प्रकारचे probes मेंदूमध्ये उत्पन्न होणारे विद्युत संदेश ग्रहण करण्यास तसेच मेंदूपर्यंत पोहोचवण्यासही सक्षम आहेत. भविष्यात मज्जासंस्थेच्या दोषांच्या उपचारांपासून ते वेदना कमी करण्यापर्यंतच्या उपचारांसाठी यांचा प्रभावी वापर होऊ शकणार आहे.

मानवी मेंदू आणि कॉम्प्युटर यांचा एकमेकांशी संवाद साधण्याकरिता interface तयार करण्यासाठी अमेरिकेत स्थापन झालेल्या Grapheton या start up कंपनी मध्ये सुरभि senior engineer म्हणून जवाबदारी सांभाळत आहे. तसेच सध्या ती Intel या जगप्रसिद्ध semiconductor कंपनीत internship करीत आहे.
त्याआधी सुरभिने कमिन्स कॉलेज येथून पुणे विद्यापीठाची BE (Instrumentation) ही पदवी उच्च गुणवत्तेसह प्राप्त केली. कमिन्स इंडिया येथे दोन वर्षे कार्यानुभव मिळवल्यानंतर तिने उच्च शिक्षणाकरिता अमेरिकेत कॅलिफोर्निया राज्यातील सॅन-डिएगो स्टेट युनिव्हर्सटी (SDSU) येथे प्रवेश घेऊन MS ही पदवी मिळविली.
सुरभिचे प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षण DKTE च्या अनंतराव भिडे विद्यामंदिर व इचलकरंजी हायस्कूल येथे झाले तर गोविंदराव हायस्कूल व ज्युनिअर कॉलेज, इचलकरंजी मधून तिने HSC केले आहे.विशेष म्हणजे आयकोचे माजी व्यवस्थापकिय संचालक शंकरराव निंबाळकर यांची नात आहे.

सुरभिचे खूप अभिनंदन.

सनातन समाज को कौन बांटकर खत्म कर रहा है? दोशी कौन है ? जरूर विचार करो !!!🔥

सनातन समाज !🔥

सनातन समाज को कौन बांटकर खत्म कर रहा है? दोशी कौन है ? जरूर विचार करो !!!🔥

क)- सनातन समाज के बदले लगभग 1450 वर्ष पूर्व नये बने —
इस्लाम में भी हैं ब्राह्मण- मुफ्ती ,इमाम,मोलाना आदि कौन हैं ये लोग अपने समाज के ब्राह्मण ही तो हैं , याद रखो हर समाज को चलाने के लिये कुछ लोग नियुक्त होते हैं इसी तरह से इस्लाम में भी इस्लाम के नियमानुसार कुछ लोग नियुक्त हैं।🔥

ख)- सनातन समाज के बदले लगभग 2021 वर्ष पूर्व नये बने —
ईसाई में भी हैं ब्राह्मण – पादरी, फादर,विशप , पोप आदि कौन हैं ये लोग भी अपने समाज के ब्राह्मण ही तो हैं , याद रखो हर समाज को चलाने के लिये कुछ लोग नियुक्त होते हैं इसी तरह से इस्लाम में भी इस्लाम के नियमानुसार कुछ लोग नियुक्त हैं।🔥

🔥सनातन समाज के लोगों सोचो आखिर सनातनी हिन्दुओं के नियुक्त ब्राह्मणों का ही विरोध क्यों ???
क्या दे रहे हो और कितना दे रहे हो ब्राह्मणों को विचार जरूर कर लो ???🔥

🔥सोचो जबकि सनातन समाज के सन्त महात्माओं और ऋषियों और मुनियों की किताब पर ही संसार के वैज्ञानिक रिसर्च व खोज कर रहे हैं !!!🔥

नोट- जो भी समाज बनेगा उसको चलाने के लिये लोग रहते हैं । 🔥

विशेष ध्यान दें–🔥

(परमात्मा को जानने का रास्ता तो आसान है पर पाना कठिन है क्योंकि परमात्मा को पाने की पात्रता व मरमात्मा को पाने की लगन ही परमात्मा को पाने का मार्ग खोलती है)

सनातन समाज को चार भागों में समाज को बांटा गया–

1)- ब्राह्मण – 🔥🔥
शिक्षा,अध्यात्मिक ज्ञान की खोज, सभी मानवों के हित के उपाय हेतु नित नई खोज, चिकित्सा व आयुर्वेद व भुगोल व विज्ञान व ज्योतिष व खगोल व यज्ञ आदि की खोज करते रहना तथा समाज की जरूरत के हिसाब से काम करना समाज को जागरूक करना , सभी के जीविकोपार्जन हेतु समाज को जागरुक करना,रक्षा एवं सुरक्षा हेतु नई तकनीकी खोजना, सभी वर्गों के लोगों को अध्यात्मिक ज्ञान और भौतिक ज्ञान देना ,सभी को ज्ञान विज्ञान की खोज का लाभ देना , शासन को उचित सलाह व सेवा देना , कठोर व तपस्वी के रूप में आश्रम में रहना , देश व समाज की रक्षा में सदा तैयार रहना। दोशी पाये जाने पर चार गुना सजा मिलती थी।

2)- क्षत्रिय-🔥🔥
समाज के पीडित लोगों को बचाना, ब्राह्मणो को उनके कामों को करने में हर तरह से सुरक्षा देना , सुरक्षा की दृष्टि से ही प्रशिक्षण लेना , पशुओं और गायों की सुरक्षा करना , कमजोरों को दबंग लोगों से बचाना , देश व समाज की सुरक्षा हेतु सदा तैयार रहना। दोशी पाये जाने पर तीन गुना सजा मिलती थी।

3)- वैश्य-🔥🔥
खेती करना , व्यापार करना, समाज के लिये जरूरी समानों को हर तरह से बनवाना या बाहर से मंगा कर उपलब्ध कराना , समाज की हर जरूरी चीजें समाज को उपलब्ध कराना , शासन को टैक्स देना , देश व समाज की सुरक्षा हेतु सदा तैयार रहना , दोशी पाये जाने पर दोगनी सजा मिलती थी।

4)- शूद्र(सहायक) – 🔥🔥
समाज के द्वारा दिये गये काम को पूरा करना , ब्राह्मणो और क्षत्रियों वैश्यों के कामों में सहयोग करना जिससे समाज को हर तरह की सुविधा मिल सके, देश व समाज की सुरक्षा हेतु सदा तैयार रहना।दोशी पाये जाने पर एक गुना सजा मिलती थी।

नोट–

1)-सनातन समाज में समाज ही सबको रोजगार देता था। महाभारत का युद्ध विश्व युद्ध था , इसी महाभारत के बाद से सनातन समाज ही सबसे ज्यादा ही कमजोर हुवा तो विश्व में नये नये समाज बने तथा नये नये परमात्मा पैदा किये गये। अभी कितने समाज बनेंगे तथा परमात्मा पैदा किये जायेंगे। युद्ध के बाद क्या होता धर्मात्मा राजा मार दिए गए उनकी मरने के बाद अराजक तत्वों ने सत्ता पर कब्जा कर जनता का ही उत्पीड़न किया जिसके कारण जनता राष्ट्रवाद व देश हित व अपने हित से विमुख हो गई मतलब भूल ही गई ही गई है इसी का परिणाम है भारत कई सालों से गुलाम रहा गुलाम मी की पीड़ा से आज भी निकल नहीं पा रहा है सनातन समाज को खत्म करने हेतु पुस्तकालयों को जलाया गया विद्यालयों को जलाया गया। बाद में मौखिक ज्ञान के जरिए जरिये जो पुस्तकालय लिखे गये उनमें फर्जी ब्राह्मणों के जरिये कुछ हेराफेरी किये गये। सोचो क्यों पुस्तकालय जलाये गये।सत्ता की ताकत के बल पर 900 वर्षों से सनातन समाज को केवल खत्म किया जा रहा है । भारत के लोगों होश में आ जावो खुद को और सनातन समाज को बचालो। सनातन समाज संस्कृति से विश्व में बेरोजगारी खत्म होगी तथा लोग खुशहाल होंगे तथा विश्व में शान्ति आयेगी तथा भ्रष्टाचार व आतंकवाद तथा उत्पीड़न बन्द व खत्म होगा ।🔥🔥

2)- परिणाम- सनातन समाज के कमजोर होने से विश्व में प्राकृतिक आपदा का बोलबाला होता जा रहा है। रासायनिक उपयोग ने विश्व को कैंसर,लिवर डैमेज, किडनी फेलियर, एड़स, तमाम घातक बिमारियों ने घेर लिया है लोग मंहगी दवाइयों से आर्थिक रूप से लूटे जा रहे है। बेरोजगारी बढ़ रही है , आध्यत्मिक ज्ञान व्यापार हो गया है,सनातन अध्यात्मिक ज्ञान का लोग मजाक उड़ाया जा रहा है, परमात्मा को लोग मजाक समझ लिये हैं, इस्लाम व ईसाई समाज के लोग सनातन समाज का मजाक उडाते है जबकि सनातन देवी देवताओं का नाम बदलकर मनमाने तरीके से अपना अपना समाज बनाकर सनातन समाज को खत्म करना चाहते हैं ।ब्राह्मणों का मजाक उड़ाते है और उड़वाते हैं जीते जी परमात्मा को कैसे जाना जाय ये ज्ञान इनके पास नहीं है केवल मरने के बाद ये मिलेगा मरने के बाल वो मिलेगा या जिहाद करने की बात करेंगे। याद रखो इस्लाम व ईसाई समाज के पहले से सनातन अध्यात्मिकज्ञान था । सभी मानवों चाहे तुम कोई भी हो याद रखो परमात्मा को पाने का एक ही रास्ता है केवल साधन अलग हो सकता है। मानवों का एक ही धर्म होता है वह है केवल कर्तव्य। हिन्दू ,इस्लाम, ईसाई ,बौद्ध , जैन ,सिख , ये पृथ्वी पर रह रहे मानवों की पार्टियां हैं धर्म नहीं है। परमात्मा तो जो पहले से था वही आज है और सदा रहेगा परमात्मा तो सदा सनातन( निरन्तर ) है और रहेगा ।🔥🔥

नोट– संसार में मानवता को बचाने के हेतु इस महा युद्घ में शामिल हों और इस सन्देश को जरूर ही शेयर करें ।

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धर्म आणि दहशतवाद*🫂

🚩 *धर्म आणि दहशतवाद*🫂
🙋🏻‍♂️➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖🤷🏼‍♂️

⚫ *देशापेक्षा धर्म दहशतवाद्यांचा प्रभाव मोठा*

⚫ आव्हान दहशतवादाचे
➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖
👉 धर्म म्हणजे Religion ➖
__________________

*अर्थातच ; धर्म शब्दाचा अर्थ खुप मोठा आणि व्यापक आहे*…!!
भारतीय संस्कृती प्रमाणे किंवा परंपरेनुसार निसर्गाचा नियम म्हणजे *धर्म [ देव देश आणि धर्म ] राजधर्म* आहे…!!
” Religion ” इंग्लिश मध्ये म्हंटले जात आहे , राजकीय माध्यमातून दहशतवादी हल्ले जरी होत असतील तर प्रेरणादायी धर्मदेते , जहाल धर्माधिष्ठित दहशतवादी संघटना आहेत…!!
*कारण* ;
त्यांच्या मुळे धार्मिक सर्वंकषावादी सिद्धांत म्हणजे ; [ *व्यक्तीच्या जीवनाच्या प्रत्येक घटकांवर प्रभाव पडणे , नियंत्रण आणणारी विचार प्रणाली आहे* ]…!!
धर्माच्या इतिहासात , *मुस्लिम , यहुदी आणि ख्रिस्ती* यांना आपले जिवलग बनवू नका हे एकमेकांचे मित्र आहे ; कारणीभूत जगातील मुख्य हल्ले आणि धर्मावर त्यांचा प्रभाव स्पष्टपणे जाणवतो…!!
घटना :- २६ नोव्हेंबर २००८ रोजी मुंबईवर क्रुरपणे दहशतवादी हल्ला झालातो ; ताज हॉटेल , कॅफे , सी.एस. टी , लिओपोल्ड , अश्या ठिकाणांवर करण्या आला ,हा हल्ला लष्कर
एतैबाने केला होता …!!
*ही देहशतवादी संघटना असून यांना पाकिस्तानचे सहकारी आहेत*
सी.एस. टी :- सामान्य नागरिकांची वर्दळीचे ठिकाण आहे , आणि निवडण्याचे कारण भारतात मोठी दशत निर्माण करायची होती…!!

👉 *भारत देश सुरक्षित नाही हे दाखवायचे आहे*…!!

शेवटचे तत्व महणजे दहशतवादी लोकसंख्या , ही बहुसंख्याक होत गेले , धर्माच्या आधारे एकत्रीकरण शत्र स्थापन वाढले त्यामुळे सक्रिय दहशतवाद वाढला…!!

👉 *भारत देशाची Economy + Geography = culture* वंचित राहिले…….!!

अश्या परिस्थिती मध्ये राजधर्म चेचण्यात आलं , चळवळ सुरू झाली ; खरंतर मूलतत्ववाद्यांनी पुरावे इतिहासात आणले परंतु , धर्माच्या मुल्यांचे पालन करताना देशाचा कायदा व भावना ठेचू लागल्या होत्या…!!

साभार ,

*संघ स्वयंसेवक* ,
निखील नितीनचंद्र शाह
०९७६२३४५५५५

सिंघम पार्ट टू

*इंदापूर तालुक्याला लाभलेले कर्तुत्ववान अधिकारी सहसा इंदापूरला पुन्हा येत नाहीत. पण ज्यांनी निरा भीमा खोऱ्यामध्ये अवैध गौण खनिज उत्खननास चाप लावला गुन्हेगार होऊ पाहणारी पिढी सावरण्याचा प्रयत्न केला.*
*तालुका कार्यकारी दंडाधिकारी म्हणून काम करत असताना शेतकऱ्यांच्या रस्त्यांचे प्रश्न तातडीने सोडवण्यासाठी काम केले. त्यामुळे इंदापूर तालुक्यातील जनतेला प्रशासकीय अधिकारी कसा असतो हे समजले परंतु दुर्दैवाने त्यांची बदली झाली व बरीच कामे अर्धी राहिली.*

*आता पुन्हा आल्यानंतर मात्र इंदापूरकरांची फार मोठी आशा आहे. इंदापूर तालुक्यातील अनेक शेतकऱ्यांचे शेतीच्या रस्त्यावरून वाद आहेत अनेक जण वहिवाटीची रस्ते मोडून आजूबाजूच्या शेतकऱ्यांना अडथळा निर्माण करत आहेत. त्यांचे दावे तहसिलदार न्यायालयात प्रलंबित आहेत.*
*जमिनींच्या खरेदी-विक्रीमध्ये घोटाळे आहेत. नसलेली जमीन विकली जात आहे. तर बनावट हक्कसोड पत्राद्वारे बहिणीचे हक्क सोड केले जात आहेत. एकत्रित कुटुंबाच्या मालमत्ता कुटुंबातील एखाद्या व्यक्तीला घेऊन मुद्रांक कायद्यातील पळवाट काढून विक्री केली जात आहे. व त्या अनुषंगाने पुन्हा वाद निर्माण होत आहेत.*

*राज्यांमध्ये तुकडे जोड तुकडे बंदी कायदा लागू असताना निबंधक कार्यालयाकडून मात्र जमिनीचे तुकडे पाडले जात आहेत. १० आर क्षेत्रामध्ये २० खरेदीदार खातेदार निर्माण करून शासनाच्या तुकडे जोड तुकडे बंदी कायद्याच्या विरोधात व्यवहार केले जात आहेत. एका बाजूला कायदेभंग तर दुसर्‍या बाजूला शासनाचा महसूल बुडवण्याचा उद्योग केला जात आहे. व हे सर्व शासनाचा पगार घेणारे लोक करत आहेत.*

*ऑनलाइन उतारे करत असताना तलाठ्यांनी अनेक प्रमाद (चुका)करून ठेवल्या आहेत. कुणाच्या ७/१२ चे क्षेत्र चुकीचे, तर कोणाचे नाव चुकीचे, कुणाचा आकार चुकीचा तर एकूण आकार भरत नाही अशी परिस्थिती तलाठ्यांनी निर्माण करून ठेवली आहे अनेक खरेदीखताची नोंद कारण नसताना प्रलंबित ठेवलेली आहे या माध्यमातून शेतकऱ्यांचे शोषण केले जाते त्यांना आर्थिक मागणी केली जाते ते व मागणी न पूर्ण केल्यास प्रकरण प्रलंबित ठेवले जाते व हे सर्व उद्योग शासकीय सेवेतील विलंबास प्रतिबंध कायद्याचे विरोधात केले जातात. झिरो तलाठी भाऊसाहेब शेतकऱ्यांचे शोषण करत आहेत त्यामुळे शेतकरी त्रस्त आहेत. तर मंडल अधिकाऱ्यांची स्थितीच न्यारी बहुतेक मंडलाधिकारी हे कार्यालयात उपस्थित नसतात परंतु त्यांचे खाजगी साहेब मात्र उपस्थित असतात काही खाजगी सहाय्यक तर एवढे खतरनाक आहेत की covid-19 च्या काळामध्ये नागरिकांची कागदपत्रे सुद्धा हातात घेत नाहीत कोणत्याही कागदपत्राची नागरिकांना पोच देत नाहीत श्रावणबाळ योजनेचे लाभार्थी असलेले वयोवृद्ध नागरिक संजय गांधी निराधार योजनेतील विधवा महिला भगिनी अपंग योजनेतील अपंग शेतकरी दाखला २१ हजार उत्पन्न दाखला ईडब्ल्यूएस दाखला यासाठी लागणारी टिपणी अहवाल या सर्वांनी पैसे दिल्याशिवाय मंडलाधिकारी देतच नाहीत तर त्याही पुढे जाऊन त्यांचे कारकून हे मंडळ अधिकाऱ्याच्या पेक्षा वरिष्ठ असल्याचा आव आणून नागरिकांना हेलपाटे घालण्यास भाग पडतात विशेष म्हणजे नागरिकांना तक्रार कोणाकडे करावी व त्याचे निरसन कसे होईल हेच माहित नाही त्यामुळे विद्यार्थी विधवा महिला ज्येष्ठ नागरिक यांचे प्रचंड ससेहोलपट या कार्यालयांकडून केली जाते*
*शासनाच्या पुरवठा विभागाकडून पुरवल्या जाणाऱ्या स्वस्त धान्याची गाव पातळीवर वितरण करणारी व्यवस्था आजही भ्रष्टाचार करण्याची संधी शोधत असते आजही गोरगरीब दीनदलित शेतकरी शेतमजुरांचे पॉजमशीनवर अंगठे घेऊन त्यांना कमी धान्य दिले जाते.*

*असे एक ना अनेक आव्हाने सिंघम पार्ट टू मध्ये आहेत या सर्व आव्हानावर विजय मिळवून इंदापूर तालुक्यातील नागरिकांना दिलासा देण्यासाठी मा. श्रीकांत पाटील साहेब यांना हार्दिक शुभेच्छा.*

*मा.नितीन दादा आरडे पाटील*
*प्रदेशाध्यक्ष*
*शिवशाही शेतकरी संघटना महाराष्ट्र राज्य*

टोकियो ऑलिम्पिकमध्ये इतिहास रचणाऱ्या नीरज चोप्राचा प्रेरणादायी प्रवास*

टोकियो ऑलिम्पिकमध्ये इतिहास रचणाऱ्या नीरज चोप्राचा प्रेरणादायी प्रवास*

*नवी दिल्ली, ०७ ऑगस्ट:-अॅथलेटिक्समध्ये पदक जिंकण्यासाठी भारताची अनेक वर्षांची प्रतीक्षा संपली ऑगस्ट २०२१ मध्ये संपली.. भाला फेकणारा नीरज चोप्रा याने या खेळात भारताला सुवर्णपदक मिळवून दिले होते. त्याने अंतिम फेरीत 87.58 मीटर थ्रो करत सुवर्ण पटकावले. नीरजने पहिल्या प्रयत्नात 87.03 मीटर आणि दुसऱ्या प्रयत्नात 87.58 मीटर भाला फेकला. त्याने तिसऱ्या प्रयत्नात 76.79 मीटर भाला फेकला, चौथ्या आणि पाचव्या क्रमांकावर फाऊल आणि 6 व्या प्रयत्नात फाउल थ्रो केला. नीरजने क्वालिफाइंग राउंडमध्ये 86.65 मीटर थ्रो केला होता आणि आपल्या ग्रुपमध्ये पहिल्या नंबरवर होता.*

*👉13 वर्षांनंतर भारताला सुवर्ण:-*

*ऑलिम्पिक स्पर्धेत 13 वर्षानंतर भारताला एखाद्या स्पर्धेत सुवर्णपदक मिळाले आहे. यापूर्वी 2008 मध्ये बीजिंग ऑलिम्पिक नेमबाज अभिनव बिंद्राला सुवर्णपदक मिळाले होते. बिंद्राने 10 मीटर एअर रायफल स्पर्धेत सुवर्ण जिंकले होते.*

*👉भारताचे आतापर्यंतचे 10 वे सुवर्ण:-*

*ऑलिम्पिक स्पर्धेत भारताचे हे आतापर्यंतचे 10 वे सुवर्णपदक होते. भारताने यापूर्वी हॉकीमध्ये 8 आणि नेमबाजीमध्ये 1 सुवर्णपदक जिंकले आहे. अशा प्रकारे, हे भारताचे केवळ दुसरे वैयक्तिक सुवर्णपदक आहे.*

*👉👉सर्वसामान्य कुटुंबात जन्म,👉तर चंडीगढमध्ये शिक्षण:-*

*अतिशय सर्वसामान्य परिस्थितीतून शिक्षण आणि खेळाची सांगड घालत नीरज मोठा झाला. नीरज चोप्राचा जन्म 27 डिसेंबर 1997 ला हरयाणाच्या पानीपत जिल्ह्यातल्या खांद्रा गावात एका शेतकरी कुटुंबात झाला. नीरजने आपलं शिक्षण चंडीगढमधून पूर्ण केलं. भालाफेक या खेळाची कोणतीही पार्श्वभूमी त्याच्या गावात नवह्ती. तरी जिद्दीच्या जोरावर त्याने या खेळात सातत्य ठेवलं आणि चांगली कामगिरी करत राहिला.*

*👉भालाफेकीत जागतिक मेडल नंतर सैन्यात अधिकारी:-*

*2016 मध्ये भारतात झालेल्या दक्षिण आशियाई खेळांमध्ये नीरजने सुवर्णपदक पटकावलं. त्यानंतर 2016 मध्ये नीरजने पोलंडमध्ये झालेल्या IAAF अंडर 20 वर्ल्ड चॅम्पियनशीपमध्ये 86.48 मीटर दूर भाला फेकत सुवर्णपदक पटकावलेलं. अंजू बॉबी जॉर्जनंतर जागतिक स्तरावरच्या अॅथलेटिक स्पर्धेत पदक पटकवणारा नीरज दुसरा भारतीय ठरला होता. या कामगिरीनंतर नीरजची भारतीय सेनेत ज्युनियर कमिशन्ड ऑफिसर म्हणून नेमणूक करण्यात आली होती.*

*👉कोरोनाची लागण, तरी डगमगला नाही:-*

*2018 मध्ये इंडोनेशियाच्या जकार्ता इथं एशियन्स गेम्समध्ये नीरजने 88.06 मीटर दूर भालाफेक केला होता. या स्पर्धेत त्याने सुवर्णपदक पटकावलं होतं. अशी कामगिरी करणारा तो पहिला भारतीय खेळाडू आहे. एशियन गेम्स आणि कॉमनवेल्थ गेम्समध्ये जबरदस्त कामगिरी केल्यानंतर 2018 मध्ये नीरजच्या खांद्याला दुखापत झाली होती. या कारणाने तो अनेक दिवस खेळापासून दूर होता. 2019 मध्ये त्याला कोरोनाची लागण झाली होती. यामुळे त्याला अनेक स्पर्धांपासून मुकावं लागलं होतं.*

*👉जर्मन कोचकडून घेतली ट्रेनिंग:-*

*नीरज चोप्राने आपले थ्रोइंग स्किल्स आणखी चांगले बनवण्यासाठी जर्मनीचे बायो मेकॅनिक्स एक्सपर्ट क्लाउस बार्तोनित्ज यांच्याकडून ट्रेनिंग घेतली. तेव्हापासून नीरज सलग चांगले परफॉर्म करत आहे.*

*👉यापूर्वी 5 मोठ्या इव्हेंटमध्ये जिंकले गोल्ड:-*

*इंडियन आर्मीमध्ये कार्यरत असलेल्या नीरजने ऑलिम्पिकपूर्वी 5 मेगा स्पोर्ट्स इव्हेंटमध्ये गोल्ड मेडल जिंकले आहेत. त्याने एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन चॅम्पियनशिप, साउथ एशियन गेम्स आणि वर्ल्ड जुनिअर चॅम्पियनशिपमध्ये सुवर्ण पदक मिळवले आहेत.*

*👉वजन कमी करण्यासाठी अ‍ॅथलेटिक्समध्ये:-*

*नीरज चोप्रा हरियाणाच्या पानीपत येथील रहिवासी आहे. त्याने मुळात वजन कमी करण्यासाठी अ‍ॅथलेटिक्सची निवड केली होती. यात अगदी कमी वेळातच स्पर्धांमध्ये सहभाग घेण्यास सुरुवात केली. तेव्हापासून नीरजने मागे वळून पाहिले नाही. अ‍ॅथलेटिक्समध्ये चांगल्या परफॉर्मंसमुळेच 2016 मध्ये भारतीय लष्कर जॉइन केले.*

मोदी सरकार का एक और कारनामा, भारत ने लद्दाख में बनाई दुनिया की सबसे ऊँची सड़क, यह चीन बॉर्डर के नज़दीक है।

मोदी सरकार का एक और कारनामा, भारत ने लद्दाख में बनाई दुनिया की सबसे ऊँची सड़क, यह चीन बॉर्डर के नज़दीक है।

यह सड़क पूर्वी लद्दाख के उमलिंगला पास में स्थित है, जिसकी ऊंचाई समुद्र तल से 19,300 फीट है। इसके साथ ही भारत ने बोलिविया रिकॉर्ड तोड़ दिया है। अभी तक दुनिया की सबसे ऊंची सड़क का रिकॉर्ड बोलिविया के नाम था।

मोदी सरकार का एक और कारनामा, भारत ने लद्दाख में बनाई दुनिया की सबसे ऊँची सड़क, यह चीन बॉर्डर के नज़दीक है।

मोदी सरकार का एक और कारनामा, भारत ने लद्दाख में बनाई दुनिया की सबसे ऊँची सड़क, यह चीन बॉर्डर के नज़दीक है।

यह सड़क पूर्वी लद्दाख के उमलिंगला पास में स्थित है, जिसकी ऊंचाई समुद्र तल से 19,300 फीट है। इसके साथ ही भारत ने बोलिविया रिकॉर्ड तोड़ दिया है। अभी तक दुनिया की सबसे ऊंची सड़क का रिकॉर्ड बोलिविया के नाम था।

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