Home Blog Page 300

आखिर मोदी सरकार क्यूं बना रही है नई संसद बिल्डिंग (सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट)

*आखिर मोदी सरकार क्यूं बना रही है नई संसद बिल्डिंग (सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट)*
*- पवन त्यागी की रिपोर्ट*

*जब भी किसी विषय पर कांग्रेस हल्ला करे ,विरोध करे तब इसका मतलब* *मोदी ने कमीशन बंद कर दिया*। *जैसे राफेल, किसान बिल आदि ,या मोदी जी देशहित में कोई बडा कदम उठाने वाले हैं |*

*अब समझते है राहुल गाँधी और बिकाऊ पत्तलकार क्यूं सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पे रो रहे है*

*आपको शायद नेशनल हेरल्ड केस याद हो. अख़बार नेशनल हेरल्ड की सैकड़ों करोड़ की बिल्डिंग सोनिया एंड फ़ैमिली के नाम पर कौड़ियों में कर दी गई थी और फ़िर उस बिल्डिंग को सरकार के ही विभिन्न विभागों को करोड़ों रुपए किराए पर उठा रखा गया था*.
*हींग लगे ना फिटक़री, फ़ैमिली को *नम्बर वन की मुफ़्त की करोड़ों की कमाई*।

*दिल्ली में ऐसी सैंकड़ों प्रॉपर्टी हैं पीक लोकेशन पर*।
*जिनके आधिकारिक मालिक गुमनाम ट्रस्ट / कम्पनियाँ हैं. इन ट्रस्टों / कम्पनियों के मकड़ जाल के पीछे इन सबकी मालकियत देश की इन्हीं गिनी चुनी फ़ैमिली के हाथ में है. और फ़िर यह बिल्डिंग पचास साल प्लस से भारत सरकार को करोड़ों रुपये किराए पर उठा रखी गई हैं*।
*रेल ,स्वास्थ्य,कृषि,गृह,शिक्षा,जैसे लगभग 51 मंत्रालयों के आफिस इन प्राईवेट बिल्डिंगों में दिल्ली में हैं ,जिसका प्रतिवर्ष का किराया पिछली कांग्रेस की सरकार ने बिल्डिंग मालिकों से मार्किट रेट से बहुत ऊँची कीमत पर किया हुआ था ,जिसके कारण सरकार के या यूं कहें कि जनता के टैक्स के करोडों रुपये कांग्रेसियों के निकट या प्यारे रहे लोगों की जेब में जाता है* |
*नई संसद बनते ही ये सभी मंत्रालय के आफिस प्राईवेट बिल्डिंगों से हटकर सरकारी नई संसद भवन की बिल्डिंग में शिफ्ट हो जाएंगे,फिर ये प्राईवेट लोगों की कमाई बंद हो जाएगी |*

*सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट विरोध का मूल कारण यही है. यह बात बच्चा भी जानता है कि संसद भवन हो या प्रधान मंत्री आवास वह मोदी का व्यक्तिगत नहीं*,
*भारत के प्रधान मंत्री और भारत की संसद का है. फ़िर इस प्रोजेक्ट का इतना मुखर विरोध, व्यक्तिगत स्तर तक जाकर पूरी ताक़त से जो विरोध किया जा रहा है, उसकी वजह व्यक्तिगत ही है*.

*दरसल नए सेंट्रल विस्टा में भारत सरकार के 51 मंत्रालय अपनी खुद की बिल्डिंग में होंगे. वर्तमान में यह मंत्रालय दिल्ली में किराए की बिल्डिंग में चलते हैं*.,
*जिनका एक साल का किराया लगभग हज़ार करोड़ भारत को देना पड़ता है*।

*जैसा आप सब जानते हैं इनमे ज्यादातर बिल्डिंग की ओनर शिप किसके पास है*????
*बिल्डिंग का किराया हज़ार करोड़ इस लिए है क्योंकि दसकों से चले आ रहे लीज़ अग्रीमेंट में रेंटल का रेट सबसे शानदार है ,जिसमें ज्यादातर बिल्डिंग मालिकों का संबंध कांग्रेस के किसी न किसी नेता है* |
*एक बार उन प्राईवेट बिल्डिंगों से मंत्रालय हट गए तो इसका दस प्रतिशत किराया इन्हें नहीं मिलेगा |*

*सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट सीधा सीधा फ़ैमिली नम्बर वन (गांधी परिवार )और उनके क्रोनीज को हज़ार करोड़ की चोट है. यह व्यक्तिगत है और इस लिए इस प्रोजेक्ट का विरोध भी व्यक्तिगत है*.
*किंतु इसे पैसे की बरबादी बताकर ,मोदी का घर बताया जा रहा है जबकि इस भवन की व्यवस्था इसलिए की जा रही है ताकि सभी मंत्रालय ,मंत्री व उनका स्टाफ,सभी सांसदों की व्यवस्था एक ही परिसर में हो सके* |
*इससे मंत्रियों की सुरक्षा पर होने वाले करोडों रुपयों की भी बचत होगी* I
*पवन त्यागी*
*राजनैतिक विश्लेषक*
*गाजियाबाद(उ०प्र०)*

आखिर मोदी सरकार क्यूं बना रही है नई संसद बिल्डिंग (सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट)

*आखिर मोदी सरकार क्यूं बना रही है नई संसद बिल्डिंग (सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट)*
*- पवन त्यागी की रिपोर्ट*

*जब भी किसी विषय पर कांग्रेस हल्ला करे ,विरोध करे तब इसका मतलब* *मोदी ने कमीशन बंद कर दिया*। *जैसे राफेल, किसान बिल आदि ,या मोदी जी देशहित में कोई बडा कदम उठाने वाले हैं |*

*अब समझते है राहुल गाँधी और बिकाऊ पत्तलकार क्यूं सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पे रो रहे है*

*आपको शायद नेशनल हेरल्ड केस याद हो. अख़बार नेशनल हेरल्ड की सैकड़ों करोड़ की बिल्डिंग सोनिया एंड फ़ैमिली के नाम पर कौड़ियों में कर दी गई थी और फ़िर उस बिल्डिंग को सरकार के ही विभिन्न विभागों को करोड़ों रुपए किराए पर उठा रखा गया था*.
*हींग लगे ना फिटक़री, फ़ैमिली को *नम्बर वन की मुफ़्त की करोड़ों की कमाई*।

*दिल्ली में ऐसी सैंकड़ों प्रॉपर्टी हैं पीक लोकेशन पर*।
*जिनके आधिकारिक मालिक गुमनाम ट्रस्ट / कम्पनियाँ हैं. इन ट्रस्टों / कम्पनियों के मकड़ जाल के पीछे इन सबकी मालकियत देश की इन्हीं गिनी चुनी फ़ैमिली के हाथ में है. और फ़िर यह बिल्डिंग पचास साल प्लस से भारत सरकार को करोड़ों रुपये किराए पर उठा रखी गई हैं*।
*रेल ,स्वास्थ्य,कृषि,गृह,शिक्षा,जैसे लगभग 51 मंत्रालयों के आफिस इन प्राईवेट बिल्डिंगों में दिल्ली में हैं ,जिसका प्रतिवर्ष का किराया पिछली कांग्रेस की सरकार ने बिल्डिंग मालिकों से मार्किट रेट से बहुत ऊँची कीमत पर किया हुआ था ,जिसके कारण सरकार के या यूं कहें कि जनता के टैक्स के करोडों रुपये कांग्रेसियों के निकट या प्यारे रहे लोगों की जेब में जाता है* |
*नई संसद बनते ही ये सभी मंत्रालय के आफिस प्राईवेट बिल्डिंगों से हटकर सरकारी नई संसद भवन की बिल्डिंग में शिफ्ट हो जाएंगे,फिर ये प्राईवेट लोगों की कमाई बंद हो जाएगी |*

*सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट विरोध का मूल कारण यही है. यह बात बच्चा भी जानता है कि संसद भवन हो या प्रधान मंत्री आवास वह मोदी का व्यक्तिगत नहीं*,
*भारत के प्रधान मंत्री और भारत की संसद का है. फ़िर इस प्रोजेक्ट का इतना मुखर विरोध, व्यक्तिगत स्तर तक जाकर पूरी ताक़त से जो विरोध किया जा रहा है, उसकी वजह व्यक्तिगत ही है*.

*दरसल नए सेंट्रल विस्टा में भारत सरकार के 51 मंत्रालय अपनी खुद की बिल्डिंग में होंगे. वर्तमान में यह मंत्रालय दिल्ली में किराए की बिल्डिंग में चलते हैं*.,
*जिनका एक साल का किराया लगभग हज़ार करोड़ भारत को देना पड़ता है*।

*जैसा आप सब जानते हैं इनमे ज्यादातर बिल्डिंग की ओनर शिप किसके पास है*????
*बिल्डिंग का किराया हज़ार करोड़ इस लिए है क्योंकि दसकों से चले आ रहे लीज़ अग्रीमेंट में रेंटल का रेट सबसे शानदार है ,जिसमें ज्यादातर बिल्डिंग मालिकों का संबंध कांग्रेस के किसी न किसी नेता है* |
*एक बार उन प्राईवेट बिल्डिंगों से मंत्रालय हट गए तो इसका दस प्रतिशत किराया इन्हें नहीं मिलेगा |*

*सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट सीधा सीधा फ़ैमिली नम्बर वन (गांधी परिवार )और उनके क्रोनीज को हज़ार करोड़ की चोट है. यह व्यक्तिगत है और इस लिए इस प्रोजेक्ट का विरोध भी व्यक्तिगत है*.
*किंतु इसे पैसे की बरबादी बताकर ,मोदी का घर बताया जा रहा है जबकि इस भवन की व्यवस्था इसलिए की जा रही है ताकि सभी मंत्रालय ,मंत्री व उनका स्टाफ,सभी सांसदों की व्यवस्था एक ही परिसर में हो सके* |
*इससे मंत्रियों की सुरक्षा पर होने वाले करोडों रुपयों की भी बचत होगी* I
*पवन त्यागी*
*राजनैतिक विश्लेषक*
*गाजियाबाद(उ०प्र०)*

*मेरे प्यारे भारतवासि भाईओं बहनों !!* *नमस्ते * *मैं भारत का प्रधान सेवक हूं – नरेंद्र मोदी*

*मेरे प्यारे भारतवासि भाईओं बहनों !!*
🙏 *नमस्ते 🙏*
*मैं भारत का प्रधान सेवक हूं – नरेंद्र मोदी*

*आपका दिया हुआ यह ज़िम्मेदारी आज सात साल हो गए हैं । मैं इस अवसर पर कुछ बातें आपके साथ साझा करना चाहूंगा । जब मैंने प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली, तो सिंहासन काँटेदार था ।*

*पिछली सरकार ने अपने 10 वर्षों के कुशासन में बहुत भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी, वैमानी, कालाबाजारी, मुद्रास्फीति की है । लगभग सभी सरकारी संस्थान बिखरे हुए थे । विशाल विदेशी ऋण हमारे उपर बने हुए थे । एवं भारतीय कंपनियां घाटे में चल रही थी, कोई बैंकों की NPA. के तलवार लटक रही थी । — तत्कालिक ॠण हमारे उपर एक बड़ा बोझ था जैसे …ll*

*ईरान 48,000 करोड़ ।*
*यूएई. 40,000 करोड़ ।*
*भारतीय ईंधन कंपनियां 133,000 करोड़ का ।*
*इंडियन एयरलाइंस 58,000 करोड़ ।*
*भारतीय रेलवे 22,000 करोड़ ।*
*बीएस.एनएल. 1500 करोड़ ।*
*इसके अतिरिक्त अर्थनैतिक विसंगतियों से षडयंत्र खेल खेला जा रहा था ।*

*सैनिकों के पास बुनियादी हथियार नहीं थे, और उनके पास बुलेट प्रूफ जैकेट तक नहीं थे । अत्याधुनिक फाइटर प्लेन नहीं थे , यदि किसी देश के साथ युद्ध होता तो हमारे सेना 4 दिनों तक भी जीवित नहीं रह पाती, सारे गोला भण्डार खाली पड़ा हुआ था । हमारे जंबाज सेनाओं का मनोबल टूटा हुआ था ।*

*तभी मैंने कठोर निर्णय लिया ।*
*उस समय मेरी मुख्य जिम्मेदारी सभी प्रणालियों को ठीक से स्थापित करने की थी । सभी दिशाओं में व्यवस्थाओं को तंदुरुस्त करना बहुत जरूरी था ।*

*सौभाग्य से भारतीयों के लिए, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें कम हो गई थी । आपको सभी कम हुई कीमतों से लाभ नहीं हुआ है, यह मुझे खेद है । आपको लग रहा होगा कि सरकार ने गलत किया है ।*

*आप मुझसे बहुत प्यार करते हैं, लेकिन आप ईंधन की कीमत के लिए मुझसे थोड़ा नाराज हैं । मुझे पता है, लेकिन मैं आपकी मदद नहीं कर सका क्योंकि मैं अपनी आने वाली पीढ़ियों के साथ काम कर रहा हूं , भारतवासी के भविष्यत सुधारने का निरन्तर गतिशील हूँ ।*

*पिछली सरकार की, लापरवाही, मूर्खता व भ्रष्टाचार हमारे लिए अभिशाप थी । उन्होंने उधार लिया और कच्चा तेल खरीदा । हालांकि, लोगों की आक्रामकता से बचने के लिए उन्होंने कीमतों में नहीं बढ़ाई ।*
*तब उन्होंने 250,000 करोड़ रुपये का तेल उत्पादन सम्बन्धित विदेशी ऋण लिया था । इसके लिए हमें हर साल ब्याज के रूप में 25,000 करोड़ रुपये देने थे ।*

*हमारे देश को भारी मात्रा में ऋण दिया गया था । और हमें अपने ऋणों का भुगतान करने के लिए कहा गया था ताकि भारत को बिना किसी रुकावट के अधिक ईंधन मिल सके ।*

*ईंधन पर कर लगाने का क्या कारण है !? हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि आज हमने ब्याज के साथ 250,000 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाया है ।*

*रेलवे नुकसान कर रहा था । हमने पिछली सरकारों द्वारा शुरू की गई सभी परियोजनाएं पूरी कीं जो सुचारू रूप से चल रही है । हमने अतीत में पहले की तुलना में रेलवे लाइनों के सभी विद्युतीकरण को तेज गति से पूरा किया , तथा हजारों किलोमीटर नयी रेल लाइन बिछाकर नये क्रान्तिकारी कार्य आज भी चल रहा है ।*

*साथ ही साथ .. :*

*18,500 गांवों का विद्युतीकरण किया गया ।*
*गरीबों को 5 करोड़ संख्या मुफ्त गैस कनेक्शन दिए गए हैं ।*
*हजारों किलोमीटर नई सड़कें बनीं तथा पुराने सड़को का चार लेन, छह लेन में विकसित किया गया ।*
*युवाओं को 150,000 करोड़ का ऋण उपलब्ध करवा कर स्वरोजगार को प्रोत्साहित किया गया ।*

*आयुष्मान भारत नाम के स्वास्थ्य सेवा 50 करोड़ लोगों के लिए 150,000 करोड़ रुपये की योजना शुरू की ।*
*2020 – 2021 वैश्विक महामारी भयावह स्थिति में मानव मात्र त्राहि त्राहि कर रही है, हमें बहुत चिन्ता है । एक एक भारतवासी के जीवन राष्ट्र के लिए बहुत मूल्यवान है । इसिलिए युद्धस्तर पर हर दिशा में प्राथमिकता के आधार पर सभी स्वास्थ्य सेवाओं को सुधार किया गया तथा भविष्यत खतरे से बचने के लिए 3 – 3 वैक्सीन का विकास किया गया । हम सबको विशेष रूप से वैज्ञानिकों को हृदय से आभार व अभिनन्दन करते हैं तथा इस प्रकार के सेवा कार्य को जन जन तक पहुँचाने के लिए सभी सेवकों को धन्यवाद करते हैं ।*

*हमारे सैनिकों को सभी नवीनतम और अद्यतन संस्करण हथियार और बुलेट प्रूफ जैकेट , आधुनिक युद्ध विमान व राफेल जैसे लड़ाकू विमान एवं अन्य बहुत प्रकार की आधुनिक सुविधाएं प्रदान किए गए हैं , ताकि हमारे लिए राष्ट्रीय विकास सर्वोपरि है ।*

*इन सभी कार्यों के लिए पैसा कहाँ से आया ?? वह पैसा आपके ही द्वारा दिया जाता है । वह पैसा आप सभी पेट्रोल और डीजल खरीदते हैं और देश को टैक्स देते हैं अपनी अंशदान ।*

*यदि हम पेट्रोल / डीजल पर कर हटाते हैं, तो क्या हमारे ऋणों का भुगतान करना संभव होगा ?? हम कर्ज का भुगतान कर सकते हैं, साथ ही कई नई नई परियोजनाओं को भी ला सकते हैं, इसलिए अप्रत्यक्ष रूप से हमें हर चीज पर कर बढ़ाने की जरूरत है । 139 करोड़ लोगों की जिम्मेदारी केवल वाहन मालिकों व समस्त करदाताओं की हो सकती है ।*

*एक अंतिम बात..!!*
*आपके परिवार के मुखिया के रूप में, जब आपके परिवार पर बड़ा कर्ज का बोझ पड़ता है तो आप क्या करते हैं !?*

*क्या आप लापरवाही से खर्च करते हैं !?*

*या आप कर्ज चुकाते हैं ??*

*यदि लापरवाही से कर्ज और फर्ज न चुकाया जाए तो परिवार का भविष्य क्या होगा ??*

*सरकार के विरोधियों के गलत खेल में न पड़ें …!!*

*आप इस महान देश के एक सच्चे देशभक्त नागरिक के रूप में, कृपया देश के विकास में शामिल हों , भविष्यत भारत, उज्वल भारत आपका है ।*

*विरोधीओ के यह विरोध हमेशा चुनावी रहा है, झूठे प्रचार से लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे है लोग ।*

*मेरा आप सभी से🙏 निवेदन है कि – यह सच्चाई आप सभी भारतीयों के साथ साझा करें, ताकि आपका भविष्यत आतंक का भय, भूख, भ्रष्टाचार से मुक्त आधुनिक भारत उज्वल वनी रहें ।*

*धन्यवाद सहित -*
*आपका प्रधान सेवक ।*
*नरेंद्र मोदी

नेते मा.श्री नागेश गायकवाड यांना वाढदिवसाच्या हार्दिक शुभेच्छा

नेते मा.श्री नागेश गायकवाड यांना वाढदिवसाच्या हार्दिक शुभेच्छा

जगावरति आलेल्या संकटातुन तुम्ही आनंदी सुखि व निरोगी रहा हिच एक शुभेच्छा

शुभेच्छुक:- रामवर्मा आसबे व नमोन्यूजनेशन परिवार

निर्मल गंगाजल पुण्यश्लोक राजमाता अहिल्यादेवी*डॉ. ल.म.आसबे

निर्मल गंगाजल पुण्यश्लोक राजमाता अहिल्यादेवी*
ज्यांचे पुण्यशील चरित्र लिहिले,वाचले , सांगितले, ऐकले असता आपल्याला पुण्य प्राप्त होते,त्यांना *पुण्यश्लोक* ही उपाधी लावली जाते.
*दृढ निश्चयी आणि आढळ*
लहान वयात सीना नदीच्या काठी वाळूचे शिवलिंग तयार केले, पेशव्यांचा उधळलेला घोडा त्यादिशेने आला असता, सर्व मैत्रिणी पळून गेल्या, परंतु देवीने शिवलिंगावर स्वतःला झोकून देऊन शिवलिंग वाचवले, जीवाचीही पर्वा केली नाही. पेशव्यांनी असे का केले ? असे विचारले, तर *”आपणच निर्माण केलेले शिवलिंग, आपण स्वतः प्राणपणाने रक्षिले पाहिजे !”* असे बाणेदार उत्तर दिले. या बाणेदार उत्तराने चौंडीच्या माणकोजी शिंदे यांची खेड्यातील मुलगी सुभेदार मल्हारराव होळकर यांची सून झाली.
मल्हारराव होळकरांनी आपल्या सुनेचे अलौकिक गुण ओळखून आपल्या संस्थानाचा सर्व कारभार मातेच्या हाती दिला. खंडेराव होळकर त्या संस्थानाचे अधिकृत युवराज असूनही, त्यांनी आगाऊ मागितलेला पगार अहिल्याबाईंनी स्पष्ट नाकारला. हे धाडस इतिहासात कोणत्याच स्त्रीच्या नावावर नाही.
स्वतः महाराणी असून, आपल्या मुक्ता नावाच्या मुलीचे स्वयंवर करण्याचा निर्णय अतिशय विचारपूर्वक आणि निर्धाराने घेतला. सासरे मल्हारराव होळकर आणि सासू गौतमीबाई यांनी ज्यावेळेला प्रश्न केला, जर स्वयंवर जिंकणारा आपल्या जातीतला नसला, तर काय करणार ? त्यावेळी अहिल्यादेवींनी उत्तर दिले, *”वीराला आणि शूराला जात नसते , आपण त्यांच्या गुणांकडे पाहिले पाहिजे, जातीकडे नाही !”* आपल्या निश्चयाशी ठाम राहिल्या आणि इतिहासातील पुराणा नंतरचे पहिले स्वयंवर करण्याचा बहुमान त्यांच्या नावावर लिहिला गेला.
खंडेराव होळकरांचे सहामासी श्राद्ध करत असताना, खंडेराव होळकरांबरोबर सती गेलेल्या सात राण्यांना पिंडदान केले गेले, परंतु त्यांच्याबरोबर सती गेलेल्या दोन कंचनी स्त्रिया, ज्या मुस्लीम होत्या, शबनम आणि शकीना, त्यांना मुस्लिम असल्यामुळे पिंडदान करण्याचे पुरोहितांनी नाकारले. त्यावेळी अहिल्यामातेने श्राध्द विधी थांबवला आणि शास्त्रींना, *त्या दोन मुस्लिम स्त्रियांनाही पिंडदान करण्यास भाग पाडले.*
हा त्यांचा पुरोगामी विचार त्यावेळी त्यांच्याबरोबर असलेल्या त्यांच्या दोन भावांना शहाजी आणि महादजी शिंदे यांना पटला नाही. वर्ष श्रद्धाचे वेळी, त्यांनी पत्र लिहून कळवले की पुन्हा त्या मुस्लिम स्त्रियांसाठी विधी करणार असाल, तर आम्ही त्या कार्यक्रमास येणार नाही, त्यामुळे आमची इज्जत गेली, ती करणार नसाल तरच आम्ही येतो. अहिल्यादेवींनी पत्र लिहून कळवले, *आपण याल तर आपला सन्मान होईल, परंतु ठरलेल्या कार्यक्रमात कोणताही बदल होणार नाही आणि आपण नाही आलात, तर आपल्या स्वभावाचा कोतेपणा उघड होईल.* अहिल्या मातेने वर्ष श्राद्ध विधीतही त्या मुस्लिम स्त्रियांसाठी सुद्धा पिंडदान केले.
*मुरब्बी आणि मुत्सद्दी रणरागिनी*
मल्हारराव आणि मालेराव होळकरांच्या मृत्यूनंतर, त्यांच्याच संस्थानात मुनीम असलेला गंगोबा चंद्रचूड, हा ब्राह्मण फितूर झाला आणि राघोबादादांना इंदोर हे संस्थान वारस नसल्यामुळे जप्त करण्याचा सल्ला दिला. राघोबादादा उज्जैनपर्यंत सैन्य घेऊन आले, त्यावेळी मातेने एक खलिता पाठवला त्यात उल्लेख केला. *क्षिप्रा नदी ओलांडाल, तर मी भाला घेऊन उभी आहे. युद्धामध्ये आपण जिंकला, तर एका स्त्रीला हरवल्यामुळे आपली नामुष्की होईल आणि युद्धात हारला तर एक बाईकडून हरला म्हणूनही आपली नामुष्कीच होईल. मी जिंकले किंवा हरले तरी लढवैयी विरांगणा म्हणून माझा लौकिकच वाढेल.* या पत्रातील अर्थपूर्ण शब्दाचा राघोबादादावर परिणाम झाला आणि *तलवारीपेक्षा मातेची लेखणी भारी ठरली आणि लेखणीने मातेने रक्ताचा एक थेंबही न सांडता युद्ध जिंकले.*
स्वतः रणांगणात उतरून चंद्रावतांचा पराभव दोनदा केला. मालेरावांच्या मृत्यूनंतर, तुकोजी होळकर यांना सुभेदाराची वस्त्रे दिली गेली. कालांतराने तुकोजी होळकर यांना राज्याची अभिलाषा निर्माण झाली. त्यावेळी त्यांनी महादजी शिंदे यांना मध्यस्थी करण्यासाठी मातेकडे पाठवले. त्यावेळी महादजी शिंदे, माता ऐकत नाही असे दिसताच दरडावण्याच्या भाषेत बोलले, “आम्ही पुरुष माणसे, आमच्या ढंगावर आलो, तर तुम्ही बाईमाणूस काय कराल ?” त्यावेळी रणरागिणी मातेने जे उत्तर दिले, ते इतिहासात अजरामर झालेले आहे. माता दृढनिश्चयाने बोलल्या *”तुम्ही सैन्यासह यावे, सीमेवर उभे राहून , हत्तीच्या पायाला मिठी मारून तुमचा हत्ती नाही परत फिरवला, तर मल्हाराची सून म्हणून नाव सांगणार नाही !”* या बाणेदार उत्तराने महादजी शिंदे वरमले आणि तेथून पुढे त्यांनी कायम मातेला मदतच केली, तुकोजी होळकरही तेथून पुढे त्यांच्या आज्ञेत राहिले.
राघोबादादांच्या प्रकरणानंतर गंगोबांनी संन्यास घेतला, पण मातेने त्यांना कनकाईच्या किल्ल्यात मरेपर्यंत नजरकैदेत ठेवले. संन्याशी झाले म्हणून त्यांना मारले नाही, परंतु नजरकैदेत ठेवले, हा त्यांचा धूर्त आणि मुत्सद्दी निर्णय होता.
*सासु गौतमीबाई आणि सासरे मल्हारराव*
इतिहासातील हे सासू-सासरे अतिशय अलौकिक आहेत. आपल्या हयातीत राज्याचा पूर्ण कारभार सुनेच्या हातात देणारे, ते इतिहासातील पहिले सासरे आहेत. खंडोजीराव होळकर यांना आगाऊ पैसे द्यायचे नाकारले, त्याबद्दल सासु गौतमीबाई आणि सासरे मल्हाराव यांनी अहिल्यादेवीचे कौतुकच केले.
खंडेरावांचा चितेवर नऊ स्त्रिया सती गेल्या, अहिल्या माता सती जाऊ लागल्या, त्यावेळी मल्हारराव होळकरांनी त्यांच्या पायावर डोके ठेवून, अहिल्यामातेला अडवले. *गेली ती अहिल्या, आता तूच माझा खंडेराव !* असे म्हणून विनवणी केली.
*सुनेच्या पायावर डोके ठेवणारा, इतिहासातील हा एकमेव सासरा आहे.*
मुक्ताच्या स्वयंवराच्या निर्णयाला सुभेदार असून, प्रतिष्ठित घराणे असूनसुद्धा, सूनेच्या पुरोगामी विचाराला पाठिंबा देणारे, हे सासू- सासरे एकमेवाद्वितीय आहेत.
*अहिल्या मातेच्या पुण्यश्लोक होण्याच्या प्रक्रियेत सासु गौतमीबाई आणि सासरे मल्हारराव होळकर यांचा सिंहाचा वाटा आहे.* त्यांचे योगदान विसरून अहिल्यादेवी कोणालाही सांगताच येणार नाहीत.
*लोक कल्याणकारी निर्णय*
हुंडा बंदी, सती प्रथा बंदी, वृक्ष लागवड, शेकडो विहीरी आणि तलाव बांधणे, नदीवरती घाट बांधणे, अन्नछत्र उघडणे, शिक्षण व्यवस्था, सर्व प्रकारच्या कलाकारांना माहेश्वरी संस्थांमध्ये घरे बांधून देऊन, त्यांच्या पोटापाण्याची व्यवस्था करणे, काशी पासून रामेश्वर पर्यंत शिवमंदिराचा जीर्णोद्धार आणि बांधकाम करणे, चोर आणि दरोडे करणारे भिल्ल, यांना सैन्यदलात घेऊन, त्यांना रोजगार उपलब्ध करून देऊन, सन्मार्गाला लावणे, पेशव्यांनाही हेवा वाटेल असा तोफांचा कारखाना उभा करणे. एका विधवा स्त्रिने केलेल्या कार्याचा हा डोंगर आहे.
*लोकप्रियतेच्या शिरोमणी*
लोककल्याणकारी योजना आणि सत्वशील व धार्मिक आचरण यामुळे माता अतिशय लोकप्रिय झालेल्या होत्या, आजही आहेत आणि चंद्र सूर्य आहे तोपर्यंत त्यांची लोकप्रियता अबाधित राहणार.
अनंत फंदी नावाचा एक लोकशाहीर, तमाशा मध्ये कवने लिहीत असायचा. त्याने मातेवर कविता लिहिल्या आणि दरबारात त्यांना ऐकून दाखविल्या, त्यावेळी मातेने त्यांना उपदेश केला, व्यक्तीची स्तुती करण्याऐवजी तुम्ही तुमची प्रतिभा भगवंत चिंतनासाठी वापरा, त्यात तुमचे कल्याण होईल ! *या उपदेशाने एक तमाशात काम करणारा कलावंत, पुढे प्रख्यात कीर्तनकार झाला आणि संतपदाला पोहोचला.*
अहिल्यामाता आजारी असताना सर्व लोक माहेश्वरी संस्थांच्या राजवाड्यात त्यांना भेटायला येऊ लागले. त्यात एका भिल्लाने आपल्या हातातील जंबियाने ( चाकू ) आपल्या पोटात खुपसून घेतला आणि देवाला विनंती केली, *माझे उरलेले आयुष्य माझ्या आईला दे !* एखाद्या व्यक्तीसाठी स्वतःचा जीव देऊन उरलेले आयुष्य दान करण्याची भगवंताकडे प्रार्थना करणारा *हा प्रसंग इतिहासात अहिल्यादेवी सोडून कोणाच्याही वाट्याला आलेला नाही*
अहिल्यामातेने प्राण सोडताच , ज्या गायीला त्या नीत्य नैवेद्य देत असायच्या त्या गायीने डोके आपटून आपलाही प्राण सोडला.
वयाच्या एकोणतिसाव्या वर्षी वैधव्य येऊन, रक्ताच्या नात्यातील बावीस माणसे डोळ्यासमोर जाऊन, नियतीने पूर्णपणे जीवनात एकलेपणा देऊन, जीवनात सर्वोच्च दुःखांना खंबीरपणे तोंड देऊन, ४४ वर्षे राजमाता म्हणून अलौकिक लोक कल्याणकारी राज्य करणाऱ्या, चंद्र सूर्य आहे तोपर्यंत प्रत्येक स्त्रीला मार्गदर्शक आणि आदर्श ठरणाऱ्या, आपल्या कर्तुत्वाने आणि सामर्थ्याने, *निर्मल गंगाजल पुण्यश्लोक ठरलेल्या त्या जगाच्या पाठीवरील एकमेव राजमाता देवी आहेत.*
या दिव्य मातेच्या जयंतीनिमित्त त्यांच्या चरणावर
*त्रिवार मानाचा मुजरा !*
डॉ. आसबे ल.म.
अध्यक्ष कामधेनू सेवा परिवार.
मो.नं.9822292713.

निर्मल गंगाजल पुण्यश्लोक राजमाता अहिल्यादेवी*डॉ. ल.म.आसबे

निर्मल गंगाजल पुण्यश्लोक राजमाता अहिल्यादेवी*
ज्यांचे पुण्यशील चरित्र लिहिले,वाचले , सांगितले, ऐकले असता आपल्याला पुण्य प्राप्त होते,त्यांना *पुण्यश्लोक* ही उपाधी लावली जाते.
*दृढ निश्चयी आणि आढळ*
लहान वयात सीना नदीच्या काठी वाळूचे शिवलिंग तयार केले, पेशव्यांचा उधळलेला घोडा त्यादिशेने आला असता, सर्व मैत्रिणी पळून गेल्या, परंतु देवीने शिवलिंगावर स्वतःला झोकून देऊन शिवलिंग वाचवले, जीवाचीही पर्वा केली नाही. पेशव्यांनी असे का केले ? असे विचारले, तर *”आपणच निर्माण केलेले शिवलिंग, आपण स्वतः प्राणपणाने रक्षिले पाहिजे !”* असे बाणेदार उत्तर दिले. या बाणेदार उत्तराने चौंडीच्या माणकोजी शिंदे यांची खेड्यातील मुलगी सुभेदार मल्हारराव होळकर यांची सून झाली.
मल्हारराव होळकरांनी आपल्या सुनेचे अलौकिक गुण ओळखून आपल्या संस्थानाचा सर्व कारभार मातेच्या हाती दिला. खंडेराव होळकर त्या संस्थानाचे अधिकृत युवराज असूनही, त्यांनी आगाऊ मागितलेला पगार अहिल्याबाईंनी स्पष्ट नाकारला. हे धाडस इतिहासात कोणत्याच स्त्रीच्या नावावर नाही.
स्वतः महाराणी असून, आपल्या मुक्ता नावाच्या मुलीचे स्वयंवर करण्याचा निर्णय अतिशय विचारपूर्वक आणि निर्धाराने घेतला. सासरे मल्हारराव होळकर आणि सासू गौतमीबाई यांनी ज्यावेळेला प्रश्न केला, जर स्वयंवर जिंकणारा आपल्या जातीतला नसला, तर काय करणार ? त्यावेळी अहिल्यादेवींनी उत्तर दिले, *”वीराला आणि शूराला जात नसते , आपण त्यांच्या गुणांकडे पाहिले पाहिजे, जातीकडे नाही !”* आपल्या निश्चयाशी ठाम राहिल्या आणि इतिहासातील पुराणा नंतरचे पहिले स्वयंवर करण्याचा बहुमान त्यांच्या नावावर लिहिला गेला.
खंडेराव होळकरांचे सहामासी श्राद्ध करत असताना, खंडेराव होळकरांबरोबर सती गेलेल्या सात राण्यांना पिंडदान केले गेले, परंतु त्यांच्याबरोबर सती गेलेल्या दोन कंचनी स्त्रिया, ज्या मुस्लीम होत्या, शबनम आणि शकीना, त्यांना मुस्लिम असल्यामुळे पिंडदान करण्याचे पुरोहितांनी नाकारले. त्यावेळी अहिल्यामातेने श्राध्द विधी थांबवला आणि शास्त्रींना, *त्या दोन मुस्लिम स्त्रियांनाही पिंडदान करण्यास भाग पाडले.*
हा त्यांचा पुरोगामी विचार त्यावेळी त्यांच्याबरोबर असलेल्या त्यांच्या दोन भावांना शहाजी आणि महादजी शिंदे यांना पटला नाही. वर्ष श्रद्धाचे वेळी, त्यांनी पत्र लिहून कळवले की पुन्हा त्या मुस्लिम स्त्रियांसाठी विधी करणार असाल, तर आम्ही त्या कार्यक्रमास येणार नाही, त्यामुळे आमची इज्जत गेली, ती करणार नसाल तरच आम्ही येतो. अहिल्यादेवींनी पत्र लिहून कळवले, *आपण याल तर आपला सन्मान होईल, परंतु ठरलेल्या कार्यक्रमात कोणताही बदल होणार नाही आणि आपण नाही आलात, तर आपल्या स्वभावाचा कोतेपणा उघड होईल.* अहिल्या मातेने वर्ष श्राद्ध विधीतही त्या मुस्लिम स्त्रियांसाठी सुद्धा पिंडदान केले.
*मुरब्बी आणि मुत्सद्दी रणरागिनी*
मल्हारराव आणि मालेराव होळकरांच्या मृत्यूनंतर, त्यांच्याच संस्थानात मुनीम असलेला गंगोबा चंद्रचूड, हा ब्राह्मण फितूर झाला आणि राघोबादादांना इंदोर हे संस्थान वारस नसल्यामुळे जप्त करण्याचा सल्ला दिला. राघोबादादा उज्जैनपर्यंत सैन्य घेऊन आले, त्यावेळी मातेने एक खलिता पाठवला त्यात उल्लेख केला. *क्षिप्रा नदी ओलांडाल, तर मी भाला घेऊन उभी आहे. युद्धामध्ये आपण जिंकला, तर एका स्त्रीला हरवल्यामुळे आपली नामुष्की होईल आणि युद्धात हारला तर एक बाईकडून हरला म्हणूनही आपली नामुष्कीच होईल. मी जिंकले किंवा हरले तरी लढवैयी विरांगणा म्हणून माझा लौकिकच वाढेल.* या पत्रातील अर्थपूर्ण शब्दाचा राघोबादादावर परिणाम झाला आणि *तलवारीपेक्षा मातेची लेखणी भारी ठरली आणि लेखणीने मातेने रक्ताचा एक थेंबही न सांडता युद्ध जिंकले.*
स्वतः रणांगणात उतरून चंद्रावतांचा पराभव दोनदा केला. मालेरावांच्या मृत्यूनंतर, तुकोजी होळकर यांना सुभेदाराची वस्त्रे दिली गेली. कालांतराने तुकोजी होळकर यांना राज्याची अभिलाषा निर्माण झाली. त्यावेळी त्यांनी महादजी शिंदे यांना मध्यस्थी करण्यासाठी मातेकडे पाठवले. त्यावेळी महादजी शिंदे, माता ऐकत नाही असे दिसताच दरडावण्याच्या भाषेत बोलले, “आम्ही पुरुष माणसे, आमच्या ढंगावर आलो, तर तुम्ही बाईमाणूस काय कराल ?” त्यावेळी रणरागिणी मातेने जे उत्तर दिले, ते इतिहासात अजरामर झालेले आहे. माता दृढनिश्चयाने बोलल्या *”तुम्ही सैन्यासह यावे, सीमेवर उभे राहून , हत्तीच्या पायाला मिठी मारून तुमचा हत्ती नाही परत फिरवला, तर मल्हाराची सून म्हणून नाव सांगणार नाही !”* या बाणेदार उत्तराने महादजी शिंदे वरमले आणि तेथून पुढे त्यांनी कायम मातेला मदतच केली, तुकोजी होळकरही तेथून पुढे त्यांच्या आज्ञेत राहिले.
राघोबादादांच्या प्रकरणानंतर गंगोबांनी संन्यास घेतला, पण मातेने त्यांना कनकाईच्या किल्ल्यात मरेपर्यंत नजरकैदेत ठेवले. संन्याशी झाले म्हणून त्यांना मारले नाही, परंतु नजरकैदेत ठेवले, हा त्यांचा धूर्त आणि मुत्सद्दी निर्णय होता.
*सासु गौतमीबाई आणि सासरे मल्हारराव*
इतिहासातील हे सासू-सासरे अतिशय अलौकिक आहेत. आपल्या हयातीत राज्याचा पूर्ण कारभार सुनेच्या हातात देणारे, ते इतिहासातील पहिले सासरे आहेत. खंडोजीराव होळकर यांना आगाऊ पैसे द्यायचे नाकारले, त्याबद्दल सासु गौतमीबाई आणि सासरे मल्हाराव यांनी अहिल्यादेवीचे कौतुकच केले.
खंडेरावांचा चितेवर नऊ स्त्रिया सती गेल्या, अहिल्या माता सती जाऊ लागल्या, त्यावेळी मल्हारराव होळकरांनी त्यांच्या पायावर डोके ठेवून, अहिल्यामातेला अडवले. *गेली ती अहिल्या, आता तूच माझा खंडेराव !* असे म्हणून विनवणी केली.
*सुनेच्या पायावर डोके ठेवणारा, इतिहासातील हा एकमेव सासरा आहे.*
मुक्ताच्या स्वयंवराच्या निर्णयाला सुभेदार असून, प्रतिष्ठित घराणे असूनसुद्धा, सूनेच्या पुरोगामी विचाराला पाठिंबा देणारे, हे सासू- सासरे एकमेवाद्वितीय आहेत.
*अहिल्या मातेच्या पुण्यश्लोक होण्याच्या प्रक्रियेत सासु गौतमीबाई आणि सासरे मल्हारराव होळकर यांचा सिंहाचा वाटा आहे.* त्यांचे योगदान विसरून अहिल्यादेवी कोणालाही सांगताच येणार नाहीत.
*लोक कल्याणकारी निर्णय*
हुंडा बंदी, सती प्रथा बंदी, वृक्ष लागवड, शेकडो विहीरी आणि तलाव बांधणे, नदीवरती घाट बांधणे, अन्नछत्र उघडणे, शिक्षण व्यवस्था, सर्व प्रकारच्या कलाकारांना माहेश्वरी संस्थांमध्ये घरे बांधून देऊन, त्यांच्या पोटापाण्याची व्यवस्था करणे, काशी पासून रामेश्वर पर्यंत शिवमंदिराचा जीर्णोद्धार आणि बांधकाम करणे, चोर आणि दरोडे करणारे भिल्ल, यांना सैन्यदलात घेऊन, त्यांना रोजगार उपलब्ध करून देऊन, सन्मार्गाला लावणे, पेशव्यांनाही हेवा वाटेल असा तोफांचा कारखाना उभा करणे. एका विधवा स्त्रिने केलेल्या कार्याचा हा डोंगर आहे.
*लोकप्रियतेच्या शिरोमणी*
लोककल्याणकारी योजना आणि सत्वशील व धार्मिक आचरण यामुळे माता अतिशय लोकप्रिय झालेल्या होत्या, आजही आहेत आणि चंद्र सूर्य आहे तोपर्यंत त्यांची लोकप्रियता अबाधित राहणार.
अनंत फंदी नावाचा एक लोकशाहीर, तमाशा मध्ये कवने लिहीत असायचा. त्याने मातेवर कविता लिहिल्या आणि दरबारात त्यांना ऐकून दाखविल्या, त्यावेळी मातेने त्यांना उपदेश केला, व्यक्तीची स्तुती करण्याऐवजी तुम्ही तुमची प्रतिभा भगवंत चिंतनासाठी वापरा, त्यात तुमचे कल्याण होईल ! *या उपदेशाने एक तमाशात काम करणारा कलावंत, पुढे प्रख्यात कीर्तनकार झाला आणि संतपदाला पोहोचला.*
अहिल्यामाता आजारी असताना सर्व लोक माहेश्वरी संस्थांच्या राजवाड्यात त्यांना भेटायला येऊ लागले. त्यात एका भिल्लाने आपल्या हातातील जंबियाने ( चाकू ) आपल्या पोटात खुपसून घेतला आणि देवाला विनंती केली, *माझे उरलेले आयुष्य माझ्या आईला दे !* एखाद्या व्यक्तीसाठी स्वतःचा जीव देऊन उरलेले आयुष्य दान करण्याची भगवंताकडे प्रार्थना करणारा *हा प्रसंग इतिहासात अहिल्यादेवी सोडून कोणाच्याही वाट्याला आलेला नाही*
अहिल्यामातेने प्राण सोडताच , ज्या गायीला त्या नीत्य नैवेद्य देत असायच्या त्या गायीने डोके आपटून आपलाही प्राण सोडला.
वयाच्या एकोणतिसाव्या वर्षी वैधव्य येऊन, रक्ताच्या नात्यातील बावीस माणसे डोळ्यासमोर जाऊन, नियतीने पूर्णपणे जीवनात एकलेपणा देऊन, जीवनात सर्वोच्च दुःखांना खंबीरपणे तोंड देऊन, ४४ वर्षे राजमाता म्हणून अलौकिक लोक कल्याणकारी राज्य करणाऱ्या, चंद्र सूर्य आहे तोपर्यंत प्रत्येक स्त्रीला मार्गदर्शक आणि आदर्श ठरणाऱ्या, आपल्या कर्तुत्वाने आणि सामर्थ्याने, *निर्मल गंगाजल पुण्यश्लोक ठरलेल्या त्या जगाच्या पाठीवरील एकमेव राजमाता देवी आहेत.*
या दिव्य मातेच्या जयंतीनिमित्त त्यांच्या चरणावर
*त्रिवार मानाचा मुजरा !*
डॉ. आसबे ल.म.
अध्यक्ष कामधेनू सेवा परिवार.
मो.नं.9822292713.

सोशल मीडिया कंपन्या केंद्र सरकारपुढे नमल्या..

सोशल मीडिया कंपन्या केंद्र सरकारपुढे नमल्या…….

नियमांचे पालन करण्याचा निर्णय………………….
काय आहेत नियम…??
दिनांक : ३० मे २०२१
🧷🧷🧷🧷🧷🧷🧷🧷🧷🧷🧷

माहिती-तंत्रज्ञानविषयक नवे नियम २६ मेपासून अंमलात आले आहेत. केंद्र सरकारने सर्व कंपन्यांना दिलेल्या आदेशानुसार गुगल, फेसबुक, व्हॉट्सॲप, कू, टेलिग्राम, लिंक्डइन आणि शेअरचॅट या समाजमाध्यम कंपन्यांनी अधिकाऱ्यांच्या नियुक्तीबाबतच्या सर्व तपशीलाची माहिती केंद्र सरकारकडे सुपूर्द केली आहे.

मुख्य अट हि होती : नव्या नियमानुसार सर्व समाजमाध्यम कंपन्यांना भारतात मुख्य अनुपालन अधिकारी, नोडल अधिकारी आणि तक्रार निवारण अधिकारी यांची नियुक्ती करून त्यासंदर्भात केंद्र सरकारला अवगत करणे क्रमप्राप्त होते. हि माहिती आता केंद्रसरकारकडे सुपूर्द केली आहे.

व्हॉट्सॲप नमले मात्र ट्विटर कडून अजूनही अस्पष्टता :

व्हॉट्सॲपने नव्या नियमांविरोधात दिल्ली हायकोर्टात धाव घेतली असली तरी त्यांनी नियमांचे पालन करत असल्याचे केंद्र सरकारला कळवल्याने व्हॉट्सॲप आणि केंद्र सरकार यांच्यात निर्माण झालेला वाद निवळत असल्याचे संकेत मिळत आहेत.

नव्या नियमांबाबत ट्विटरने नाराजी व्यक्त करत त्यामुळे अभिव्यक्ती स्वातंत्र धोक्यात येत असल्याचे नमूद केले. त्यानंतर केंद्र सरकारनेही ट्विटरला फटकारत नियमांचे पालन करण्याचे निर्देश दिले.

काय आहेत नवे नियम ?

पॉर्नोग्राफी, त्यांचा मुलांवर होणारा परिणाम आणि प्रक्षोभक वक्तव्य हटवावे.

सोशल मीडियावरील अश्लीलतेला आळा घालणे.

सोशल मीडियावरच्या माहितीची तीन स्तरीय तपासणी…

सोशल मीडिया वापरकर्त्यांच्या तक्रारीसाठी कंपन्यांनी स्वतंत्र यंत्रणा स्थापन करावी.

या तक्रारींवर लक्ष ठेवण्यासाठी स्वतंत्र अधिकारी नेमावा.

तक्रारींबाबत 24 तासांत कारवाई होणे अपेक्षित.

महिलाविरोधी पोस्ट 24 तासांत हटवाव्या लागतील.

सोशल मीडिया कंपन्यांना फर्स्ट ओरिजिनेटर कोण आहे, ते सांगावे लागेल.

हा प्रकार कुणी सुरू केला हे सांगावे लागेल. ते भारताबाहेरून सुरू झाले असेल तर भारतात ते कुणी सुरू केले हे सांगावे लागेल.

तुमच्या प्लॅटफॉर्मवर काही समाजविघातक असेल तर ते हटवावे लागेल.

हे नवे नियम २६ मे २०२१ पासून लागू झाले आहेत. जर या कंपन्यांनी नियमांचे पालन केले नाही, तर त्यांचे इंटरमीडिअरी स्टेटस काढून घेतले जाऊ शकते. त्या भारतात लागू असलेल्या कायद्यानुसार, गुन्हेगारी कारवाईच्या चौकटीत येऊ शकतात

सोशल मीडिया कंपन्या केंद्र सरकारपुढे नमल्या..

सोशल मीडिया कंपन्या केंद्र सरकारपुढे नमल्या…….

नियमांचे पालन करण्याचा निर्णय………………….
काय आहेत नियम…??
दिनांक : ३० मे २०२१
🧷🧷🧷🧷🧷🧷🧷🧷🧷🧷🧷

माहिती-तंत्रज्ञानविषयक नवे नियम २६ मेपासून अंमलात आले आहेत. केंद्र सरकारने सर्व कंपन्यांना दिलेल्या आदेशानुसार गुगल, फेसबुक, व्हॉट्सॲप, कू, टेलिग्राम, लिंक्डइन आणि शेअरचॅट या समाजमाध्यम कंपन्यांनी अधिकाऱ्यांच्या नियुक्तीबाबतच्या सर्व तपशीलाची माहिती केंद्र सरकारकडे सुपूर्द केली आहे.

मुख्य अट हि होती : नव्या नियमानुसार सर्व समाजमाध्यम कंपन्यांना भारतात मुख्य अनुपालन अधिकारी, नोडल अधिकारी आणि तक्रार निवारण अधिकारी यांची नियुक्ती करून त्यासंदर्भात केंद्र सरकारला अवगत करणे क्रमप्राप्त होते. हि माहिती आता केंद्रसरकारकडे सुपूर्द केली आहे.

व्हॉट्सॲप नमले मात्र ट्विटर कडून अजूनही अस्पष्टता :

व्हॉट्सॲपने नव्या नियमांविरोधात दिल्ली हायकोर्टात धाव घेतली असली तरी त्यांनी नियमांचे पालन करत असल्याचे केंद्र सरकारला कळवल्याने व्हॉट्सॲप आणि केंद्र सरकार यांच्यात निर्माण झालेला वाद निवळत असल्याचे संकेत मिळत आहेत.

नव्या नियमांबाबत ट्विटरने नाराजी व्यक्त करत त्यामुळे अभिव्यक्ती स्वातंत्र धोक्यात येत असल्याचे नमूद केले. त्यानंतर केंद्र सरकारनेही ट्विटरला फटकारत नियमांचे पालन करण्याचे निर्देश दिले.

काय आहेत नवे नियम ?

पॉर्नोग्राफी, त्यांचा मुलांवर होणारा परिणाम आणि प्रक्षोभक वक्तव्य हटवावे.

सोशल मीडियावरील अश्लीलतेला आळा घालणे.

सोशल मीडियावरच्या माहितीची तीन स्तरीय तपासणी…

सोशल मीडिया वापरकर्त्यांच्या तक्रारीसाठी कंपन्यांनी स्वतंत्र यंत्रणा स्थापन करावी.

या तक्रारींवर लक्ष ठेवण्यासाठी स्वतंत्र अधिकारी नेमावा.

तक्रारींबाबत 24 तासांत कारवाई होणे अपेक्षित.

महिलाविरोधी पोस्ट 24 तासांत हटवाव्या लागतील.

सोशल मीडिया कंपन्यांना फर्स्ट ओरिजिनेटर कोण आहे, ते सांगावे लागेल.

हा प्रकार कुणी सुरू केला हे सांगावे लागेल. ते भारताबाहेरून सुरू झाले असेल तर भारतात ते कुणी सुरू केले हे सांगावे लागेल.

तुमच्या प्लॅटफॉर्मवर काही समाजविघातक असेल तर ते हटवावे लागेल.

हे नवे नियम २६ मे २०२१ पासून लागू झाले आहेत. जर या कंपन्यांनी नियमांचे पालन केले नाही, तर त्यांचे इंटरमीडिअरी स्टेटस काढून घेतले जाऊ शकते. त्या भारतात लागू असलेल्या कायद्यानुसार, गुन्हेगारी कारवाईच्या चौकटीत येऊ शकतात

राज्यात 15 जूनपर्यंत लॉकडाऊन कायम👉मुख्यमंत्री उध्दव ठाकरे*

नमोन्यूजनेशन:- संपादकीय

राज्यात 15 जूनपर्यंत लॉकडाऊन कायम👉मुख्यमंत्री उध्दव ठाकरे*

*👉👉👉ज्या जिल्ह्यात कोरोनाचा प्रादुर्भाव कमी आहे.त्या ठिकाणी काही प्रमाणात शिथिलता देण्यात येणार असून,👉ज्या जिल्ह्यात रुग्ण संख्या अधिक आहे.तेथे निर्बंध कायम ठेवण्यात येतील असे मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे यांनी केले जाहीर*

*👉👉👉राज्यातील 21 जिल्‍ह्यात लॉकडाऊन वाढवण्यात आल्याची घोषणा मुख्यमंत्र्यांनी केली आहे.👉👉कडक लॉकडाऊन नाही पण निर्बंध मात्र राहणार👉मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे*

*👉यावेळी बोलताना मुख्यमंत्री उध्दव ठाकरे म्हणाले की,एक वर्षांपासून आपण बंधनात आहोत आपणा सर्वांचे सहकार्य लाभले म्हणून काही अंशी आपण कोरोनावर मात करू शकलो,कोरोनाचे संकट आणि वादळ दोन्ही एकाच वेळी आले,पण प्रशासनाने यावर खूप छान कामगिरी केली,आपत्ती मध्ये केंद्राचे निकष असतात ते बदलणे गरजेचे,संकटात मदत केली पण भविष्यात यासाठी कायमस्वरूपी उपाय योजना करावी लागेल,अनेक दुर्घटना घडतात,त्यामुळे वीज तारा भूमिगत कराव्या लागतील,आपण केंद्र सरकारशी चर्चा करत आहोत.कोरोनाच्या लढाईत आपण गरिबांना धान्य वाटप केले,850 कोटी लाभार्थ्यांना जमा केले,कामगार,फेरीवाले,आदिवासी, यांनाही थेट मदत केली,निर्बंध लादने हे नाईलाजाने निर्णय घ्यावे लागले,सध्या रुग्ण संख्या कमी होत आहे,मध्यंतरी ही संख्या वाढली होती,सध्या 18 हजार रुग्ण आढळत आहेत,काही जिल्ह्यात अजूनही रुग्ण संख्या कमी नाही,ग्रामीण भागात आकडे वाढत आहेत,तिसरी लाट येणार म्हणतात यासाठी आपण आजच तयारी केली आहे,कडक लॉक डाऊन नसला तरी काही निर्बंध घालावे लागत आहेत,असे मुख्यमंत्री ठाकरे म्हणाले*

*👉तसेच पुढे बोलताना मुख्यमंत्री ठाकरे म्हणाले की,मध्यंतरी ऑक्सिजनचा प्रश्न खूप गंभीर झाला होता त्यामुळे आपण निर्मिती वर अधिक भर दिला,वेळप्रसंगी आपण बाहेरून ऑक्सिजन पुरवठा आणला,दिवसाला 1200 मेट्रिक टन ऑक्सिजन उत्पादन सुरू आहे,👉पावसाळ्यात साथीचे रोग रोखणे महत्वाचे आहे,वेळीच उपचार झाले तर रुग्ण संख्या आटोक्यात राहील,कारण नसताना औषध देऊ नका यामुळे इतर साईड इफेक्ट्स होऊ लागले आहेत,आता लहान मुलांना सुरक्षित ठेवणे गरजेचे आहे,पहिल्या लाटेत वृद्ध,दुसऱ्यात तरुण आता तिसऱ्यात बालकांना बाधा होण्याची शक्यता आहे,लसीकरण मोहीम वेगात सुरू केली आहे,लस उपलब्धते नुसार आपण टप्याटप्याने लसीकरण करत आहोत, जूनपासून लसीकरण सुरळीत होईल,लस साठा आपण खरेदी करत आहोत,12 कोटी लोकांचे लसीकरण पूर्ण झाले आहे,18 ते 44 लोकांना लवकरच लसीकरण सुरू करत आहोत, एकरकमी लस खरेदीची आपली तयारी आहे,👉10 वी ची परीक्षा रद्द करावी लागली,ती एका निकषांवर निकाल लावले जाणार आहेत,आता 12 वी चा प्रश्न आहे,यासाठी केंद्राशी बोलत आहोत, हे धोरण केंद्राने ठरवणे गरजेचे आहे,लॉक डाऊन असला तरी अर्थ चक्र सुरू राहणे महत्वाचे आहे यासाठी जनतेचे सहकार्य असायला हवे,आपण ते करत आहात,प्रत्येकाने आता मी माझं गाव कोरोना मुक्त गाव ही मोहीम राबवायला हवे,काही गावांनी हे करून दाखवले आहे,सरकारी यंत्रणा तुमच्या बरोबर आहे.असे मुख्यमंत्री ठाकरे म्हणाले*

कोरोनामुळे ज्या मुलांच्या पालकांचं निधन झालं, त्यांच्यासाठी मोदी सरकारची नवी योजना

नमोन्यूजनेशन:- रामवर्मा आसबे

कोरोनामुळे ज्या मुलांच्या पालकांचं निधन झालं, त्यांच्यासाठी सरकारची नवी योजना

नवी दिल्ली ( वृत्तसंस्था ) –  ज्या मुलांचे पालक म्हणजेच आई-वडील अशा दोघांचंही कोरोनामुळे निधन झालं आहे, अशा मुलांसाठी पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांनी ‘PM-CARES for Children’ ही योजना जाहीर केली आहे.

पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांच्या वेबसाईटवर दिलेल्या माहितीनुसार, ज्या मुलांच्या पालकांचं कोरोनामुळे निधन झालं आहे, अशा मुलांना वयाची 18 वर्षं पूर्ण केल्यानंतर दरमहा स्टायपेंड (ठरावीक रक्कम) देण्यात येईल. तसंच ही मुलं 23 वर्षांची झाल्यानंतर त्यांना पीएम केअर्समधून 10 लाख रुपयांचा निधी देण्यात येईल, असं पंतप्रधान कार्यालयानं जाहीर केलं आहे.

तसंच या मुलांना मोफत शिक्षण मिळेल याची खात्री बाळगली जाईल. तर उच्च शिक्षणासाठी या मुलांना शैक्षणिक कर्ज मिळावं यासाठी मदत केली जाईल आणि या कर्जारील व्याज पीएम केअर्समधून फेडलं जाईल, असंही पंतप्रधान कार्यालयानं स्पष्ट केलंय.

या मुलांना वयाच्या 18 वर्षापर्यंत आयुष्यमान भारत योजनेअंतर्गत 5 लाख रुपयांचा मोफत आरोग्य विमा मिळेल आणि यावरील प्रीमियम पीएम केअर्समधून भरला जाईल, असंही पंतप्रधान कार्यालयानं म्हटलंय.

पीएम केअर्स फंड

कोव्हिड-19 च्या विषाणूचा प्रसार रोखण्यासाठी भारतात 24 मार्चपासून लॉकडाऊन लागू करण्यात आला. त्यानंतर 27 मार्च 2020 रोजी पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांनी ‘प्राईम मिनिस्टर्स सिटिझन असिस्टन्स अँड रिलीफ इन इमर्जन्सी सिच्युएशन फंड’ची सुरुवात केली. ‘PM केअर्स फंड’ या सुटसुटीत नावानं हा फंड ओळखला जातोय.

“सर्व भारतीयांना मी विनंती आहे की, PM केअर फंडमध्ये देणगी द्या,” असं आवाहन करणारं पंतप्रधान मोदींनी ट्वीटही केलं होतं.

या निधीमुळे कोरोनाविरुद्धच्या लढाईसह अशाच तणावाच्या स्थितींशी लढण्यासाठी बळ मिळेल, तसंच निरोगी भारत बनवण्यासाठी हे सर्व महत्त्वाचं असेल, असंही मोदी म्हणाले होते.

error: Content is protected !!