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आज का हिन्दू पंचांग  दिनांक – 19 अप्रैल 2023दिन – बुधवार

आज का हिन्दू पंचांग
दिनांक – 19 अप्रैल 2023दिन – बुधवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – उत्तरायण*
*⛅ऋतु – वसंत*
*⛅मास – वैशाख (गुजरात, महाराष्ट्र में चैत्र)*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – चतुर्दशी सुबह 11:23 तक तत्पश्चात अमावस्या*
*⛅नक्षत्र – रेवती रात्रि 11:53 तक तत्पश्चात अश्विनी*
*⛅योग – वैधृति दोपहर 03:26 तक तत्पश्चात विष्कम्भ*
*⛅राहु काल – दोपहर 12:39 से 02:15 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:16*
*⛅सूर्यास्त – 07:02*
*⛅दिशा शूल – उत्तर दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:46 से 05:31 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:16 से 01:01 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – दर्श अमावस्या*
*⛅विशेष – चतुर्दशी एवं अमावस्या के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🔹अमावस्या – 20 अप्रैल 2023🔹*

*🔸19 अप्रैल सुबह 11:23 से 20 अप्रैल सुबह 09:41 तक ।*

*🔹अमावस्या विशेष🔹*

*🌹1. जो व्यक्ति अमावस्या को दूसरे का अन्न खाता है उसका महीने भर का किया हुआ पुण्य दूसरे को (अन्नदाता को) मिल जाता है ।*
*(स्कंद पुराण, प्रभास खं. 207.11.13)*

*🌹2. अमावस्या के दिन पेड़-पौधों से फूल-पत्ते, तिनके आदि नहीं तोड़ने चाहिए, इससे ब्रह्महत्या का पाप लगता है ! (विष्णु पुराण)*

*🌹4. अमावस्या के दिन खेती का काम न करें, न मजदूर से करवाएं ।*

*🌹5. अमावस्या के दिन श्रीमद्भगवद्गीता का सातवाँ अध्याय पढ़ें और उस पाठ का पुण्य अपने पितरों को अर्पण करें । सूर्य को अर्घ्य दें और प्रार्थना करें । आज जो मैंने पाठ किया मेरे घर में जो गुजर गए हैं, उनको उसका पुण्य मिल जाए । इससे उनका आर्शीवाद हमें मिलेगा और घर में सुख-सम्पत्ति बढ़ेगी ।*

*🔹गरीबी भगाने का शास्त्रीय उपाय🔹*

*🌹गरीबी है, बरकत नहीं है, बेरोजगारी ने गला घोंटा है तो फिक्र न करो । हर अमावस्या को घर में एक छोटा सा आहुति प्रयोग करें ।*

*🔹सामग्री : १. काले तिल २. जौ ३. चावल ४. गाय का घी ५. चंदन पाउडर ६. गूगल ७. गुड़ ८. देशी कपूर एवं गौ चंदन या कण्डा ।*

*🌹विधि: गौ चंदन या कण्डे को किसी बर्तन में डालकर हवन कुण्ड बना लें, फिर उपरोक्त ८ वस्तुओं के मिश्रण से तैयार सामग्री से, घर के सभी सदस्य एकत्रित होकर नीचे दिये गये मंत्रों से ५ आहुति दें ।*
*आहुति मंत्र*
*🌹 १. ॐ कुल देवताभ्यो नमः*
*🌹 २. ॐ ग्राम देवताभ्यो नमः*
*🌹 ३. ॐ ग्रह देवताभ्यो नमः*
*🌹 ४. ॐ लक्ष्मीपति देवताभ्यो नमः*
*🌹 ५. ॐ विघ्नविनाशक देवताभ्यो नमः*

*🌹इस प्रयोग से थोड़े ही दिनों में स्वास्थ्य, समृद्धि और मन की प्रसन्नता दिखायी देगी ।*

*🌞सूर्य ग्रहण – अप्रैल 20, 2023🌞*

*🔹पंचांग के अनुसार सूर्य ग्रहण का समय सुबह ७ बजकर ४ मिनट से १२ बजकर २९ मिनट तक है यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा । इसलिए इस ग्रहण का सूतक काल नहीं माना जाएगा ।*

*🔹अप्रैल 20, 2023 को संकरित सूर्य ग्रहण दर्शनीय होगा । यह सूर्य ग्रहण संकरित है इसीलिये है क्योंकि पृथ्वी के कुछ हिस्सों में पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देगा जबकि कुछ हिस्सों में वलयाकार सूर्य ग्रहण दिखाई देगा ।*

*🔹पूर्ण सूर्य ग्रहण ऑस्ट्रेलिया के कुछ पश्चिमी भागों, पापुआ न्यू गिनी के उत्तर-पश्चिमी भागों, तिमोर-लेस्ते के उत्तर-पूर्वी भागों, हिन्द महासागर और उत्तरी प्रशान्त महासागर के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। पूर्वी तिमोर में लोस्पालोस उन कुछ स्थानों में से एक है जहाँ पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देगा ।*

*🔸वलयाकार सूर्य ग्रहण उत्तरी प्रशान्त महासागर के कुछ हिस्सों से दिखाई देगा ।*

*🔹आंशिक सूर्य ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैण्ड, थाईलैण्ड, फिलिपींस, इण्डोनेशिया, प्रशान्त महासागर हिन्द महासागर, अन्टार्कटिका के कुछ भागों से और दक्षिण-पूर्व एशिया से दिखाई देगा ।*

*🔹यह ग्रहण भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, अफगानिस्तान, फिजी, मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य एशियाई देशों से दिखाई नहीं देगा । साथ ही यह ग्रहण अटलान्टिक महासागर, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका महाद्वीप से भी दिखाई नहीं देगा ।*

*🌞🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

आज का हिन्दू पंचांग  दिनांक – 19 अप्रैल 2023दिन – बुधवार

आज का हिन्दू पंचांग
दिनांक – 19 अप्रैल 2023दिन – बुधवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – उत्तरायण*
*⛅ऋतु – वसंत*
*⛅मास – वैशाख (गुजरात, महाराष्ट्र में चैत्र)*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – चतुर्दशी सुबह 11:23 तक तत्पश्चात अमावस्या*
*⛅नक्षत्र – रेवती रात्रि 11:53 तक तत्पश्चात अश्विनी*
*⛅योग – वैधृति दोपहर 03:26 तक तत्पश्चात विष्कम्भ*
*⛅राहु काल – दोपहर 12:39 से 02:15 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:16*
*⛅सूर्यास्त – 07:02*
*⛅दिशा शूल – उत्तर दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:46 से 05:31 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:16 से 01:01 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – दर्श अमावस्या*
*⛅विशेष – चतुर्दशी एवं अमावस्या के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🔹अमावस्या – 20 अप्रैल 2023🔹*

*🔸19 अप्रैल सुबह 11:23 से 20 अप्रैल सुबह 09:41 तक ।*

*🔹अमावस्या विशेष🔹*

*🌹1. जो व्यक्ति अमावस्या को दूसरे का अन्न खाता है उसका महीने भर का किया हुआ पुण्य दूसरे को (अन्नदाता को) मिल जाता है ।*
*(स्कंद पुराण, प्रभास खं. 207.11.13)*

*🌹2. अमावस्या के दिन पेड़-पौधों से फूल-पत्ते, तिनके आदि नहीं तोड़ने चाहिए, इससे ब्रह्महत्या का पाप लगता है ! (विष्णु पुराण)*

*🌹4. अमावस्या के दिन खेती का काम न करें, न मजदूर से करवाएं ।*

*🌹5. अमावस्या के दिन श्रीमद्भगवद्गीता का सातवाँ अध्याय पढ़ें और उस पाठ का पुण्य अपने पितरों को अर्पण करें । सूर्य को अर्घ्य दें और प्रार्थना करें । आज जो मैंने पाठ किया मेरे घर में जो गुजर गए हैं, उनको उसका पुण्य मिल जाए । इससे उनका आर्शीवाद हमें मिलेगा और घर में सुख-सम्पत्ति बढ़ेगी ।*

*🔹गरीबी भगाने का शास्त्रीय उपाय🔹*

*🌹गरीबी है, बरकत नहीं है, बेरोजगारी ने गला घोंटा है तो फिक्र न करो । हर अमावस्या को घर में एक छोटा सा आहुति प्रयोग करें ।*

*🔹सामग्री : १. काले तिल २. जौ ३. चावल ४. गाय का घी ५. चंदन पाउडर ६. गूगल ७. गुड़ ८. देशी कपूर एवं गौ चंदन या कण्डा ।*

*🌹विधि: गौ चंदन या कण्डे को किसी बर्तन में डालकर हवन कुण्ड बना लें, फिर उपरोक्त ८ वस्तुओं के मिश्रण से तैयार सामग्री से, घर के सभी सदस्य एकत्रित होकर नीचे दिये गये मंत्रों से ५ आहुति दें ।*
*आहुति मंत्र*
*🌹 १. ॐ कुल देवताभ्यो नमः*
*🌹 २. ॐ ग्राम देवताभ्यो नमः*
*🌹 ३. ॐ ग्रह देवताभ्यो नमः*
*🌹 ४. ॐ लक्ष्मीपति देवताभ्यो नमः*
*🌹 ५. ॐ विघ्नविनाशक देवताभ्यो नमः*

*🌹इस प्रयोग से थोड़े ही दिनों में स्वास्थ्य, समृद्धि और मन की प्रसन्नता दिखायी देगी ।*

*🌞सूर्य ग्रहण – अप्रैल 20, 2023🌞*

*🔹पंचांग के अनुसार सूर्य ग्रहण का समय सुबह ७ बजकर ४ मिनट से १२ बजकर २९ मिनट तक है यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा । इसलिए इस ग्रहण का सूतक काल नहीं माना जाएगा ।*

*🔹अप्रैल 20, 2023 को संकरित सूर्य ग्रहण दर्शनीय होगा । यह सूर्य ग्रहण संकरित है इसीलिये है क्योंकि पृथ्वी के कुछ हिस्सों में पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देगा जबकि कुछ हिस्सों में वलयाकार सूर्य ग्रहण दिखाई देगा ।*

*🔹पूर्ण सूर्य ग्रहण ऑस्ट्रेलिया के कुछ पश्चिमी भागों, पापुआ न्यू गिनी के उत्तर-पश्चिमी भागों, तिमोर-लेस्ते के उत्तर-पूर्वी भागों, हिन्द महासागर और उत्तरी प्रशान्त महासागर के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। पूर्वी तिमोर में लोस्पालोस उन कुछ स्थानों में से एक है जहाँ पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देगा ।*

*🔸वलयाकार सूर्य ग्रहण उत्तरी प्रशान्त महासागर के कुछ हिस्सों से दिखाई देगा ।*

*🔹आंशिक सूर्य ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैण्ड, थाईलैण्ड, फिलिपींस, इण्डोनेशिया, प्रशान्त महासागर हिन्द महासागर, अन्टार्कटिका के कुछ भागों से और दक्षिण-पूर्व एशिया से दिखाई देगा ।*

*🔹यह ग्रहण भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, अफगानिस्तान, फिजी, मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य एशियाई देशों से दिखाई नहीं देगा । साथ ही यह ग्रहण अटलान्टिक महासागर, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका महाद्वीप से भी दिखाई नहीं देगा ।*

*🌞🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

आज का हिन्दू पंचांग  दिनांक – 18 अप्रैल 2023दिन – मंगलवार

आज का हिन्दू पंचांग
दिनांक – 18 अप्रैल 2023दिन – मंगलवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – उत्तरायण*
*⛅ऋतु – वसंत*
*⛅मास – वैशाख (गुजरात, महाराष्ट्र में चैत्र)*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – त्रयोदशी दोपहर 01:27 तक तत्पश्चात चतुर्दशी*
*⛅नक्षत्र – उत्तर भाद्रपद रात्रि 01:01 तक तत्पश्चात रेवती*
*⛅योग – इन्द्र शाम 06:10 तक तत्पश्चात वैधृति*
*⛅राहु काल – शाम 03:50 से 05:26 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:17*
*⛅सूर्यास्त – 07:01*
*⛅दिशा शूल – उत्तर दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:47 से 05:32 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:16 से 01:02 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – मासिक शिवरात्रि*
*⛅विशेष – त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
*चतुर्दशी के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🌹 मासिक शिवरात्रि : 18 अप्रैल 2023*🌹

*🌹कर्ज मुक्ति हेतु -*

*🌹 हर मासिक शिवरात्रि को सूर्यास्त के समय घर में बैठकर अपने गुरुदेव का स्मरण करके शिवजी का स्मरण करते-करते ये 17 मंत्र बोलें ! जिनके सिर पर कर्जा ज्यादा हो वो शिवजी के मंदिर में जाकर दिया जलाकर ये 17 मंत्र बोलें ! इससे कर्जे से मुक्ति मिलेगी ।*

🌹1) *ॐ शिवाय नमः*
🌹2) *ॐ सर्वात्मने नमः*
🌹3) *ॐ त्रिनेत्राय नमः*
🌹4) *ॐ हराय नमः*
🌹5) *ॐ इन्द्रमुखाय नमः*
🌹6) *ॐ श्रीकंठाय नमः*
🌹7) *ॐ सद्योजाताय नमः*
🌹8) *ॐ वामदेवाय नमः*
🌹9) *ॐ अघोरहृदयाय नम:*
🌹10) *ॐ तत्पुरुषाय नमः*
🌹11) *ॐ ईशानाय नमः*
🌹12) *ॐ अनंतधर्माय नमः*
🌹13) *ॐ ज्ञानभूताय नमः*
🌹14) *ॐ अनंतवैराग्यसिंघाय नमः*
🌹15) *ॐ प्रधानाय नमः*
🌹16) *ॐ व्योमात्मने नमः*
🌹17) *ॐ व्यूक्तकेशात्मरूपाय नम:*

*🔹अमावस्या – 20 अप्रैल 2023🔹*

*🔸19 अप्रैल सुबह 11:23 से 20 अप्रैल सुबह 09:41 तक ।*

*🔹नकारात्मक ऊर्जा मिटाने के लिए🔹*

*🔹घर में हर अमावस्या अथवा हर १५ दिन में पानी में खड़ा नमक (१ लीटर पानी में ५० ग्राम खड़ा नमक) डालकर पोछा लगायें । इससे नेगेटिव एनर्जी चली जाएगी । अथवा खड़ा नमक के स्थान पर गौझरण अर्क भी डाल सकते हैं ।*

*🔹नारियल पानी के लाभकारी प्रयोग🔹*

*🔹 मूत्र त्यागते समय जलन होने पर नारियल के पानी में गुड़ और हरा धनिया मिलाकर रोगी को पिलाने से राहत मिलती है ।*

*🔹 नारियल पानी यकृत की अनेक बीमारियों में लाभदायक है । उल्टी, हैजा, पेचिश, एसिडिटी, अल्सर, आदि में यह हितकर है I थकान तथा नाड़ी की तमाम गड़बड़ियाँ नारियल पानी से दूर हो जाती हैं ।*

*🔹 जिनकी दिल की धड़कन बढ़ जाती हो उन्हें हरे नारियल का पानी पीना चाहिए । शिशु के शरीर में जलीय अंश की कमी हो जाने पर उसे दूर करने के लिए यह एक आदर्श पेय है । महिलाओं के रक्तप्रदर में भी यह लाभदायक है ।*

*🔹 कच्चे नारियल का पानी चहरे पर मलने से चहरे के दाग-धब्बे व मुंहासों के निशान मिट जाते हैं और चेहरा सुन्दर हो जाता है I*

*🌞🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

आज का हिन्दू पंचांग  दिनांक – 18 अप्रैल 2023दिन – मंगलवार

आज का हिन्दू पंचांग
दिनांक – 18 अप्रैल 2023दिन – मंगलवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – उत्तरायण*
*⛅ऋतु – वसंत*
*⛅मास – वैशाख (गुजरात, महाराष्ट्र में चैत्र)*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – त्रयोदशी दोपहर 01:27 तक तत्पश्चात चतुर्दशी*
*⛅नक्षत्र – उत्तर भाद्रपद रात्रि 01:01 तक तत्पश्चात रेवती*
*⛅योग – इन्द्र शाम 06:10 तक तत्पश्चात वैधृति*
*⛅राहु काल – शाम 03:50 से 05:26 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:17*
*⛅सूर्यास्त – 07:01*
*⛅दिशा शूल – उत्तर दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:47 से 05:32 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:16 से 01:02 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – मासिक शिवरात्रि*
*⛅विशेष – त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
*चतुर्दशी के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🌹 मासिक शिवरात्रि : 18 अप्रैल 2023*🌹

*🌹कर्ज मुक्ति हेतु -*

*🌹 हर मासिक शिवरात्रि को सूर्यास्त के समय घर में बैठकर अपने गुरुदेव का स्मरण करके शिवजी का स्मरण करते-करते ये 17 मंत्र बोलें ! जिनके सिर पर कर्जा ज्यादा हो वो शिवजी के मंदिर में जाकर दिया जलाकर ये 17 मंत्र बोलें ! इससे कर्जे से मुक्ति मिलेगी ।*

🌹1) *ॐ शिवाय नमः*
🌹2) *ॐ सर्वात्मने नमः*
🌹3) *ॐ त्रिनेत्राय नमः*
🌹4) *ॐ हराय नमः*
🌹5) *ॐ इन्द्रमुखाय नमः*
🌹6) *ॐ श्रीकंठाय नमः*
🌹7) *ॐ सद्योजाताय नमः*
🌹8) *ॐ वामदेवाय नमः*
🌹9) *ॐ अघोरहृदयाय नम:*
🌹10) *ॐ तत्पुरुषाय नमः*
🌹11) *ॐ ईशानाय नमः*
🌹12) *ॐ अनंतधर्माय नमः*
🌹13) *ॐ ज्ञानभूताय नमः*
🌹14) *ॐ अनंतवैराग्यसिंघाय नमः*
🌹15) *ॐ प्रधानाय नमः*
🌹16) *ॐ व्योमात्मने नमः*
🌹17) *ॐ व्यूक्तकेशात्मरूपाय नम:*

*🔹अमावस्या – 20 अप्रैल 2023🔹*

*🔸19 अप्रैल सुबह 11:23 से 20 अप्रैल सुबह 09:41 तक ।*

*🔹नकारात्मक ऊर्जा मिटाने के लिए🔹*

*🔹घर में हर अमावस्या अथवा हर १५ दिन में पानी में खड़ा नमक (१ लीटर पानी में ५० ग्राम खड़ा नमक) डालकर पोछा लगायें । इससे नेगेटिव एनर्जी चली जाएगी । अथवा खड़ा नमक के स्थान पर गौझरण अर्क भी डाल सकते हैं ।*

*🔹नारियल पानी के लाभकारी प्रयोग🔹*

*🔹 मूत्र त्यागते समय जलन होने पर नारियल के पानी में गुड़ और हरा धनिया मिलाकर रोगी को पिलाने से राहत मिलती है ।*

*🔹 नारियल पानी यकृत की अनेक बीमारियों में लाभदायक है । उल्टी, हैजा, पेचिश, एसिडिटी, अल्सर, आदि में यह हितकर है I थकान तथा नाड़ी की तमाम गड़बड़ियाँ नारियल पानी से दूर हो जाती हैं ।*

*🔹 जिनकी दिल की धड़कन बढ़ जाती हो उन्हें हरे नारियल का पानी पीना चाहिए । शिशु के शरीर में जलीय अंश की कमी हो जाने पर उसे दूर करने के लिए यह एक आदर्श पेय है । महिलाओं के रक्तप्रदर में भी यह लाभदायक है ।*

*🔹 कच्चे नारियल का पानी चहरे पर मलने से चहरे के दाग-धब्बे व मुंहासों के निशान मिट जाते हैं और चेहरा सुन्दर हो जाता है I*

*🌞🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 17 अप्रैल 2023 दिन – सोमवार

आज का हिन्दू पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक – 17 अप्रैल 2023*
*⛅दिन – सोमवार*
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – उत्तरायण*
*⛅ऋतु – वसंत*
*⛅मास – वैशाख (गुजरात, महाराष्ट्र में चैत्र)*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – द्वादशी दोपहर 03:46 तक तत्पश्चात त्रयोदशी*
*⛅नक्षत्र – पूर्व भाद्रपद रात्रि 02:28 तक तत्पश्चात उत्तर भाद्रपद*
*⛅योग – ब्रह्म रात्रि 09:07 तक तत्पश्चात इन्द्र*
*⛅राहु काल – सुबह 07:53 से 09:29 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:18*
*⛅सूर्यास्त – 07:01*
*⛅दिशा शूल – पूर्व दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:48 से 05:33 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:16 से 01:02 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – सोमप्रदोष व्रत*
*⛅विशेष – द्वादशी को पूतिका (पोई) एवं त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🔹सोमप्रदोष व्रत – 17 अप्रैल 2023🔹*

*🌹 जिस दिन त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल के समय व्याप्त होती है उसी दिन प्रदोष का व्रत किया जाता है । प्रदोष काल सूर्यास्त से प्रारम्भ हो जाता है । जब त्रयोदशी तिथि और प्रदोष साथ-साथ होते हैं, वह समय शिव पूजा व गुरु पूजा के लिये सर्वश्रेष्ठ होता है ।*

*🔸गर्मियों में बलप्रद व स्वास्थ्यवर्धक आम🔸*

*🔸पका आम बहुत ही पौष्टिक होता है । इसमें प्रोटीन,विटामिन व खनिज पदार्थ, कार्बोहाइड्रेट तथा शर्करा विपुल मात्रा में होते हैं ।*

*🔸आम मीठा, चिकना, शौच साफ़ लानेवाला, तृप्तिदायक, ह्रदय को बलप्रद, वीर्य की शुद्धि तथा वृद्धि करनेवाला है । यह वायु व पित्त नाशक परंतु कफकारक है तथा कांतिवर्धक, रक्त की शुद्धि करनेवाला एवं भूख बढ़ानेवाला है । इसके नियमित सेवन से रोगप्रतिकारक शक्ति बढती है ।*

*🔸शुक्रप्रमेह आदि विकारों के कारण जिनको संतानोत्पत्ति न होती हो, उनके लिए पका आम लाभकारक है । कलमी आम की अपेक्षा देशी आम जल्दी पचनेवाला, त्रिदोषशामक व विशेष गुणयुक्त है । रेशासहित, मीठा, पतली या छोटी गुठलीवाला आम उत्तम माना जाता है । यह आमाशय, यकृत, फेफड़ों के रोग तथा अल्सर, रक्ताल्पता आदि में लाभ पहुँचाता है । इसके सेवन से रक्त,मांस आदि सप्तधातुओं तथा वासा की वृद्धि और हड्डियों का पोषण होता है । यूनानी डॉक्टरों के मतानुसार पका आम आलस्य दूर करता है, मूत्र साफ़ लाता है, क्षयरोग (टी.बी.)मिटाता है तथा गुर्दें व मूत्राशय के लिए शक्तिदायक है ।*

*🔸औषधि-प्रयोग🔸*

*🔸भूखवृद्धि : आम के रस में घी और सौंठ डालकर सेवन करने से जठराग्नि प्रदीप्त होता है । वायु रोग या पाचनतंत्र की दुर्बलता : आम के रस में अदरक मिलाकर लेना हितकारी है ।*

*🔸शहद के साथ पके आम के सेवन से प्लीहा, वायु और कफ के दोष तथा क्षयरोग दूर होता है ।*

*🔸 आम का पना : केरी (कच्चा आम ) को पानी में उबालें अथवा गोबर के कंडे की आग में दबा दें । भुन जाने पर छिलका उतार दें और गूदा मथकर उसमें गुड, जीरा, धनिया, काली मिर्च तथा नमक मिलाकर दोबारा मथें । आवश्यकता अनुसार पानी मिलायें और पियें ।*

*🔸लू लगने पर : उपरोक्त आम का पना एक-एक कप दिन में २ – ३ बार पियें ।*

*🔸भुने हुए कच्चे आम के गूदेको पैरों के तलवों पर लगाने से भी लू से राहत मिलती है ।*

*🔸वजन बढ़ाने के लिए : पके और मीठे आम नियमित रूप से खाने से दुबले – पतले व्यक्ति का वजन बढ़ सकता है ।*

*🔸दस्त में रक्त आने पर : छाछ में आम की गुठली का २ से ३ ग्राम चूर्ण मिलाकर पीने से लाभ होता है ।*

*🔸पेट के कीड़े : सुबह चौथाई चम्मच आम की गुठलियों का चूर्ण गर्म पानी के साथ लेने से पेट के कीड़े मर जाते है ।*

*🔸प्रदर रोग : आम की गुठली का २ से ३ ग्राम चूर्ण शहद के साथ चाटने से रक्त-प्रदर में लाभ होता है ।*

*🔸दाँतों के रोग : आम के पत्तों को खूब चबा-चबाकर थूकते रहने से कुछ ही दोनों में दाँतों का हिलना और मसूड़ों से खून आना बंद हो जाता है । आम की गुठली की गिरी के महीन चूर्ण का मंजन करने से पायरिया ठीक होता है ।*

*🔸घमौरियाँ : आम की गुठली के चूर्ण से स्नान करने से घमौरियाँ दूर होती है ।*

*🔸पुष्ट और सुडौल शरीर : यदि एक वक्त के आहार में सुबह या शाम केवल आम चूसकर जरा-सा अदरक लें तथा डेढ -दो घंटे के बाद दूध पियें तो ४० दिन में शरीर पुष्ट व सुडौल हो जाता । आम और दूध एक साथ खाना आयुर्वेद की दृष्टि से विरुद्ध आहार है । इससे आगे चलकर चमड़ी के रोग होते हैं ।*

*🔸सावधानी : खाने के पहले आम को पानी में रखना चाहिए । इससे उसकी गर्मी निकल जाती है । भूखे पेट आम नहीं खाना चाहिए । अधिक आम खाने से गैस बनती है और पेट के विकार पैदा होते हैं । कच्चा, खट्टा तथा अति पका हुआ आम खाने से लाभ के बजाय हानि हो सकती है । कच्चे आम के सीधे सेवन से कब्ज व मंदाग्नि हो सकती है ।*

*🔸बाजार में बिकनेवाला डिब्बाबंद आम का रस स्वास्थ्य के लिए हितकारी नहीं होता है । लम्बे समय तक रखा हुआ बासी रस वायुकारक, पचने में भारी एवं ह्रदय के लिए अहितकर है ।*

 

*🔹कार्यों में सफलता-प्राप्ति हेतु🔹*

*🔹जो व्यक्ति बार-बार प्रयत्नों के बावजूद सफलता प्राप्त न कर पा रहा हो अथवा सफलता-प्राप्ति के प्रति पूर्णतया निराश हो चुका हो, उसे प्रत्येक सोमवार को पीपल वृक्ष के नीचे सायंकाल के समय एक दीपक जला के उस वृक्ष की ५ परिक्रमा करनी चाहिए । इस प्रयोग को कुछ ही दिनों तक सम्पन्न करनेवाले को उसके कार्यों में धीरे-धीरे सफलता प्राप्त होने लगती है ।*

*🌞🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 17 अप्रैल 2023 दिन – सोमवार

आज का हिन्दू पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक – 17 अप्रैल 2023*
*⛅दिन – सोमवार*
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – उत्तरायण*
*⛅ऋतु – वसंत*
*⛅मास – वैशाख (गुजरात, महाराष्ट्र में चैत्र)*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – द्वादशी दोपहर 03:46 तक तत्पश्चात त्रयोदशी*
*⛅नक्षत्र – पूर्व भाद्रपद रात्रि 02:28 तक तत्पश्चात उत्तर भाद्रपद*
*⛅योग – ब्रह्म रात्रि 09:07 तक तत्पश्चात इन्द्र*
*⛅राहु काल – सुबह 07:53 से 09:29 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:18*
*⛅सूर्यास्त – 07:01*
*⛅दिशा शूल – पूर्व दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:48 से 05:33 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:16 से 01:02 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – सोमप्रदोष व्रत*
*⛅विशेष – द्वादशी को पूतिका (पोई) एवं त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🔹सोमप्रदोष व्रत – 17 अप्रैल 2023🔹*

*🌹 जिस दिन त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल के समय व्याप्त होती है उसी दिन प्रदोष का व्रत किया जाता है । प्रदोष काल सूर्यास्त से प्रारम्भ हो जाता है । जब त्रयोदशी तिथि और प्रदोष साथ-साथ होते हैं, वह समय शिव पूजा व गुरु पूजा के लिये सर्वश्रेष्ठ होता है ।*

*🔸गर्मियों में बलप्रद व स्वास्थ्यवर्धक आम🔸*

*🔸पका आम बहुत ही पौष्टिक होता है । इसमें प्रोटीन,विटामिन व खनिज पदार्थ, कार्बोहाइड्रेट तथा शर्करा विपुल मात्रा में होते हैं ।*

*🔸आम मीठा, चिकना, शौच साफ़ लानेवाला, तृप्तिदायक, ह्रदय को बलप्रद, वीर्य की शुद्धि तथा वृद्धि करनेवाला है । यह वायु व पित्त नाशक परंतु कफकारक है तथा कांतिवर्धक, रक्त की शुद्धि करनेवाला एवं भूख बढ़ानेवाला है । इसके नियमित सेवन से रोगप्रतिकारक शक्ति बढती है ।*

*🔸शुक्रप्रमेह आदि विकारों के कारण जिनको संतानोत्पत्ति न होती हो, उनके लिए पका आम लाभकारक है । कलमी आम की अपेक्षा देशी आम जल्दी पचनेवाला, त्रिदोषशामक व विशेष गुणयुक्त है । रेशासहित, मीठा, पतली या छोटी गुठलीवाला आम उत्तम माना जाता है । यह आमाशय, यकृत, फेफड़ों के रोग तथा अल्सर, रक्ताल्पता आदि में लाभ पहुँचाता है । इसके सेवन से रक्त,मांस आदि सप्तधातुओं तथा वासा की वृद्धि और हड्डियों का पोषण होता है । यूनानी डॉक्टरों के मतानुसार पका आम आलस्य दूर करता है, मूत्र साफ़ लाता है, क्षयरोग (टी.बी.)मिटाता है तथा गुर्दें व मूत्राशय के लिए शक्तिदायक है ।*

*🔸औषधि-प्रयोग🔸*

*🔸भूखवृद्धि : आम के रस में घी और सौंठ डालकर सेवन करने से जठराग्नि प्रदीप्त होता है । वायु रोग या पाचनतंत्र की दुर्बलता : आम के रस में अदरक मिलाकर लेना हितकारी है ।*

*🔸शहद के साथ पके आम के सेवन से प्लीहा, वायु और कफ के दोष तथा क्षयरोग दूर होता है ।*

*🔸 आम का पना : केरी (कच्चा आम ) को पानी में उबालें अथवा गोबर के कंडे की आग में दबा दें । भुन जाने पर छिलका उतार दें और गूदा मथकर उसमें गुड, जीरा, धनिया, काली मिर्च तथा नमक मिलाकर दोबारा मथें । आवश्यकता अनुसार पानी मिलायें और पियें ।*

*🔸लू लगने पर : उपरोक्त आम का पना एक-एक कप दिन में २ – ३ बार पियें ।*

*🔸भुने हुए कच्चे आम के गूदेको पैरों के तलवों पर लगाने से भी लू से राहत मिलती है ।*

*🔸वजन बढ़ाने के लिए : पके और मीठे आम नियमित रूप से खाने से दुबले – पतले व्यक्ति का वजन बढ़ सकता है ।*

*🔸दस्त में रक्त आने पर : छाछ में आम की गुठली का २ से ३ ग्राम चूर्ण मिलाकर पीने से लाभ होता है ।*

*🔸पेट के कीड़े : सुबह चौथाई चम्मच आम की गुठलियों का चूर्ण गर्म पानी के साथ लेने से पेट के कीड़े मर जाते है ।*

*🔸प्रदर रोग : आम की गुठली का २ से ३ ग्राम चूर्ण शहद के साथ चाटने से रक्त-प्रदर में लाभ होता है ।*

*🔸दाँतों के रोग : आम के पत्तों को खूब चबा-चबाकर थूकते रहने से कुछ ही दोनों में दाँतों का हिलना और मसूड़ों से खून आना बंद हो जाता है । आम की गुठली की गिरी के महीन चूर्ण का मंजन करने से पायरिया ठीक होता है ।*

*🔸घमौरियाँ : आम की गुठली के चूर्ण से स्नान करने से घमौरियाँ दूर होती है ।*

*🔸पुष्ट और सुडौल शरीर : यदि एक वक्त के आहार में सुबह या शाम केवल आम चूसकर जरा-सा अदरक लें तथा डेढ -दो घंटे के बाद दूध पियें तो ४० दिन में शरीर पुष्ट व सुडौल हो जाता । आम और दूध एक साथ खाना आयुर्वेद की दृष्टि से विरुद्ध आहार है । इससे आगे चलकर चमड़ी के रोग होते हैं ।*

*🔸सावधानी : खाने के पहले आम को पानी में रखना चाहिए । इससे उसकी गर्मी निकल जाती है । भूखे पेट आम नहीं खाना चाहिए । अधिक आम खाने से गैस बनती है और पेट के विकार पैदा होते हैं । कच्चा, खट्टा तथा अति पका हुआ आम खाने से लाभ के बजाय हानि हो सकती है । कच्चे आम के सीधे सेवन से कब्ज व मंदाग्नि हो सकती है ।*

*🔸बाजार में बिकनेवाला डिब्बाबंद आम का रस स्वास्थ्य के लिए हितकारी नहीं होता है । लम्बे समय तक रखा हुआ बासी रस वायुकारक, पचने में भारी एवं ह्रदय के लिए अहितकर है ।*

 

*🔹कार्यों में सफलता-प्राप्ति हेतु🔹*

*🔹जो व्यक्ति बार-बार प्रयत्नों के बावजूद सफलता प्राप्त न कर पा रहा हो अथवा सफलता-प्राप्ति के प्रति पूर्णतया निराश हो चुका हो, उसे प्रत्येक सोमवार को पीपल वृक्ष के नीचे सायंकाल के समय एक दीपक जला के उस वृक्ष की ५ परिक्रमा करनी चाहिए । इस प्रयोग को कुछ ही दिनों तक सम्पन्न करनेवाले को उसके कार्यों में धीरे-धीरे सफलता प्राप्त होने लगती है ।*

*🌞🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

१६ एप्रिल मुंबई ते ठाणे’ दरम्यान प्रथम रेल्वे सुरू

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*@ १६ एप्रिल @*
*’मुंबई ते ठाणे’ दरम्यान प्रथम रेल्वे सुरू*
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ऐतिहासिक भारतीय रेल्वेचा आज स्थापना दिन. भारतीय रेल्वे च्या आजपर्यंत च्या ऐतिहासिक प्रवास मध्ये अतुलनीय योगदान देणाऱ्या सर्व आजी माजी कर्मचाऱ्यांना या वर्धापन दिना च्या अगणित हार्दीक शुभेच्छा !

बरोबर १६ एप्रिल १८५३ म्हणजेच आजच्याच दिवशी धावली होती ठाणे बोरीबंदर दरम्यान पहिली रेल्वे. आणि पुढील काळात याच रेल्वेची चाके धावली १८५४ मध्ये कल्याण पर्यत,१८६० मध्ये भुसावळ पर्यत, १८६७ मध्ये नागपुर पर्यंत पुढे मनमाडमार्गे थेट जम्मू पर्यंत. त्यामुळे रेल्वे बरोबर मनमाडचे नाव जोडले गेले ते कायमचेच.जम्मू पर्यंतच्या या मार्गातील मनमाड हे एक महत्वाचे रेल्वे स्थानक. मनमाड रेल्वे स्थानक चे उदघाटन १८६६ साली झाले, तर मनमाड रेल्वे विद्युतीकरण १९६८ साली झाले. लोखंडाला गंज लागू नये म्हणून मनमाडचं वातावरण पोषक त्यामुळे येथे रेल्वेचा कारखाना झाला, तर देशाच्या विविध भागात जाण्यासाठी येथे रेल्वेचे मोठे जाळे विणले गेले.

मनमाड रेल्वे स्थानक जंक्शन झाले, मनमाडला रेल्वे आली आणि मनमाडचं नाव रेल्वेच्या चाकांबरोबर सर्वदूर गेले हजारो हातांना काम मिळाले. आजही मनमाड शहरची अर्थ व्यवस्था ८०% रेल्वे वरच अवलंबून आहे. उत्तर महाराष्ट्र चे प्रवेशद्वार म्हणून ओळखल्या जाणाऱ्या मनमाड हुन भारतात चारही दिशाना जाण्यासाठी प्रवासी रेलवे आहेत. दररोज २५००० पेक्षा जास्त प्रवासी मनमाड रेल्वे स्थानका त येजा करतात. ९ प्रवासी रेल्वे गाड्या मनमाडहुन सुटुन मनमाड ला टर्मिनेट होतात. करोडो रूपयाचे उत्पन्न रेल्वे ला मनमाड स्टेशन दररोज देत आहे. सुमारे १५० प्रवासी नि १०० पेक्षा जास्त मालवाहतूक रेल्वे गाड्या मनमाड रेल्वे स्थानकातुन दररोज धावतात.

मनमाड रेल्वे स्थानकातून काही कोटी चा व्यवहार माल वाहतुकीच्या दळण वळणातुन दररोज होतो आहे. ५ हजार पेक्षा जास्त चाकरमाने या रेल्वे द्वारे रोज उपडाउन करतात. रेल्वे ब्रिज कारखाना व इतर विभाग मिळून काही हजार कामगार येथे काम करतात. सध्या मनमाड रेल्वे स्थानकाचे आधुनिकीकरण करण्याचे कार्य रेल्वे प्रशासन द्वारा युद्ध पातळी वर सुरु असून रेल्वे स्थानका मध्ये प्रवासी सोयी साठी नवीन पादचारी पुल निर्माण करण्यात आला, सरकते जिने सुरु करण्यात आले, लिफ्ट बसवन्यात आली, भव्य नवीन वाहनतळ उभारले गेले आहे, प्रवासी सुरक्षे साठी रेल्वे स्थानकाला संरक्षण भिंत उभारली गेली आहे तसेच संपूर्ण रेल्वे स्थानकात सी सी टीवी कैमरे बसवले आहेत. आगमी काळात नवीन पार्सल कार्यालय, भव्य प्रवेशद्वार, भव्य सर्व सामान्य प्रवासी प्रतीक्षालय, आधुनिक व्यापार संकुल, भव्य विश्रांति गृह, निर्माण प्रस्तावित आहेत. लवकरच मनमाड इंदौर या रेल्वे महामार्गाचे कार्य सुरू होणार आहे, त्यामुळे मनमाची अर्थव्यवस्था शक्तिशाली होईल.

कारण रेल्वे म्हटली की मनमाड, आणि मनमाड म्हटलं की रेल्वे हे नातं अगदी घट्ट झालं आहे अगदी मायलेकरावाणी. भारतीय रेल्वे ला आणि सर्व रेल्वे अधिकारी ,कर्मचारी बंधु भागिनिना, सर्व रेल्वे प्रवासी वर्गाला या रेल्वेच्या वर्धापन (स्थापना) दिनाच्या मनःपूर्वक हार्दीक शुभेच्छा !

*संकलन : मिलिंद पंडित, कल्याण*

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१६ एप्रिल मुंबई ते ठाणे’ दरम्यान प्रथम रेल्वे सुरू

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*@ १६ एप्रिल @*
*’मुंबई ते ठाणे’ दरम्यान प्रथम रेल्वे सुरू*
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ऐतिहासिक भारतीय रेल्वेचा आज स्थापना दिन. भारतीय रेल्वे च्या आजपर्यंत च्या ऐतिहासिक प्रवास मध्ये अतुलनीय योगदान देणाऱ्या सर्व आजी माजी कर्मचाऱ्यांना या वर्धापन दिना च्या अगणित हार्दीक शुभेच्छा !

बरोबर १६ एप्रिल १८५३ म्हणजेच आजच्याच दिवशी धावली होती ठाणे बोरीबंदर दरम्यान पहिली रेल्वे. आणि पुढील काळात याच रेल्वेची चाके धावली १८५४ मध्ये कल्याण पर्यत,१८६० मध्ये भुसावळ पर्यत, १८६७ मध्ये नागपुर पर्यंत पुढे मनमाडमार्गे थेट जम्मू पर्यंत. त्यामुळे रेल्वे बरोबर मनमाडचे नाव जोडले गेले ते कायमचेच.जम्मू पर्यंतच्या या मार्गातील मनमाड हे एक महत्वाचे रेल्वे स्थानक. मनमाड रेल्वे स्थानक चे उदघाटन १८६६ साली झाले, तर मनमाड रेल्वे विद्युतीकरण १९६८ साली झाले. लोखंडाला गंज लागू नये म्हणून मनमाडचं वातावरण पोषक त्यामुळे येथे रेल्वेचा कारखाना झाला, तर देशाच्या विविध भागात जाण्यासाठी येथे रेल्वेचे मोठे जाळे विणले गेले.

मनमाड रेल्वे स्थानक जंक्शन झाले, मनमाडला रेल्वे आली आणि मनमाडचं नाव रेल्वेच्या चाकांबरोबर सर्वदूर गेले हजारो हातांना काम मिळाले. आजही मनमाड शहरची अर्थ व्यवस्था ८०% रेल्वे वरच अवलंबून आहे. उत्तर महाराष्ट्र चे प्रवेशद्वार म्हणून ओळखल्या जाणाऱ्या मनमाड हुन भारतात चारही दिशाना जाण्यासाठी प्रवासी रेलवे आहेत. दररोज २५००० पेक्षा जास्त प्रवासी मनमाड रेल्वे स्थानका त येजा करतात. ९ प्रवासी रेल्वे गाड्या मनमाडहुन सुटुन मनमाड ला टर्मिनेट होतात. करोडो रूपयाचे उत्पन्न रेल्वे ला मनमाड स्टेशन दररोज देत आहे. सुमारे १५० प्रवासी नि १०० पेक्षा जास्त मालवाहतूक रेल्वे गाड्या मनमाड रेल्वे स्थानकातुन दररोज धावतात.

मनमाड रेल्वे स्थानकातून काही कोटी चा व्यवहार माल वाहतुकीच्या दळण वळणातुन दररोज होतो आहे. ५ हजार पेक्षा जास्त चाकरमाने या रेल्वे द्वारे रोज उपडाउन करतात. रेल्वे ब्रिज कारखाना व इतर विभाग मिळून काही हजार कामगार येथे काम करतात. सध्या मनमाड रेल्वे स्थानकाचे आधुनिकीकरण करण्याचे कार्य रेल्वे प्रशासन द्वारा युद्ध पातळी वर सुरु असून रेल्वे स्थानका मध्ये प्रवासी सोयी साठी नवीन पादचारी पुल निर्माण करण्यात आला, सरकते जिने सुरु करण्यात आले, लिफ्ट बसवन्यात आली, भव्य नवीन वाहनतळ उभारले गेले आहे, प्रवासी सुरक्षे साठी रेल्वे स्थानकाला संरक्षण भिंत उभारली गेली आहे तसेच संपूर्ण रेल्वे स्थानकात सी सी टीवी कैमरे बसवले आहेत. आगमी काळात नवीन पार्सल कार्यालय, भव्य प्रवेशद्वार, भव्य सर्व सामान्य प्रवासी प्रतीक्षालय, आधुनिक व्यापार संकुल, भव्य विश्रांति गृह, निर्माण प्रस्तावित आहेत. लवकरच मनमाड इंदौर या रेल्वे महामार्गाचे कार्य सुरू होणार आहे, त्यामुळे मनमाची अर्थव्यवस्था शक्तिशाली होईल.

कारण रेल्वे म्हटली की मनमाड, आणि मनमाड म्हटलं की रेल्वे हे नातं अगदी घट्ट झालं आहे अगदी मायलेकरावाणी. भारतीय रेल्वे ला आणि सर्व रेल्वे अधिकारी ,कर्मचारी बंधु भागिनिना, सर्व रेल्वे प्रवासी वर्गाला या रेल्वेच्या वर्धापन (स्थापना) दिनाच्या मनःपूर्वक हार्दीक शुभेच्छा !

*संकलन : मिलिंद पंडित, कल्याण*

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१६ एप्रिल कलाकार चार्ली चॅप्लिन जन्मदिन

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*❀ १६ एप्रिल ❀*
*कलाकार चार्ली चॅप्लिन जन्मदिन*
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जन्म – १६ एप्रिल १८८९ (लंडन)
स्मृती – २५ डिसेंबर १९७७ (स्वित्झर्लंड)

चार्ली चॅप्लिन यांनी जगभरच्या प्रेक्षकांवर राज्य केलं. जगातल्या कुठल्याही कोपऱ्यातल्या माणसावर तो गारुड करू शकला. भाषेच्या बंधना विना पडद्यावरून तो कुठल्याही प्रेक्षकाशी संवाद साधू शकला. त्यासाठी त्यानं वापरलेली साधनं होती, भरपूर हासू आणि थोडेसे आसू!

एका निराधार बाळाचं पोटच्या मायेनं संगोपन करतो तो. पोत्याची झोळी करून त्यात त्या बाळाला ठेवतो. किटलीच्या नळीने दूध पाजतो. जुनी खुर्ची मध्यभागी फाडून बाळाची ‘पॉटी’ म्हणून वापरात आणतो. मोठय़ा पडद्यावर या सगळ्या गोष्टी घडत असताना धमाल उडत असते. पण तो हे सगळं पोटतिडकीनं करत असतो. त्याच्यातली आई आणि ते बाळ यांची नाळ अदृश्य स्वरूपात जुळलेली असते. खरं तर, तो त्या बाळाचा कुणीही नसतो, पण त्यांच्यातली माया आपणा प्रेक्षकांनाही अस्वस्थ करून जाते.

त्याचा ‘द किड्’ हा चित्रपट आपल्याला भारावून सोडतो. चार्ली चॅप्लिनने त्याच्या चित्रपटांमधून आपल्याला गडाबडा लोळायला लावून हसवलं, पण त्याचबरोबर त्यानं डोळ्यात टचकन् पाणी आणून रडवलंही. विचार करायला लावलं. जागतिक पटलावर एक महानायक म्हणून वावरला! स्वत:तल्या आत्मविश्वासामुळे अनेक वैशिष्टय़पूर्ण युक्त्या तो पडद्यावर साकारू शकला.

पडद्यावरच्या मस्तमौला चार्लीचं आगळंवेगळं रूप होतं, ‘एक टाइट कोट, बॅगी पॅन्ट, छोटी हॅट आणि मोठे शूज, आणि हो, चेहऱ्यावरची त्याची ती छोटीशी मिशी.’ त्याने त्याचं हे रूप समजून उमजूनच ठरवलं होतं. त्याला त्याचं बाह्य़रूप संपूर्णपणे विरोधाभासी हवं होतं. ती छोटीशी मिशी त्याच्या व्यक्तिमत्त्वाला, त्याच्या चेहऱ्यावरचे भाव न लपवता वयातला मोठेपणा, परिपक्वता देऊ शकेल हा त्याचा अंदाज होता आणि त्याचं हे बाह्य़रूप त्याची ओळखच ठरलं. या व्यक्तिरेखेबद्दल त्याचं म्हणणं होतं, ‘‘ज्या क्षणी मी तो पोशाख केला, मेकअप केला, त्या क्षणी मी ते व्यक्तिमत्त्व अनुभवू लागायचो. मी त्याला ओळखायचो आणि रंगमंचावर असेपर्यंत तो माझ्यात भिनलेला असायचा.’’

आयुष्याचं सार त्यानं पडद्यावर अनेक तऱ्हेनं जगापुढे मांडलं. खिल्ली उडवण्यासाठी दु:ख हे कारण असतं. खिल्ली उडवणे म्हणजे प्रतिकार करणे. निसर्गाच्या शक्तीपुढे स्वत:च्या हतबलतेतही आपण हसत राहिलं पाहिजे. प्रतिकूलतेचा हसत हसत सामना केला पाहिजे, नाही तर मानसिकरीत्या खचून जाल. म्हणूनच त्याच्या आयुष्याच्या जवळचा चित्रपट ‘द किड्’ याचं ओपिनग टायटल होतं, ‘‘अ पिक्चर विथ अ स्माइल अँड परहॅप्स अ टिअर.’’ जगातल्या कुठल्याही कोपऱ्यातल्या माणसावर तो गारुड करू शकला. भाषेच्या बंधनाविना पडद्यावरून तो कुठल्याही प्रेक्षकाशी संवाद साधू शकला. त्यासाठी त्यानं वापरलेली साधनं होती, भरपूर हासू आणि थोडेसे आसू

*संकलन : मिलिंद पंडित, कल्याण*

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१६ एप्रिल कलाकार चार्ली चॅप्लिन जन्मदिन

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*❀ १६ एप्रिल ❀*
*कलाकार चार्ली चॅप्लिन जन्मदिन*
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जन्म – १६ एप्रिल १८८९ (लंडन)
स्मृती – २५ डिसेंबर १९७७ (स्वित्झर्लंड)

चार्ली चॅप्लिन यांनी जगभरच्या प्रेक्षकांवर राज्य केलं. जगातल्या कुठल्याही कोपऱ्यातल्या माणसावर तो गारुड करू शकला. भाषेच्या बंधना विना पडद्यावरून तो कुठल्याही प्रेक्षकाशी संवाद साधू शकला. त्यासाठी त्यानं वापरलेली साधनं होती, भरपूर हासू आणि थोडेसे आसू!

एका निराधार बाळाचं पोटच्या मायेनं संगोपन करतो तो. पोत्याची झोळी करून त्यात त्या बाळाला ठेवतो. किटलीच्या नळीने दूध पाजतो. जुनी खुर्ची मध्यभागी फाडून बाळाची ‘पॉटी’ म्हणून वापरात आणतो. मोठय़ा पडद्यावर या सगळ्या गोष्टी घडत असताना धमाल उडत असते. पण तो हे सगळं पोटतिडकीनं करत असतो. त्याच्यातली आई आणि ते बाळ यांची नाळ अदृश्य स्वरूपात जुळलेली असते. खरं तर, तो त्या बाळाचा कुणीही नसतो, पण त्यांच्यातली माया आपणा प्रेक्षकांनाही अस्वस्थ करून जाते.

त्याचा ‘द किड्’ हा चित्रपट आपल्याला भारावून सोडतो. चार्ली चॅप्लिनने त्याच्या चित्रपटांमधून आपल्याला गडाबडा लोळायला लावून हसवलं, पण त्याचबरोबर त्यानं डोळ्यात टचकन् पाणी आणून रडवलंही. विचार करायला लावलं. जागतिक पटलावर एक महानायक म्हणून वावरला! स्वत:तल्या आत्मविश्वासामुळे अनेक वैशिष्टय़पूर्ण युक्त्या तो पडद्यावर साकारू शकला.

पडद्यावरच्या मस्तमौला चार्लीचं आगळंवेगळं रूप होतं, ‘एक टाइट कोट, बॅगी पॅन्ट, छोटी हॅट आणि मोठे शूज, आणि हो, चेहऱ्यावरची त्याची ती छोटीशी मिशी.’ त्याने त्याचं हे रूप समजून उमजूनच ठरवलं होतं. त्याला त्याचं बाह्य़रूप संपूर्णपणे विरोधाभासी हवं होतं. ती छोटीशी मिशी त्याच्या व्यक्तिमत्त्वाला, त्याच्या चेहऱ्यावरचे भाव न लपवता वयातला मोठेपणा, परिपक्वता देऊ शकेल हा त्याचा अंदाज होता आणि त्याचं हे बाह्य़रूप त्याची ओळखच ठरलं. या व्यक्तिरेखेबद्दल त्याचं म्हणणं होतं, ‘‘ज्या क्षणी मी तो पोशाख केला, मेकअप केला, त्या क्षणी मी ते व्यक्तिमत्त्व अनुभवू लागायचो. मी त्याला ओळखायचो आणि रंगमंचावर असेपर्यंत तो माझ्यात भिनलेला असायचा.’’

आयुष्याचं सार त्यानं पडद्यावर अनेक तऱ्हेनं जगापुढे मांडलं. खिल्ली उडवण्यासाठी दु:ख हे कारण असतं. खिल्ली उडवणे म्हणजे प्रतिकार करणे. निसर्गाच्या शक्तीपुढे स्वत:च्या हतबलतेतही आपण हसत राहिलं पाहिजे. प्रतिकूलतेचा हसत हसत सामना केला पाहिजे, नाही तर मानसिकरीत्या खचून जाल. म्हणूनच त्याच्या आयुष्याच्या जवळचा चित्रपट ‘द किड्’ याचं ओपिनग टायटल होतं, ‘‘अ पिक्चर विथ अ स्माइल अँड परहॅप्स अ टिअर.’’ जगातल्या कुठल्याही कोपऱ्यातल्या माणसावर तो गारुड करू शकला. भाषेच्या बंधनाविना पडद्यावरून तो कुठल्याही प्रेक्षकाशी संवाद साधू शकला. त्यासाठी त्यानं वापरलेली साधनं होती, भरपूर हासू आणि थोडेसे आसू

*संकलन : मिलिंद पंडित, कल्याण*

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