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देश का प्रथम नागरिक राष्ट्रपति

हमारे देश भारत का *प्रथम नागरिक राष्ट्रपति होता है और 27 वें नागरिक भारत की जनता।* आइए जानें, इसके बीच कौन-कौन आता है।👇

श्री रामनाथ कोविंद भारत के 14 वें राष्ट्रपति हैं। भारत के संविधान के अनुसार भारत का राष्ट्रपति देश का प्रथम नागरिक है।
संविधान के अनुसार एक पूरी लिस्ट तैयार की गयी है जिसमें यह बताया गया है कि पहले स्थान पर कौन है और उसके बाद 27 वें स्थान जनता तक कौन-कौन है।

चलिए देखते हैं पूरी लिस्ट…

*भारत का प्रथम नागरिक* : देश का राष्ट्रपति।

*द्वितीय नागरिक* : देश का उप राष्ट्रपति।
आपको बता दें इस समय भारत के उप राष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू हैं।

*तृतीय नागरिक* : प्रधानमंत्री।
इस समय भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी हैं।

*चतुर्थ नागरिक* : राज्यपाल। (संबंधित राज्यों के सभी)

*पंचम नागरिक* : देश के पूर्व राष्ट्रपति और पंचम (अ) देश के पूर्व उपराष्ट्रपति।

*छठवाँ नागरिक* : भारत के मुख्य न्यायधीश और लोकसभा अध्यक्ष।

*सप्तम नागरिक* : केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, मुख्यमंत्री (संबंधित सभी राज्यों के), योजना आयोग के उपाध्यक्ष, पूर्व प्रधानमंत्री, राज्यसभा और लोकसभा में विपक्ष के नेता और सप्तम (अ) सभी भारत रत्न पुरस्कार विजेता।

*अष्टम नागरिक* : भारत में मान्यता प्राप्त राजदूत, मुख्यमंत्री (संबंधित राज्यों से बाहर के) , राज्यपाल (अपने संबंधित राज्यों से बाहर के)

*नवम नागरिक* : सुप्रीम कोर्ट के जज, नवम (अ) यूनियन पब्लिक सर्सिस कमिशन (यूपीएससी) के चेयरपर्सन, चीफ इलेक्शन कमिशनर, भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक।

*दशम नागरिक* : राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन, डिप्टी चीफ मिनिस्टर्स, लोकसभा के डिप्टी स्पीकर, योजना आयोग के सदस्य (वर्तमान में नीति आयोग), राज्यों के मंत्री (सुरक्षा से जुड़े मंत्रालयों के अन्य मंत्री)

*ग्यारहवें नागरिक* : अटर्नी जर्नल (एजी), कैबिनेट सचिव, उप राज्यपाल (केंद्र शासित प्रदेशों के भी शामिल)

*बारहवें नागरिक* : पूर्ण जनरल या समकक्ष रैंक वाले कर्मचारियों के चीफ।

*तेरहवें नागरिक* : राजदूत ,असाधारण और पूर्ण नियोक्ता जो कि भारत में मान्यता प्राप्त हैं।

*चौदहवें नागरिक* : राज्यों के चेयरमैन और राज्य विधानसभा के स्पीकर (सभी राज्य शामिल), हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस (सभी राज्यों की पीठ के जज शामिल)

*पंद्रहवे नागरिक* : राज्यों के कैबिनेट मिनिस्टर्स (सभी राज्यों के शामिल), केंद्र शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, दिल्ली के मुख्य कार्यकारी काउंसिलर (सभी केंद्र शासित राज्य) केंद्र के उपमंत्री।

*सोलहवें नागरिक* : लेफ्टिनेंट जनरल या समकक्ष रैंक का पद धारण करने वाले स्टाफ के प्रमुख अधिकारी।

*सत्रहवें नागरिक* : अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष, अनुसूचित जाति के राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष, अनुसूचित जनजाति के राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष, उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश (उनके संबंधित न्यायालय के बाहर), उच्च न्यायालयों के पीयूज न्यायाधीश (उनके संबंधित अधिकार क्षेत्र में)

*अठारहवें नागरिक* : राज्यों (उनके संबंधित राज्यों के बाहर) में कैबिनेट मंत्री, राज्य विधान मंडलों के सभापति और अध्यक्ष (उनके संबंधित राज्यों के बाहर), एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार आयोग के अध्यक्ष, उप अध्यक्ष और राज्य विधान मंडलों के उपाध्यक्ष (उनके संबंधित राज्यों में), मंत्री राज्य सरकारों (राज्यों में उनके संबंधित राज्यों), केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्री और कार्यकारी परिषद, दिल्ली (उनके संबंधित संघ शासित प्रदेशों के भीतर) संघ शासित प्रदेशों में विधान सभा के अध्यक्ष और दिल्ली महानगर परिषद के अध्यक्ष, उनके संबंधित केंद्र शासित प्रदेशों में।

*उन्नीसवें नागरिक* : संघ शासित प्रदेशों के मुख्य आयुक्त, उनके संबंधित केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यों के उपमंत्री (उनके संबंधित राज्यों में), केंद्र शासित प्रदेशों में विधान सभा के उपाध्यक्ष और मेट्रोपॉलिटन परिषद दिल्ली के उपाध्यक्ष।

*बीसवें नागरिक* : राज्य विधानसभा के चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन (उनके संबंधित राज्यों के बाहर)

*इक्कीसवें नागरिक* : सभी संसद सदस्य।

*बाईसवें नागरिक* : राज्यों के डिप्टी मिनिस्टर्स (उनके संबंधित राज्यों के बाहर)

*तेईसवें नागरिक* : आर्मी कमांडर, वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ और इन्हीं की रैंक के बराबर के अधिकारी, राज्य सरकारों के मुख्य सचिव, (उनके संबंधित राज्यों के बाहर), भाषाई अल्पसंख्यकों के आयुक्त, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आयुक्त, अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य, अनुसूचित जातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग के सदस्य, अनुसूचित जनजाति के लिए राष्ट्रीय आयोग के सदस्य।

*चौबीसवें नागरिक* : उप राज्यपाल रैंक के अधिकारी या इन्हीं के समकक्ष अधिकारी।

*पच्चीसवें नागरिक* : भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव।

*छब्बीसवें नागरिक* : भारत सरकार के संयुक्त सचिव और समकक्ष रैंक के अधिकारी, मेजर जनरल या समकक्ष रैंक के रैंक के अधिकारी।

*सत्ताईसवें नागरिक* : भारत के सत्ताईसवें नागरिक आम इंसान होते हैं। जैसे की आप और हम !!
🇮🇳वंदेमातरम , भारतमाता की जय🇮🇳
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

मा.श्री शशिकांत चंद्रकांत थोरात यांची रयत क्रांती संघटना सोलापूर जिल्हा अध्यक्ष पदी निवड

आमचे मित्र मा.श्री शशिकांत चंद्रकांत थोरात यांची रयत क्रांती संघटना सोलापूर जिल्हा अध्यक्ष पदी निवड झाल्या बद्दल हार्दीक शुभेच्छा
शुभेच्छुक :- रामवर्मा आसबे
संपादक:- नमोन्युजनेशन परिवार
सहसंपादक:- शिव-कल्यान न्युजनेटवर्क

*ॐ नमः शिवाय…… भस्म (विभूति) धारण का दिव्य महात्म्य*

*ॐ नमः शिवाय…… भस्म (विभूति) धारण का दिव्य महात्म्य*

*महर्षि दुर्वासा……* *अत्रिमुनि के पुत्ररूप में भगवान् शंकर के अंश से उत्पन्न हुए थे….* अत: *ये रुद्रावतार नाम से भी प्रसिद्ध है। अपने परमाराध्य भगवान् शंकर में इनकी विशेष भक्ति थी।* *ये भस्म एवं रुद्राक्ष धारण किया करते थे। इनका स्वभाव अत्यन्त उग्र था।*

यद्यपि उग्र स्वभाव के कारण इनके शाप से सभी भयभीत रहते थे… *तथापि इनका क्रोध भी प्राणियो-के परम कल्याण के लिये ही होता रहा है । एक समय महर्षि दुर्वासा समस्त भूमण्डल का भ्रमण करते हुए पितृलोक में जा पहुंचे । वे सर्वांग में भस्म रमाये एवं रुद्राक्ष धारण किये हुए थे…….*

*हृदय मे पराम्बा भगवती पार्वती का ध्यान और मुख से ‘जय पार्वती हर’ का उच्चारण करते हुए कमण्डलु तथा त्रिशूल लिये दुर्वासा मुनि ने वहां अपने पितरों का दर्शन किया । इसी समय उनके कानो में करुण क्रन्दन सुनायी पडा…..*

वे पापियों के हाहाकारमय भीषण रुदन को सुनकर कुम्भीपाक, रौरव नरक आदि स्थानों को देखने के लिये दौड़ पड़े । *वहाँ पहुंचकर उन्होंने वहाँ के अधिकारियो से पूछा – रक्षको ! यह करुण क्रन्दन किनका है….? ये इतनी यातना क्यों सह रहे है ….?*

उन्होंने उत्तर दिया- *यह संयमनीपुरी का कुम्भीपाक नामक नरक है। यहां वे ही लोग आकर कष्ट भोगते है, जो शिव, विष्णु, देवी, सूर्य तथा गणेश के निन्दक है और जो वेद पुराण की निन्दा करते है ब्राह्मणोंके द्रोही है और माता, पिता, गुरु तथा श्रेष्ट ज़नो का अनादर करते है, जो धर्मके दूषक है वे पतितजन यहां घोर कष्ट पाते है। उन्ही पतितो का यह महाघोर दारुण शब्द अपको सुनायी दे रहा है..*

यह सुनकर दुर्वासा ऋषि बहुत दुखी हुए और दुखियों को देखने के लिये वे उस कुण्ड के पास गये । *कुण्ड के समीप जाकर ज्यों ही वे सिर नीचा करके देखने लगे त्यों ही वह कुण्ड स्वर्ग के समान सुन्दर हो गया । वहाँ के पापी जीव एकाएक प्रसन्न हो उठे और दु:ख से मुक्त होकर गद्गदस्वर से मधुर भाषण करने लगे । उस समय आकाश से पुष्पवृष्टि होने लगी और विविध समीर चलने लगे । वसन्त ऋतु के समान उस सुखदायी समय मे यमदूतो को भी विस्मय में डाल दिया । स्वयं मुनि भी यह आश्चर्य देखकर बड़े सोच में पड़ गये….*

चकित होकर यमदूतों ने धर्मराज के निकट जाकर इस आश्चर्यमय स्थिति परिवर्तन की सुचना दी और कहा – *महाभाग… बड़े आश्चर्य की बात है कि सभी पापियों को इस समय अपार आनन्द हो गया है, किसी को किसी प्रकार की यम यातना रह ही नहीं गयी । विभो ! यह क्या बात है ?दूतों की यह खात सुनते ही धर्मराज स्वयं वहाँ गये और वहाँ का दृश्य देखकर वे भी बहुत चकित हुए….*

उन्होंने सभी देवताओ को बुलाकर इसका कारण पूछा, परंतु किसी को इसका मूल कारण नहीं ज्ञात हो सका । *जब किसी प्रकार इसका पता न चला, तब ब्रह्मा और विष्णु की सहायता से धर्मराज भगवान् शंकर के पास गये……* पार्वती के साथ विराजमान भगवान् शंकर का दर्शन कर वे स्तुति प्रार्थना करते हुए कहने लगे-
*हे देवदेव…. कुम्मीपाक का कुण्ड एकाएक स्वर्गके समान हो गया, इसका क्या कारण है ? प्रभो ! आप सर्वज्ञ हैं अत: अपकी सेवा में हम आये है । हम लोगोंके संदेह को आप दूर करने की कृपा करे ।*

सर्वान्तर्यामी भगवान् ने गम्भीर स्वर से हंसते हुए कहा – *देवगणो ! इसमें कुछ भी आश्चर्य नहीं है, यह विभूति ( भस्म) का ही माहात्म्य है । जिस समय मेरे परम भक्त दुर्वास मुनि कुम्मीपाक नरक को देखने गये थे, उस समय वायुके वेगसे उनके ललाट से भस्म के कुछ कण उस कुण्डमें गिर पड़े थे । इसी कारण वह नरक स्वर्ग के समान हो गया है और अब वह स्वर्गीय ‘पितृतीर्थ’ के नामसे प्रसिद्ध होगा ।*

*कुम्भीपाकं गतो द्रष्टुं दुर्वासा: शैवसम्मतः।।*
*अवांगमुखो ददर्शाधस्तदा वायुवशाद्धरे ।*
*भाले भस्मकणास्तत्र पतिता दैवयोगतः ।।*
*तेन जातमिदं सर्वं भस्मनो महिमा त्वयम्।*
*इतः परं तु तत्तीर्थं पितृलोकनिवासिनाम्।।*
*भविष्यति न संदेहो यत्र स्नात्वा सुखी भवेत्।*
*(देवीभागवत ११ । १५ ।६४-६७)*

भगवान् शंकर की बात सुनकर धर्मराजसहित सभी देवगण अत्यन्त प्रसन्न हुए । उसी समय उन्होंने उस कुण्ड के समीप शिवलिङ्ग तथा देवी पार्वती की स्थापना की और वहाँ के पापियों को मुक्त कर दिया। *तभी से पितृलोक में उस मूर्ति के दर्शन पूजन करके पितृलोग शिवधाम (मोक्ष) प्राप्त करने लगे । यह चमत्कार परम शैव रुद्रावतार महर्षि दुर्वासा मुनि की शिवभक्ति तथा उनके भालपर विराजमान शिवविभूति(भस्म) का ही था* । (देवीभागवत)

जो ॐ नमः शिवाय इस मन्त्र का उच्चारण करता है, उसका मुख को निश्चय ही तीर्थ दर्शन का फल प्राप्त होता है। *जिसके मुख में ‘शिव’ नाम तथा शरीरपर भस्म और रुद्राक्ष रहता है, उसके दर्शनेसे ही पाप नष्ट हो जाते है । (शिवपुराण. शा. सं.अ ३०)*

*जय महाँकाल*
🚩 🚩 🚩

*ॐ नमः शिवाय…… भस्म (विभूति) धारण का दिव्य महात्म्य*

*ॐ नमः शिवाय…… भस्म (विभूति) धारण का दिव्य महात्म्य*

*महर्षि दुर्वासा……* *अत्रिमुनि के पुत्ररूप में भगवान् शंकर के अंश से उत्पन्न हुए थे….* अत: *ये रुद्रावतार नाम से भी प्रसिद्ध है। अपने परमाराध्य भगवान् शंकर में इनकी विशेष भक्ति थी।* *ये भस्म एवं रुद्राक्ष धारण किया करते थे। इनका स्वभाव अत्यन्त उग्र था।*

यद्यपि उग्र स्वभाव के कारण इनके शाप से सभी भयभीत रहते थे… *तथापि इनका क्रोध भी प्राणियो-के परम कल्याण के लिये ही होता रहा है । एक समय महर्षि दुर्वासा समस्त भूमण्डल का भ्रमण करते हुए पितृलोक में जा पहुंचे । वे सर्वांग में भस्म रमाये एवं रुद्राक्ष धारण किये हुए थे…….*

*हृदय मे पराम्बा भगवती पार्वती का ध्यान और मुख से ‘जय पार्वती हर’ का उच्चारण करते हुए कमण्डलु तथा त्रिशूल लिये दुर्वासा मुनि ने वहां अपने पितरों का दर्शन किया । इसी समय उनके कानो में करुण क्रन्दन सुनायी पडा…..*

वे पापियों के हाहाकारमय भीषण रुदन को सुनकर कुम्भीपाक, रौरव नरक आदि स्थानों को देखने के लिये दौड़ पड़े । *वहाँ पहुंचकर उन्होंने वहाँ के अधिकारियो से पूछा – रक्षको ! यह करुण क्रन्दन किनका है….? ये इतनी यातना क्यों सह रहे है ….?*

उन्होंने उत्तर दिया- *यह संयमनीपुरी का कुम्भीपाक नामक नरक है। यहां वे ही लोग आकर कष्ट भोगते है, जो शिव, विष्णु, देवी, सूर्य तथा गणेश के निन्दक है और जो वेद पुराण की निन्दा करते है ब्राह्मणोंके द्रोही है और माता, पिता, गुरु तथा श्रेष्ट ज़नो का अनादर करते है, जो धर्मके दूषक है वे पतितजन यहां घोर कष्ट पाते है। उन्ही पतितो का यह महाघोर दारुण शब्द अपको सुनायी दे रहा है..*

यह सुनकर दुर्वासा ऋषि बहुत दुखी हुए और दुखियों को देखने के लिये वे उस कुण्ड के पास गये । *कुण्ड के समीप जाकर ज्यों ही वे सिर नीचा करके देखने लगे त्यों ही वह कुण्ड स्वर्ग के समान सुन्दर हो गया । वहाँ के पापी जीव एकाएक प्रसन्न हो उठे और दु:ख से मुक्त होकर गद्गदस्वर से मधुर भाषण करने लगे । उस समय आकाश से पुष्पवृष्टि होने लगी और विविध समीर चलने लगे । वसन्त ऋतु के समान उस सुखदायी समय मे यमदूतो को भी विस्मय में डाल दिया । स्वयं मुनि भी यह आश्चर्य देखकर बड़े सोच में पड़ गये….*

चकित होकर यमदूतों ने धर्मराज के निकट जाकर इस आश्चर्यमय स्थिति परिवर्तन की सुचना दी और कहा – *महाभाग… बड़े आश्चर्य की बात है कि सभी पापियों को इस समय अपार आनन्द हो गया है, किसी को किसी प्रकार की यम यातना रह ही नहीं गयी । विभो ! यह क्या बात है ?दूतों की यह खात सुनते ही धर्मराज स्वयं वहाँ गये और वहाँ का दृश्य देखकर वे भी बहुत चकित हुए….*

उन्होंने सभी देवताओ को बुलाकर इसका कारण पूछा, परंतु किसी को इसका मूल कारण नहीं ज्ञात हो सका । *जब किसी प्रकार इसका पता न चला, तब ब्रह्मा और विष्णु की सहायता से धर्मराज भगवान् शंकर के पास गये……* पार्वती के साथ विराजमान भगवान् शंकर का दर्शन कर वे स्तुति प्रार्थना करते हुए कहने लगे-
*हे देवदेव…. कुम्मीपाक का कुण्ड एकाएक स्वर्गके समान हो गया, इसका क्या कारण है ? प्रभो ! आप सर्वज्ञ हैं अत: अपकी सेवा में हम आये है । हम लोगोंके संदेह को आप दूर करने की कृपा करे ।*

सर्वान्तर्यामी भगवान् ने गम्भीर स्वर से हंसते हुए कहा – *देवगणो ! इसमें कुछ भी आश्चर्य नहीं है, यह विभूति ( भस्म) का ही माहात्म्य है । जिस समय मेरे परम भक्त दुर्वास मुनि कुम्मीपाक नरक को देखने गये थे, उस समय वायुके वेगसे उनके ललाट से भस्म के कुछ कण उस कुण्डमें गिर पड़े थे । इसी कारण वह नरक स्वर्ग के समान हो गया है और अब वह स्वर्गीय ‘पितृतीर्थ’ के नामसे प्रसिद्ध होगा ।*

*कुम्भीपाकं गतो द्रष्टुं दुर्वासा: शैवसम्मतः।।*
*अवांगमुखो ददर्शाधस्तदा वायुवशाद्धरे ।*
*भाले भस्मकणास्तत्र पतिता दैवयोगतः ।।*
*तेन जातमिदं सर्वं भस्मनो महिमा त्वयम्।*
*इतः परं तु तत्तीर्थं पितृलोकनिवासिनाम्।।*
*भविष्यति न संदेहो यत्र स्नात्वा सुखी भवेत्।*
*(देवीभागवत ११ । १५ ।६४-६७)*

भगवान् शंकर की बात सुनकर धर्मराजसहित सभी देवगण अत्यन्त प्रसन्न हुए । उसी समय उन्होंने उस कुण्ड के समीप शिवलिङ्ग तथा देवी पार्वती की स्थापना की और वहाँ के पापियों को मुक्त कर दिया। *तभी से पितृलोक में उस मूर्ति के दर्शन पूजन करके पितृलोग शिवधाम (मोक्ष) प्राप्त करने लगे । यह चमत्कार परम शैव रुद्रावतार महर्षि दुर्वासा मुनि की शिवभक्ति तथा उनके भालपर विराजमान शिवविभूति(भस्म) का ही था* । (देवीभागवत)

जो ॐ नमः शिवाय इस मन्त्र का उच्चारण करता है, उसका मुख को निश्चय ही तीर्थ दर्शन का फल प्राप्त होता है। *जिसके मुख में ‘शिव’ नाम तथा शरीरपर भस्म और रुद्राक्ष रहता है, उसके दर्शनेसे ही पाप नष्ट हो जाते है । (शिवपुराण. शा. सं.अ ३०)*

*जय महाँकाल*
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ईडीकडून सचिन वाझेची सहा तास झाडाझडती*

ईडीकडून सचिन वाझेची सहा तास झाडाझडती*

*👉दक्षिण मुंबईतील कारमायल रोडवरील स्फोटक प्रकरण आणि मनसुख हिरेन हत्या प्रकरणातील आरोपी बडतर्फ एपीआय सचिन वाझे याची सक्तवसुली संचालनालयाने (ईडी) शनिवारी तळोजा कारागृहात सहा तास कसून चौकशी केली. खात्यात कार्यरत असताना मुंबईतील बार मालकांकडून केलेली हप्तावसुली आणि माजी पोलीस आयुक्त परमबीर सिंग यांनी तत्कालीन गृहमंत्री अनिल देशमुख यांच्यावर केलेल्या भ्रष्टाचाराच्या आरोपांच्या अनुषंगाने ही चौकशी करण्यात आली.*

*👉अखेरच्या टप्प्यात वाझेसोबत संजीव पलांडे आणि कुंदन शिंदे यांना समोरासमोर बसवून चौकशी केली जाईल, असे सांगण्यात आले. परमबीर सिंग यांनी वाझेला मुंबईतील बार मालकांकडून दरमहा १०० कोटी रुपये वसूल करून देण्याचे टार्गेट देशमुख यांनी दिले होते, असा गंभीर आरोप केला होता, या प्रकरणाचा तपास गेल्या दोन-अडीच महिन्यांपासून आतापर्यंत देशमुख आणि त्यांचे दोन पीए यांच्या भोवती सुरू होता. त्यामुळे उच्च न्यायालयाने या प्रकरणाची व्याप्ती वाढवून तत्कालीन आयुक्त आणि इतरांची जबाबदारी निश्चित करण्याची सूचना सीबीआयला केली आहे.त्यामुळे त्यांच्या प्राथमिक अहवालावरून मनी लॉन्ड्रिंगचा गुन्हा दाखल केलेल्या ईडीने या प्रकरणातील मुख्य साक्षीदार व स्फोटक कार आणि हिरेन हत्या प्रकरणातील आरोपी वाझेकडे सविस्तर चौकशी करण्याचा निर्णय घेतला आहे. त्यासाठी न्यायालयाने तीन दिवस तुरुंगात जाऊन चौकशी करण्याची परवानगी ईडीच्या अधिकाऱ्यांना दिली आहे. त्यानुसार शनिवारी सकाळी अधिकाऱ्यांचे एक पथक तळोजा तुरुंगात गेले. वाझेला बराकीतून भेट कक्षातील स्वतंत्र दालनात आणण्यात आले.त्याने सीबीआयला दिलेल्या जबाबात डिसेंबर २०२० ते फेब्रुवारी २०२१ दरम्यान ४.७० कोटी रुपये वसूल करून तत्कालीन गृहमंत्री देशमुख यांचे खासगी सचिव संजीव पलांडे आणि पीए कुंदन शिंदे यांच्याकडे पोहचल्याचे नमूद केले होते. त्यानुषंगाने त्याच्याकडून सविस्तर तपशील जाणून घेण्यात आला. ती रक्कम कोठून कशी घेतले, कोणाच्या हवाली केली याबद्दल जबाब नोंदवून घेण्यात आला. वसुलीबद्दल गृहमंत्री, आयुक्तांनी काय काय सूचना दिल्या होत्या याबाबत सायंकाळी चार वाजेपर्यंत चौकशी सुरू होती. त्यानंतर पथक कारागृहाबाहेर आले.आज पुन्हा त्याच्याकडे चौकशी केली जाणार आहे.*

*👉परमबीर सिंगांबद्दलही विचारणा*

*ईडीच्या अधिकाऱ्यांकडून वाझेकडे तत्कालीन आयुक्त परमबीर सिंग यांच्याबद्दल विचारणा करण्यात आली. पैसे वसुलीला त्यांची संमती होती का, त्यांच्यासाठी वसुली केली होती, त्यांच्या कामाची पद्धती कशी होती, याबद्दल ईडीच्या अधिकाऱ्यांनी विचारणा केल्याचे समजते.*

मारुतराव वणवे भाजपच्या प्रदेश कार्यकारिणीवर निमंत्रित सदस्यपदी*

*मारुतराव वणवे भाजपच्या प्रदेश कार्यकारिणीवर निमंत्रित सदस्यपदी*
*मारुतराव वनवे यांचा हर्षवर्धन पाटील यांच्या हस्ते सत्कार*
भाजपचे भिगवण येथील ज्येष्ठ कार्यकर्ते मारुतराव वणवे यांची भाजपचे प्रदेशाध्यक्ष चंद्रकांत पाटील यांनी पक्षाच्या प्रदेश कार्यकारिणीवर निमंत्रित सदस्य म्हणून नियुक्ती केली आहे. माजी मंत्री व भाजपनेते हर्षवर्धन पाटील यांच्या हस्ते शनिवारी (दि.१०) येथील एका कार्यक्रमात हे नियुक्तीपत्र वणवे यांच्याकडे सुपूर्द करून त्यांचा सन्मान केला तसेच त्यांचे अभिनंदन केले.
मारुतराव वणवे यांचे इंदापूर तालुका व पुणे जिल्ह्यात भाजपच्या वाढीसाठीचे योगदान व सक्रियता पाहून पक्षाने त्यांना कार्यकारिणीवर काम करण्याची संधी दिली आहे.हर्षवर्धन पाटील यांनी त्यासाठी पक्षश्रेष्ठींकडे सातत्याने पाठपुरावा केला होता.
या नियुक्तीबद्दल वणवे यांनी प्रदेशाध्यक्ष चंद्रकांत पाटील,माजी मुख्यमंत्री व विधानसभेतील विरोधी पक्षनेते देवेंद्र फडणवीस, माजी मंत्री पंकजा मुंडे यांचे आभार मानले आहेत.पक्षश्रेष्ठींनी दिलेल्या या संधीचे सोने करू, पक्षवाढीसाठी अथक परिश्रम घेऊ असे वणवे यांनी सांगितले.
यावेळी संदीप खुटाळे, बाळासाहेब भांडवलकर नगरपालिका गटनेते कैलास कदम व कार्यकर्ते उपस्थित होते.

आमचे मित्र मा.श्री हनुमंत हरी गिरी यांची रयत क्रांती संघटना मोहोळ तालुका कार्यअध्यक्ष पदी निवड झाल्या बद्दल खुप खुप अभिनंदन

मा.श्री हनुमंत हरी गिरी यांची रयत क्रांती संघटना मोहोळ तालुका कार्यअध्यक्ष पदी निवड झाल्या बद्दल हार्दीक अभिनंदन
शुभेच्छुक :- रामवर्मा आसबे
संपादक:- नमोन्युजनेशन परिवार
सहसंपादक:- शिव-कल्यान न्युजनेटवर्क

देशात समान नागरी कायदा आवश्यक, केंद्रानं पावलं उचलावीत”; मे.न्यायालयानं दिले निर्देश!

“देशात समान नागरी कायदा आवश्यक, केंद्रानं पावलं उचलावीत”;
मे.न्यायालयानं दिले निर्देश!

भारतामध्ये वेगवेगळ्या जाती-धर्माचे लोक एकत्र राहत असल्यामुळे इथे समान नागरी कायदा असण्याची गरज अनेकदा व्यक्त करण्यात आली आहे.
मात्र, त्यावर ठोस निर्णय किंवा त्या दिशेने ठोस प्रयत्न होताना दिसले नाहीत.
आता थेट मे.दिल्ली उच्च न्यायालयाने देशात समान नागरी कायद्याची गरज व्यक्त केली आहे.
यासंदर्भातल्या एका याचिकेच्या सुनावणीदरम्यान मे.न्यायालयानं हे मत व्यक्त केलं आहे.
तसेच, या संदर्भात मे.न्यायालयानं केंद्र सरकारला आवश्यक ती पावलं उचलण्याचे निर्देश देखील दिले आहेत.
त्यामुळे अनेक प्रकरणांमध्ये त्या त्या धर्माचे किंवा समुदायासाठी केलेले कायदे न्यायदान प्रक्रियेमध्ये अडथळा ठरू शकणार नाहीत आणि सर्व भारतीयांना एका समान कायद्याच्या आधारे न्याय देता येईल,
असं देखील मत मे.न्यायालयाने यावेळी नमूद केलं.
…म्हणून समान नागरी कायद्याचं महत्त्व भारतात हिंदू विवाह कायदा, हिंदू वारसाहक्क कायदा, भारतीय ख्रिश्चन विवाह कायदा, भारतीय घटस्फोट कायदा पारशी विवाह आणि घटस्फोट कायदा असे अनेक कायदे आहेत.
याशिवाय, मुस्लीम समाजामधल्या या चालीरितींसाठीचे बहुतांश नियम घटनात्मक कायदे स्वरूपात नसून ते त्यांच्या धर्मग्रंथांमध्येच नमूद करण्यात आले आहेत.
त्यामुळे अशा प्रकरणांमध्ये न्यायदान प्रक्रिया क्लिष्ट ठरते.
विशेषत: वेगवेगळ्या धर्मांच्या व्यक्ती जेव्हा विवाह किंवा घटस्फोटासारख्या प्रकरणांमध्ये गुंतलेल्या असतात,
तेव्हा त्यांना कोणत्या कायद्याप्रमाणे न्यायदान करावं,
असा प्रश्न देखील उपस्थित होतो.
या पार्श्वभूमीवर समान नागरी कायदा आल्यास या सर्व गोष्टींसाठीचे समान नियम सर्व धर्मीयांना लागू करता येऊ शकतील,
अशी भूमिका आजवर अनेकदा मांडण्यात आली आहे.

देशात समान नागरी कायदा आवश्यक, केंद्रानं पावलं उचलावीत”; मे.न्यायालयानं दिले निर्देश!

“देशात समान नागरी कायदा आवश्यक, केंद्रानं पावलं उचलावीत”;
मे.न्यायालयानं दिले निर्देश!

भारतामध्ये वेगवेगळ्या जाती-धर्माचे लोक एकत्र राहत असल्यामुळे इथे समान नागरी कायदा असण्याची गरज अनेकदा व्यक्त करण्यात आली आहे.
मात्र, त्यावर ठोस निर्णय किंवा त्या दिशेने ठोस प्रयत्न होताना दिसले नाहीत.
आता थेट मे.दिल्ली उच्च न्यायालयाने देशात समान नागरी कायद्याची गरज व्यक्त केली आहे.
यासंदर्भातल्या एका याचिकेच्या सुनावणीदरम्यान मे.न्यायालयानं हे मत व्यक्त केलं आहे.
तसेच, या संदर्भात मे.न्यायालयानं केंद्र सरकारला आवश्यक ती पावलं उचलण्याचे निर्देश देखील दिले आहेत.
त्यामुळे अनेक प्रकरणांमध्ये त्या त्या धर्माचे किंवा समुदायासाठी केलेले कायदे न्यायदान प्रक्रियेमध्ये अडथळा ठरू शकणार नाहीत आणि सर्व भारतीयांना एका समान कायद्याच्या आधारे न्याय देता येईल,
असं देखील मत मे.न्यायालयाने यावेळी नमूद केलं.
…म्हणून समान नागरी कायद्याचं महत्त्व भारतात हिंदू विवाह कायदा, हिंदू वारसाहक्क कायदा, भारतीय ख्रिश्चन विवाह कायदा, भारतीय घटस्फोट कायदा पारशी विवाह आणि घटस्फोट कायदा असे अनेक कायदे आहेत.
याशिवाय, मुस्लीम समाजामधल्या या चालीरितींसाठीचे बहुतांश नियम घटनात्मक कायदे स्वरूपात नसून ते त्यांच्या धर्मग्रंथांमध्येच नमूद करण्यात आले आहेत.
त्यामुळे अशा प्रकरणांमध्ये न्यायदान प्रक्रिया क्लिष्ट ठरते.
विशेषत: वेगवेगळ्या धर्मांच्या व्यक्ती जेव्हा विवाह किंवा घटस्फोटासारख्या प्रकरणांमध्ये गुंतलेल्या असतात,
तेव्हा त्यांना कोणत्या कायद्याप्रमाणे न्यायदान करावं,
असा प्रश्न देखील उपस्थित होतो.
या पार्श्वभूमीवर समान नागरी कायदा आल्यास या सर्व गोष्टींसाठीचे समान नियम सर्व धर्मीयांना लागू करता येऊ शकतील,
अशी भूमिका आजवर अनेकदा मांडण्यात आली आहे.

कोरोनाच्या पार्श्वभूमीवर जिल्हा परिषद व पंचायत समित्यांच्या पोटनिवडणुका स्थगित

कोरोनाच्या पार्श्वभूमीवर जिल्हा परिषद व पंचायत समित्यांच्या पोटनिवडणुका स्थगित*

*मुंबई :-धुळे, नंदुरबार, अकोला, वाशीम व नागपूर या पाच जिल्हा परिषदा तसेच त्यांतर्गतच्या 33 पंचायत समित्यांमधील रिक्त झालेल्या पदांच्या पोटनिवडणुका जुलैला घेण्यात येणार होत्या. परंतु कोरोनाची संभाव्य तिसरी लाट आणि डेल्टा प्लसचा वाढता प्रादुर्भाव लक्षात घेता पंचायत समित्यांमधील रिक्तपदांच्या पोटनिवडणुकांची प्रक्रिया आहे त्या टप्प्यावर स्थगित करण्यात आली आहे. ही घोषणा निवडणूक आयुक्त यू. पी. एस. मदान यांनी शुक्रवारी येथे केली.*

*👉मदान यांनी सांगितले की, धुळे, नंदुरबार, अकोला, वाशीम आणि नागपूर या 5 जिल्हा परिषदांमधील 70 निवडणूक विभाग आणि 33 पंचायत समित्यांमधील 130 निर्वाचक गणांमधील पोटनिवडणुकांसाठी 19 जुलै 2021 ला मतदान होणार होते.परंतु 7 जुलैला राज्य शासनाने कोविड-19 च्या पार्श्वभूमीवर या पोटनिवडणुका स्थगित करण्याची विनंती राज्य निवडणूक आयोगाला केली होती.*

*👉सर्वोच्च न्यायालयाचे 6 जुलैचे आदेश आणि राज्य शासनाची विनंती लक्षात घेऊन राज्य निवडणूक आयोगाने राज्य शासनाकडून कोविड-19 बाबत अधिकची माहिती आणि जिल्हाधिकाऱ्यांकडून सविस्तर अहवाल मागविले होते. त्या आधारे आयोगाने या निवडणुका आज आहे त्या टप्प्यावर स्थगित केल्या. त्यामुळे या पोटनिवडणुकांसाठी लागू असलेली आचारसंहितादेखील आजपासून शिथिल करण्यात आली आहे. कोविड-19 ची परिस्थिती सुधारल्यावर या पोटनिवडणुकांचे उर्वरित टप्पे पार पाडण्यासंदर्भात राज्य निवडणूक आयोगातर्फे घोषणा करण्यात येईल, असे मदान यांनी सांगितले.*

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