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कुलदेवता/कुलदेवी की पूजा क्यूं करनी चाहिये

कुलदेवता/कुलदेवी की पूजा क्यूं करनी चाहिये -भाग दो |*

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हिन्दू पारिवारिक आराध्य व्यवस्था में कुल देवता/कुलदेवी का स्थान सदैव से रहा है ,,प्रत्येक हिन्दू परिवार किसी न किसी ऋषि के वंशज हैं जिनसे उनके गोत्र का पता चलता है ,बाद में कर्मानुसार इनका विभाजन वर्णों में हो गया विभिन्न कर्म करने के लिए ,जो बाद में उनकी विशिष्टता बन गया और जाति कहा जाने लगा । हर जाति वर्ग , किसी न किसी ऋषि की संतान है और उन मूल ऋषि से उत्पन्न संतान के लिए वे ऋषि या ऋषि पत्नी कुलदेव / कुलदेवी के रूप में पूज्य हैं । पूर्व के हमारे कुलों अर्थात पूर्वजों के खानदान के वरिष्ठों ने अपने लिए उपयुक्त कुल देवता अथवा कुलदेवी का चुनाव कर उन्हें पूजित करना शुरू किया था ,ताकि एक आध्यात्मिक और पारलौकिक शक्ति कुलों की रक्षा करती रहे जिससे उनकी नकारात्मक शक्तियों/ऊर्जाओं और वायव्य बाधाओं से रक्षा होती रहे तथा वे निर्विघ्न अपने कर्म पथ पर अग्रसर रह उन्नति करते रहें |

*समय क्रम में परिवारों के एक दुसरे स्थानों पर स्थानांतरित होने ,धर्म परिवर्तन करने ,आक्रान्ताओं के भय से विस्थापित होने ,जानकार व्यक्ति के असमय मृत होने ,संस्कारों के क्षय होने ,विजातीयता पनपने ,इनके पीछे के कारण को न समझ पाने आदि के कारण बहुत से परिवार अपने कुल देवता /देवी को भूल गए अथवा उन्हें मालूम ही नहीं रहा की उनके कुल देवता /देवी कौन हैं या किस प्रकार उनकी पूजा की जाती है ,इनमें पीढ़ियों से शहरों में रहने वाले परिवार अधिक हैं ,कुछ स्वयंभू आधुनिक मानने वाले और हर बात में वैज्ञानिकता खोजने वालों ने भी अपने ज्ञान के गर्व में अथवा अपनी वर्त्तमान अच्छी स्थिति के गर्व में इन्हें छोड़ दिया या इन पर ध्यान नहीं दिया |*

*कुल देवता /देवी की पूजा छोड़ने के बाद कुछ वर्षों तक तो कोई ख़ास अंतर नहीं समझ में आता ,किन्तु उसके बाद जब सुरक्षा चक्र हटता है तो परिवार में दुर्घटनाओं ,नकारात्मक ऊर्जा ,वायव्य बाधाओं का बेरोक-टोक प्रवेश शुरू हो जाता है ,उन्नति रुकने लगती है ,पीढ़िया अपेक्षित उन्नति नहीं कर पाती ,संस्कारों का क्षय ,नैतिक पतन ,कलह, उपद्रव ,अशांति शुरू हो जाती हैं ,व्यक्ति कारण खोजने का प्रयास करता है, कारण जल्दी नहीं पता चलता क्योकि व्यक्ति की ग्रह स्थितियों से इनका बहुत मतलब नहीं होता है ,अतः ज्योतिष आदि से इन्हें पकड़ना मुश्किल होता है ,भाग्य कुछ कहता है और व्यक्ति के साथ कुछ और घटता है|*

कुल देवता या देवी हमारे वह सुरक्षा आवरण हैं जो
किसी भी बाहरी बाधा ,नकारात्मक ऊर्जा के परिवार
में अथवा व्यक्ति पर प्रवेश से पहले सर्वप्रथम उससे संघर्ष करते हैं और उसे रोकते हैं ,यह पारिवारिक संस्कारों और नैतिक आचरण के प्रति भी समय समय पर सचेत करते रहते हैं ,यही किसी भी ईष्ट को दी जाने वाली पूजा को ईष्ट तक पहुचाते हैं ,,यदि इन्हें पूजा नहीं मिल रही होती है तो यह नाराज भी हो सकते हैं और निर्लिप्त भी हो सकते हैं ,,ऐसे में आप किसी भी ईष्ट की आराधना करे वह उस ईष्ट तक नहीं पहुँचता ,क्योकि सेतु कार्य करना बंद कर देता है ,,बाहरी बाधाये ,अभिचार आदि ,नकारात्मक ऊर्जा बिना बाधा व्यक्ति तक पहुचने लगती है ,,कभी कभी व्यक्ति या परिवारों द्वारा दी जा रही ईष्ट की पूजा कोई अन्य बाहरी वायव्य शक्ति लेने लगती है ,अर्थात पूजा न ईष्ट तक जाती है न उसका लाभ मिलता है|

ऐसा कुलदेवता की निर्लिप्तता अथवा उनके कम
शशक्त होने से होता है ।

*कुलदेवता या देवी सम्बंधित व्यक्ति के पारिवारिक संस्कारों के प्रति संवेदनशील होते हैं और पूजा पद्धति ,उलटफेर ,विधर्मीय क्रियाओं अथवा पूजाओं से रुष्ट हो सकते हैं ,सामान्यतया इनकी पूजा वर्ष में एक बार अथवा दो बार निश्चित समय पर होती है ,यह परिवार के अनुसार भिन्न समय होता है और भिन्न विशिष्ट पद्धति होती है ,,शादी-विवाह-संतानोत्पत्ति आदि होने पर इन्हें विशिष्ट पूजाएँ भी दी जाती हैं ,,,यदि यह सब बंद हो जाए तो या तो यह नाराज होते हैं या कोई मतलब न रख मूकदर्शक हो जाते हैं और परिवार बिना किसी सुरक्षा आवरण के पारलौकिक शक्तियों के लिए खुल जाता है ,परिवार में विभिन्न तरह की परेशानियां शुरू हो जाती हैं ,,अतः प्रत्येक व्यक्ति और परिवार को अपने कुल देवता या देवी को जानना चाहिए तथा यथायोग्य उन्हें पूजा प्रदान करनी चाहिए, जिससे परिवार की सुरक्षा -उन्नति होती रहे ।*
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*जो लोग यह नही जानते कि कौन हैं हमारी कुलदेवी या कुल देवता*
*1-गोत्र के अनुसार कुलदेवी या कुलदेवता की पहचान होती है ।जैसे वैश्य समाज में सभी की कुलदेवी महालक्ष्मी माता को माना गया है लेकिन कई गौत्र के वैश्यों ने महालक्ष्मी माता के अलग अलग रुपों को अपनी कुल देवी बनाया ।अतः जिन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है वे माता महालक्ष्मी को अपनी कुलदेवी मानकर पूजित करें।
2-आदि गौड़ समाज अपने गोत्र के अनुसार -कल्याणी माता,काली माता,कृष्णा माता,चामुंडा माता जयंती माता,जीन माता, नरवरिया देवी,रुचि माता,सत्यवती, समा देवी,सहदेवी को अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते हैं
3-भार्गव समाज -अधिकतर चंडी माता,नागन ,शीतला माता ,चामुंडा और शाकुम्भरी देवी को पूजते हैं।
4-दाधीच समाज की कुलदेवी दधिमती माता है।
5-कायस्थ एवं खंडेलवाल समाज -जीन माता, बिजासन माता,अंजनी माता,यमुना माता,राज राजेश्वरी माता,हुलहुल माता,आशापुरा माता,चामुंडा माता
*इसी प्रकार हर गोत्र की कुलदेवी अलग अलग होती हैं जिनका वर्णन यहां नही किया जा सकता है।
*जिन सज्जनो को अपनी कुलदेवी के विषय मे जानकारी नहीं है उन्हें चाहिये कि अपने इष्ट देव को ही कुलदेवता व कुलदेवी के रूप में स्वीकार कर पूजित करें एवं पूजन के समय -ॐ कुलदेवोभ्य नमः ,कुलदेवी नम: का उच्चारण कर पूजा करें।*
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*पित्र दोष से निवारण एवं उपाय समस्या व समाधान सम्बन्धी जानकारी अगली पोस्ट में दी जायेगी*
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उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी ने अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद भारत के मुसलमानों को साफ़ साफ़ संदेश दिया.

*उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी ने अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद भारत के मुसलमानों को साफ़ साफ़ संदेश दिया….!!*

योगी जी ने जो कहा है, उस बात को कहने के लिए बड़ा साहस और आत्मविश्वास चाहिए…!!

*पूरी दुनियाँ के सभी ग़ैर मुसलिम देशों में ऐसे ही लीडर होने चाहिए…!!*

वे कहते हैं;

*जो भी मुस्लिम, इस्लामिक शरिया क़ानून चाहते हैं, उन्हें बुधवार तक शरिया वाले देशों में चले जाना चाहिए। क्योंकि, भारत ही नहीं विश्व के अनेकों देश, देश के कट्टर मुसलमानों को आतंकवादी समझता है।*

इसलिये प्रदेश के हर एक मस्जिद की जाँच होगी और मुस्लिम इस जाँच में हमें सहयोग दें।

*जो बाहर से देश में आए हैं, उन्हें प्रदेश में रहने के लिए अपने आप को बदलना होगा न कि भारतीयों लोगों को…!*

और मैं भारतीय लोगों को विश्वास दिलाता हूँ कि हम जो भी कर रहे हैं वो सिर्फ़ भारत के लोगों के हित में कर रहे हैं।

*हम यहाँ हिंदी बोलते है न कि उर्दू और अरबी..इसलिए अगर इस देश में रहना होगा तो आपको हिंदी और संस्कृत सीखनी ही होगी।*

हमारे भारत में प्रभु श्री राम और श्री कृष्ण को ईश्वर एवं भगवान् स्वरूप मानते हैं, हम सिर्फ़ हमारे सनातन, सिख, बौद्ध और जैन धर्म को मानते हैं और किसी धर्म को नहीं।

*इसीलिये हमारे यहां भगवान की तस्वीरें, मूर्तियां और धर्म ग्रंथ सब जगह पूजे जाते हैं…!*

अगर आपको हमारी मूर्तियों और धर्म ग्रंथों से आपत्ति है तो आप भारत छोड़ कर, दुनियाँ में कहीं भी जा सकते हैं।

*भारत हमारी मातृभूमि है, हमारी धरती माँ है, हमारी संस्कृति है सभ्यता है।*

लेकिन इसका यह अर्थ बिल्कुल भी नहीं है कि हम सांप्रदायिक हैं…!

*हम आपके धर्म को नहीं मानते, पर आपकी भावनाओं का सम्मान करते हैं…! आप अपने धर्म का पालन सहजता से कर सकते हैं..!*

इसलिए अगर आपको नमाज़ पढ़नी है तो ध्वनि प्रदूषण न करें…!

*हमारे ऑफिस, स्कूल या सार्वजनिक जगहों में नमाज़ बिल्कुल न पढ़ें…!*

अपने घरों में या मस्जिद में शांति से नमाज़ पढ़ें। जिस से हमें कोई तकलीफ़ न हो…।

*अगर आपको हमारे ध्वज से, राष्ट्रीय गीत से, हमारे धर्म से या फिर हमारे रहन-सहन से कोई भी शिकायत है, तो आप अभी इसी वक़्त भारत छोड़ दें।*

उपकार कुणावर करावे

*उपकार कुणावर करावे ❓*
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🟣 *बोधकथा* 🟣

*एकदा एक वाघ आणि वाघीण आपल्या पिलांना गुहेत सोडून शिकारीसाठी दूर जंगलात जातात. दोन दिवस पर्यंत ते परत आलेच नाही. इकडे पिलांना खूप भूक लागली. कलकल ऐकून एका बकरीला त्यांची दया आली. तिने वाघिणीच्या पिलांना आपले दूध पाजले. पिलांच्या जीवात जीव आला*.

*आता बकरी रोज येऊन त्यांना दूध पाजू लागली. एक दिवस पिले पोट भरल्यानंतर मस्ती करू लागली. तेवढ्यात तिथे वाघ आणि वाघीण परतले. बकरीला पाहून आयती शिकार मिळाल्याच्या आनंदात तिच्यावर वाघ झडप घालणार इतक्यात वाघाची पिले म्हणाली, आई-बाबा या शेळीने आम्हाला दूध पाजून मोठे केलेय. ही नसती तर आम्ही मरून गेलो असतो. हिचे आपल्यावर खूप उपकार आहेत. तुम्ही तिला मारू नका*.

*पिलांचे ऐकून वाघ खुश झाला आणि तिला म्हणाला, आम्ही तुझे हे उपकार विसरणार नाही. आता तू स्वतंत्रपणे आनंदाने जंगलात एकटी सुद्धा वावरू शकतेस. कुणीही तुला त्रास देणार नाही. याची मी ग्वाही देतो. तेव्हा पासून सदर बकरी मोठ्या धाडसाने जंगलात स्वच्छंदी पणे कुठेही फिरू लागली*.

*एकदा तर बकरीला वाघाच्या पाठीवर बसून उंच झाडांची पाने खातांना एका गरुडाने पाहिले आणि कुतूहलाने त्याने बकरीला या किमयेबद्ल विचारले. बकरीने त्याला सर्व हकीकत सांगितली. उपकाराचे महत्व गरुडाच्या लक्षात आले. आपण पण असेच महान कार्य करायचे असे त्या गरुडाने मनातल्या मनात ठरवले*.

*एकदा गरुड उडत असतांना त्याला काही उंदराची पिले दलदलीत फसलेली दृष्टीस पडली. ती बाहेर पडायचा प्रयत्न करत असता अधिकच खोल जात होती. शेवटी गरुडाने त्यांना अलगद बाहेर काढले*.

*उंदराची पिले ओली झालेली व थंडीने कुडकुडत होती. गरुडाने त्यांना आपल्या पंखात बऱ्याच वेळ ऊब दिली. थोड्या वेळाने आपल्या घरट्या कडे जाण्यासाठी गरुडाने उंदराच्या पिलांचा निरोप घेतला आणि भरारी घेण्याचा प्रयत्न केला, पण काही केल्या त्याला उडता येईना. तो अस्वस्थ झाला आणि त्याने त्याचे कारण शोधले*.

*उंदराच्या पिल्लांनी ऊब घेता घेता त्या गरुडाचे संपूर्ण पंख कुरतडले होते. फडफडत कसेबसे गरुड तेथून बकरी पर्यंत पोहचले आणि त्याने बकरीला त्याबाबत विचारले*.

*”तू पण उपकार केलेस आणि मी पण उपकारच केले. पण दोघांना वेगवेगळे फळ कसे मिळाले*?”

*बकरी हंसली आणि गंभीरपणे म्हणाली*,

*”उपकार कधीही वाघा सारख्या दिलदार व्यक्तित्वावर करावेत, उंदरा सारख्या स्वार्थीवर नाहीत. कारण, स्वार्थी लोक नेहमी आपल्या स्वार्था करिता दूसरा पर्याय शोधात असतात. स्वतःचा स्वार्थ साधला कि, ते सच्च्या व प्रमाणिक माणसाला सुद्धा विसरण्यात स्वतःची धन्यता मानतात. मात्र दिलदार स्वभावाचे लोक निस्वार्थी आणि बहादूर लोक आयुष्यभर उपकार करण्याऱ्याला लक्षात ठेवतात*.” 👏👏 ✒️

*श्री गणेश जीवन परिचय*

🐀🐀🐀🐀🐀🐀
*श्री गणेश जीवन परिचय*
१] वडील = *भगवान शंकर*
२] आई = *देवी पार्वती*
३] मोठा भाऊ = *कार्तिकेय*
४] बहीण = *अशोकसुंदरी*
५] 2 पत्नी = *रिद्धी व सिद्धी*
६] 2 पुत्र = *शुभ व लाभ*
७] श्री गणेशाचे जन्मठिकाण = *दोडीताल,उत्तरकाशी/कैलास पर्वत*
८] श्री गणेशाचा जन्म कशापासून झाला ? = *देवी पार्वतीच्या अंगावरील मळ आणि उटण्यापासून*
९] वाहन उंदीर/मूषकाचे नाव = *डिंक*
१०] शिव मानस पूजेत श्री गणेशाचे नाव = *प्रणव*
११] गणेशाची पूजा/भक्ती करणाऱ्या संप्रदायाचे नाव = *गाणपत्य*
*१२] श्री गणेशाला प्रथमपूज्य का म्हणतात?* = *कोणत्याही कार्यारंभी अग्रपूजेचा मान असल्याने*
१३] बालगणेशाचा शिरच्छेद कोणी केला ? = *भगवान शंकर*
*१४] चूक लक्षात येताच त्यांनी श्री गणेशाला कसे पुनरुज्जीवित केले ? = *हत्तीचे शिर बसवून*
*१५] श्री गणेशाने महर्षी व्यास व्यासरचित महाभारत महाकाव्याचा निर्मितीत कोणती भूमिका पार पाडली ? = *लेखनिक*
१६] श्री गणेशाला प्रिय असणारे खाद्यपदार्थ = *मोदक,लाडू*
१७] आवडता रंग व फुल = *लाल,जास्वंदीचे*
१८] प्रिय पत्री = *दूर्वा,शमीपत्र*
*१९] हातातील मुख्य अस्त्रे =* *पाश,अंकुश*
*२०] नारद पुराणानुसार श्री गणेशाची मुख्य १२ नावे =* *सुमुख,एकदंत,कपिल,गजकर्णक,लंबोदर,विकट,विघ्ननाश,विनायक,धुम्रकेतू,गणाध्यक्ष,भालचंद्र व गजानन*
*२१] श्री गणेशाची सुखकर्ता दुःखहर्ता ही लोकप्रिय आरती कोणी लिहिली ? =* *समर्थ रामदास स्वामी*
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*आपण सगळे दर वर्षी गणपती बसवतो पण का बसवतो याचे कारण कोणालाही माहीत नाही..*
*आपल्या धर्म ग्रंथानुसार भगवान वेद व्यास ऋषि यांनी महाभारत हे महाकाव्य रचले, परंतु त्यांना त्याचे लिखाण करणे शक्य होत नव्हते म्हणून त्यांनी श्री गणेशाची आराधना केली आणि गणपती ला महाभारत लिहिण्याची विनंती केली. त्या वेळी गणपती ने होकार दिला. हे लिखाण दिवस रात्र चालले आणि त्या मुळे गणपतीला थकवा आला, आणि शरीरातील पाणि ही वर्ज्य झाले अशा वेळी गणपतीच्या शरीराचे तापमान वाढू नये म्हणून व्यास यांनी श्री गणपती ला मृत्तिकेचे म्हणजे मातीचे लेपन केले आणि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थीला गणपती ची यथा सांग पूजा केली. माती चे लेपन केले म्हणून गणपती आखडून गेला म्हणून याला पार्थिव गणेश असे नाव पडले. हे लिखाण दहा दिवस चालले. अनंत चतुर्दशीला हे लिखाण संपल्यावर व्यास यांनी गणपती कड़े पाहिले असता त्याच्या शरीराचे तापमान खुप वाढले होते. हे तापमान कमी व्हावे आणि गणपती च्या अंगावरची माती निघावी म्हणून व्यासांनी गणपती ला पाण्यात विसर्जित केले. या दहा दिवसात व्यासांनी गणपती ला खाण्यास वेगवेगळे पदार्थ दिले. तेव्हा पासून गणपती बसवण्याची प्रथा पडली.*
*ती प्रथा आज ही कलियुगात अव्याहत आणि अखंडीत पणे चालू आहे.*

*श्री गणेशाची कृपा आपल्यावर सदैव राहो हीच माझी बाप्पा कडे प्रार्थना आणि आपण सर्व भक्तास हार्दिक शुभेच्छा शेतकरी मित्र बिदुशेठ शमाॅ किसान मोर्चा महाराष्ट्र प्रदेश उपाध्यक्ष भाजप शेतकरी मित्र 🙏*

आम्ही अकलूजकर* जपतो आपल्या परंपराही..

*आम्ही अकलूजकर*
जपतो आपल्या परंपराही....

🙏🙏🙏🙏🙏
*पीओपीचा नाही*
*तर माती किंवा गोमय चा गणेश घरी आणूया*
💐💐💐💐💐

दरवर्षी आपण गणेशोत्सवामध्ये प्लॅस्टर ऑफ पॅरिसपासून तयार केलेल्या मूर्तीची मोठ्या प्रमाणावर स्थापना करतो परंतु या मूर्तीचे विसर्जन केल्यानंतर त्या पूर्णपणे विरघळत नाहीत त्यामुळे तलाव, नदी आणि विहीरीच्या तळाशी गाळ साचतो. त्याचबरोबर मोठ्या प्रमाणात जलप्रदूषण होते पीओपीआणि रासायनिक रंगामुळे पाण्यात शिसे, पारा आणि कँडीयम यासारखे हानिकारक पदार्थ, घनपदार्थ आम्लाच्या प्रमाणात वेगाने वाढ होऊन ऑक्सिजनचेप्रमाणही कमी होते त्याचबरोबर मुर्तीची विटंबनाही होते .ज्यामुळे आपणच आपले आणि आपल्या पुढच्या पिढीचे भविष्य धोक्यात घालवत आहोत
आपण कोणत्याही शुभकार्याची सुरुवात श्री गणेशाच्या पूजनाने करतो म्हणून पर्यावरण पूरक जीवनशैली अंगीकारण्याची सुरुवातही याच उत्सावापासून सुरु करूया पीओपी ऐवजी माती किंवा गाईच्या शेणा(गोमय)पासून तयार केलेल्या गणेशमूर्तीची स्थापना करून नंतर घरीच तिचे विसर्जन करून तिच पवित्र माती कुंडीत टाकून त्यामध्ये रोप लावून पर्यावरणाचे संवर्धन करुया !
*चला तर परंपरा, पर्यावरण आणि सामाजिक बांधिलकीचा एक नवा आदर्श घालूया!*
*पर्यावरण पूरक गणेशाची प्रतिष्ठापना करुया*
👏👏👏👏👏👏
आपणही या राष्ट्रकार्यामध्ये सहभागी व्हावे ही विनंती कारण
*तुम्हीच आहात या निसर्गाचे संरक्षक*

*श्री श्री पतंजलि आयुर्वेद* कारखाना पेट्रोल पंपाशेजारी अकलूज
*बुकींग साठी संपर्क*
दिग्विजय देशमुख
9763686868
अनिकेत सावंत
7219732012

IND × ENG

IND v ENG*
*👉👉हिंदुस्थानने इंग्लंडचा157 धावांनी धुव्वा उडवला, 👉ओव्हलवर 50 वर्षांनी हिंदुस्थानने विजयी झेंडा फडकला*

*👉हिंदुस्थान आणि इंग्लंड संघात लंडनच्या ओव्हल मैदानावर चौथा कसोटी रंगला. रोमहर्षक झालेल्या या लढतीत हिंदुस्थानने यजमान संघाचा 157 धावांनी धुव्वा उडवत विजय मिळवला आणि पाच सामन्यांच्या मालिकेत 2-1 अशी आघाडी घेतली.विशेष म्हणजे 50 वर्षानंतर हिंदुस्थानच्या संघाने ओव्हलच्या मैदानावर कसोटी सामना जिंकला आहे.*

*👉रोरी बर्न्स आणि हसीब हमीद यांनी इंग्लंडला शतकी सलामी दिली. शार्दूल ठाकूरने बर्न्सला बाद करत ही जोडी फोडली. यानंतर इंग्लंडचा डाव कोसळला. एकामागोमाग एक गडी बाद होत गेले.अखेर इंग्लंडचा संघ 210 धावांमध्ये गारद झाला आणि हिंदुस्थानने विजय मिळवला. हिंदुस्थानकडून उमेश यादवने सर्वाधिक 3, बुमराह, ठाकूर आणि जाडेजाने प्रत्येकी 2 बळी घेतले.*

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*👉👉हिंदुस्थानने इंग्लंडचा157 धावांनी धुव्वा उडवला, 👉ओव्हलवर 50 वर्षांनी हिंदुस्थानने विजयी झेंडा फडकला*

*👉हिंदुस्थान आणि इंग्लंड संघात लंडनच्या ओव्हल मैदानावर चौथा कसोटी रंगला. रोमहर्षक झालेल्या या लढतीत हिंदुस्थानने यजमान संघाचा 157 धावांनी धुव्वा उडवत विजय मिळवला आणि पाच सामन्यांच्या मालिकेत 2-1 अशी आघाडी घेतली.विशेष म्हणजे 50 वर्षानंतर हिंदुस्थानच्या संघाने ओव्हलच्या मैदानावर कसोटी सामना जिंकला आहे.*

*👉रोरी बर्न्स आणि हसीब हमीद यांनी इंग्लंडला शतकी सलामी दिली. शार्दूल ठाकूरने बर्न्सला बाद करत ही जोडी फोडली. यानंतर इंग्लंडचा डाव कोसळला. एकामागोमाग एक गडी बाद होत गेले.अखेर इंग्लंडचा संघ 210 धावांमध्ये गारद झाला आणि हिंदुस्थानने विजय मिळवला. हिंदुस्थानकडून उमेश यादवने सर्वाधिक 3, बुमराह, ठाकूर आणि जाडेजाने प्रत्येकी 2 बळी घेतले.*

जर शिवाजी महाराज हे इंग्लंडमध्ये जन्माला आले असते तर आम्ही पृथ्वीवरच काय पण परग्रहावरही राज्य केले असते ! लॉर्ड माउंटबँटन, इंग्लंड.

“जर *शिवाजी महाराज* हे इंग्लंडमध्ये जन्माला आले असते तर आम्ही पृथ्वीवरच काय पण परग्रहावरही राज्य केले असते !”
*– लॉर्ड माउंटबँटन, इंग्लंड.*

“भारताला जर स्वातंत्र्य मिळवून द्यायचं असेल तर एकच पर्याय आहे, शिवाजी महाराजांप्रमाणे लढा !
*– नेताजी सुभाषचंद्र बोस.*

“नेताजी, तुमच्या देशाला स्वातंत्र्यासाठी कुठल्या ‘हिटलर‘ची गरज नाही, तर तुमच्याच देशात जन्माला आलेल्या शिवाजी महाराजांच्या इतिहासाची गरज आहे !”
*– अॅडॉल्फ हिटलर* .

“शिवाजी महाराज हे फक्त नाव नाही, तर शिवाजीमहाराज ही आजच्या तरूण पिढीसाठी उर्जा आहे; जिचा वापर हिंदुस्थानला स्वातंत्र्य मिळवून देण्यासाठी होऊ शकतो !”
*– स्वामी विवेकानंद.*

“जर शिवाजी महाराज आमच्या देशात जन्माला आले असते तर आम्ही त्यास ‘सुर्य‘ संबोधले असते !”
*– बराक ओबामा, अमेरिका.*

“जर शिवाजी महाराज अजून १० वर्षे जगले असते, तर इंग्रजांना पुर्ण हिंदुस्थानचा चेहरा सुध्दा पाहता आला नसता !”
*– इंग्रज गव्हर्नर.*

“काबुल पासुन कंदहार पर्यंत माझ्या तैमुर खानदानाने मोघली सत्ता निर्माण केली. इराक, इराण, तुर्कस्तानच्या कित्येक नामांकित सरदारांना माझ्या तैमुर खानदानाने पाणी पाजलं ! पण हिंदुस्थानात मात्र आम्हाला शिवाजी महाराजांनी रोखलं ! सर्व शक्ती मी शिवाजी महाराजांना पराभव करायला खर्च केली पण शिवाजी महाराज काही माझ्या हाती नाही आले ! या अल्लाह ! दुश्मन दिया भी तो कौण दिया? *सिवा_भोसला* जैसा दिया. अपने जन्नत के दरवाजे खुले रखना खुदा क्योंकि दुनिया का सबसे बहादुर योध्दा और दिलदार दुश्मन तेरे पास आ रहा है !”
*– औरंगजेब (छत्रपति शिवाजी महाराजांच्या मृत्यू नंतर नमाज पढताना काढलेले उदगार, संदर्भ- खाफिखानाची बखर)*

“उस दिन *सिवा भोसला*ने सिर्फ मेरी उंगलियां नही काटी, बल्कि मेरी ताकद के घमंड को भी उतारा. मै अब निंद मे भी *सिवा भोसला* से मिलना नही चाहता !”
*– शाहीस्तेखान, संदर्भ- खाफिखानाची बखर.*

“क्या उस गद्दारे दख्खन से *सिवा* नाम का लोहा लाने के लिए एक भी मर्द नही है, इस दरबार में? लालत है ऐसी मर्दानगी पे !”
*– बडी बेगम अलि आदिलशाह.*

१७ व्या शतकात युरोप खंडात “लंडन गॅझेट” नावाचं आघाडीचं वृत्तपत्र होतं. जेव्हा महाराज आग्र्यावरून सहीसलामत सुटले, तेव्हा या वृत्तपत्राने पहिल्या पानावर जी पहिली बातमी छापली होती आणि त्यात *महाराजांचा Shivaji, The King of India असा उल्लेख केला होता !*

वरील उदाहरणावरून मी नेहमी जाणिवपुर्वक छत्रपती शिवरायांचा आंतरराष्ट्रीय किर्तीचे राजे म्हणुन उल्लेख करतो, जागतिक दर्जाचे योद्धे म्हणून शिवरायांची ओळख आहे ती यामुळेच ! महाराजांनी त्यांच्या ३० वर्षाच्या आयुष्यात ज्या ज्या सेनानींचा पराभव केला त्यामध्ये फक्त २ च भारतीय, बाकी सर्वजण हे परकिय सरदार आणि त्या त्या देशाचे नामांकित सरदार होते !

ज्या शाहीस्तेखानाची बोटे महाराजांनी लाल महालात छाटली आणि त्याच्या मनात शिवाजी महाराज या नावाचा खौफ निर्माण केला, तो शाहीस्तेखान साधासुधा मामुली सरदार नव्हता. तर तो अबू तालिबानचा नवाब होता, तुर्कस्तानचा नवाब होता ! प्रतिऔरंगजेब म्हणुन ओळखणारा हा शाहीस्तेखान औरंगजेबाचा सख्खा मामा होता. त्याने प्रचंड मोठा पराक्रम करून मोघलांना मोठा बंगाल प्रांत जिंकुन दिला होता. पण एका रात्रीत महाराजांनी लाल महालात घुसुन त्याची बोटे छाटली आणि काही कळायच्या आत पसार झाले ! परिणामी शाहीस्तेखानाने त्यानंतर शिवाजी महाराज या नावाची इतकी भिती घेतली की शिवाजी महाराजांना आता मला स्वप्नात देखील भेटायचं नाही. असं त्याने औरंगजेबाला सांगितलं इतका खौफ या नवाबाच्या मनात निर्माण केला होता !

बेहलोलखान पठाण, सिकंदर पठाण, चिडरखाण पठाण इ. ज्यांना महाराजांनी रणांगणावर धुधु धुतलं, हे सर्व अफगाणिस्तानचे मातब्बर सरदार होते !

दिलेरखान पठाण, मंगोलियन सरदार, मंगोलिया देशाचा सर्वोत्तम योध्दा होता हा ! महाराजांनी याचा पराभव केला !

सिध्दी जौहर, सिध्दी सलाबत खान हे इराणी होते, इराणचे शुर सरदार होते ! महाराजांनी यांना रणांगणात पाणी पाजलं !

उंबरखिंडीत ज्याचा कोंडुन पराभव केला, तो कारतलब खान उझबेकिस्तानचा सरदार होता, म्हणजे आत्ताच्या रशियाचा ! या महाराजांच्या विजयाची नोंद साक्षात गिनिज बुकाने देखील घेतली. कमीत कमी सैन्याने जास्तीत जास्त सैन्याचा केलेला पराभव ! (१००० मावळे विरूध्द ३०,००० गनिम आणि या ३०,००० पैकी एकही जिवंत राहीला नाही. आणि १००० पैकी एक ही मावळा गमावला नाही. ⛳

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वरील ज्वलन्त इतिहास नवीन पिढी पर्यन्त पोचवण्या साठी world record उपक्रम घेत आहोत तरी जास्तीत जास्त शाळा आणि मूलां पर्यंत हा msg पोहचवा आणि या ऐतिहासिक सोहळ्यांचे साक्षीदार व्हावे ही विनंती 🙏

जर शिवाजी महाराज हे इंग्लंडमध्ये जन्माला आले असते तर आम्ही पृथ्वीवरच काय पण परग्रहावरही राज्य केले असते ! लॉर्ड माउंटबँटन, इंग्लंड.

“जर *शिवाजी महाराज* हे इंग्लंडमध्ये जन्माला आले असते तर आम्ही पृथ्वीवरच काय पण परग्रहावरही राज्य केले असते !”
*– लॉर्ड माउंटबँटन, इंग्लंड.*

“भारताला जर स्वातंत्र्य मिळवून द्यायचं असेल तर एकच पर्याय आहे, शिवाजी महाराजांप्रमाणे लढा !
*– नेताजी सुभाषचंद्र बोस.*

“नेताजी, तुमच्या देशाला स्वातंत्र्यासाठी कुठल्या ‘हिटलर‘ची गरज नाही, तर तुमच्याच देशात जन्माला आलेल्या शिवाजी महाराजांच्या इतिहासाची गरज आहे !”
*– अॅडॉल्फ हिटलर* .

“शिवाजी महाराज हे फक्त नाव नाही, तर शिवाजीमहाराज ही आजच्या तरूण पिढीसाठी उर्जा आहे; जिचा वापर हिंदुस्थानला स्वातंत्र्य मिळवून देण्यासाठी होऊ शकतो !”
*– स्वामी विवेकानंद.*

“जर शिवाजी महाराज आमच्या देशात जन्माला आले असते तर आम्ही त्यास ‘सुर्य‘ संबोधले असते !”
*– बराक ओबामा, अमेरिका.*

“जर शिवाजी महाराज अजून १० वर्षे जगले असते, तर इंग्रजांना पुर्ण हिंदुस्थानचा चेहरा सुध्दा पाहता आला नसता !”
*– इंग्रज गव्हर्नर.*

“काबुल पासुन कंदहार पर्यंत माझ्या तैमुर खानदानाने मोघली सत्ता निर्माण केली. इराक, इराण, तुर्कस्तानच्या कित्येक नामांकित सरदारांना माझ्या तैमुर खानदानाने पाणी पाजलं ! पण हिंदुस्थानात मात्र आम्हाला शिवाजी महाराजांनी रोखलं ! सर्व शक्ती मी शिवाजी महाराजांना पराभव करायला खर्च केली पण शिवाजी महाराज काही माझ्या हाती नाही आले ! या अल्लाह ! दुश्मन दिया भी तो कौण दिया? *सिवा_भोसला* जैसा दिया. अपने जन्नत के दरवाजे खुले रखना खुदा क्योंकि दुनिया का सबसे बहादुर योध्दा और दिलदार दुश्मन तेरे पास आ रहा है !”
*– औरंगजेब (छत्रपति शिवाजी महाराजांच्या मृत्यू नंतर नमाज पढताना काढलेले उदगार, संदर्भ- खाफिखानाची बखर)*

“उस दिन *सिवा भोसला*ने सिर्फ मेरी उंगलियां नही काटी, बल्कि मेरी ताकद के घमंड को भी उतारा. मै अब निंद मे भी *सिवा भोसला* से मिलना नही चाहता !”
*– शाहीस्तेखान, संदर्भ- खाफिखानाची बखर.*

“क्या उस गद्दारे दख्खन से *सिवा* नाम का लोहा लाने के लिए एक भी मर्द नही है, इस दरबार में? लालत है ऐसी मर्दानगी पे !”
*– बडी बेगम अलि आदिलशाह.*

१७ व्या शतकात युरोप खंडात “लंडन गॅझेट” नावाचं आघाडीचं वृत्तपत्र होतं. जेव्हा महाराज आग्र्यावरून सहीसलामत सुटले, तेव्हा या वृत्तपत्राने पहिल्या पानावर जी पहिली बातमी छापली होती आणि त्यात *महाराजांचा Shivaji, The King of India असा उल्लेख केला होता !*

वरील उदाहरणावरून मी नेहमी जाणिवपुर्वक छत्रपती शिवरायांचा आंतरराष्ट्रीय किर्तीचे राजे म्हणुन उल्लेख करतो, जागतिक दर्जाचे योद्धे म्हणून शिवरायांची ओळख आहे ती यामुळेच ! महाराजांनी त्यांच्या ३० वर्षाच्या आयुष्यात ज्या ज्या सेनानींचा पराभव केला त्यामध्ये फक्त २ च भारतीय, बाकी सर्वजण हे परकिय सरदार आणि त्या त्या देशाचे नामांकित सरदार होते !

ज्या शाहीस्तेखानाची बोटे महाराजांनी लाल महालात छाटली आणि त्याच्या मनात शिवाजी महाराज या नावाचा खौफ निर्माण केला, तो शाहीस्तेखान साधासुधा मामुली सरदार नव्हता. तर तो अबू तालिबानचा नवाब होता, तुर्कस्तानचा नवाब होता ! प्रतिऔरंगजेब म्हणुन ओळखणारा हा शाहीस्तेखान औरंगजेबाचा सख्खा मामा होता. त्याने प्रचंड मोठा पराक्रम करून मोघलांना मोठा बंगाल प्रांत जिंकुन दिला होता. पण एका रात्रीत महाराजांनी लाल महालात घुसुन त्याची बोटे छाटली आणि काही कळायच्या आत पसार झाले ! परिणामी शाहीस्तेखानाने त्यानंतर शिवाजी महाराज या नावाची इतकी भिती घेतली की शिवाजी महाराजांना आता मला स्वप्नात देखील भेटायचं नाही. असं त्याने औरंगजेबाला सांगितलं इतका खौफ या नवाबाच्या मनात निर्माण केला होता !

बेहलोलखान पठाण, सिकंदर पठाण, चिडरखाण पठाण इ. ज्यांना महाराजांनी रणांगणावर धुधु धुतलं, हे सर्व अफगाणिस्तानचे मातब्बर सरदार होते !

दिलेरखान पठाण, मंगोलियन सरदार, मंगोलिया देशाचा सर्वोत्तम योध्दा होता हा ! महाराजांनी याचा पराभव केला !

सिध्दी जौहर, सिध्दी सलाबत खान हे इराणी होते, इराणचे शुर सरदार होते ! महाराजांनी यांना रणांगणात पाणी पाजलं !

उंबरखिंडीत ज्याचा कोंडुन पराभव केला, तो कारतलब खान उझबेकिस्तानचा सरदार होता, म्हणजे आत्ताच्या रशियाचा ! या महाराजांच्या विजयाची नोंद साक्षात गिनिज बुकाने देखील घेतली. कमीत कमी सैन्याने जास्तीत जास्त सैन्याचा केलेला पराभव ! (१००० मावळे विरूध्द ३०,००० गनिम आणि या ३०,००० पैकी एकही जिवंत राहीला नाही. आणि १००० पैकी एक ही मावळा गमावला नाही. ⛳

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वरील ज्वलन्त इतिहास नवीन पिढी पर्यन्त पोचवण्या साठी world record उपक्रम घेत आहोत तरी जास्तीत जास्त शाळा आणि मूलां पर्यंत हा msg पोहचवा आणि या ऐतिहासिक सोहळ्यांचे साक्षीदार व्हावे ही विनंती 🙏

अफगानिस्तान में बदले हालात को लेकर भारत सतर्क, अटारी बॉर्डर पर लगा रेडिएशन डिटेक्शन उपकरण.

अफगानिस्तान में बदले हालात को लेकर भारत सतर्क, अटारी बॉर्डर पर लगा रेडिएशन डिटेक्शन उपकरण..*

🟠 *मोदी सरकार पेट्रोल डीजल गैस इत्यादि पर हमारे टैक्स के पैसों से भारत को सुरक्षित करने में लगी है! ताकि कोई भी आतंकी भारत की धरती पर आतंक न फैला सके। हम और हमारी सेना के जवान सुरक्षित रहें!*

🟠 *पाकिस्तान और अफगानिस्तान में जारी स्थिति के बीच, भारत ने अटारी सीमा पर एकीकृत चेक पोस्ट (आईसीपी) पर अपना पहला विकिरण जांच उपकरण (आरडीई) स्थापित किया है।*

🟠 *इस डिवाइस को “फुल-बॉडी ट्रक स्कैनर” कहा जाता है। यह मूल रूप से हथियारों, गोला-बारूद या अन्य अवैध वस्तुओं की तस्करी का पता लगाने के लिए ट्रक की एक्स-रे मशीन है। यह किसी भी रेडियोधर्मी सामग्री की तस्करी को भी पकड़ने में सक्षम है।*

*जय हिन्द 🇮🇳🚩*

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