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आज का हिन्दू पंचांग  दिनांक – 10 सितम्बर 2023 दिन – रविवार

आज का हिन्दू पंचांग
दिनांक – 10 सितम्बर 2023
दिन – रविवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – शरद*
*⛅मास – भाद्रपद (गुजरात महाराष्ट्र में श्रावण)*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – एकादशी रात्रि 09:28 तक तत्पश्चात द्वादशी*
*⛅नक्षत्र – पुनर्वसु शाम 05:06 तक तत्पश्चात पुष्य*
*⛅योग – वरियान रात्रि 11:20 तक तत्पश्चात परिघ*
*⛅राहु काल – शाम 05:16 से दोपहर 06:49 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:24*
*⛅सूर्यास्त – 06:49*
*⛅दिशा शूल – पश्चिम दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:52 से 05:38 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:14 से 01:00 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – अजा एकादशी, रविपुष्यामृत योग (शाम 05:06 से 11 सितम्बर सूर्योदय तक)*
*⛅विशेष – एकादशी को शिम्बी (सेम) खाने से पुत्र का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🌹रविपुष्यामृत योग – 10 सितम्बर 2023*

*🔸पुण्यकाल : शाम 05:06 से 11 सितम्बर सूर्योदय तक ।*

*🌹 पुष्य नक्षत्र का रविवार के साथ का संयोग “रविपुष्यामृत योग” कहलाता है । सर्वसिद्धिकरः पुष्यः । ‘ इस शास्त्रवचन के अनुसार पुष्य नक्षत्र सर्वसिद्धिकर है ।*

*🌹 यह योग मंत्रसिद्धि और औषधि – प्रयोग के लिए विशेष फलदायी है ।*

*🌹 इस योग में किया गया जप-ध्यान, दान-पुण्य महाफलदायी होता है परंतु पुष्य में विवाह व उससे संबंधित सभी मांगलिक कार्य वर्जित हैं । (शिव पुराण)*

*🌹अजा एकादशी – 10 सितम्बर 2023*

*🔸एकादशी तिथि 09 सितम्बर रात्रि 07:17 बजे से प्रारम्भ 10 सितम्बर रात्रि 09:28 बजे तक ।*

*🔹एकादशी में क्या करें, क्या न करें ?🔹*

*🌹1. एकादशी को लकड़ी का दातुन तथा पेस्ट का उपयोग न करें । नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और उँगली से कंठ शुद्ध कर लें । वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है, अत: स्वयं गिरे हुए पत्ते का सेवन करें ।*

*🌹2. स्नानादि कर के गीता पाठ करें, श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें ।*

*🌹हर एकादशी को श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है ।*
*राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।*
*सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ।।*

*एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से श्री विष्णुसहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l*

*🌹3. `ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ इस द्वादश अक्षर मंत्र अथवा गुरुमंत्र का जप करना चाहिए ।*

*🌹4. चोर, पाखण्डी और दुराचारी मनुष्य से बात नहीं करना चाहिए, यथा संभव मौन रहें ।*

*🌹5. एकादशी के दिन भूल कर भी चावल नहीं खाना चाहिए न ही किसी को खिलाना चाहिए । इस दिन फलाहार अथवा घर में निकाला हुआ फल का रस अथवा दूध या जल पर रहना लाभदायक है ।*

*🌹6. व्रत के (दशमी, एकादशी और द्वादशी) – इन तीन दिनों में काँसे के बर्तन, मांस, प्याज, लहसुन, मसूर, उड़द, चने, कोदो (एक प्रकार का धान), शाक, शहद, तेल और अत्यम्बुपान (अधिक जल का सेवन) – इनका सेवन न करें ।*

*🌹7. फलाहारी को गोभी, गाजर, शलजम, पालक, कुलफा का साग इत्यादि सेवन नहीं करना चाहिए । आम, अंगूर, केला, बादाम, पिस्ता इत्यादि अमृत फलों का सेवन करना चाहिए ।*

*🌹8. जुआ, निद्रा, पान, परायी निन्दा, चुगली, चोरी, हिंसा, मैथुन, क्रोध तथा झूठ, कपटादि अन्य कुकर्मों से नितान्त दूर रहना चाहिए ।*

*🌹9. भूलवश किसी निन्दक से बात हो जाय तो इस दोष को दूर करने के लिए भगवान सूर्य के दर्शन तथा धूप-दीप से श्रीहरि की पूजा कर क्षमा माँग लेनी चाहिए ।*

*🌹10. एकादशी के दिन घर में झाडू नहीं लगायें । इससे चींटी आदि सूक्ष्म जीवों की मृत्यु का भय रहता है ।*

*🌹11. इस दिन बाल नहीं कटायें ।*

*🌹12. इस दिन यथाशक्ति अन्नदान करें किन्तु स्वयं किसीका दिया हुआ अन्न कदापि ग्रहण न करें ।*

*🌹13. एकादशी की रात में भगवान विष्णु के आगे जागरण करना चाहिए (जागरण रात्र 1 बजे तक) ।*

*🌹14. जो श्रीहरि के समीप जागरण करते समय रात में दीपक जलाता है, उसका पुण्य सौ कल्पों में भी नष्ट नहीं होता है ।*

*🔹 इस विधि से व्रत करनेवाला उत्तम फल को प्राप्त करता है ।*

*🌞🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

आज का हिन्दू पंचांग  दिनांक – 10 सितम्बर 2023 दिन – रविवार

आज का हिन्दू पंचांग
दिनांक – 10 सितम्बर 2023
दिन – रविवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – शरद*
*⛅मास – भाद्रपद (गुजरात महाराष्ट्र में श्रावण)*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – एकादशी रात्रि 09:28 तक तत्पश्चात द्वादशी*
*⛅नक्षत्र – पुनर्वसु शाम 05:06 तक तत्पश्चात पुष्य*
*⛅योग – वरियान रात्रि 11:20 तक तत्पश्चात परिघ*
*⛅राहु काल – शाम 05:16 से दोपहर 06:49 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:24*
*⛅सूर्यास्त – 06:49*
*⛅दिशा शूल – पश्चिम दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:52 से 05:38 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:14 से 01:00 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – अजा एकादशी, रविपुष्यामृत योग (शाम 05:06 से 11 सितम्बर सूर्योदय तक)*
*⛅विशेष – एकादशी को शिम्बी (सेम) खाने से पुत्र का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🌹रविपुष्यामृत योग – 10 सितम्बर 2023*

*🔸पुण्यकाल : शाम 05:06 से 11 सितम्बर सूर्योदय तक ।*

*🌹 पुष्य नक्षत्र का रविवार के साथ का संयोग “रविपुष्यामृत योग” कहलाता है । सर्वसिद्धिकरः पुष्यः । ‘ इस शास्त्रवचन के अनुसार पुष्य नक्षत्र सर्वसिद्धिकर है ।*

*🌹 यह योग मंत्रसिद्धि और औषधि – प्रयोग के लिए विशेष फलदायी है ।*

*🌹 इस योग में किया गया जप-ध्यान, दान-पुण्य महाफलदायी होता है परंतु पुष्य में विवाह व उससे संबंधित सभी मांगलिक कार्य वर्जित हैं । (शिव पुराण)*

*🌹अजा एकादशी – 10 सितम्बर 2023*

*🔸एकादशी तिथि 09 सितम्बर रात्रि 07:17 बजे से प्रारम्भ 10 सितम्बर रात्रि 09:28 बजे तक ।*

*🔹एकादशी में क्या करें, क्या न करें ?🔹*

*🌹1. एकादशी को लकड़ी का दातुन तथा पेस्ट का उपयोग न करें । नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और उँगली से कंठ शुद्ध कर लें । वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है, अत: स्वयं गिरे हुए पत्ते का सेवन करें ।*

*🌹2. स्नानादि कर के गीता पाठ करें, श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें ।*

*🌹हर एकादशी को श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है ।*
*राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।*
*सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ।।*

*एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से श्री विष्णुसहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l*

*🌹3. `ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ इस द्वादश अक्षर मंत्र अथवा गुरुमंत्र का जप करना चाहिए ।*

*🌹4. चोर, पाखण्डी और दुराचारी मनुष्य से बात नहीं करना चाहिए, यथा संभव मौन रहें ।*

*🌹5. एकादशी के दिन भूल कर भी चावल नहीं खाना चाहिए न ही किसी को खिलाना चाहिए । इस दिन फलाहार अथवा घर में निकाला हुआ फल का रस अथवा दूध या जल पर रहना लाभदायक है ।*

*🌹6. व्रत के (दशमी, एकादशी और द्वादशी) – इन तीन दिनों में काँसे के बर्तन, मांस, प्याज, लहसुन, मसूर, उड़द, चने, कोदो (एक प्रकार का धान), शाक, शहद, तेल और अत्यम्बुपान (अधिक जल का सेवन) – इनका सेवन न करें ।*

*🌹7. फलाहारी को गोभी, गाजर, शलजम, पालक, कुलफा का साग इत्यादि सेवन नहीं करना चाहिए । आम, अंगूर, केला, बादाम, पिस्ता इत्यादि अमृत फलों का सेवन करना चाहिए ।*

*🌹8. जुआ, निद्रा, पान, परायी निन्दा, चुगली, चोरी, हिंसा, मैथुन, क्रोध तथा झूठ, कपटादि अन्य कुकर्मों से नितान्त दूर रहना चाहिए ।*

*🌹9. भूलवश किसी निन्दक से बात हो जाय तो इस दोष को दूर करने के लिए भगवान सूर्य के दर्शन तथा धूप-दीप से श्रीहरि की पूजा कर क्षमा माँग लेनी चाहिए ।*

*🌹10. एकादशी के दिन घर में झाडू नहीं लगायें । इससे चींटी आदि सूक्ष्म जीवों की मृत्यु का भय रहता है ।*

*🌹11. इस दिन बाल नहीं कटायें ।*

*🌹12. इस दिन यथाशक्ति अन्नदान करें किन्तु स्वयं किसीका दिया हुआ अन्न कदापि ग्रहण न करें ।*

*🌹13. एकादशी की रात में भगवान विष्णु के आगे जागरण करना चाहिए (जागरण रात्र 1 बजे तक) ।*

*🌹14. जो श्रीहरि के समीप जागरण करते समय रात में दीपक जलाता है, उसका पुण्य सौ कल्पों में भी नष्ट नहीं होता है ।*

*🔹 इस विधि से व्रत करनेवाला उत्तम फल को प्राप्त करता है ।*

*🌞🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 09 सितम्बर 2023 दिन – शनिवार

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 09 सितम्बर 2023 दिन – शनिवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – शरद*
*⛅मास – भाद्रपद (गुजरात महाराष्ट्र में श्रावण)*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – दशमी रात्रि 07:17 तक तत्पश्चात एकादशी*
*⛅नक्षत्र – आर्द्रा दोपहर 02:26 तक तत्पश्चात पुनर्वसु*
*⛅योग – व्यतिपात रात्रि 10:36 तक तत्पश्चात वरियान*
*⛅राहु काल – सुबह 09:31 से दोपहर 11:04 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:24*
*⛅सूर्यास्त – 06:50*
*⛅दिशा शूल – पूर्व दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:52 से 05:38 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:14 से 01:01 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण -व्यतिपात योग*
*⛅विशेष – दशमी को कलंबी शाक त्याज्य है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🔹व्यतिपात योग🔹*

*🔸समय अवधि : 08 सितम्बर रात्रि 10:07 से 09 सितम्बर रात्रि 10:36 तक*

*🔸व्यतिपात योग में किया हुआ जप, तप, मौन, दान व ध्यान का फल १ लाख गुना होता है । – वराह पुराण*

*🔸रविपुष्यामृत योग – 10 सितम्बर 2023*

*(शाम 05:06 से 11 सितम्बर सूर्योदय तक)*

*🔹कैसे बदले दुर्भाग्य को सौभाग्य में🔹*

*🌹 बरगद के पत्ते पर गुरुपुष्य या रविपुष्य योग में हल्दी से स्वस्तिक बनाकर घर में रखें ।*

*🌹अजा एकादशी : 10 सितम्बर 2023*

*🔸एकादशी तिथि 09 सितम्बर रात्रि 07:17 बजे से 10 सितम्बर रात्रि 09:28 बजे तक ।*

*🔸व्रत उपवास 10 सितम्बर रविवार को रखा जायेगा ।*

*🔸एकादशी व्रत के लाभ🔸*

*👉 एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है ।*

*👉 जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।*

*👉 जो पुण्य गौ-दान, सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।*

*👉 एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं । इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है ।*

*👉 धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है ।*

*👉 कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है ।*

*🌹 शनिवार के दिन विशेष प्रयोग 🌹*

*🌹 शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है । (ब्रह्म पुराण)*

*🌹 हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है । (पद्म पुराण)*

*🔹आर्थिक कष्ट निवारण हेतु🔹*

*🔹एक लोटे में जल, दूध, गुड़ और काले तिल मिलाकर हर शनिवार को पीपल के मूल में चढ़ाने तथा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र जपते हुए पीपल की ७ बार परिक्रमा करने से आर्थिक कष्ट दूर होता है ।*

*🌞🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 09 सितम्बर 2023 दिन – शनिवार

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 09 सितम्बर 2023 दिन – शनिवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – शरद*
*⛅मास – भाद्रपद (गुजरात महाराष्ट्र में श्रावण)*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – दशमी रात्रि 07:17 तक तत्पश्चात एकादशी*
*⛅नक्षत्र – आर्द्रा दोपहर 02:26 तक तत्पश्चात पुनर्वसु*
*⛅योग – व्यतिपात रात्रि 10:36 तक तत्पश्चात वरियान*
*⛅राहु काल – सुबह 09:31 से दोपहर 11:04 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:24*
*⛅सूर्यास्त – 06:50*
*⛅दिशा शूल – पूर्व दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:52 से 05:38 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:14 से 01:01 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण -व्यतिपात योग*
*⛅विशेष – दशमी को कलंबी शाक त्याज्य है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🔹व्यतिपात योग🔹*

*🔸समय अवधि : 08 सितम्बर रात्रि 10:07 से 09 सितम्बर रात्रि 10:36 तक*

*🔸व्यतिपात योग में किया हुआ जप, तप, मौन, दान व ध्यान का फल १ लाख गुना होता है । – वराह पुराण*

*🔸रविपुष्यामृत योग – 10 सितम्बर 2023*

*(शाम 05:06 से 11 सितम्बर सूर्योदय तक)*

*🔹कैसे बदले दुर्भाग्य को सौभाग्य में🔹*

*🌹 बरगद के पत्ते पर गुरुपुष्य या रविपुष्य योग में हल्दी से स्वस्तिक बनाकर घर में रखें ।*

*🌹अजा एकादशी : 10 सितम्बर 2023*

*🔸एकादशी तिथि 09 सितम्बर रात्रि 07:17 बजे से 10 सितम्बर रात्रि 09:28 बजे तक ।*

*🔸व्रत उपवास 10 सितम्बर रविवार को रखा जायेगा ।*

*🔸एकादशी व्रत के लाभ🔸*

*👉 एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है ।*

*👉 जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।*

*👉 जो पुण्य गौ-दान, सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।*

*👉 एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं । इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है ।*

*👉 धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है ।*

*👉 कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है ।*

*🌹 शनिवार के दिन विशेष प्रयोग 🌹*

*🌹 शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है । (ब्रह्म पुराण)*

*🌹 हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है । (पद्म पुराण)*

*🔹आर्थिक कष्ट निवारण हेतु🔹*

*🔹एक लोटे में जल, दूध, गुड़ और काले तिल मिलाकर हर शनिवार को पीपल के मूल में चढ़ाने तथा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र जपते हुए पीपल की ७ बार परिक्रमा करने से आर्थिक कष्ट दूर होता है ।*

*🌞🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

आज का हिन्दू पंचांग  दिनांक – 08 सितम्बर 2023 दिन – शुक्रवार

आज का हिन्दू पंचांग
दिनांक – 08 सितम्बर 2023
दिन – शुक्रवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – शरद*
*⛅मास – भाद्रपद (गुजरात महाराष्ट्र में श्रावण)*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – नवमी शाम 05:30 तक तत्पश्चात दशमी*
*⛅नक्षत्र – मृगशिरा दोपहर 12:19 तक तत्पश्चात आर्द्रा*
*⛅योग – सिद्धि रात्रि 10:07 तक तत्पश्चात व्यतिपात*
*⛅राहु काल – सुबह 11:04 से दोपहर 12:37 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:24*
*⛅सूर्यास्त – 06:51*
*⛅दिशा शूल – पश्चिम दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:52 से 05:38 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:14 से 01:01 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – नंद महोत्सव, गोगा नवमी*
*⛅विशेष – नवमी को लौकी खाना त्याज्य है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🔹व्यतिपात योग🔹*

*🔸समय अवधि : 08 सितम्बर रात्रि 10:07 से 09 सितम्बर रात्रि 10:36 तक*

*🔸व्यतिपात योग में किया हुआ जप, तप, मौन, दान व ध्यान का फल १ लाख गुना होता है । – वराह पुराण*

*🔹 आचमन तीन बार क्यों ?*🔹

🔹 *प्राय: प्रत्येक धर्मानुष्ठान के आरम्भ में और विशेषरूप से संध्योपासना में ३ बार आचमन करने का शास्त्रीय विधान है । धर्मग्रंथों में कहा गया है कि ३ बार जल का आचमन करने से तीनों वेद अर्थात ऋग्वेद, यजुर्वेद व सामवेद प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं । मनु महाराज ने भी कहा है : त्रिराचमेद्प: पूर्वम । (मनुस्मृति :२.६०)*

*🔹अर्थात सबसे पहले ३ बार जल से आचमन करना चाहिए । इससे जहाँ कायिक, मानसिक एवं वाचिक–त्रिविध पापों की निवृत्ति होती है वहीँ कंठशोष ( कंठ की शुष्कता) दूर होने और कफ-निवृत्ति होने से श्वास-प्रश्वास क्रिया में मंत्रादि के शुद्ध उच्चारण में भी मदद मिलती है । प्राणायाम करते समय प्राणनिरोध से स्वभावतः शरीर में ऊष्मा बढ़ जाती है, कभी-कभी तो ऋतू के तारतम्य से तालू सूख जाने से हिचकी तक आने लग जाती है । आचमन करते ही यह सब ठीक हो जाता है ।*

*🔹बोधायन सूत्र के अनुसार आचमन-विधि :🔹*

*🔹(दायें) हाथ की हथेली को गाय के कान की तरह आकृति प्रदान कर उससे ३ बार जल पीना चाहिए ।*

*🔹शास्त्र-रीति के अनुसार आचमन में चुल्लू जितना जल नहीं पिया जाता बल्कि उतने ही प्रमाण में जल ग्रहण करने की विधि है जितना कि कंठ व तालू को स्पर्श करता हुआ हृदयचक्र की सीमा तक ही समाप्त हो जाय ।*

*🔹 सत्संग-अमृत में आता है : संध्या में आचमन किया जाता है । इस आचमन से कफ-संबंधी दोषों का शमन होता है, नाड़ियों के शोधन में व ध्यान-भजन में कुछ मदद मिलती है ।*

🔹 *ध्यान-भजन में बैठे तो पहले तीन आचमन कर लेने चाहिए, नहीं तो सिर में वायु चढ़ जाती है, ध्यान नहीं लगता, आलस्य आता है, मनोराज चलता है, कल्पना चलती है । आचमन से प्राणवायु का संतुलन हो जाता है ।*

*🔹आचमन से मिले शान्ति व पुण्याई🔹*

🔹 *’ॐ केशवाय नम: । ॐ नारायणाय नम: । ॐ माधवाय नम: ।’ कहकर जल के ३ आचमन लेते हैं तो जल में जो यह भगवदभाव, आदरभाव है इससे शांति, पुण्याई होती है ।*

*🔹इससे भी हो जाती है शुद्धि*🔹

*🔹जप करने के लिए आसन पर बैठकर सबसे पहले शुद्धि की भावना के साथ हाथ धो के पानी के ३ आचमन ले लो । जप करते हुए छींक, जम्हाई या खाँसी आ जाय, अपानवायु छूटे तो यह अशुद्धि है । वह माला नियत संख्या में नहीं गिननी चाहिए । आचमन करके शुद्ध होने के बाद वह माला फिर से करनी चाहिए । आचमन के बदले ‘ॐ’ सम्पुट के साथ गुरुमंत्र ७ बार दुहरा दिया जाय तो भी शुद्धि हो जायेगी । जैसे, मन्त्र है ‘नम: शिवाय’ तो ७ बार ‘ॐ नम:शिवाय ॐ’ दुहरा देने से पड़ा हुआ विघ्न निवृत्त हो जायेगा ।*

*🌞🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

आज का हिन्दू पंचांग  दिनांक – 08 सितम्बर 2023 दिन – शुक्रवार

आज का हिन्दू पंचांग
दिनांक – 08 सितम्बर 2023
दिन – शुक्रवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – शरद*
*⛅मास – भाद्रपद (गुजरात महाराष्ट्र में श्रावण)*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – नवमी शाम 05:30 तक तत्पश्चात दशमी*
*⛅नक्षत्र – मृगशिरा दोपहर 12:19 तक तत्पश्चात आर्द्रा*
*⛅योग – सिद्धि रात्रि 10:07 तक तत्पश्चात व्यतिपात*
*⛅राहु काल – सुबह 11:04 से दोपहर 12:37 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:24*
*⛅सूर्यास्त – 06:51*
*⛅दिशा शूल – पश्चिम दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:52 से 05:38 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:14 से 01:01 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – नंद महोत्सव, गोगा नवमी*
*⛅विशेष – नवमी को लौकी खाना त्याज्य है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🔹व्यतिपात योग🔹*

*🔸समय अवधि : 08 सितम्बर रात्रि 10:07 से 09 सितम्बर रात्रि 10:36 तक*

*🔸व्यतिपात योग में किया हुआ जप, तप, मौन, दान व ध्यान का फल १ लाख गुना होता है । – वराह पुराण*

*🔹 आचमन तीन बार क्यों ?*🔹

🔹 *प्राय: प्रत्येक धर्मानुष्ठान के आरम्भ में और विशेषरूप से संध्योपासना में ३ बार आचमन करने का शास्त्रीय विधान है । धर्मग्रंथों में कहा गया है कि ३ बार जल का आचमन करने से तीनों वेद अर्थात ऋग्वेद, यजुर्वेद व सामवेद प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं । मनु महाराज ने भी कहा है : त्रिराचमेद्प: पूर्वम । (मनुस्मृति :२.६०)*

*🔹अर्थात सबसे पहले ३ बार जल से आचमन करना चाहिए । इससे जहाँ कायिक, मानसिक एवं वाचिक–त्रिविध पापों की निवृत्ति होती है वहीँ कंठशोष ( कंठ की शुष्कता) दूर होने और कफ-निवृत्ति होने से श्वास-प्रश्वास क्रिया में मंत्रादि के शुद्ध उच्चारण में भी मदद मिलती है । प्राणायाम करते समय प्राणनिरोध से स्वभावतः शरीर में ऊष्मा बढ़ जाती है, कभी-कभी तो ऋतू के तारतम्य से तालू सूख जाने से हिचकी तक आने लग जाती है । आचमन करते ही यह सब ठीक हो जाता है ।*

*🔹बोधायन सूत्र के अनुसार आचमन-विधि :🔹*

*🔹(दायें) हाथ की हथेली को गाय के कान की तरह आकृति प्रदान कर उससे ३ बार जल पीना चाहिए ।*

*🔹शास्त्र-रीति के अनुसार आचमन में चुल्लू जितना जल नहीं पिया जाता बल्कि उतने ही प्रमाण में जल ग्रहण करने की विधि है जितना कि कंठ व तालू को स्पर्श करता हुआ हृदयचक्र की सीमा तक ही समाप्त हो जाय ।*

*🔹 सत्संग-अमृत में आता है : संध्या में आचमन किया जाता है । इस आचमन से कफ-संबंधी दोषों का शमन होता है, नाड़ियों के शोधन में व ध्यान-भजन में कुछ मदद मिलती है ।*

🔹 *ध्यान-भजन में बैठे तो पहले तीन आचमन कर लेने चाहिए, नहीं तो सिर में वायु चढ़ जाती है, ध्यान नहीं लगता, आलस्य आता है, मनोराज चलता है, कल्पना चलती है । आचमन से प्राणवायु का संतुलन हो जाता है ।*

*🔹आचमन से मिले शान्ति व पुण्याई🔹*

🔹 *’ॐ केशवाय नम: । ॐ नारायणाय नम: । ॐ माधवाय नम: ।’ कहकर जल के ३ आचमन लेते हैं तो जल में जो यह भगवदभाव, आदरभाव है इससे शांति, पुण्याई होती है ।*

*🔹इससे भी हो जाती है शुद्धि*🔹

*🔹जप करने के लिए आसन पर बैठकर सबसे पहले शुद्धि की भावना के साथ हाथ धो के पानी के ३ आचमन ले लो । जप करते हुए छींक, जम्हाई या खाँसी आ जाय, अपानवायु छूटे तो यह अशुद्धि है । वह माला नियत संख्या में नहीं गिननी चाहिए । आचमन करके शुद्ध होने के बाद वह माला फिर से करनी चाहिए । आचमन के बदले ‘ॐ’ सम्पुट के साथ गुरुमंत्र ७ बार दुहरा दिया जाय तो भी शुद्धि हो जायेगी । जैसे, मन्त्र है ‘नम: शिवाय’ तो ७ बार ‘ॐ नम:शिवाय ॐ’ दुहरा देने से पड़ा हुआ विघ्न निवृत्त हो जायेगा ।*

*🌞🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

चेतना इंटरनॅशनल स्कूल सरडेवाडी येथे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्साहात साजरा

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चेतना इंटरनॅशनल स्कूल सरडेवाडी येथे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्साहात साजरा

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चेतना इंटरनॅशनल स्कूल सरडेवाडी येथे 6 सप्टेंबर 2023 रोजी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मोठ्या उत्साहात साजरा करण्यात आली. कृष्ण जन्माष्टमी म्हणजे भगवान कृष्णाचा जन्मदिवस. श्रावण महिन्यातील वद्य अष्टमीला भगवान कृष्णाचा जन्म झाला होता. भारतात गोकुळ, मथुरा, वृंदावन, द्वारका आणि पुरी येथे हा सणाला फार महत्त्व आहे. त्यामुळे देशभरात जन्माष्टमीच्या हार्दिक शुभेच्छा देत हा सण उत्त्साहात साजरा केला जातो.
चेतना इंटरनॅशनल स्कूल सरडेवाडी येथे जन्माष्टमीचा हा दिवस खूप आनंदात साजरा केला गेला .या कार्यक्रमाच्या वेळी मा.अध्यक्ष उदय देशपांडे सर , मा. सचिव विलास भोसले सर, मा.खजिनदार सोमनाथ माने सर उपस्थित होते. स्कूलच्या प्रिन्सिपल मा.निकिता माने मॅडम यांनी सर्व विद्यार्थ्यांना श्रीकृष्ण जन्माष्टमीची माहिती सांगितली.
या दिवशी शाळेतील सर्व विद्यार्थी राधा कृष्णाचे वेशभूषा परिधान करून आले होते. शाळेसमोर एक छोटीशी मटकी बांधण्यात आली होती.सर्व विद्यार्थ्यांनी दहीहंडी फोडण्याचा आनंद घेतला.नंतर सर्व विद्यार्थ्यांना खाऊ वाटप करण्यात आले.
कार्यक्रमाची सांगता आभार प्रदर्शनाने झाली आणि सर्वात शेवटी वंदे मातरम घेऊन कार्यक्रम संपला असे जाहीर करण्यात आले.

सुंदर विचार 100

मानव इच्छाशक्ति की शक्ति अपरिमेय है, लेकिन इसकी पूर्ति उसकी दृढ़ता पर निर्भर करती है। सच्चा लक्ष्य वास्तव में ईश्वर-प्राप्ति है जो हमें पूर्ण संतुष्टि दे सकता है। अन्य सभी लक्ष्य हमें मृत्यु के समय असंतुष्ट छोड़ देते हैं।

Ramvarma Asabe

आज का हिन्दू पंचांग  दिनांक – 07 सितम्बर 2023 दिन – गुरुवार

आज का हिन्दू पंचांग
दिनांक – 07 सितम्बर 2023
दिन – गुरुवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – शरद*
*⛅मास – भाद्रपद (गुजरात महाराष्ट्र में श्रावण)*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – अष्टमी शाम 04:14 तक तत्पश्चात नवमी*
*⛅नक्षत्र – रोहिणी सुबह 10:25 तक तत्पश्चात मृगशिरा*
*⛅योग – वज्र रात्रि 10:02 तक तत्पश्चात सिद्धि*
*⛅राहु काल – दोपहर 02:11 से 03:45 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:24*
*⛅सूर्यास्त – 06:52*
*⛅दिशा शूल – दक्षिण दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:51 से 05:38 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:15 से 01:01 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – श्रीकॄष्ण जन्माष्टमी (वैष्णव), दही हांडी*
*⛅विशेष – अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🌹 जन्माष्टमी (वैष्णव)- 07 सितम्बर 2023 🌹*

*🔸२० करोड़ एकादशी के समान व्रत🔸*

*👉 श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उपवास अवश्य करना चाहिए । २० करोड़ एकादशी व्रत के समान अकेला जन्माष्टमी का व्रत है ।*

*👉 जन्माष्टमी के दिन जो भोजन करते हैं उनको १०० ब्रह्महत्याओं का पाप लगता है व उनके करोड़ों जन्मों के पुण्य नष्ट हो जाते हैं ।*

*👉 जो लोग जन्माष्टमी का व्रत नहीं रखते वे दूसरे जन्मों में साँप आदि वीभत्स जीव जानवरों की योनि में जंगलों में भटकते रहते हैं ।*

*👉🏻 जो इस दिन व्रत रखते हैं उनके घर में धन-धान्य, पुत्र-पौत्र, सुख-शांति का वास होता है और सत्पुरुषों का सान्निध्य-सत्संग होता है तो उन्हें सद्गति प्राप्त होती है ।*

*🔹स्वादिष्ट और बलदायक केला🔹*

*🔹केला एक ऐसा विलक्षण फल है जो शारीरिक व बौद्धिक विकास के साथ उत्साहवर्धक भी है । पूजन-अर्चन आदि कार्यो में भी केले का महत्त्वपूर्ण स्थान है । केले में शर्करा, कैल्शियम, पोटैशियम, सोडियम, फोस्फोरस, प्रोटीन्स, विटामिन ए, बी, सी, डी एवं लौह, ताँबा, आयोडीन आदि तत्त्वों के साथ ऊर्जा का भरपूर खजाना है ।*

*लाभ – १] पका केला स्वादिष्ट, भूख बढ़ानेवाला, शीतल, पुष्टिकारक, मांस एवं वीर्यवर्धक, भूख-प्यास को मिटानेवाला तथा नेत्ररोग एवं प्रमेह में हितकर है ।*

*२] केला हड्डियों और दाँतों को मजबूती प्रदान करता है | छोटे बच्चों के शाररिक व बौद्धिक विकास के लिए केला अत्यंत गुणकारी है ।*

*३] एक पका केला रोजाना खिलाने से बच्चों का सुखा रोग मिटता है ।*

*४] यह शरीर व धातु की दुर्बलता दूर करता है, शरीर को स्फूर्तिवान तथा त्वचा को कांतिमय बनाता है और रोगप्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है ।*

*५] केला अन्न को पचाने में सहायक है । भोजन के साथ १-२ पके केले प्रतिदिन खाने से भूख बढ़ती है ।*

*६] खून की कमी को दूर करने तथा वजन बढ़ाने के लिए केला विशेष लाभाकरी है ।*

*🔹आसान घरेलू प्रयोग🔹*

*🔹स्वप्नदोष : २ अच्छे पके केलों का गुदा खूब घोंटकर उसमें १०-१० ग्राम शुद्ध शहद व आँवले का रस मिला के सुबह-शाम कुछ दिनों तक नियमित लेने से लाभ होता है ।*

*🔹प्रदर रोग – (महिलाओं की सफेद पानी पड़ने की बीमारी) : सुबह-शाम एक-एक खूब पका केला १० ग्राम गाय के घी के साथ खाने से करीब एक सप्ताह में ही लाभ होता है ।*

*🔹शीघ्रपतन : एक केले के साथ १० ग्राम शुद्ध शहद लगातार कम-से-कम १५ दिन तक सेवन करें | शीघ्रपतन के रोगियों के लिए यह रामबाण प्रयोग माना जाता है ।*

*🔹आमाशय व्रण (अल्सर) : पके केले खाने और भोजन में दूध व भात लेने से अल्सर में लाभ होता है ।*

*🔹उपरोक्त सभी प्रयोगों में अच्छे-से पके चित्तीदार केले धीरे-धीरे, खूब चबाते हुए खाने चाहिए । इससे केले आसानी से पच जाते है, अन्यथा पचने में भारी भी पड सकते हैं । अधिक केले खाने से अजीर्ण हो सकता है । केले के साथ इलायची खाने से वह शीघ्र पच जाता है । अदरक भी केला पचाने में सहायता करता है ।*

*🔹सावधानियाँ – केला भोजन के समय या बाद में खाना उचित है । मंदाग्नि, गुर्दों से संबधित बीमारियों, कफजन्य व्याधियों से पीड़ित व मोटे व्यक्तियों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए । केले को छिलका हटाने के बाद तुरुंत खा लेना चाहिए केले, अन्य फल व सब्जियों को फ्रिज में रखने से उनके पौष्टिक तत्त्व नष्ट होते हैं ।*

*🌞🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

कुणबी दाखले देण्याकरिता कार्यपद्धती निश्चितीसाठी निवृत्त न्यायाधीशांच्या अध्यक्षतेखाली समिती मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे यांची घोषणा

मुख्यमंत्री सचिवालय ( जनसंपर्क कक्ष)
बुधवार, दि. ६ सप्टेंबर, २०२३

कुणबी दाखले देण्याकरिता कार्यपद्धती निश्चितीसाठी निवृत्त न्यायाधीशांच्या अध्यक्षतेखाली समिती

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे यांची घोषणा

मुंबई, दि. ६ :- मराठवाड्यातील मराठा समाजाला कुणबी जातीचे प्रमाणपत्र देण्याकरिता कार्यपद्धती निश्चितीसाठी निवृत्त न्यायाधीशांच्या अध्यक्षतेखाली समितीची स्थापना करण्यात येत असल्याची घोषणा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे यांनी आज येथे केली.

आंदोलनाच्या माध्यमातून मनोज जारंगे – पाटील यांनी ‘निजामकालीन महसुली रेकॉर्ड तपासून याठिकाणी पूर्वी जे कुणबी म्हणून नोंदणीकृत होते त्यांना मान्यता’ देण्याची मागणी केली आहे. त्या अनुषंगाने ही समिती स्थापन करण्यात येत आहे.

ही समिती महसुली, शैक्षणिक व संबंधित नोंदी तपासून मागणीनुसार निजामकालीन ‘कुणबी’ नोंद असणाऱ्या मराठा समाजास ‘कुणबी’ दाखले देण्याकरिता अशा प्रकरणांची वैधानिक व प्रशासकीय तपासणी करणे व त्याबाबतची कार्यपद्धती (एसओपी) निश्चित करेल. याबाबत समिती अहवाल तयार करून तो एक महिन्यात शासनास सादर करेल. निवृत्त न्यायाधीश न्या. संदीप शिंदे यांच्या अध्यक्षतेखालील या समितीत महसूल विभागाचे अतिरिक्त मुख्य सचिव, विधी व न्याय विभागाचे प्रधान सचिव, तसेच संबंधित सर्व जिल्हयांचे जिल्हाधिकारी सदस्य म्हणून काम पाहतील. तसेच औरंगाबाद (छत्रपती संभाजी नगर)चे विभागीय आयुक्त समितीचे सदस्य सचिव असतील. यापुर्वीची महसूल विभागाच्या अतिरिक्त मुख्य सचिव यांच्या अध्यक्षतेखालील समिती देखील या समितीस पूरक माहिती देण्याचे काम करेल.

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