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साहित्यरत्न लोकशाहीर अण्णाभाऊ साठे विकास महामंडळ अंतर्गत लघु उद्योग व्यवसायासाठी थेट कर्ज योजना

पुणे, दि. २७: साहित्यरत्न लोकशाहीर अण्णाभाऊ साठे विकास महामंडळ अंतर्गत लघु उद्योग व्यवसायासाठी थेट कर्ज योजना राबविण्यात येत असून त्यासाठी ३१ जुलै २०२३ पर्यंत प्रस्ताव सादर करावेत, असे आवाहन करण्यात आले आहे.

महामंडळामार्फत अनुदान योजना, बीज भांडवल योजना तसेच थेट कर्ज योजना अशा तीन योजना राबविण्यात येतात. थेट कर्ज योजनेचा लाभ मातंग समाज व त्यामध्ये अंतर्भाव असणाऱ्या मांग, मातंग, मिनी मादिग, मादींग, दानखणी मांग, मांग महाशी, मदारी, राधेमांग, मांग गारुडी, मांग गारोडी, मादगी व मादिगा या १२ पोट जातींना घेता येणार आहे. अर्जदार पुणे जिल्ह्यातील रहिवासी असावा. वय १८ वर्षे पूर्ण व ५० वर्षाच्या आत असावे. सीबील क्रेडिट स्कोअर किमान ५०० असावा. एका कुटुंबातील एकाच व्यक्तीस योजनेचा लाभ घेता येईल. वेळोवेळी महामंडळाने घातलेल्या अटी, शर्ती बंधनकारक राहतील.

योजनेअंतर्गत १ लाख रुपयांच्या प्रकल्प मूल्यासाठी महामंडळाचे बीजभांडवल ८५ हजार रुपये, अनुदान १० हजार रुपये, अर्जदाराचा सहभाग ५ हजार रुपये असून बीजभांडवल रक्कमेवर ४ टक्के व्याजदर असणार आहे. २०२३-२४ या आर्थिक वर्षासाठी भौतिक उदिष्ट ९० प्रकरणांचे प्राप्त झाले आहे. उद्दिष्टापेक्षा अधिक अर्ज आल्यास लॉटरी पद्धतीने निवड करण्यात येईल.

अर्जासोबत उत्पन्नाचा दाखला, जातीचा दाखला, शिधापत्रिका, आधार कार्ड, पॅन कार्डची छायांकित प्रत, व्यवसायासाठी आवश्यक जागेचा पुरावा, तीन पासपोर्ट आकाराची छायाचित्रे, व्यवसायाचे दरपत्रक, व्यवसायासंबंधी तांत्रिक प्रमाणपत्र व अनुभवाचा दाखला, शैक्षणिक दाखला, अनुदान, कर्जाचा लाभ न घेतल्याबाबतचे स्वत:चे प्रतिज्ञापत्र, आधार क्र. जोडणी केलेल्या बँक खात्याचा तपशील, ग्रामसेवकाचे शासकीय योजनेचा लाभ घेतला नसल्याबाबत प्रतिज्ञापत्र, दुकाने अनुज्ञप्ती/ उद्योग आधार जोडणे आवश्यक आहे.

इच्छुक व पात्र अर्जदारांनी अटी व शर्ती, अर्जासोबत जोडावयाची कागदपत्रे, विहित नमुन्यातील अर्ज आदींबाबत साहित्यरत्न लोकशाहीर अण्णाभाऊ साठे विकास महामंडळ, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर सामाजिक न्याय भवन, सर्वे नंबर १०३,१०४ मेंटल कॉर्नर, विश्रांतवाडी पोलीस स्टेशनसमोर, येरवडा, पुणे दूरध्वनी क्र. ०२०-२९७०३०५७ येथे संपर्क साधून माहिती घ्यावी, असे महामंडळाचे जिल्हा व्यवस्थापक शिवाजी मांजरे यांनी कळवले आहे.
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इस वर्ष चार नहीं पांच महीने तक नहीं बजेंगी शहनाईयां- ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शास्त्री

 

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ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शास्त्री ने बताया कि चातुर्मास का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार चातुर्मास आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी से शुरू होकर कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि तक रहता है। साल 2023 में चातुर्मास 29 जून से शुरू होगा, इस दिन देवशयनी एकादशी भी है। 23 नवंबर 2023 को देवोत्थानी एकादशी है। कहा जाता है कि इस दिन से भगवान विष्णु विश्राम काल पूरा करने के बाद क्षीर सागर से निकल कर सृष्टि का संचालन करते हैं। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी या हरिशयनी एकादशी कहते हैं। इस साल देवशयनी एकादशी 29 जून 2023 को है। इस दिन श्रीहरि विष्णु की पूजा करने से कई गुना अधिक फल की प्राप्ति होती है। ज्योतिषाचार्य अतुल शास्त्री ने बताया कि पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का शुभारंभ 29 जून 2023 सुबह 03:18 मिनट पर होगा और इस तिथि का समापन 30 जून सुबह 02:42 मिनट पर हो जाएगा. पूजा तिथि के अनुसार, देवशयनी एकादशी व्रत गुरुवार 29 जून 2023 को रखा जाएगा. इस विशेष दिन पर रवि योग का निर्माण हो रहा है, जो सुबह 05:26 मिनट से दोपहर 04:30 मिनट तक रहेगा।

देवशयनी एकादशी के दिन से ही जगत के पालनहार भगवान विष्णु का निद्राकाल शुरू हो जाता है, यानी इसी दिन से चातुर्मास की शुरुआत होती है। चातुर्मास शुरू होने के बाद से सारे शुभ और मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है।ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल ने बताया कि देवशयनी एकादशी से चातुर्मास का प्रारंभ होता है।
देवशयनी एकादशी से चार माह तक भगवान विष्णु देवोत्थानी एकादशी तक के लिए योग निद्रा में चले जाएंगे। फिर वे देवउठनी एकादशी को योग निद्रा से बाहर आएंगे, तब चातुर्मास का समापन होगा। देवउठनी एकादशी 23 नवंबर को है। इस तरह से चातुर्मास 30 जून से लगेगा और 23 नवंबर को खत्म हो जाएगा. इस बार श्रावण पुरुषोत्तम मास होने की वजह से दो माह तक है, इसलिए चातुर्मास की अवधि पांच माह होग। इस दौरान सभी मांगलिक कार्य बंद रहेंगे। हिंदू धर्म में चातुर्मास का बहुत अधिक महत्व माना जाता है। चातुर्मास की शुरुआत आषाढ़ माह से शुरू होती है और कार्तिक की एकादशी के दिन खत्म होते हैं।
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि चार माह की निद्रा के बाद कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी को जब भगवान विष्णु योग निद्रा से उठते हैं तब फिर से सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं. इस बार चातुर्मास चार माह की बजाय पांच माह तक रहेंगे। देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा के अलावा कुछ उपाय करने से जीवन में खुशियां आती हैं।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी से देवोत्थानी एकादशी तक भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग पर विश्राम करते हैं. इन पांच महीनों में सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। इस दौरान मुंडन, उपनयन संस्कार, विवाह इत्यादि जैसे महत्वपूर्ण मांगलिक कार्य रोक दिए जाते हैं. मान्यता है कि भगवान विष्णु के शयनकाल में मांगलिक कार्य करने से व्यक्ति को उनका आशीर्वाद नहीं प्राप्त होता है, जिस वजह से विघ्न उत्पन्न होने का खतरा बना रहता है. हर साल चातुर्मास सामान्‍य रूप से 4 महीने का होता है, लेकिन इस साल अधिक मास होने के कारण चातुर्मास 5 महीने का होगा। यानी कि इस दिन भगवान विष्णु पूरे 5 महीने के लिए योग निद्रा में चले जाएंगे और फिर इसके बाद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि यानी कि देवउठनी एकादशी के दिन योग निद्रा से जागेंगे। ज्योतिषाचार्य अतुल शास्त्री ने बताया कि देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व होते हैं। देवशयनी एकादशी भगवान विष्णु के आराम का समय है, यानी एक दिन से भगवान विष्णु चार महीने के लिए शयन करने के लिए चले जाते हैं। इसी के साथ इस दिन से चातुर्मास का आरंभ भी हो जाता है. ऐसे में अगले 4 महीने तक कोई भी शुभ कार्य का आयोजन करना वर्जित माना जाता है. हर साल चातुर्मास सामान्‍य रूप से 4 महीने का होता है, लेकिन इस साल अधिक मास होने के कारण चातुर्मास 5 महीने का होगा, यानी कि इस दिन भगवान विष्णु पूरे 5 महीने के लिए योग निद्रा में चले जाएंगा और फिर इसके बाद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि यानी कि देवउठनी एकादशी के दिन योग निद्रा से जागेंगे। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु के विश्राम करने से सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं। इस दौरान सभी तरह के धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं, बस विवाह समेत अन्य मांगलिक कार्य नहीं होते हैं। इस दौरान भगवान का अधिक से अधिक ध्यान करना चाहिए‌। ज्योतिषाचार्य अतुल शास्त्री ने बताया कि इस साल 29 जून को देवशयनी एकादशी और 23 नवंबर को देव उठनी एकादशी रहेगी, इसलिए चातुर्मास 148 दिनों का रहेगा। इन दिनों में भगवान विष्णु योग निद्रा में रहेंगे। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इस अवधि में सृष्टि को संभालने और कामकाज संचालन का जिम्मा भगवान भोलेनाथ के पास रहेगा। इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान किए जा सकेंगे पर विवाह समेत मांगलिक काम नहीं होंगे‌। ज्योतिषाचार्य अतुल शास्त्री ने बताया कि भगवान विष्णु को सृष्टि का पालनहार कहा जाता है। श्रीहरि के विश्राम अवस्था में चले जाने के बाद मांगलिक कार्य जैसे- विवाह, मुंडन, जनेऊ आदि करना शुभ नहीं माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान मांगलिक कार्य करने से भगवान का आशीर्वाद नहीं प्राप्त होता है। शुभ कार्यों में देवी-देवताओं का आवाह्न किया जाता है। भगवान विष्णु योग निद्रा में होते हैं, इसलिए वह मांगलिक कार्यों में उपस्थित नहीं हो पाते हैं। जिसके कारण इन महीनों में मांगलिक कार्यों पर रोक होती है। ज्योतिषाचार्य अतुल शास्त्री ने बताया कि ग्रंथों के अनुसार पाताल लोक के अधिपति राजा बलि ने भगवान विष्णु से पाताल स्थिति अपने महल में रहने का वरदान मांगा था, इसलिए माना जाता है कि देवशयनी एकादशी से अगले 4 महीने तक भगवान विष्णु पाताल में राजा बलि के महल में निवास करते हैं। इसके अलावा अन्य मान्यताओं के अनुसार शिवजी महाशिवरात्रि तक और ब्रह्मा जी शिवरात्रि से देवशयनी एकादशी तक पाताल में निवास करते हैं‌। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि चार्तुमास में संत एक ही स्थान पर रुककर तप और ध्यान करते हैं। चातुर्मास में यात्रा करने से यह बचते हैं, क्योंकि ये वर्षा ऋतु का समय रहता है, इस दौरान नदी-नाले उफान पर होते है तथा कई छोटे-छोटे कीट उत्पन्न होते हैं। इस समय में विहार करने से इन छोटे-छोटे कीटों को नुकसान होने की संभावना रहती है. इसी वजह से जैन धर्म में चातुर्मास में संत एक जगह रुककर तप करते हैं।चातुर्मास में भगवान विष्णु विश्राम करते हैं और सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं। देवउठनी एकादशी के बाद विष्णुजी फिर से सृष्टि का भार संभाल लेते हैं‌।
ज्योतिषाचार्य अतुल शास्त्री ने बताया कि चातुर्मास में पूजा और ध्यान करने का विशेष महत्व है। देवशयनी एकादशी से देवप्रबोधनी एकादशी तक भगवान विष्णु विश्राम करेंगे। इस दौरान शिवजी सृष्टि का संचालन करेंगे. इन दिनों में शिवजी और विष्णुजी की पूजा करनी चाहिए। चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु और शिवजी का अभिषेक करना चाहिए. विष्णुजी को तुलसी तो शिवजी को बिल्वपत्र चढ़ाने चाहिए। साथ ही ऊँ विष्णवे नम: और ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करना चाहिए। इन दिनों में भागवत कथा सुनने का विशेष महत्व है. साथ ही जरूरतमंद लोगों को धन और अनाज का दान करना चाहिए‌। ज्योतिषाचार्य अतुल शास्त्री ने बताया कि चातुर्मास की शुरुआत में बारिश का मौसम रहता है। इस कारण बादलों की वजह से सूर्य की रोशनी हम तक नहीं पहुंच पाती है। सूर्य की रोशनी के बिना हमारी पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है। ऐसी स्थिति में खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। खाने में ऐसी चीजें शामिल करें जो सुपाच्य हों वरना पेट संबंधित बीमारियां हो सकती है। ज्योतिषाचार्य अतुल शास्त्री ने बताया कि सावन से लेकर कार्तिक तक चलने वाले चातुर्मास में नियम-संयम से रहने का विधान बताया गया है। इन दिनों में सुबह जल्दी उठकर योग, ध्यान और प्राणायाम किया जाता है। तामसिक भोजन नहीं करते और दिन में नहीं सोना चाहिए. इन चार महीनों में रामायण, गीता और भागवत पुराण जैसे धार्मिक ग्रंथ पढ़ने चाहिए। भगवान शिव और विष्णुजी का अभिषेक करना चाहिए। पितरों के लिए श्राद्ध और देवी की उपासना करनी चाहिए, जरूरतमंद लोगों की सेवा करें‌।

ज्योतिषाचार्य अतुल शास्त्री
ज्योतिष सेवा केन्द्र
09594318403-9820819501
panditatulshastri@gmail.com

गोव्यात निम्म्या सरकारी प्राथमिक शाळांमध्ये १० किंवा त्याहून अल्प विद्यार्थी

  1. गोव्यात निम्म्या सरकारी प्राथमिक शाळांमध्ये १० किंवा त्याहून अल्प विद्यार्थी*


    *पणजी – गोव्यात मागील शैक्षणिक वर्षी (वर्ष २०२२-२३ मध्ये) ६ सरकारी प्राथमिक शाळा बंद पडल्या आहेत.विशेष म्हणजे राज्यातील ७१२ पैकी ३७४ सरकारी प्राथमिक शाळांमध्ये विद्यार्थ्यांची पटसंख्या १० किंवा त्याहून अल्प आहे. यामुळे या शाळांमध्ये तातडीने विद्यार्थ्यांची पटसंख्या वाढवण्यासाठी प्रयत्न न झाल्यास पटसंख्येच्या अभावी शाळा बंद होण्याची भीती निर्माण झाली आहे. गोवा सरकार मात्र सरकारी प्राथमिक शाळांच्या साधनसुविधांमध्ये वाढ केल्याचा दावा करत आहे.*

*👉🅾️🅾️👉वर्ष २०२२-२३ मध्ये बंद पडलेल्या सरकारी प्राथमिक शाळांमध्ये ४ मराठी माध्यमातील, तसेच मराठी-कन्नड आणि कोकणी-मराठी माध्यमातील प्रत्येकी एक शाळा यांचा समावेश आहे. यामध्ये काणकोण आणि बार्देश तालुक्यांतील प्रत्येकी २, तर सांगे आणि धारबांदोडा तालुक्यांतील प्रत्येकी एका शाळेचा समावेश आहे. विद्यार्थ्यांची पटसंख्या १० किंवा त्याहून अल्प असलेल्या सरकारी प्राथमिक शाळांची तालुकानिहाय आकडेवारी पुढीलप्रमाणे आहे. धारबांदोडा – एकूण ४९ शाळांपैकी ४१ शाळा, काणकोण – ६३ पैकी ४३, सांगे – ५२ पैकी ३४, केपे -५६ पैकी २४, पेडणे – ६४ पैकी ४०, डिचोली – ७३ पैकी ४०, सत्तरी १०१ पैकी ५२, फोंडा – १०३ पैकी ५०, बार्देश – ५७ पैकी २६, तिसवाडी – ३३ पैकी ९, सासष्टी – ४१ पैकी ११ आणि मुरगाव – २० पैकी ४ शाळा. विशेष म्हणजे खासगी अनुदानित प्राथमिक शाळांमध्ये विद्यार्थ्यांची पटसंख्या सरकारी प्राथमिक शाळांपेक्षा साडेतीन पट अधिक आहे. मागील १० वर्षांच्या कालावधीत सरकारी प्राथमिक शाळांची संख्या १ सहस्रवरून आता ७१२ वर आलेली आहे.*

मुंबई ते गोवा वंदेभारतसह पाच वंदेभारतचे उद्या उद्घाटन, पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांच्या हस्ते रिमोटने लोकार्पण

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मुबई :-मुंबई ते गोवा ( मडगांव ) वंदेभारत एक्सप्रेसला एकदाचा मुहूर्त मिळाला आहे. उद्या मध्य प्रदेशातून पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांच्या हस्ते पाच वंदेभारत एक्सप्रेसना हिरवा झेंडा दाखविण्यात येणार आहे.मुंबई ते गोवा वंदेभारतचे नियोजित उद्घाटन 3 जून रोजी होणार होते. परंतू 2 जून रोजी ओडिशातील बालासोर जिल्ह्यात देशातील आतापर्यंतचा सर्वात मोठा अपघात अपघात घडून प्रचंड मनुष्यहानी झाल्याने दुखवटा जाहीर झाल्याने हे उद्घाटन रद्द करण्यात आले होते.*

*👉🅾️🅾️👉वंदेभारतची संख्या 23 होणार*

*देशाला पाच नवीन वंदेभारतचे उद्घाटन पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांच्या हस्ते उद्या मध्य प्रदेशातील राणी कमलापती रेल्वे स्थानकातून होणार आहे. राणी कमलापती ( भोपाळ ) – जबलपूर वंदेभारत एक्सप्रेस, खजुराहो-भोपाळ-इंदौर वंदेभारत एक्सप्रेस, मडगांव ( गोवा ) – मुंबई सीएसएमटी वंदेभारत एक्सप्रेस, धारवाड-बंगळुरु वंदेभारत एक्सप्रेस आणि हटीया-पाटणा वंदेभारत एक्सप्रेस अशा पाच वंदेभारतचे एकाच वेळी लोकार्पण केले जाणार आहे. त्यामुळे देशातील एकूण वंदेभारतची संख्या त्यामुळे 23 इतकी होणार आहे.*

*👉🔺🔺👉1 – सीएसएमटी – मडगांव ( गोवा ) वंदेभारत एक्सप्रेस :-*

*ही गोव्याला मिळालेली पहिली वंदेभारत एक्सप्रेस असून तिचे सीएसएमटी ते मडगाव दरम्यान ती धावणार आहे, ही वंदेभारत सोळा डब्यांच्या आठ डब्यांद्वारे चालविण्यात येणार आहे. या गाडीला एक्झुकेटीव्ह क्लाससाठी 2,915 रुपये तर चेअरकारसाठी 1,435 रुपये भाडे असणार आहे.मुंबई ते गोवा वंदेभारत मॉन्सून वेळापत्रकामुळे 10 तासांचा वेळ घेणार आहे. आठ डब्यांच्या या गाडीला 11 थांबे असून एरव्ही मुंबई ते गोवा हे ( 586 कि.मी.) अंतर ती सात तास पंधरा मिनिटांत कापणार आहे.मान्सूनकाळात ती आठवड्यातून तीन वेळा सोमवार, बुधवार आणि शुक्रवार अशी धावणार आहे. सीएसएमटी हून स.5.23 वाजता सुटून ती मडगांवला दु. 3.30 वाजता पोहचेल. 28 जूनपासून ती प्रवाशांच्या सेवेत येईल. तिला दादर, ठाणे, पनवेल, खेड, रत्नागिरी, कणकवली आणि थिविम असे थांबे आहेत.ही ट्रेन नॉन मान्सूनमध्ये शुक्रवार वगळता आठवड्यातून सहा दिवस चालविण्यात येणार आहे. या मार्गावरील अन्य ट्रेनपेक्षा या ट्रेन प्रवाशांच्या एका तासांची बचत होणार आहे. ही गाडीचे 2 जूनचे पूर्वनियोजित उद्घाटन ओदिशा रेल्वे अपघाताने रद्द करण्यात आले होते. ते आता उद्या अन्य ट्रेन सोबत एकाच व्यासपीठावरुन करण्यात येणार आहे.*

*👉🔺🔺👉2 – राणी कमलापती ( भोपाळ ) :-*

*जबलपूर वंदेभारत एक्सप्रेस : ही सेमी हायस्पीड ट्रेन मध्य प्रदेशातील महाकौशल प्रातांला ( जबलपूर ) ते मध्य रिजनला ( भोपाळ ) जोडली जाणार आहे. ही मध्य प्रदेशला मिळालेली दुसरी वंदेभारत आहे. दोन शहरांना ही दरताशी 130 वेगाने जोडली जाणार आहे. या मार्गावरील याआधीच्या तेज गाडीपेक्षा वंदेभारतने अर्धा तासांची बचत होणार आहे.*

*👉🔺🔺👉3 – खजुराहो-भोपाळ-इंदौर वंदेभारत एक्सप्रेस :-*

*ही मध्य प्रदेशला मिळालेली तिसरी वंदेभारत आहे. ही ट्रेन मालवा ( रिजन ) , बुंदेलखंड रिजन ( खजुराहो ) आणि सेंट्रल रिजन ( भोपाळ ) या भागात धावेल. महाकालेश्वर, मंडू, महेश्वर, खजुराहो, पन्ना आदी प्रेक्षणीय स्थळांना भेटणाऱ्या पर्यटकांना या ट्रेनचा फायदा होणार आहे. ही ट्रेन आधीच्या या मार्गावरील ट्रेनपेक्षा अडीच तासांची बचत करणार आहे.*

*👉🔺🔺👉4 – धारवाड-बंगळुरु वंदेभारत :-*

*कर्नाटकला आणखी एक वंदेभारत मिळणार आहे. ही ट्रेन धारवाड, हुब्बाळी आणि दवणगेरे यांना राजधानी बंगळुरुला जोडणार आहे. याआधीच्या या मार्गावरील ट्रेनपेक्षा तीस मिनिटांची बचत होईल. याआधीची कर्नाटकची वंदेभारत चेन्नई-बंगळुर आणि म्हैसूर दरम्यान धावत आहे.*

*👉🔺🔺👉5 – हटीया – पाटणा वंदेभारत एक्सप्रेस:-*

*बिहारला मिळालेली ही पहिली वंदेभारत एक्सप्रेस आहे. या सेमी हायस्पीड वंदेभारतचा मार्ग व्हाया तटीसिलवई, मेर्सा, शांकी, बाहकाकनास, हजारीबाग, कोडर्मा आणि गया मार्गाने जाण्याची शक्यता आहे. त्यामुळे प्रवाशांची एक तास 25 मिनिटांची बचत होणार आहे.*

मुंबई ते गोवा वंदेभारतसह पाच वंदेभारतचे उद्या उद्घाटन, पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांच्या हस्ते रिमोटने लोकार्पण

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मुबई :-मुंबई ते गोवा ( मडगांव ) वंदेभारत एक्सप्रेसला एकदाचा मुहूर्त मिळाला आहे. उद्या मध्य प्रदेशातून पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांच्या हस्ते पाच वंदेभारत एक्सप्रेसना हिरवा झेंडा दाखविण्यात येणार आहे.मुंबई ते गोवा वंदेभारतचे नियोजित उद्घाटन 3 जून रोजी होणार होते. परंतू 2 जून रोजी ओडिशातील बालासोर जिल्ह्यात देशातील आतापर्यंतचा सर्वात मोठा अपघात अपघात घडून प्रचंड मनुष्यहानी झाल्याने दुखवटा जाहीर झाल्याने हे उद्घाटन रद्द करण्यात आले होते.*

*👉🅾️🅾️👉वंदेभारतची संख्या 23 होणार*

*देशाला पाच नवीन वंदेभारतचे उद्घाटन पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांच्या हस्ते उद्या मध्य प्रदेशातील राणी कमलापती रेल्वे स्थानकातून होणार आहे. राणी कमलापती ( भोपाळ ) – जबलपूर वंदेभारत एक्सप्रेस, खजुराहो-भोपाळ-इंदौर वंदेभारत एक्सप्रेस, मडगांव ( गोवा ) – मुंबई सीएसएमटी वंदेभारत एक्सप्रेस, धारवाड-बंगळुरु वंदेभारत एक्सप्रेस आणि हटीया-पाटणा वंदेभारत एक्सप्रेस अशा पाच वंदेभारतचे एकाच वेळी लोकार्पण केले जाणार आहे. त्यामुळे देशातील एकूण वंदेभारतची संख्या त्यामुळे 23 इतकी होणार आहे.*

*👉🔺🔺👉1 – सीएसएमटी – मडगांव ( गोवा ) वंदेभारत एक्सप्रेस :-*

*ही गोव्याला मिळालेली पहिली वंदेभारत एक्सप्रेस असून तिचे सीएसएमटी ते मडगाव दरम्यान ती धावणार आहे, ही वंदेभारत सोळा डब्यांच्या आठ डब्यांद्वारे चालविण्यात येणार आहे. या गाडीला एक्झुकेटीव्ह क्लाससाठी 2,915 रुपये तर चेअरकारसाठी 1,435 रुपये भाडे असणार आहे.मुंबई ते गोवा वंदेभारत मॉन्सून वेळापत्रकामुळे 10 तासांचा वेळ घेणार आहे. आठ डब्यांच्या या गाडीला 11 थांबे असून एरव्ही मुंबई ते गोवा हे ( 586 कि.मी.) अंतर ती सात तास पंधरा मिनिटांत कापणार आहे.मान्सूनकाळात ती आठवड्यातून तीन वेळा सोमवार, बुधवार आणि शुक्रवार अशी धावणार आहे. सीएसएमटी हून स.5.23 वाजता सुटून ती मडगांवला दु. 3.30 वाजता पोहचेल. 28 जूनपासून ती प्रवाशांच्या सेवेत येईल. तिला दादर, ठाणे, पनवेल, खेड, रत्नागिरी, कणकवली आणि थिविम असे थांबे आहेत.ही ट्रेन नॉन मान्सूनमध्ये शुक्रवार वगळता आठवड्यातून सहा दिवस चालविण्यात येणार आहे. या मार्गावरील अन्य ट्रेनपेक्षा या ट्रेन प्रवाशांच्या एका तासांची बचत होणार आहे. ही गाडीचे 2 जूनचे पूर्वनियोजित उद्घाटन ओदिशा रेल्वे अपघाताने रद्द करण्यात आले होते. ते आता उद्या अन्य ट्रेन सोबत एकाच व्यासपीठावरुन करण्यात येणार आहे.*

*👉🔺🔺👉2 – राणी कमलापती ( भोपाळ ) :-*

*जबलपूर वंदेभारत एक्सप्रेस : ही सेमी हायस्पीड ट्रेन मध्य प्रदेशातील महाकौशल प्रातांला ( जबलपूर ) ते मध्य रिजनला ( भोपाळ ) जोडली जाणार आहे. ही मध्य प्रदेशला मिळालेली दुसरी वंदेभारत आहे. दोन शहरांना ही दरताशी 130 वेगाने जोडली जाणार आहे. या मार्गावरील याआधीच्या तेज गाडीपेक्षा वंदेभारतने अर्धा तासांची बचत होणार आहे.*

*👉🔺🔺👉3 – खजुराहो-भोपाळ-इंदौर वंदेभारत एक्सप्रेस :-*

*ही मध्य प्रदेशला मिळालेली तिसरी वंदेभारत आहे. ही ट्रेन मालवा ( रिजन ) , बुंदेलखंड रिजन ( खजुराहो ) आणि सेंट्रल रिजन ( भोपाळ ) या भागात धावेल. महाकालेश्वर, मंडू, महेश्वर, खजुराहो, पन्ना आदी प्रेक्षणीय स्थळांना भेटणाऱ्या पर्यटकांना या ट्रेनचा फायदा होणार आहे. ही ट्रेन आधीच्या या मार्गावरील ट्रेनपेक्षा अडीच तासांची बचत करणार आहे.*

*👉🔺🔺👉4 – धारवाड-बंगळुरु वंदेभारत :-*

*कर्नाटकला आणखी एक वंदेभारत मिळणार आहे. ही ट्रेन धारवाड, हुब्बाळी आणि दवणगेरे यांना राजधानी बंगळुरुला जोडणार आहे. याआधीच्या या मार्गावरील ट्रेनपेक्षा तीस मिनिटांची बचत होईल. याआधीची कर्नाटकची वंदेभारत चेन्नई-बंगळुर आणि म्हैसूर दरम्यान धावत आहे.*

*👉🔺🔺👉5 – हटीया – पाटणा वंदेभारत एक्सप्रेस:-*

*बिहारला मिळालेली ही पहिली वंदेभारत एक्सप्रेस आहे. या सेमी हायस्पीड वंदेभारतचा मार्ग व्हाया तटीसिलवई, मेर्सा, शांकी, बाहकाकनास, हजारीबाग, कोडर्मा आणि गया मार्गाने जाण्याची शक्यता आहे. त्यामुळे प्रवाशांची एक तास 25 मिनिटांची बचत होणार आहे.*

सामाजिक न्याय दिनानिमित्त मागासवर्गीय मुलींच्या शासकीय वसतिगृहाचे मुख्यमंत्र्यांच्या हस्ते लोकार्पण वसतिगृहाला माता रमाई यांचे नाव देणार – मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे

मुंबई, दि. २६ : राजर्षी शाहू महाराजांनी शिक्षणातून सामाजिक उन्नतीकडे जाण्यावर भर दिला होता. आजच्या लोकार्पण सोहळ्यातून आपण त्याच दिशेने प्रयत्न करीत आहोत. मुंबई शहरामध्ये आपण २५० विद्यार्थिनी क्षमतेच्या वसतिगृहाचे लोकार्पण करीत आहोत. या वसतिगृहाला माता रमाई यांचे नाव देण्यात येणार असल्याची घोषणा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे यांनी आज केली.

सामाजिक न्याय विभागाच्या मागासवर्गीय मुलींच्या वसतिगृहाच्या लोकार्पण प्रसंगी मुख्यमंत्री श्री.शिंदे बोलत होते. या कार्यक्रमास पर्यटन आणि कौशल्य विकास व उद्योजकता, महिला व बाल विकास मंत्री तथा मुंबई उपनगरचे पालकमंत्री मंगल प्रभात लोढा, खासदार राहुल शेवाळे, सामाजिक न्याय विभागाचे सचिव सुमंत भांगे, समाजकल्याण विभागाचे आयुक्त डॉ. प्रशांत नारनवरे, मुंबई उपनगरचे जिल्हाधिकारी राजेंद्र भोसले उपस्थित होते.

मुख्यमंत्री श्री. शिंदे यांच्या हस्ते चेंबूर येथील १ हजार मुला-मुलींची विभागीय स्तरावरील वसतिगृहापैकी २५० मुलींच्या वसतिगृहाच्या इमारतीचे उद्घाटन करण्यात आले. तसेच दूरदृश्यप्रणालीद्वारे मागासवर्गीय व आर्थिकदृष्ट्या मागासवर्गीय मुलींचे शासकीय वसतिगृह, मंगरुळपीर, जि. वाशिम व बार्टी अंतर्गत येरवडा संकुल, पुणे येथील संघ लोकसेवा आयोगाच्या निवासी प्रशिक्षण कार्यक्रमाचा शुभारंभ झाला. तसेच समान संधी केंद्र उपक्रमाच्या मोबाईल ॲपचे उद्घाटनही यावेळी करण्यात आले.

मुख्यमंत्री श्री. शिंदे म्हणाले की, राजर्षी शाहू महाराज यांचा जयंती दिन हा सामाजिक न्याय दिन म्हणून साजरा केला जातो. शाहू महाराजांसमोर मोठी आव्हाने असताना त्यांनी समाजाला न्याय देण्याचा प्रयत्न केला. खेडोपाडी शाळा सुरू करीत वसतिगृह संकल्पना आणली. त्यामुळे वसतिगृह संकल्पनेचे जनक म्हणूनही त्यांना संबोधले जाते.

राज्यातील विविध समाज घटकातील सनदी अधिकारी व्हावेत यासाठी ‘बार्टी’, ‘सारथी’ आणि ‘महाज्योती’ या संस्थांच्या माध्यमातून युवकांना प्रशिक्षण दिले जाते. या संस्थांमधून विद्यार्थ्यांना जास्तीत जास्त सुविधा देऊन मुख्य प्रवाहात आणण्याचा सरकारचा प्रयत्न आहे. सर्व समाज घटकांना न्याय देण्याचा प्रयत्न सरकारमार्फत होत आहे. राज्य शासन अनुसूचित जाती, जमाती व बहुजन वर्गाच्या कल्याणासाठी विविध योजना राबवीत आहे. उच्च शिक्षणासाठी परदेशी पाठविण्यात येणाऱ्या विद्यार्थ्यांची संख्या वाढविली आहे. सामाजिक न्याय, उच्च व तंत्रशिक्षण, आदिवासी विकास, इतर मागास विभाग, शालेय शिक्षण विभाग, कौशल्य विकास आदी विभागांमार्फत विद्यार्थ्यांच्या उन्नतीसाठी प्रयत्न केले जात आहेत, असे मुख्यमंत्री श्री. शिंदे यांनी सांगितले.

मुख्यमंत्री श्री. शिंदे म्हणाले की, मुंबईतील ‘एसआरए’ सह अन्य प्रलंबित प्रकल्प सरकारच्या माध्यमातून संबंधित संस्थांना सोबत घेऊन पूर्ण करण्यात येतील. चेंबूर परिसरातील प्रलंबित असलेले असे सर्व प्रकल्प मार्गी लावले जातील.

खासदार श्री. शेवाळे म्हणाले की, मुंबई शहरात मुलींच्या वसतिगृहाची गरज आहे. शिक्षणासाठी येणाऱ्या मुलींना सुरक्षित वास्तू या वसतिगृहामुळे मिळाली आहे.

सचिव श्री. भांगे यांनी प्रास्ताविकात सांगितले, समाजकल्याण विभागाची 1932 मध्ये स्थापना झाली असून राज्याच्या या विभागास सर्वसाधारणपणे आता 90-91 वर्षाचा कालखंड झालेला आहे. अशा या ऐतिहासिक विभागामार्फत राज्य शासन अनुसूचित जाती, अनुसूचित जमाती आणि इतर दुर्बल घटकांच्या शैक्षणिक आणि आर्थिक संवर्धनासाठी काम करते. परदेशातील उच्च शिक्षणासाठी राज्य शासन अनुसूचित जातीच्या विद्यार्थ्यांना सर्वोतोपरी मदत करते. दरवर्षी विभागाच्या ४४१ वसतिगृह २,३३८ अनुदानित वसतिगृह व ९० निवासी शाळामार्फत १.५ लक्ष विद्यार्थ्यांना शिक्षण, भोजन व निवासाची सोय करण्यात येते. समाजकल्याण आयुक्त डॉ. नारनवरे यांनी आभार मानले.

वसतिगृह व मोबाईल ॲप विषयी माहिती

मुंबई शहरामध्ये 250 क्षमतेच्या वसतिगृहाचे सुरू करण्यात आले. नजीकच्या काळात आणखी 750 विद्यार्थ्यांसाठीचे वसतिगृह सहा महिन्यांत सूरू करण्यात येणार आहे. यामुळे मुंबई उपनगर जिल्ह्यात 1300 मुले व 350 मुलींसाठी वसतिगृहाची उपलब्धता होणार आहे. चेंबूर येथे उभारण्यात येत असलेले हे वसतिगृह 1000 क्षमतेचे असून त्याचे बांधकाम बीओटी तत्वावर झालेले आहे. या वसतिगृहामध्ये विद्यार्थ्यांना भोजन, शैक्षणिक सुविधा, सुरक्षित निवास याबरोबरच शैक्षणिक/इंटरनेट, संगणक सुविधा, ग्रंथालय सुविधा, करमणुकीच्या सुविधा उपलब्ध आहेत.

वाशीम जिल्ह्यातील मंगळूरपीर येथील मागासवर्गीय तथा आर्थिकदृष्ट्या मागासवर्गीय मुलींच्या वसतिगृहामुळे 100 मुलींच्या निवासाची व शिक्षणाची व्यवस्था ग्रामीण भागामध्ये उपलब्ध होणार आहे. समान संधी केंद्र उपक्रमाच्या मोबाईल ॲप च्या माध्यमातून राज्यातील सर्व महाविद्यालयांमध्ये अनुसुचित जाती जमाती, विजाभज, इमाव या सर्व विद्यार्थ्यांना उच्च शिक्षणासाठी प्रोत्साहित करण्यासाठी त्यांना असलेल्या शैक्षणिक सवलतींची माहिती मिळणार आहे. तसेच रोजगार, स्वयंरोजगार, उद्योजकता, व्यवसायिकता कौशल्य प्रशिक्षण या सर्व बाबींचे सर्वसमावेशक मार्गदर्शनही मिळणार आहे.

सामाजिक न्याय दिनानिमित्त मागासवर्गीय मुलींच्या शासकीय वसतिगृहाचे मुख्यमंत्र्यांच्या हस्ते लोकार्पण वसतिगृहाला माता रमाई यांचे नाव देणार – मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे

मुंबई, दि. २६ : राजर्षी शाहू महाराजांनी शिक्षणातून सामाजिक उन्नतीकडे जाण्यावर भर दिला होता. आजच्या लोकार्पण सोहळ्यातून आपण त्याच दिशेने प्रयत्न करीत आहोत. मुंबई शहरामध्ये आपण २५० विद्यार्थिनी क्षमतेच्या वसतिगृहाचे लोकार्पण करीत आहोत. या वसतिगृहाला माता रमाई यांचे नाव देण्यात येणार असल्याची घोषणा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे यांनी आज केली.

सामाजिक न्याय विभागाच्या मागासवर्गीय मुलींच्या वसतिगृहाच्या लोकार्पण प्रसंगी मुख्यमंत्री श्री.शिंदे बोलत होते. या कार्यक्रमास पर्यटन आणि कौशल्य विकास व उद्योजकता, महिला व बाल विकास मंत्री तथा मुंबई उपनगरचे पालकमंत्री मंगल प्रभात लोढा, खासदार राहुल शेवाळे, सामाजिक न्याय विभागाचे सचिव सुमंत भांगे, समाजकल्याण विभागाचे आयुक्त डॉ. प्रशांत नारनवरे, मुंबई उपनगरचे जिल्हाधिकारी राजेंद्र भोसले उपस्थित होते.

मुख्यमंत्री श्री. शिंदे यांच्या हस्ते चेंबूर येथील १ हजार मुला-मुलींची विभागीय स्तरावरील वसतिगृहापैकी २५० मुलींच्या वसतिगृहाच्या इमारतीचे उद्घाटन करण्यात आले. तसेच दूरदृश्यप्रणालीद्वारे मागासवर्गीय व आर्थिकदृष्ट्या मागासवर्गीय मुलींचे शासकीय वसतिगृह, मंगरुळपीर, जि. वाशिम व बार्टी अंतर्गत येरवडा संकुल, पुणे येथील संघ लोकसेवा आयोगाच्या निवासी प्रशिक्षण कार्यक्रमाचा शुभारंभ झाला. तसेच समान संधी केंद्र उपक्रमाच्या मोबाईल ॲपचे उद्घाटनही यावेळी करण्यात आले.

मुख्यमंत्री श्री. शिंदे म्हणाले की, राजर्षी शाहू महाराज यांचा जयंती दिन हा सामाजिक न्याय दिन म्हणून साजरा केला जातो. शाहू महाराजांसमोर मोठी आव्हाने असताना त्यांनी समाजाला न्याय देण्याचा प्रयत्न केला. खेडोपाडी शाळा सुरू करीत वसतिगृह संकल्पना आणली. त्यामुळे वसतिगृह संकल्पनेचे जनक म्हणूनही त्यांना संबोधले जाते.

राज्यातील विविध समाज घटकातील सनदी अधिकारी व्हावेत यासाठी ‘बार्टी’, ‘सारथी’ आणि ‘महाज्योती’ या संस्थांच्या माध्यमातून युवकांना प्रशिक्षण दिले जाते. या संस्थांमधून विद्यार्थ्यांना जास्तीत जास्त सुविधा देऊन मुख्य प्रवाहात आणण्याचा सरकारचा प्रयत्न आहे. सर्व समाज घटकांना न्याय देण्याचा प्रयत्न सरकारमार्फत होत आहे. राज्य शासन अनुसूचित जाती, जमाती व बहुजन वर्गाच्या कल्याणासाठी विविध योजना राबवीत आहे. उच्च शिक्षणासाठी परदेशी पाठविण्यात येणाऱ्या विद्यार्थ्यांची संख्या वाढविली आहे. सामाजिक न्याय, उच्च व तंत्रशिक्षण, आदिवासी विकास, इतर मागास विभाग, शालेय शिक्षण विभाग, कौशल्य विकास आदी विभागांमार्फत विद्यार्थ्यांच्या उन्नतीसाठी प्रयत्न केले जात आहेत, असे मुख्यमंत्री श्री. शिंदे यांनी सांगितले.

मुख्यमंत्री श्री. शिंदे म्हणाले की, मुंबईतील ‘एसआरए’ सह अन्य प्रलंबित प्रकल्प सरकारच्या माध्यमातून संबंधित संस्थांना सोबत घेऊन पूर्ण करण्यात येतील. चेंबूर परिसरातील प्रलंबित असलेले असे सर्व प्रकल्प मार्गी लावले जातील.

खासदार श्री. शेवाळे म्हणाले की, मुंबई शहरात मुलींच्या वसतिगृहाची गरज आहे. शिक्षणासाठी येणाऱ्या मुलींना सुरक्षित वास्तू या वसतिगृहामुळे मिळाली आहे.

सचिव श्री. भांगे यांनी प्रास्ताविकात सांगितले, समाजकल्याण विभागाची 1932 मध्ये स्थापना झाली असून राज्याच्या या विभागास सर्वसाधारणपणे आता 90-91 वर्षाचा कालखंड झालेला आहे. अशा या ऐतिहासिक विभागामार्फत राज्य शासन अनुसूचित जाती, अनुसूचित जमाती आणि इतर दुर्बल घटकांच्या शैक्षणिक आणि आर्थिक संवर्धनासाठी काम करते. परदेशातील उच्च शिक्षणासाठी राज्य शासन अनुसूचित जातीच्या विद्यार्थ्यांना सर्वोतोपरी मदत करते. दरवर्षी विभागाच्या ४४१ वसतिगृह २,३३८ अनुदानित वसतिगृह व ९० निवासी शाळामार्फत १.५ लक्ष विद्यार्थ्यांना शिक्षण, भोजन व निवासाची सोय करण्यात येते. समाजकल्याण आयुक्त डॉ. नारनवरे यांनी आभार मानले.

वसतिगृह व मोबाईल ॲप विषयी माहिती

मुंबई शहरामध्ये 250 क्षमतेच्या वसतिगृहाचे सुरू करण्यात आले. नजीकच्या काळात आणखी 750 विद्यार्थ्यांसाठीचे वसतिगृह सहा महिन्यांत सूरू करण्यात येणार आहे. यामुळे मुंबई उपनगर जिल्ह्यात 1300 मुले व 350 मुलींसाठी वसतिगृहाची उपलब्धता होणार आहे. चेंबूर येथे उभारण्यात येत असलेले हे वसतिगृह 1000 क्षमतेचे असून त्याचे बांधकाम बीओटी तत्वावर झालेले आहे. या वसतिगृहामध्ये विद्यार्थ्यांना भोजन, शैक्षणिक सुविधा, सुरक्षित निवास याबरोबरच शैक्षणिक/इंटरनेट, संगणक सुविधा, ग्रंथालय सुविधा, करमणुकीच्या सुविधा उपलब्ध आहेत.

वाशीम जिल्ह्यातील मंगळूरपीर येथील मागासवर्गीय तथा आर्थिकदृष्ट्या मागासवर्गीय मुलींच्या वसतिगृहामुळे 100 मुलींच्या निवासाची व शिक्षणाची व्यवस्था ग्रामीण भागामध्ये उपलब्ध होणार आहे. समान संधी केंद्र उपक्रमाच्या मोबाईल ॲप च्या माध्यमातून राज्यातील सर्व महाविद्यालयांमध्ये अनुसुचित जाती जमाती, विजाभज, इमाव या सर्व विद्यार्थ्यांना उच्च शिक्षणासाठी प्रोत्साहित करण्यासाठी त्यांना असलेल्या शैक्षणिक सवलतींची माहिती मिळणार आहे. तसेच रोजगार, स्वयंरोजगार, उद्योजकता, व्यवसायिकता कौशल्य प्रशिक्षण या सर्व बाबींचे सर्वसमावेशक मार्गदर्शनही मिळणार आहे.

उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांनी घेतली शिक्षण कार्यगटाच्या प्रतिनिधींची भेट

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सांस्कृतिक कार्यक्रमात विविधरंगी भारताचे पाहुण्यांना दर्शन*

पुणे, दि.२१: जी-२० शिक्षण कार्यगटाच्या चौथ्या बैठकीसाठी आलेले सदस्य देशांचे मंत्री आणि प्रतिनिधींची उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांनी भेट घेतली आणि त्यांच्याशी संवाद साधला. पाहुण्यांच्या सन्मानार्थ आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमात सादर करण्यात आलेल्या नृत्यांच्या माध्यमातून विविधरंगी भारताचे दर्शन घडले.

सावित्रीबाई फुले पुणे विद्यापीठ येथे जी-२० प्रतिनिधींसाठी महाराष्ट्र शासनाच्यावतीने सांस्कृतिक कार्यक्रमाचे आयोजन करण्यात आले होते. कार्यक्रमाला केंद्रीय शिक्षण मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, पालकमंत्री चंद्रकांतदादा पाटील, आमदार माधुरी मिसाळ, केंद्रीय शालेय शिक्षण सचिव संजय कुमार, उच्च शिक्षण सचिव के.संजय मूर्ती, विभागीय आयुक्त सौरभ राव, पुणे महानगरपालिका आयुक्त विक्रम कुमार, जिल्हाधिकारी डॉ.राजेश देशमुख, कुलगुरू प्रा. सुरेश गोसावी आदी उपस्थित होते.

स्वागताच्यावेळी करण्यात आलेल्या मल्लखांब प्रात्यक्षिकांनी पाहुण्यांची मने जिंकली. मर्दानी खेळ आणि लोककलांचेही यावेळी सादरीकरण करण्यात आले.

*सांस्कृतिक कार्यक्रमातून भारताच्या सांस्कृतिक वैभवाचे दर्शन*
भारताच्या विविध प्रांतातील लोकनृत्य यावेळी सादर करण्यात आले. त्यातून विविधरंगी भारतीय संस्कृती आणि सांस्कृतिक वैभवाचे दर्शन पाहुण्यांना घडले. बांबू नृत्य, ढोल नृत्य, दीप नृत्य, घुमर नृत्य, गरबा नृत्य, पंजाबी भांगडा, नागालँडचे लोकनृत्य, मध्यप्रदेशचे लोकनृत्य, महाराष्ट्राचे कोळी आणि लावणी नृत्य, कथ्थक आदी नृत्यप्रकार यावेळी सादर करण्यात आले. ‘कलर्स ऑफ इंडिया’ या संकल्पनेखाली कार्यक्रमाच्या शेवटी ‘वंदे मातरम’ या गीतावर सादर करण्यात आलेल्या भारतीय लोकनृत्यांच्या सप्तरंगी दर्शनाने उपस्थित प्रतिनिधी मोहित झाले. कार्यक्रम झाल्यावर काही पाहुण्यांनी स्वतः लेझीम, फुगडीचा आनंद घेतला.

कार्यक्रमाला विविध क्षेत्रातील मान्यवर उपस्थित होते.

उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांनी घेतली शिक्षण कार्यगटाच्या प्रतिनिधींची भेट

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सांस्कृतिक कार्यक्रमात विविधरंगी भारताचे पाहुण्यांना दर्शन*

पुणे, दि.२१: जी-२० शिक्षण कार्यगटाच्या चौथ्या बैठकीसाठी आलेले सदस्य देशांचे मंत्री आणि प्रतिनिधींची उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांनी भेट घेतली आणि त्यांच्याशी संवाद साधला. पाहुण्यांच्या सन्मानार्थ आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमात सादर करण्यात आलेल्या नृत्यांच्या माध्यमातून विविधरंगी भारताचे दर्शन घडले.

सावित्रीबाई फुले पुणे विद्यापीठ येथे जी-२० प्रतिनिधींसाठी महाराष्ट्र शासनाच्यावतीने सांस्कृतिक कार्यक्रमाचे आयोजन करण्यात आले होते. कार्यक्रमाला केंद्रीय शिक्षण मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, पालकमंत्री चंद्रकांतदादा पाटील, आमदार माधुरी मिसाळ, केंद्रीय शालेय शिक्षण सचिव संजय कुमार, उच्च शिक्षण सचिव के.संजय मूर्ती, विभागीय आयुक्त सौरभ राव, पुणे महानगरपालिका आयुक्त विक्रम कुमार, जिल्हाधिकारी डॉ.राजेश देशमुख, कुलगुरू प्रा. सुरेश गोसावी आदी उपस्थित होते.

स्वागताच्यावेळी करण्यात आलेल्या मल्लखांब प्रात्यक्षिकांनी पाहुण्यांची मने जिंकली. मर्दानी खेळ आणि लोककलांचेही यावेळी सादरीकरण करण्यात आले.

*सांस्कृतिक कार्यक्रमातून भारताच्या सांस्कृतिक वैभवाचे दर्शन*
भारताच्या विविध प्रांतातील लोकनृत्य यावेळी सादर करण्यात आले. त्यातून विविधरंगी भारतीय संस्कृती आणि सांस्कृतिक वैभवाचे दर्शन पाहुण्यांना घडले. बांबू नृत्य, ढोल नृत्य, दीप नृत्य, घुमर नृत्य, गरबा नृत्य, पंजाबी भांगडा, नागालँडचे लोकनृत्य, मध्यप्रदेशचे लोकनृत्य, महाराष्ट्राचे कोळी आणि लावणी नृत्य, कथ्थक आदी नृत्यप्रकार यावेळी सादर करण्यात आले. ‘कलर्स ऑफ इंडिया’ या संकल्पनेखाली कार्यक्रमाच्या शेवटी ‘वंदे मातरम’ या गीतावर सादर करण्यात आलेल्या भारतीय लोकनृत्यांच्या सप्तरंगी दर्शनाने उपस्थित प्रतिनिधी मोहित झाले. कार्यक्रम झाल्यावर काही पाहुण्यांनी स्वतः लेझीम, फुगडीचा आनंद घेतला.

कार्यक्रमाला विविध क्षेत्रातील मान्यवर उपस्थित होते.

पुणे चक्राकार रस्त्यासाठी भूसंपादन प्रक्रियेला गती द्यावी- जिल्हाधिकारी डॉ. राजेश देशमुख

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पुणे दि. २६: राज्य शासनाचा महत्त्वाकांक्षी प्रकल्प असलेला प्रस्तावित पुणे चक्राकार रस्ता हा प्रकल्प केवळ पुण्यासाठीच नव्हे तर राज्य आणि देशाच्यादृष्टीने महत्त्वाचा प्रकल्प असून सर्व जमीनधारकांना विश्वासात घेऊन या प्रकल्पासाठीच्या भूसंपादन प्रक्रियेला गती द्यावी, असे निर्देश जिल्हाधिकारी डॉ. राजेश देशमुख यांनी दिले.

प्रस्तावित पुणे चक्राकार रस्त्याच्या (रिंग रोड) भूसंपादन प्रक्रियेला वेग देण्याच्या अनुषंगाने सर्व संबंधित यंत्रणांचे अधिकारी, भूसंपादन अधिकारी, प्रांताधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, मंडळ अधिकारी, तलाठी यांच्यासह महाराष्ट्र राज्य रस्ते विकास महामंडळाच्या अधिकाऱ्यांची संयुक्त कार्यशाळा जिल्हाधिकारी कार्यालयात आयोजित करण्यात आली होती. त्यावेळी ते बोलत होते. कार्यशाळेस महाराष्ट्र राज्य रस्ते विकास महामंडळाचे सह व्यवस्थापकीय संचालक कैलास जाधव, अधीक्षक अभियंता राहूल वसईकर, अपर जिल्हाधिकारी हणुमंत अरगुंडे आदी उपस्थित होते.

जिल्हाधिकारी डॉ. देशमुख म्हणाले, राज्याच्या सकल राज्य उत्पादनामध्ये (जीएसडीपी) पुणे शहर व जिल्ह्याचे 15 टक्के इतके योगदान असते. प्रस्तावित रिंग रोड मुळे वेगवान मालवाहतुकीला गती मिळून यामध्ये अधिक भर पडेल. त्यामुळे या प्रकल्पासाठी गतीने भूसंपादन प्रक्रिया करुन प्रकल्पाला सुरूवात होणे महत्त्वाचे आहे. या प्रकल्पात मोबदल्याची रक्कमही समाधानकारक निश्चित करण्यात आलेली असल्याने संमती करारनामे व संमती निवाड्यांना जास्तीत जास्त प्राधान्य द्यावे. संमती करारनाम्याद्वारे एकूण मोबदल्याच्या 25 टक्के अतिरिक्त वाढीव मोबदला प्राप्त होऊ शकतो. या बाबीसह पारदर्शक पद्धतीने, लोकांच्या सर्व शंकांचे शंभर टक्के निराकरण करत व योग्य दस्ताऐवजीकरण करत काम केल्यास सर्व प्रक्रिया गतीने आणि जमीनधारकांच्या सहकार्याने पूर्ण होईल, असा विश्वासही जिल्हाधिकाऱ्यांनी व्यक्त केला.

गेल्या 2 वर्षात पुणे जिल्ह्यातील महसूल, भूसंपादन, भूमी अभिलेख, मूल्यांकन आदी सर्वच विभागांनी अतिशय वेगाने काम करुन मेट्रो मार्ग, पालखी मार्ग, पुणे- मीरज नवीन ब्रॉडगेज लाईन, लोणंद- बारामती नवीन रेल्वेमार्ग, चांदणी चौक एकात्मिक प्रकल्प आदींसाठी भूसंपादन प्रक्रियेत वाखाणण्याजोगे काम केले आहे. त्यामुळे या प्रकल्पासाठीच्या भूसंपादनासाठीही आवश्यक नोटीसा देणे, गावनिहाय शिबीरे आयोजित करणे आदी प्रक्रिया राबवित जास्तीतजास्त संमतीनिवाडे होतील याकडे लक्ष द्यावे. या प्रक्रियेत ग्रामस्तरीय तलाठी, मंडळ अधिकारी, नायब तहसीलदार, भूकरमापक यांची अत्यंत महत्त्वाची भूमिका आहे, असेही ते म्हणाले.

जिल्हा, राज्य आणि देशाच्या प्रगतीमध्ये भर घालण्याऱ्या या प्रकल्पामध्ये आपला सहभाग असेल या अभिमानाच्या भावनेतून या भूसंपादन प्रक्रियेत काम करा, अशा शब्दात महसूल विभाग व सर्व संबंधित अधिकाऱ्यांना डॉ. देशमुख यांनी आवाहन केले.

एमएसआरडीसीचे सह व्यवस्थापकीय संचालक कैलास जाधव म्हणाले, हा प्रकल्प पूर्ण झाल्यानंतर पुण्यामध्ये येणारी 30 ते 40 टक्के वाहतूक बाहेरच्या बाहेरून मार्गस्थ होईल. त्यामुळे शहरातील वाहतूक कोंडीची समस्या, पुणेकरांचा त्रास मोठ्या प्रमाणात कमी होईल. त्यामुळे आता पुणे (पश्चिम) चक्राकार मार्गाच्या भूसंपादन प्रक्रियेला गती द्यायची असून पूर्व चक्राकार मार्गासाठीच्या भूसंपादनाबाबतही वेळेत नियोजन करण्यात येईल. एमएसआरडीसी ही राज्यातच नव्हे तर देशात जमीनीचा सर्वाधिक मोबदला देणारी यंत्रणा, असल्याचेही ते म्हणाले.

यावेळी एमएसआरडीसीचे अपर जिल्हाधिकारी श्री. अरगुंडे यांनी भूसंपादन प्रक्रिया आदीच्या अनुषंगाने यावेळी मार्गदर्शन केले.

कार्यशाळेस जिल्हा अधीक्षक भूमि अभिलेख सूर्यकांत मोरे, सहायक संचालक नगररचना अभिजीत केतकर, भूसंपादन (समन्वय) उपजिल्हाधिकारी प्रविण साळुंखे आदी उपस्थित होते.

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