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भारतीय जनता पार्टी कोथरूड मतदार संघाच्या महिला उपाध्यक्षा आणि नीता फाउंडेशन च्या *सौ पल्लवी गाडगीळ* यांच्या माध्यमातून किशोरवयीन मुलींना मार्गदर्शन शिबीर

भारतीय जनता पार्टी कोथरूड मतदार संघाच्या महिला उपाध्यक्षा आणि नीता फाउंडेशन च्या *सौ पल्लवी गाडगीळ* यांच्या माध्यमातून किशोरवयीन मुलींना मार्गदर्शन शिबीर

या शिबिरामध्ये किशोरवयीन मुलींना वयाच्या बदलातिल माहिती व घ्यावी लागणारी काळजी कोणत्या वेळेस कोणते साहित्य वापरावे कोणते वापरु नयेत यांची माहिती देण्यात आली व लागणारी साहित्य यांचे वाटप करण्यात आले या सर्व साहित्याचे वाटप व मार्गदर्शन हे सौ पल्लवी गाडगीळ यांनी केले या वेळेस

या मार्गदर्शन शिबिरामध्ये मतदारसंघातिल अनेक किशोरवयीन मुली उपस्थित होत्या या मुलींनी स्वताहुन यामध्ये भरपूर प्रकारे सहभाग घेतला होता व या मुलींनी सौ. पल्लवी गाडगीळ यांचे अभार मानले व आशा उपक्रमास समाजातील लोकांनी सहभाग घेऊन आशा प्रकारे एक समाज हिताचे काम करावे आसा उपदेश केला

आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞*दिनांक 05 अक्टूबर 2021*दिन – मंगलवार*

🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞*दिनांक 05 अक्टूबर 2021*दिन – मंगलवार*

⛅ *विक्रम संवत – 2078 (गुजरात – 2077)*

⛅ *शक संवत -1943*

⛅ *अयन – दक्षिणायन*

⛅ *ऋतु – शरद*

⛅ *मास -अश्विन (गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार – भाद्रपद)*

⛅ *पक्ष – कृष्ण*

⛅ *तिथि – चतुर्दशी शाम 07:04 तक तत्पश्चात अमावस्या*

⛅ *नक्षत्र – उत्तराफाल्गुनी 06 अक्टूबर रात्रि 01:10 तक तत्पश्चात हस्त*

⛅ *योग – शुक्ल सुबह 11:35  तक तत्पश्चात ब्रह्म*

⛅  *राहुकाल – शाम 03:25 से शाम  04:54 तक*

⛅ *सूर्योदय – 06:32*

⛅ *सूर्यास्त – 18:21*

⛅ *दिशाशूल – उत्तर दिशा में*

⛅ *व्रत पर्व विवरण – आग- दुर्घटना- अस्त्र-शस्त्र- अपमृत्यु से मृतक का श्राद्ध*

💥 *विशेष – चतुर्दशी और अमावस्या तिथि, एवं श्राद्ध और व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

 

🌷 *सर्व पितृ अमावस्या* 🌷

🙏🏻 *श्राद्ध पक्ष की अमावस्या को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों का श्राद्ध करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस बार 06 अक्टूबर, बुधवार को यह अमावस्या है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, श्राद्ध पक्ष की अमावस्या पर कुछ विशेष उपाय करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष भी कम होता है। इसलिए इस दिन भी ये उपाय किए जा सकते हैं।*

🙏🏻 *पीपल में पितरों का वास माना गया है ।सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं और गाय के शुद्ध घी का दीपक लगाएं ।*

🙏🏻 *सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर किसी ब्राह्मण को भोजन के लिए घर बुलाएं या भोजन सामग्री जिसमें आटा, फल, गुड़ आदि का दान करें ।*

🙏🏻 *इस अमावस्या पर किसी पवित्र नदी में काले तिल डालकर तर्पण करें ।इससे भी पितृगण प्रसन्न होते हैं ।*

🙏🏻  *सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर अपने पितरों को याद कर गाय को हरा चारा खिला दें ।इससे भी पितृ प्रसन्न व तृप्त हो जाते हैं ।*

🙏🏻 *इस अमावस्या पर चावल के आटे से 5 पिडं बनाएं व इसे लाल कपड़े में लपेटकर नदी में प्रवाहित कर दें ।*

🙏🏻 *अमावस्या पर गाय के गोबर से बने कंड़े को जलाकर उस पर घी-गुड़ की धूप दें और पितृ देवताभ्यो अर्पणमस्तु बोलें ।*

🙏🏻 *इस अमावस्या पर कच्चा दूध, जौ, तिल व चावल मिलाकर नदी में प्रवाहित करें ।ये उपाय सूर्योदय के समय करें तो अच्छा रहेगा ।*

🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

 

🌷 *सर्व पितृ अमावस्या* 🌷

🙏🏻 *पितृ पक्ष का आखिरी दिन पितृ अमावस्या होती है। इस दिन कुल के सभी पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है। फिर चाहे उनकी मृत्यु तिथि पता न हो। तब भी आप पितृ अमावस्या पर उनका तर्पण कर सकते हैं।*

🙏🏻 *पितृ पक्ष की अमावस्या को सूर्यास्त से पहले ये उपाय करना है। इस उपाय में एक स्टील के लोटे में, दूध, पानी, काले व सफेद तिल और जौ मिला लें। इसके साथ कोई भी सफेद मिठाई, एक नारियल, कुछ सिक्के और एक जनेऊ पीपल के पेड़ के नीचे जाकर सबसे पहले ये सारा सामान पेड़ की जड़ में चढ़ा दें। इस दौरान सर्व पितृ देवभ्यो नम: का जप करते रहें।*

🙏🏻 *ये मंत्र बोलते हुए पीपल को जनेऊ भी चढ़ाएं। इस पूरी विधि के बाद मन में सात बार ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करें और भगवान विष्णु से कहें मेरे जो भी अतृप्त पितृ हों वो तृप्त हो जाए। इस उपाय को करने से पितृ तृप्त होते हैं पितृ दोष का प्रभाव खत्म होता है और उनका अशीर्वाद मिलने लगता है। हर तरह की आर्थिक और मानसिक समस्याएं दूर होती हैं।*

 

 

🌞 ~ *हिन्दू पंचांग* ~ 🌞

🙏🏻🌷🌻🌹🍀🌺🌸🍁💐🙏🏻🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩

कु.सार्थक राजेंद्र पाटिल याला वाढदिवसाच्या खुप खुप शुभेच्छा

कु.सार्थक राजेंद्र पाटिल याला वाढदिवसाच्या खुप खुप शुभेच्छा

तुझे जिवण सुखी आनंदी व निरोगी राहो हिच एक शुभेच्छा
शुभेच्छुक:- रामवर्मा आसबे
नमोन्युजनेशन परिवार

व्यक्ती बदल

समाजात वावरताना जि व्यक्ती वेळेनुसार व पुढच्या व्यक्तीच्या परिस्थिती नुसार बदलते ति व्यक्ती आपली कधीच नसते परंतु जि व्यक्ती आपल्या प्रतेक वेळेस प्रतेक काळात आपल्या सावली सारखी उभी आसते ति व्यक्ती आपली हक्काची व्यक्ती आसते
👏🤝रामवर्मा आसबे👏🤝

व्यक्ती बदल

समाजात वावरताना जि व्यक्ती वेळेनुसार व पुढच्या व्यक्तीच्या परिस्थिती नुसार बदलते ति व्यक्ती आपली कधीच नसते परंतु जि व्यक्ती आपल्या प्रतेक वेळेस प्रतेक काळात आपल्या सावली सारखी उभी आसते ति व्यक्ती आपली हक्काची व्यक्ती आसते
👏🤝रामवर्मा आसबे👏🤝

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक 02 अक्टूबर 2021 दिन – शनिवार

🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞
⛅ *दिनांक 02 अक्टूबर 2021*
⛅ *दिन – शनिवार*
⛅ *विक्रम संवत – 2078 (गुजरात – 2077)*
⛅ *शक संवत -1943*
⛅ *अयन – दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु – शरद*
⛅ *मास -अश्विन (गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार – भाद्रपद)*
⛅ *पक्ष – कृष्ण*
⛅ *तिथि – एकादशी सुबह 11:10 तक तत्पश्चात द्वादशी*
⛅ *नक्षत्र – अश्लेशा 03 अक्टूबर रात्रि 03:35 तक तत्पश्चात मघा*
⛅ *योग – सिद्ध शाम 05:47 तक तत्पश्चात साध्य*
⛅ *राहुकाल – सुबह 09:29 से सुबह 10:58 तक*
⛅ *सूर्योदय – 06:31*
⛅ *सूर्यास्त – 18:24*
⛅ *दिशाशूल – पूर्व दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण – इंदिरा एकादशी, एकादशी का श्राद्ध, महात्मा गांधी जयंती, लाल बहादुर शास्त्री जयंती*
💥 *विशेष – हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है l राम रामेति रामेति । रमे रामे मनोरमे ।। सहस्त्र नाम त तुल्यं । राम नाम वरानने ।।*
💥 *आज एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l*
💥 *एकादशी के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए।*
💥 *एकादशी को चावल व साबूदाना खाना वर्जित है | एकादशी को शिम्बी (सेम) ना खाएं अन्यथा पुत्र का नाश होता है।*
💥 *जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं।*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *इंदिरा एकादशी* 🌷
➡ *01 अक्टूबर 2021 शुक्रवार को रात्रि 11:04 से 02 अक्टूबर, शनिवार को रात्रि 11:10 तक एकादशी है ।*
💥 *विशेष – 02 अक्टूबर, शनिवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखें ।*
🙏🏻 *इंदिरा एकादशी व्रत से बड़े – बड़े पापों का नाश हो जाता है | यह नीच योनियों में पड़े हुए पितरों को भी सद्गति देनेवाली है | इसका माहात्म्य पढ़ने-सुनने से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है | – पद्म पुराण*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *कौन सा वृक्ष लगाने से क्या फल मिलता है*🌷
🙏🏻 *भविष्यपुराण में आता हैं कि अशोक-वृक्ष लगाने से कभी शोक नहीं होता, प्लक्ष (पाकड़) वृक्ष उत्तम स्त्री प्रदान करवाता है ज्ञानरुपी फल भी देता हैं | बिल्ववृक्ष दीर्घ आयुष्य प्रदान करता है | जामुन का वृक्ष धन देता है, तेंदू का वृक्ष कुलबुद्धि कराता है | दाडिम (अनार) का वृक्ष स्त्री-सुख प्राप्त कराता है | बकुल पाप-नाशक, यंजुल (तिनिश) बल-बुद्धिप्रद है | धातकी (धव) स्वर्ग प्रदान करता हैं | वटवृक्ष मोक्षप्रद, आम्रवृक्ष अभीष्ट कामनाप्रद और गुवाक (सुपारी) का वृक्ष सिद्धिप्रद है | वल्वल, मधूक (महुआ) तथा अर्जुन-वृक्ष सब प्रकार का अन्न प्रदान करता है | कदम्ब-वृक्ष से विपुल लक्ष्मी की प्रप्ति होती है | तिन्तिडी )इमली) का वृक्ष धर्मदूषक माना गया है | शमी-वृक्ष रोग-नाशक है | केशर से शत्रुओं का विनाश होता है | श्वेत वट धनप्रदाता पनस (कटहल)वृक्ष मंद बुद्धिकारक है | मर्कटी (केंवाच)एवं कदम-वृक्ष के लगाने से संतति का क्षय होता है |*
*शीशम, अर्जुन, जयंती, करवीर, बेल तथा पलाश- वृक्षों के आरोपण से स्वर्ग की प्राप्ति होती है | विधिपूर्वक वृक्ष का रोपण करने से स्वर्ग-सुख प्राप्त होता है और रोपणकर्ता के तीन जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं |*

🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🙏🍀🌷🌻🌺🌸🌹🍁🙏🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩

गृहस्थ और सन्यासी

*🔰गृहस्थ और सन्यासी🔰*
*🌼गृहस्थ बड़ा या सन्यासी–🌼*
🔰प्रेरणाप्रद कहानी🔰
प्राचीन समय की बात है । किसी नगर में एक विचित्र राजा रहता था । उस राजा की एक बड़ी ही अजीब आदत थी । जब भी नगर में कोई साधू या सन्यासी आता था तो वह उसे बुलाकर पूछता था कि – “ गृहस्थ बड़ा या सन्यासी ?”
जो भी बताता कि गृहस्थ बड़ा है। वह राजा उससे कहता था कि – “ तो फिर आप सन्यासी क्यों बने ?
चलिए गृहस्थ बनिए !” इस तरह वह उस सन्यासी को भी गृहस्थ बनने का आदेश देता था ।
जो बताता कि सन्यासी बड़ा है । वह उससे प्रमाण मांगता था । जो यदि वह प्रमाण न दे सके तो वह उसे भी गृहस्थ बना देता था । इस तरह कई संत आये और उन्हें सन्यासी से गृहस्थ बनना पड़ा ।
इसी बीच एक दिन नगर में एक महात्मा का आगमन हुआ । उसे भी राजा ने बुलाया और अपना वही पुराना प्रश्न पूछा – “ गृहस्थ बड़ा या सन्यासी ?”
महात्मा बोले – “ राजन ! न तो गृहस्थ बड़ा है, न ही सन्यासी, जो अपने धर्म का पालन करें । वही बड़ा है ।”
राजा बोला – “ अच्छी बात है । क्या आप अपने कथन को सत्य सिद्ध कर सकते है ?”
महात्मा ने कहा – “ अवश्य ! इसके लिए आपको मेरे साथ चलना होगा ।” राजा महात्मा के साथ चलने के लिए तैयार हो गया।
दुसरे ही दिन दोनों घूमते – घूमते दुसरे राज्य निकल गये । उस राज्य में राजकन्या का स्वयंवर हो रहा था ।
दूर – दूर के राजा – राजकुमार आये हुए थे । बड़े ही विशाल उत्सव का आयोजन किया हुआ था । राजा और महात्मा दोनों उस उत्सव में शामिल हो गये ।
स्वयंवर का शुभारम्भ हुआ । राजकन्या राजदरबार में उपस्थित हुई । वह बड़ी ही रूपवती और सुन्दर थी । सभी राजा और राजकुमार स्तब्ध होकर उसे देख रहे थे और मन ही मन उसे पाने की कामना कर रहे थे ।
राजकन्या के पिता का कोई वारिस नहीं था । इसलिए महाराज राजकन्या द्वारा स्वयंवरित राजकुमार को ही अपने राज्य का उत्तराधिकारी घोषित करने वाला था ।
राजकुमारी अपनी सखियों के साथ राजाओं के बीच घुमने लगी। वहाँ उपस्थित सभी राजाओं को देखने के पश्चात भी उसे कोई पसंद नहीं आया ।
राजा निराश होने लगे । राजकुमारी के पिता भी सोचने लगे कि स्वयंवर व्यर्थ ही जायेगा, क्योंकि राजकुमारी को तो कोई वर पसंद ही नहीं आया ।
तभी वहाँ एक तेजस्वी सन्यासी का आगमन हुआ । सूर्य के समान उसका चेहरा कांति से चमक रहा था । तभी राजकुमारी की दृष्टि उस युवा सन्यासी पर पड़ी । देखते ही राजकुमारी ने अपनी वरमाला उसके गले में पहना दी ।
अचानक हुए इस स्वागत से वह युवा सन्यासी अचंभित हो गया । उसने तुरंत वस्तुस्थिति को समझा और तत्क्षण उस माला को अपने गले से निकालते हुए कहा – “ हे देवी ! क्या तुझे दीखता नहीं ! मैं एक सन्यासी हूँ । मुझसे विवाह के बारे में सोचना तेरी भूल है ।”
तभी राजा ने सोचा – “ लगता है यह कोई भिखारी है जो विवाह करने से डर रहा है ।” उन्होंने अपनी घोषणा दुबारा दोहराई – “ हे युवक ! क्या तुम्हें पता भी है । मेरी पुत्री से विवाह करने के बाद तुम इस सम्पूर्ण राज्य के मालिक हो जाओगे । क्या फिर भी तुम मेरी पुत्री का परित्याग करोगे ?”
सन्यासी बोला – “ राजन ! मैं सन्यासी हूँ और विवाह करना मेरा धर्म नहीं है । आप अपनी पुत्री के लिए कोई अन्य वर देखिये ।” इतना कहकर वह वहाँ से चल दिया ।
किन्तु वह युवक राजकुमारी के मन में बस चूका था । उसने भी प्रतिज्ञा की कि “ मैं विवाह करूंगी तो उसी से अन्यथा अपने प्राण त्याग दूंगी ।” इतना कहकर वह भी उसके पीछे – पीछे चली गई ।
वह राजा और महात्मा जो यह वृतांत देख रहे थे । उनमें से महात्मा ने कहा – “ चलो ! हम भी उनके पीछे चलकर देखते है, क्या परिणाम होता है ?”
वह दोनों भी राजकुमारी के पीछे – पीछे चलने लगे ।
चलते चलते वह एक घने जंगल में पहुँच गये । तभी वह युवा सन्यासी तो कहीं अदृश्य हो गया और राजकुमारी अकेली रह गई ।
घने जंगल में किसी को न देख राजकुमारी व्याकुल हो उठी । तभी यह राजा और महात्मा उसके पास पहुँच गये और उन्होंने राजकुमारी को समझाया । यह दोनों उसे उसके पिता के पास छोड़ने के लिए ले जाने लगे ।
वह जंगल से बाहर निकले ही थे कि अँधेरा हो गया । सर्दी की काली अंधियारी रात थी । भटकते – भटकते यह तीनो एक गाँव में पहुंचे ।
यह गाँव के चौपाल पर जाकर बैठ गये । बहुत सारे लोग वहाँ से गुजरे लेकिन किसी ने इन ठण्ड से ठिठुरते मुसाफिरों का हाल तक नहीं पूछा ।
तभी वहाँ से एक गाड़ीवान गुजरा। वह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ खेत से घर आ रहा था । उसने देखा कि वह तीनों ठण्ड से ठिठुर रहे है । वह उनके पास गया और पूछताछ कि तो महात्मा ने भटके हुए मुसाफ़िर बता दिया ।
किसान बोला – “ हे अतिथिदेव ! अगर आप चाहे तो आज रात मेरे घर ठहर सकते है ।” वह उनको घर ले गया । भोजन की पूछी और भोजन करवाया ।
उस दिन उनके घर में ज्यादा अनाज नहीं था । अतः किसान और उसकी पत्नी ने अपने हिस्से का भोजन अतिथियों को करवा दिया और स्वयं भूखे ही सो गये ।
सुबह हुई । राजकन्या को उसके पिता के पास छोड़कर राजा और सन्यासी दोनों वापस अपने नगर को चल दिए ।
महात्मा ने राजा से कहा – “ देखा राजा ! राजकन्या और राज्य को छोड़ने वाला वह सन्यासी अपनी जगह बड़ा है और हमारे अतिथि सत्कार के लिए स्वयं भूखा सोने वाला वह गृहस्थ किसान अपनी जगह बड़ा है ।
एक तरफ सन्यासी ने राज, वैभव और रमणी का तनिक भी मोह न करके अपने धर्म का पालन किया है, इसलिए वह निश्चय ही महान है। दूसरी तरह उन दंपति ने अपना व्यक्तिगत स्वार्थ न देखकर अतिथिसेवा को प्रधानता दी, इसलिए वह दोनों भी निश्चय ही महान है ।”
“ किसी भी देश, काल और परिस्थिति में अपने धर्म – कर्तव्य का पालन करने वाला मनुष्य ही बड़ा होता है । फिर चाहे वह गृहस्थ हो या सन्यासी, कोई फर्क नहीं पड़ता ।”
इस तरह महात्मा ने अपनी बात को सत्य सिद्ध किया ।

गृहस्थ और सन्यासी

*🔰गृहस्थ और सन्यासी🔰*
*🌼गृहस्थ बड़ा या सन्यासी–🌼*
🔰प्रेरणाप्रद कहानी🔰
प्राचीन समय की बात है । किसी नगर में एक विचित्र राजा रहता था । उस राजा की एक बड़ी ही अजीब आदत थी । जब भी नगर में कोई साधू या सन्यासी आता था तो वह उसे बुलाकर पूछता था कि – “ गृहस्थ बड़ा या सन्यासी ?”
जो भी बताता कि गृहस्थ बड़ा है। वह राजा उससे कहता था कि – “ तो फिर आप सन्यासी क्यों बने ?
चलिए गृहस्थ बनिए !” इस तरह वह उस सन्यासी को भी गृहस्थ बनने का आदेश देता था ।
जो बताता कि सन्यासी बड़ा है । वह उससे प्रमाण मांगता था । जो यदि वह प्रमाण न दे सके तो वह उसे भी गृहस्थ बना देता था । इस तरह कई संत आये और उन्हें सन्यासी से गृहस्थ बनना पड़ा ।
इसी बीच एक दिन नगर में एक महात्मा का आगमन हुआ । उसे भी राजा ने बुलाया और अपना वही पुराना प्रश्न पूछा – “ गृहस्थ बड़ा या सन्यासी ?”
महात्मा बोले – “ राजन ! न तो गृहस्थ बड़ा है, न ही सन्यासी, जो अपने धर्म का पालन करें । वही बड़ा है ।”
राजा बोला – “ अच्छी बात है । क्या आप अपने कथन को सत्य सिद्ध कर सकते है ?”
महात्मा ने कहा – “ अवश्य ! इसके लिए आपको मेरे साथ चलना होगा ।” राजा महात्मा के साथ चलने के लिए तैयार हो गया।
दुसरे ही दिन दोनों घूमते – घूमते दुसरे राज्य निकल गये । उस राज्य में राजकन्या का स्वयंवर हो रहा था ।
दूर – दूर के राजा – राजकुमार आये हुए थे । बड़े ही विशाल उत्सव का आयोजन किया हुआ था । राजा और महात्मा दोनों उस उत्सव में शामिल हो गये ।
स्वयंवर का शुभारम्भ हुआ । राजकन्या राजदरबार में उपस्थित हुई । वह बड़ी ही रूपवती और सुन्दर थी । सभी राजा और राजकुमार स्तब्ध होकर उसे देख रहे थे और मन ही मन उसे पाने की कामना कर रहे थे ।
राजकन्या के पिता का कोई वारिस नहीं था । इसलिए महाराज राजकन्या द्वारा स्वयंवरित राजकुमार को ही अपने राज्य का उत्तराधिकारी घोषित करने वाला था ।
राजकुमारी अपनी सखियों के साथ राजाओं के बीच घुमने लगी। वहाँ उपस्थित सभी राजाओं को देखने के पश्चात भी उसे कोई पसंद नहीं आया ।
राजा निराश होने लगे । राजकुमारी के पिता भी सोचने लगे कि स्वयंवर व्यर्थ ही जायेगा, क्योंकि राजकुमारी को तो कोई वर पसंद ही नहीं आया ।
तभी वहाँ एक तेजस्वी सन्यासी का आगमन हुआ । सूर्य के समान उसका चेहरा कांति से चमक रहा था । तभी राजकुमारी की दृष्टि उस युवा सन्यासी पर पड़ी । देखते ही राजकुमारी ने अपनी वरमाला उसके गले में पहना दी ।
अचानक हुए इस स्वागत से वह युवा सन्यासी अचंभित हो गया । उसने तुरंत वस्तुस्थिति को समझा और तत्क्षण उस माला को अपने गले से निकालते हुए कहा – “ हे देवी ! क्या तुझे दीखता नहीं ! मैं एक सन्यासी हूँ । मुझसे विवाह के बारे में सोचना तेरी भूल है ।”
तभी राजा ने सोचा – “ लगता है यह कोई भिखारी है जो विवाह करने से डर रहा है ।” उन्होंने अपनी घोषणा दुबारा दोहराई – “ हे युवक ! क्या तुम्हें पता भी है । मेरी पुत्री से विवाह करने के बाद तुम इस सम्पूर्ण राज्य के मालिक हो जाओगे । क्या फिर भी तुम मेरी पुत्री का परित्याग करोगे ?”
सन्यासी बोला – “ राजन ! मैं सन्यासी हूँ और विवाह करना मेरा धर्म नहीं है । आप अपनी पुत्री के लिए कोई अन्य वर देखिये ।” इतना कहकर वह वहाँ से चल दिया ।
किन्तु वह युवक राजकुमारी के मन में बस चूका था । उसने भी प्रतिज्ञा की कि “ मैं विवाह करूंगी तो उसी से अन्यथा अपने प्राण त्याग दूंगी ।” इतना कहकर वह भी उसके पीछे – पीछे चली गई ।
वह राजा और महात्मा जो यह वृतांत देख रहे थे । उनमें से महात्मा ने कहा – “ चलो ! हम भी उनके पीछे चलकर देखते है, क्या परिणाम होता है ?”
वह दोनों भी राजकुमारी के पीछे – पीछे चलने लगे ।
चलते चलते वह एक घने जंगल में पहुँच गये । तभी वह युवा सन्यासी तो कहीं अदृश्य हो गया और राजकुमारी अकेली रह गई ।
घने जंगल में किसी को न देख राजकुमारी व्याकुल हो उठी । तभी यह राजा और महात्मा उसके पास पहुँच गये और उन्होंने राजकुमारी को समझाया । यह दोनों उसे उसके पिता के पास छोड़ने के लिए ले जाने लगे ।
वह जंगल से बाहर निकले ही थे कि अँधेरा हो गया । सर्दी की काली अंधियारी रात थी । भटकते – भटकते यह तीनो एक गाँव में पहुंचे ।
यह गाँव के चौपाल पर जाकर बैठ गये । बहुत सारे लोग वहाँ से गुजरे लेकिन किसी ने इन ठण्ड से ठिठुरते मुसाफिरों का हाल तक नहीं पूछा ।
तभी वहाँ से एक गाड़ीवान गुजरा। वह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ खेत से घर आ रहा था । उसने देखा कि वह तीनों ठण्ड से ठिठुर रहे है । वह उनके पास गया और पूछताछ कि तो महात्मा ने भटके हुए मुसाफ़िर बता दिया ।
किसान बोला – “ हे अतिथिदेव ! अगर आप चाहे तो आज रात मेरे घर ठहर सकते है ।” वह उनको घर ले गया । भोजन की पूछी और भोजन करवाया ।
उस दिन उनके घर में ज्यादा अनाज नहीं था । अतः किसान और उसकी पत्नी ने अपने हिस्से का भोजन अतिथियों को करवा दिया और स्वयं भूखे ही सो गये ।
सुबह हुई । राजकन्या को उसके पिता के पास छोड़कर राजा और सन्यासी दोनों वापस अपने नगर को चल दिए ।
महात्मा ने राजा से कहा – “ देखा राजा ! राजकन्या और राज्य को छोड़ने वाला वह सन्यासी अपनी जगह बड़ा है और हमारे अतिथि सत्कार के लिए स्वयं भूखा सोने वाला वह गृहस्थ किसान अपनी जगह बड़ा है ।
एक तरफ सन्यासी ने राज, वैभव और रमणी का तनिक भी मोह न करके अपने धर्म का पालन किया है, इसलिए वह निश्चय ही महान है। दूसरी तरह उन दंपति ने अपना व्यक्तिगत स्वार्थ न देखकर अतिथिसेवा को प्रधानता दी, इसलिए वह दोनों भी निश्चय ही महान है ।”
“ किसी भी देश, काल और परिस्थिति में अपने धर्म – कर्तव्य का पालन करने वाला मनुष्य ही बड़ा होता है । फिर चाहे वह गृहस्थ हो या सन्यासी, कोई फर्क नहीं पड़ता ।”
इस तरह महात्मा ने अपनी बात को सत्य सिद्ध किया ।

आज का हिन्दू पंचांग* *दिनांक 01 अक्टूबर 2021 दिन – शुक्रवार*

🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞
⛅ *दिनांक 01 अक्टूबर 2021*
⛅ *दिन – शुक्रवार*
⛅ *विक्रम संवत – 2078 (गुजरात – 2077)*
⛅ *शक संवत -1943*
⛅ *अयन – दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु – शरद*
⛅ *मास -अश्विन (गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार – भाद्रपद)*
⛅ *पक्ष – कृष्ण*
⛅ *तिथि – दशमी रात्रि 11:03 तक तत्पश्चात एकादशी*
⛅ *नक्षत्र – पुष्य 02 अक्टूबर रात्रि 02:58 तक तत्पश्चात अश्लेशा*
⛅ *योग – शिव शाम 06:39 तक तत्पश्चात सिद्ध*
⛅ *राहुकाल – सुबह 10:59 से दोपहर 12:28 तक*
⛅ *सूर्योदय – 06:30*
⛅ *सूर्यास्त – 18:25*
⛅ *दिशाशूल – पश्चिम दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण – दशमी का श्राद्ध*
💥 *विशेष -*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *एकादशी व्रत के लाभ* 🌷
➡ *01 अक्टूबर 2021 शुक्रवार को रात्रि 11:04 से 02 अक्टूबर, शनिवार को रात्रि 11:10 तक एकादशी है ।*
💥 *विशेष – 02 अक्टूबर, शनिवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखें ।*
🙏🏻 *एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है ।*
🙏🏻 *जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।*
🙏🏻 *जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।*
🙏🏻 *एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं ।इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है ।*
🙏🏻 *धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है ।*
🙏🏻 *कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है ।*
🙏🏻 *परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है ।पूर्वकाल में राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी आदि जिन्होंने भी एकादशी का व्रत किया, उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ ।भगवान शिवजी ने नारद से कहा है : एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमे कोई संदेह नहीं है । एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है ।*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *एकादशी के दिन करने योग्य* 🌷
🙏🏻 *एकादशी को दिया जलाके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़े……विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो १० माला गुरुमंत्र का जप कर लें l अगर घर में झगडे होते हों, तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे l*
🙏🏻
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *एकादशी के दिन ये सावधानी रहे* 🌷
🙏🏻 *महीने में १५-१५ दिन में एकादशी आती है एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए एकादशी के दिन जो चावल खाता है… तो धार्मिक ग्रन्थ से एक- एक चावल एक- एक कीड़ा खाने का पाप लगता है..*
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🌞 *~ हिन्दू पंचाग ~* 🌞
🙏🍀🌻🌹🌸💐🍁🌷🌺🙏🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩

आज का हिन्दू पंचांग* *दिनांक 01 अक्टूबर 2021 दिन – शुक्रवार*

🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞
⛅ *दिनांक 01 अक्टूबर 2021*
⛅ *दिन – शुक्रवार*
⛅ *विक्रम संवत – 2078 (गुजरात – 2077)*
⛅ *शक संवत -1943*
⛅ *अयन – दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु – शरद*
⛅ *मास -अश्विन (गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार – भाद्रपद)*
⛅ *पक्ष – कृष्ण*
⛅ *तिथि – दशमी रात्रि 11:03 तक तत्पश्चात एकादशी*
⛅ *नक्षत्र – पुष्य 02 अक्टूबर रात्रि 02:58 तक तत्पश्चात अश्लेशा*
⛅ *योग – शिव शाम 06:39 तक तत्पश्चात सिद्ध*
⛅ *राहुकाल – सुबह 10:59 से दोपहर 12:28 तक*
⛅ *सूर्योदय – 06:30*
⛅ *सूर्यास्त – 18:25*
⛅ *दिशाशूल – पश्चिम दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण – दशमी का श्राद्ध*
💥 *विशेष -*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *एकादशी व्रत के लाभ* 🌷
➡ *01 अक्टूबर 2021 शुक्रवार को रात्रि 11:04 से 02 अक्टूबर, शनिवार को रात्रि 11:10 तक एकादशी है ।*
💥 *विशेष – 02 अक्टूबर, शनिवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखें ।*
🙏🏻 *एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है ।*
🙏🏻 *जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।*
🙏🏻 *जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।*
🙏🏻 *एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं ।इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है ।*
🙏🏻 *धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है ।*
🙏🏻 *कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है ।*
🙏🏻 *परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है ।पूर्वकाल में राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी आदि जिन्होंने भी एकादशी का व्रत किया, उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ ।भगवान शिवजी ने नारद से कहा है : एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमे कोई संदेह नहीं है । एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है ।*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *एकादशी के दिन करने योग्य* 🌷
🙏🏻 *एकादशी को दिया जलाके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़े……विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो १० माला गुरुमंत्र का जप कर लें l अगर घर में झगडे होते हों, तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे l*
🙏🏻
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *एकादशी के दिन ये सावधानी रहे* 🌷
🙏🏻 *महीने में १५-१५ दिन में एकादशी आती है एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए एकादशी के दिन जो चावल खाता है… तो धार्मिक ग्रन्थ से एक- एक चावल एक- एक कीड़ा खाने का पाप लगता है..*
🙏🏻
🌞 *~ हिन्दू पंचाग ~* 🌞
🙏🍀🌻🌹🌸💐🍁🌷🌺🙏🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩

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