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सर्वलाभ की कुंजी* 🌷

🌷 *सर्वलाभ की कुंजी* 🌷

👉🏻 *कैसा भी बीमार व्यक्ति हो, उसको हरिनाम की, ‘हरि ॐ’ की साधना दे दो, चंगा होने लगेगा |* *बिल्कुल पक्की बात है !*
👉🏻 *आपको स्वस्थ रहना है तो भी भगवान का नाम, प्रसन्न तथा निरहंकारी रहना है तो भगवान का नाम, उद्योगी एवं साहसी होना है तो भगवान का नाम और पूर्वजों का मंगल करना है तो भी भगवान का नाम….|*

🌷 *व्यतिपात योग* 🌷
🙏🏻 *व्यतिपात योग की ऐसी महिमा है कि उस समय जप पाठ प्राणायम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की और विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता प्राप्त होती है जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ भी किया जाता है उसका १ लाख गुना फल मिलता है।*
🙏🏻 *वाराह पुराण में ये बात आती है व्यतिपात योग की।*
🙏🏻 *व्यतिपात योग माने क्या कि देवताओं के गुरु बृहस्पति की धर्मपत्नी तारा पर चन्द्र देव की गलत नजर थी जिसके कारण सूर्य देव अप्रसन्न हुऐ नाराज हुऐ, उन्होनें चन्द्रदेव को समझाया पर चन्द्रदेव ने उनकी बात को अनसुना कर दिया तो सूर्य देव को दुःख हुआ कि मैने इनको सही बात बताई फिर भी ध्यान नही दिया और सूर्यदेव को अपने गुरुदेव की याद आई कि कैसा गुरुदेव के लिये आदर प्रेम श्रद्धा होना चाहिये पर इसको इतना नही थोडा भूल रहा है ये, सूर्यदेव को गुरुदेव की याद आई और आँखों से आँसु बहे वो समय व्यतिपात योग कहलाता है। और उस समय किया हुआ जप, सुमिरन, पाठ, प्रायाणाम, गुरुदर्शन की खूब महिमा बताई है वाराह पुराण में।*
💥 *विशेष ~ 27 सितम्बर 2021 सोमवार को शाम 04:53 से 28 सितम्बर, मंगलवार को शाम 05:51 तक व्यतीपात योग है।*

🕉🐚⚔🚩🌞🇮🇳⚔🌷🙏🏻

सर्वलाभ की कुंजी* 🌷

🌷 *सर्वलाभ की कुंजी* 🌷

👉🏻 *कैसा भी बीमार व्यक्ति हो, उसको हरिनाम की, ‘हरि ॐ’ की साधना दे दो, चंगा होने लगेगा |* *बिल्कुल पक्की बात है !*
👉🏻 *आपको स्वस्थ रहना है तो भी भगवान का नाम, प्रसन्न तथा निरहंकारी रहना है तो भगवान का नाम, उद्योगी एवं साहसी होना है तो भगवान का नाम और पूर्वजों का मंगल करना है तो भी भगवान का नाम….|*

🌷 *व्यतिपात योग* 🌷
🙏🏻 *व्यतिपात योग की ऐसी महिमा है कि उस समय जप पाठ प्राणायम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की और विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता प्राप्त होती है जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ भी किया जाता है उसका १ लाख गुना फल मिलता है।*
🙏🏻 *वाराह पुराण में ये बात आती है व्यतिपात योग की।*
🙏🏻 *व्यतिपात योग माने क्या कि देवताओं के गुरु बृहस्पति की धर्मपत्नी तारा पर चन्द्र देव की गलत नजर थी जिसके कारण सूर्य देव अप्रसन्न हुऐ नाराज हुऐ, उन्होनें चन्द्रदेव को समझाया पर चन्द्रदेव ने उनकी बात को अनसुना कर दिया तो सूर्य देव को दुःख हुआ कि मैने इनको सही बात बताई फिर भी ध्यान नही दिया और सूर्यदेव को अपने गुरुदेव की याद आई कि कैसा गुरुदेव के लिये आदर प्रेम श्रद्धा होना चाहिये पर इसको इतना नही थोडा भूल रहा है ये, सूर्यदेव को गुरुदेव की याद आई और आँखों से आँसु बहे वो समय व्यतिपात योग कहलाता है। और उस समय किया हुआ जप, सुमिरन, पाठ, प्रायाणाम, गुरुदर्शन की खूब महिमा बताई है वाराह पुराण में।*
💥 *विशेष ~ 27 सितम्बर 2021 सोमवार को शाम 04:53 से 28 सितम्बर, मंगलवार को शाम 05:51 तक व्यतीपात योग है।*

🕉🐚⚔🚩🌞🇮🇳⚔🌷🙏🏻

मोदी जि को समजना:- विनोदकुमार महाजन

*मोदीजी को प्रधानमंत्री के रूप मे पिछले सात साल से देख रहा हूं…वैसे तो मोदी को समझना लगभग नामुमकिन है…*
*देश ही नही दुनिया के बड़े से बड़े धुरंधर भी महादेव के समर्पित भक्त मोदी को समझने मे मुंह की खा चुके है…*
*तो मेरी क्या बिसात है….*
*लेकिन मैने कुंडलनी जाग्रत कर चुके मोदी के व्यक्तित्व की पांच विशेषताओं को समझ कर आपको बताने का छोटा सा प्रयास किया है…!!*

*पहला… मोदी के अंदर का वो असीम और अथाह धैर्य है,जो उनको पराजित करने की कोशिश करने वालों को निरंतर परास्त करता रहा है… विरोधी उन्हे गाली देकर, आरोप लगा कर, झूठे तथ्यों के आधार पर लगातार उकसाते रहे, लेकिन वो बिना डिगे, बिना उत्तर दिये… बस अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे…*
*चरैवति चरैवति के सिद्धांत पर चलते हुये मोदी आज न केवल देश को विकास, शक्ति और प्रगति के मार्ग पर लेकर चल रहे है वरन् वैश्विक लीडर के रूप मे खुद को स्थापित कर चुके हैं…*
*आज पूरी दुनिया की राजनीति और कूटनीति मोदी के सम्मोहन के प्रभाव मे है…!*

*दूसरा…. उनका शानदार टाइम मैनेजमेंट, जिससे पिछले सात साल मे देशी विदेशी विरोधी निरंतर परास्त होते चले आ रहे हैं…*
*कब किसको क्या कहना है, किसको क्या दिखाना है, किसको क्या बताना है, यह मैनेजमेंट मोदी से बेहतर कोई नही जानता है*
*जैसे आज मोदी अमेरिका मे हैं, बाइडन से लेकर आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और जापान के राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात के साथ “क्वाड” को अटैंड करके UN को अगले दिनो मे संबोधित करने वालें है*
*ठीक इसी समय भारत अग्नि मिसाइल का एडवांस वर्जन लांच कर रहा है।*
*यही वो अग्नि सिरीज है जिसके नाम से कभी अमेरिका भड़क जाता था और आज मोदी उसी अमेरिका मे बैठ कर अग्नि मिसाइल लांच कर रहे हैं….*
*मतलब की दुनिया समझ ले कि ये गुलाबो फिरंगन वंश द्वारा कमजोर किया जा चुका भारत नही है..*
*आज अगर नजर टेढ़ा करोगे तो चबूतरा टेढ़ा कर देंगे वाला नया भारत है, चाहे कोई भी हो*
*चाणक्य के चक्रव्यूह से कोई नही बचेगा….!!*

*तीसरा गुण.. जो मुझे सबसे पसंद आता है कि उनके विरोधी जो मोदी के विरूद्ध षडयंत्र रचते है वो जाने कैसे अपने रचे षडयंत्र को पूरा करने से पहले ही ढ़ाल, तलवार रख कर पलायन करते दिखते हैं, ऐसा जाने कैसे मोदी कर पाते हैं, पता नही*
*लेकिन पिछले सात साल या कहूं गुजरात के CM बनने के बाद से ही मै देख रहा हूं कि परिणाम आने के बाद ही विरोधियों को मोदी की योजना का पता लगता है, उसके बाद बिचारे कलप कलप कर मोदी को कोसने वाली रूदालियां बन जाते हैं।*
*इस अवस्था मे ऐसी तीक्ष्ण निगाह….*
*यह बिरलों मे ही पायी जाती है…!!*

*चौथा… इतने सब देशी विदेशी दबाव के बाद भी मां हीराबेन के सपूत के चेहरे पर लेशमात्र तनाव मैने आज तक नही देखा, मोदी बच्चों के साथ बच्चे, नेता के साथ नेता, राजनेताओं के साथ राजनेता, और वैश्विक प्रभावशाली नेतृत्व के साथ आंख मे आंख मिला कर बात करने की ताकत रखते ही नही, इन सभी को अपने अनुसार ढ़ालने की क्षमता भी मोदी रखते हैं*
*तभी तो आजादी के बाद से अपने पूर्व गौरव को हासिल करने के लिये छटपटाता भारत*
*आज मोदी को पाकर धन्य हो गया है…!!*

*पांचवां…. अपने दल के इतने नेताओं मे से महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी देने के लिये बेहद काबिल व्यक्ति के साथ सक्षम और ईमानदार अधिकारियों का चुनाव करने की अद्भुत क्षमता रखना…*
*यही सब गुण मोदी को महामानव बना देता है….*
*जिसकी प्रतीक्षा राष्ट्रप्रेमी जनमानस सदियों से कर रहा था…*
*आज जब हमे चाणक्य, स्वामी विवेकानंद और सुभाषचंद बोस के सम्मिलित क्लोन के रूप मे “नरेन्द्र दामोदर दास मोदी” मिले हैं तो हमे उनको संजोना चाहिये….*
*क्योंकि नियति बार बार क्षमतावान नेतृत्व नही भेंट करती है…*
*बाकी मां सरस्वती के सपूत दिनकर जी के शब्दों मे कहूं तो…..*

*”वसुधा का नेता कौन हुआ?*
*भूखण्ड-विजेता कौन हुआ ?*
*अतुलित यश-क्रेता कौन हुआ?*
*नव-धर्म प्रणेता कौन हुआ ?*
*जिसने न कभी आराम किया,*
*विघ्नों में रहकर नाम किया।”*
*भारत माता की जय*
*वंदेमातरम* 🚩🇮🇳🎊🇮🇳🌹💐🚩🌹🙏🎊🌹🚩🙏🌹🇮🇳🌹💐🚩🙏🎊

मोदी जि को समजना:- विनोदकुमार महाजन

*मोदीजी को प्रधानमंत्री के रूप मे पिछले सात साल से देख रहा हूं…वैसे तो मोदी को समझना लगभग नामुमकिन है…*
*देश ही नही दुनिया के बड़े से बड़े धुरंधर भी महादेव के समर्पित भक्त मोदी को समझने मे मुंह की खा चुके है…*
*तो मेरी क्या बिसात है….*
*लेकिन मैने कुंडलनी जाग्रत कर चुके मोदी के व्यक्तित्व की पांच विशेषताओं को समझ कर आपको बताने का छोटा सा प्रयास किया है…!!*

*पहला… मोदी के अंदर का वो असीम और अथाह धैर्य है,जो उनको पराजित करने की कोशिश करने वालों को निरंतर परास्त करता रहा है… विरोधी उन्हे गाली देकर, आरोप लगा कर, झूठे तथ्यों के आधार पर लगातार उकसाते रहे, लेकिन वो बिना डिगे, बिना उत्तर दिये… बस अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे…*
*चरैवति चरैवति के सिद्धांत पर चलते हुये मोदी आज न केवल देश को विकास, शक्ति और प्रगति के मार्ग पर लेकर चल रहे है वरन् वैश्विक लीडर के रूप मे खुद को स्थापित कर चुके हैं…*
*आज पूरी दुनिया की राजनीति और कूटनीति मोदी के सम्मोहन के प्रभाव मे है…!*

*दूसरा…. उनका शानदार टाइम मैनेजमेंट, जिससे पिछले सात साल मे देशी विदेशी विरोधी निरंतर परास्त होते चले आ रहे हैं…*
*कब किसको क्या कहना है, किसको क्या दिखाना है, किसको क्या बताना है, यह मैनेजमेंट मोदी से बेहतर कोई नही जानता है*
*जैसे आज मोदी अमेरिका मे हैं, बाइडन से लेकर आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और जापान के राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात के साथ “क्वाड” को अटैंड करके UN को अगले दिनो मे संबोधित करने वालें है*
*ठीक इसी समय भारत अग्नि मिसाइल का एडवांस वर्जन लांच कर रहा है।*
*यही वो अग्नि सिरीज है जिसके नाम से कभी अमेरिका भड़क जाता था और आज मोदी उसी अमेरिका मे बैठ कर अग्नि मिसाइल लांच कर रहे हैं….*
*मतलब की दुनिया समझ ले कि ये गुलाबो फिरंगन वंश द्वारा कमजोर किया जा चुका भारत नही है..*
*आज अगर नजर टेढ़ा करोगे तो चबूतरा टेढ़ा कर देंगे वाला नया भारत है, चाहे कोई भी हो*
*चाणक्य के चक्रव्यूह से कोई नही बचेगा….!!*

*तीसरा गुण.. जो मुझे सबसे पसंद आता है कि उनके विरोधी जो मोदी के विरूद्ध षडयंत्र रचते है वो जाने कैसे अपने रचे षडयंत्र को पूरा करने से पहले ही ढ़ाल, तलवार रख कर पलायन करते दिखते हैं, ऐसा जाने कैसे मोदी कर पाते हैं, पता नही*
*लेकिन पिछले सात साल या कहूं गुजरात के CM बनने के बाद से ही मै देख रहा हूं कि परिणाम आने के बाद ही विरोधियों को मोदी की योजना का पता लगता है, उसके बाद बिचारे कलप कलप कर मोदी को कोसने वाली रूदालियां बन जाते हैं।*
*इस अवस्था मे ऐसी तीक्ष्ण निगाह….*
*यह बिरलों मे ही पायी जाती है…!!*

*चौथा… इतने सब देशी विदेशी दबाव के बाद भी मां हीराबेन के सपूत के चेहरे पर लेशमात्र तनाव मैने आज तक नही देखा, मोदी बच्चों के साथ बच्चे, नेता के साथ नेता, राजनेताओं के साथ राजनेता, और वैश्विक प्रभावशाली नेतृत्व के साथ आंख मे आंख मिला कर बात करने की ताकत रखते ही नही, इन सभी को अपने अनुसार ढ़ालने की क्षमता भी मोदी रखते हैं*
*तभी तो आजादी के बाद से अपने पूर्व गौरव को हासिल करने के लिये छटपटाता भारत*
*आज मोदी को पाकर धन्य हो गया है…!!*

*पांचवां…. अपने दल के इतने नेताओं मे से महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी देने के लिये बेहद काबिल व्यक्ति के साथ सक्षम और ईमानदार अधिकारियों का चुनाव करने की अद्भुत क्षमता रखना…*
*यही सब गुण मोदी को महामानव बना देता है….*
*जिसकी प्रतीक्षा राष्ट्रप्रेमी जनमानस सदियों से कर रहा था…*
*आज जब हमे चाणक्य, स्वामी विवेकानंद और सुभाषचंद बोस के सम्मिलित क्लोन के रूप मे “नरेन्द्र दामोदर दास मोदी” मिले हैं तो हमे उनको संजोना चाहिये….*
*क्योंकि नियति बार बार क्षमतावान नेतृत्व नही भेंट करती है…*
*बाकी मां सरस्वती के सपूत दिनकर जी के शब्दों मे कहूं तो…..*

*”वसुधा का नेता कौन हुआ?*
*भूखण्ड-विजेता कौन हुआ ?*
*अतुलित यश-क्रेता कौन हुआ?*
*नव-धर्म प्रणेता कौन हुआ ?*
*जिसने न कभी आराम किया,*
*विघ्नों में रहकर नाम किया।”*
*भारत माता की जय*
*वंदेमातरम* 🚩🇮🇳🎊🇮🇳🌹💐🚩🌹🙏🎊🌹🚩🙏🌹🇮🇳🌹💐🚩🙏🎊

मानसिक बल – संकल्प

मानसिक बल – संकल्प

-संकल्प शक्ति को विद्युत  उर्जा में बदल दिया  जाये तो वे बिजली, ताप, प्रकाश तथा  चुम्बकतव के रूपों  में कितने ही प्रकार  के क्रियाकलाप सम्पन्न कर सकने योग्य बन सकतती  है ।

-वह दिन दूर नहीं जब संकल्प को ईंधन के रुप में एक सर्व समर्थ शक्ति माना  जायेगा ।

-ध्वनि कम्पन चार  प्रकार से उत्पन्न होते है ।
1) वायु द्वारा
2) जल द्वारा
3) पृथ्वी द्वारा
4)  संकल्प द्वारा

-संकल्प द्वारा डायरेक्ट विद्युत नहीं बनेगी, परंतु इनडायरेक्ट ढंग से बनेगी ।

-संकल्प वायु  में कम्पन पैदा  करते है । यदि हम 30 लाख  से अधिक कंपन एक सेकेंड में पैदा कर दे तो  वायु में गर्मी पैदा  हो जायेंगी  ।  उस गर्मी से गैस बनेगी । वह गैस इतनी शक्तिशाली  बना चला  सकते हैं  । विद्युत बना सकते हैं ।

-संकल्पों का पानी पर सब से ज्यादा प्रभाव होता है । यही कारण है, अमृत बाँटा  जाता है । शुध्द कार्यों के लिये  मंत्र  पढ़ कर जल छिड़का  जाता  है । किसी को वरदान या अभिशाप देने लिये ऋषि जल प्रयोग करते थे । अगर हम लगातार  और शक्तिशाली तरंगे देते रहे तो पानी गरम होकर भाप बनने लगेगा। भाप से टरबायन चला  कर विद्युत पैदा कर सकते है  । यह खोज का  बिषय है ।

-पृथ्वी अर्थात स्थूल पदार्थों पर भी  मन का प्रभाव पड़ता है । कुछ  ऐसे पदार्थ खोजने की जरूरत है, जिन पर विचारो का तीव्र असर होता  हो  । उनको संकल्प शक्ति से प्रभावित कर विद्युत पैदा  की जा सके । जैसे सौर उर्जा से विद्युत बनायी जा रही है ।

-संकल्प मूल शक्ति है । हर प्रकार की घटना के पीछे संकल्प ही होता है । शुध्द  संकल्पों से  ऐसी विद्युत बनती है जिस से उमंग, उत्साह, खुशी अनुभव होती है । अशुध्द संकल्पों से विद्युत शक्ति नुकसान करती है जिस से हम दुखी, उदास वा निराश हो जाते  है । इस में भी शोध की जरूरत है ।

-जीवन को नई दिशा देने वाली  – आन्तरिक बल ( भाग -1 ) और आंतरिक बल ( भाग -2 )
–  पुस्तकें लेने  के लिए  संपर्क करें ! आप अपना नाम, पूरा पोस्टल पता , पिन नम्बर और फोन नम्बर मेरे  व्हाटसअप नम्बर 9896348516 पर लिख कर भेजें ! मैं आप को कोरियर से पुस्तक भेज दूंगा !

–  दोनों पुस्तकें आप को पसंद आएगी ! पसंद आने पर  लागत राशी भेज देना !    दूसरों के कल्याण हेतू  आप अपनी   मर्जी से अधिक आर्थिक सहयोग भी भेज सकते हैं !    अगर आप को आर्थिक चैलेंज है  तो मुझे सूचित करना मैं आप को गिफ्ट के रूप में भेज दूंगा   !  चाहे आप कितने भी व्यस्त हैं या कोई भी अतृप्ती है ,   एक बार यह पुस्तकें  जरूर पढ़ें !  आप के पढ़ने मात्र से,  आप को , आप के आस पास वालों को , आप के प्रिय लोगों को नया मार्ग  और सारे विश्व का नव निर्माण होगा  !

Milakh Raj  Sandha, Hisar, Haryana, 9896348516

मानसिक बल – संकल्प

मानसिक बल – संकल्प

-संकल्प शक्ति को विद्युत  उर्जा में बदल दिया  जाये तो वे बिजली, ताप, प्रकाश तथा  चुम्बकतव के रूपों  में कितने ही प्रकार  के क्रियाकलाप सम्पन्न कर सकने योग्य बन सकतती  है ।

-वह दिन दूर नहीं जब संकल्प को ईंधन के रुप में एक सर्व समर्थ शक्ति माना  जायेगा ।

-ध्वनि कम्पन चार  प्रकार से उत्पन्न होते है ।
1) वायु द्वारा
2) जल द्वारा
3) पृथ्वी द्वारा
4)  संकल्प द्वारा

-संकल्प द्वारा डायरेक्ट विद्युत नहीं बनेगी, परंतु इनडायरेक्ट ढंग से बनेगी ।

-संकल्प वायु  में कम्पन पैदा  करते है । यदि हम 30 लाख  से अधिक कंपन एक सेकेंड में पैदा कर दे तो  वायु में गर्मी पैदा  हो जायेंगी  ।  उस गर्मी से गैस बनेगी । वह गैस इतनी शक्तिशाली  बना चला  सकते हैं  । विद्युत बना सकते हैं ।

-संकल्पों का पानी पर सब से ज्यादा प्रभाव होता है । यही कारण है, अमृत बाँटा  जाता है । शुध्द कार्यों के लिये  मंत्र  पढ़ कर जल छिड़का  जाता  है । किसी को वरदान या अभिशाप देने लिये ऋषि जल प्रयोग करते थे । अगर हम लगातार  और शक्तिशाली तरंगे देते रहे तो पानी गरम होकर भाप बनने लगेगा। भाप से टरबायन चला  कर विद्युत पैदा कर सकते है  । यह खोज का  बिषय है ।

-पृथ्वी अर्थात स्थूल पदार्थों पर भी  मन का प्रभाव पड़ता है । कुछ  ऐसे पदार्थ खोजने की जरूरत है, जिन पर विचारो का तीव्र असर होता  हो  । उनको संकल्प शक्ति से प्रभावित कर विद्युत पैदा  की जा सके । जैसे सौर उर्जा से विद्युत बनायी जा रही है ।

-संकल्प मूल शक्ति है । हर प्रकार की घटना के पीछे संकल्प ही होता है । शुध्द  संकल्पों से  ऐसी विद्युत बनती है जिस से उमंग, उत्साह, खुशी अनुभव होती है । अशुध्द संकल्पों से विद्युत शक्ति नुकसान करती है जिस से हम दुखी, उदास वा निराश हो जाते  है । इस में भी शोध की जरूरत है ।

-जीवन को नई दिशा देने वाली  – आन्तरिक बल ( भाग -1 ) और आंतरिक बल ( भाग -2 )
–  पुस्तकें लेने  के लिए  संपर्क करें ! आप अपना नाम, पूरा पोस्टल पता , पिन नम्बर और फोन नम्बर मेरे  व्हाटसअप नम्बर 9896348516 पर लिख कर भेजें ! मैं आप को कोरियर से पुस्तक भेज दूंगा !

–  दोनों पुस्तकें आप को पसंद आएगी ! पसंद आने पर  लागत राशी भेज देना !    दूसरों के कल्याण हेतू  आप अपनी   मर्जी से अधिक आर्थिक सहयोग भी भेज सकते हैं !    अगर आप को आर्थिक चैलेंज है  तो मुझे सूचित करना मैं आप को गिफ्ट के रूप में भेज दूंगा   !  चाहे आप कितने भी व्यस्त हैं या कोई भी अतृप्ती है ,   एक बार यह पुस्तकें  जरूर पढ़ें !  आप के पढ़ने मात्र से,  आप को , आप के आस पास वालों को , आप के प्रिय लोगों को नया मार्ग  और सारे विश्व का नव निर्माण होगा  !

Milakh Raj  Sandha, Hisar, Haryana, 9896348516

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक 27 सितम्बर 2021

🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞
⛅ *दिनांक 27 सितम्बर 2021*
⛅ *दिन – सोमवार*
⛅ *विक्रम संवत – 2078 (गुजरात – 2077)*
⛅ *शक संवत -1943*
⛅ *अयन – दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु – शरद*
⛅ *मास -अश्विन (गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार – भाद्रपद)*
⛅ *पक्ष – कृष्ण*
⛅ *तिथि – षष्ठी शाम 03:43 तक तत्पश्चात सप्तमी*
⛅ *नक्षत्र – रोहिणी शाम 05:42 तक तत्पश्चात म्रगशिरा*
⛅ *योग – सिद्धि शाम 04:52 तक तत्पश्चात व्यतिपात*
⛅ *राहुकाल – सुबह 07:59 से सुबह 09:29 तक*
⛅ *सूर्योदय – 06:29*
⛅ *सूर्यास्त – 18:29*
⛅ *दिशाशूल – पूर्व दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण -*
💥 *विशेष – षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *सर्वलाभ की कुंजी* 🌷
👉🏻 *कैसा भी बीमार व्यक्ति हो, उसको हरिनाम की, ‘हरि ॐ’ की साधना दे दो, चंगा होने लगेगा |* *बिल्कुल पक्की बात है !*
👉🏻 *आपको स्वस्थ रहना है तो भी भगवान का नाम, प्रसन्न तथा निरहंकारी रहना है तो भगवान का नाम, उद्योगी एवं साहसी होना है तो भगवान का नाम और पूर्वजों का मंगल करना है तो भी भगवान का नाम….|*
🙏🏻
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *व्यतिपात योग* 🌷
🙏🏻 *व्यतिपात योग की ऐसी महिमा है कि उस समय जप पाठ प्राणायम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की और विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता प्राप्त होती है जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ भी किया जाता है उसका १ लाख गुना फल मिलता है।*
🙏🏻 *वाराह पुराण में ये बात आती है व्यतिपात योग की।*
🙏🏻 *व्यतिपात योग माने क्या कि देवताओं के गुरु बृहस्पति की धर्मपत्नी तारा पर चन्द्र देव की गलत नजर थी जिसके कारण सूर्य देव अप्रसन्न हुऐ नाराज हुऐ, उन्होनें चन्द्रदेव को समझाया पर चन्द्रदेव ने उनकी बात को अनसुना कर दिया तो सूर्य देव को दुःख हुआ कि मैने इनको सही बात बताई फिर भी ध्यान नही दिया और सूर्यदेव को अपने गुरुदेव की याद आई कि कैसा गुरुदेव के लिये आदर प्रेम श्रद्धा होना चाहिये पर इसको इतना नही थोडा भूल रहा है ये, सूर्यदेव को गुरुदेव की याद आई और आँखों से आँसु बहे वो समय व्यतिपात योग कहलाता है। और उस समय किया हुआ जप, सुमिरन, पाठ, प्रायाणाम, गुरुदर्शन की खूब महिमा बताई है वाराह पुराण में।*
💥 *विशेष ~ 27 सितम्बर 2021 सोमवार को शाम 04:53 से 28 सितम्बर, मंगलवार को शाम 05:51 तक व्यतीपात योग है।*
🙏🏻

🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🙏🍀🌻🌹🌸💐🍁🌷🌺🙏🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩

मन की पवित्रता

मन की पवित्रता !!*
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

एक राजा को अपने लिए सेवक की आवश्यकता थी। उसके मंत्री ने दो दिनों के बाद एक योग्य व्यक्ति को राजा के सामने पेश किया।

राजा ने उसे अपना सेवक बना तो लिया पर बाद में मंत्री से कहा, ‘‘वैसे तो यह आदमी ठीक है पर इसका रंग-रूप अच्छा नहीं है।’’ मंत्री को यह बात अजीब लगी पर वह चुप रहा।

एक बार गर्मी के मौसम में राजा ने उस सेवक को पानी लाने के लिए कहा। सेवक सोने के पात्र में पानी लेकर आया।

राजा ने जब पानी पिया तो पानी पीने में थोड़ा गर्म लगा। राजा ने कुल्ला करके फेंक दिया। वह बोला, ‘‘इतना गर्म पानी, वह भी गर्मी के इस मौसम में, तुम्हें इतनी भी समझ नहीं।’’

मंत्री यह सब देख रहा था। मंत्री ने उस सेवक को मिट्टी के पात्र में पानी लाने को कहा। राजा ने यह पानी पीकर तृप्ति का अनुभव किया।

इस पर मंत्री ने कहा, ‘‘महाराज, बाहर को नहीं, भीतर को देखें। सोने का पात्र सुंदर, मूल्यवान और अच्छा है, लेकिन शीतलता प्रदान करने का गुण इसमें नहीं है।

मिट्टी का पात्र अत्यंत साधारण है लेकिन इसमें ठंडा बना देने की क्षमता है। कोरे रंग-रूप को न देखकर गुण को देखें।’’ उस दिन से राजा का नजरिया बदल गया।

सम्मान, प्रतिष्ठा, यश, श्रद्धा पाने का अधिकार चरित्र को मिलता है, चेहरे को नहीं। चाणक्य ने कहा है कि मनुष्य गुणों से उत्तम बनता है न कि ऊंचे आसन पर बैठने से या पदवी से। जैसे ऊंचे महल के शिखर पर बैठ कर भी कौवा, कौवा ही रहता है; गरुड़ नहीं बन जाता।

उसी तरह अमिट सौंदर्य निखरता है मन की पवित्रता से, क्योंकि सौंदर्य रंग-रूप, नाक-नक्श, चाल-ढाल, रहन-सहन, सोच-शैली की प्रस्तुति मात्र नहीं होता। यह व्यक्ति के मन, विचार, चिंतन और कर्म का आइना है।

कई लोग बाहर से सुंदर दिखते हैं मगर भीतर से बहुत कुरूप होते हैं। जबकि ऐसे भी लोग हैं जो बाहर से सुंदर नहीं होते मगर उनके भीतर भावों की पवित्रता इतनी ज्यादा होती है कि उनका व्यक्तित्व चुंबकीय बन जाता है। सुंदर होने और दिखने में बहुत बड़ा अंतर है।

*शिक्षा:-*
आपका चरित्र ही आपका सबसे बड़ा गुण है।

*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️

तृतीयपंथीयांना ओळखपत्र देण्यात राज्यात पुणे जिल्हा आघाडीवर

तृतीयपंथीयांना ओळखपत्र देण्यात राज्यात पुणे जिल्हा आघाडीवर !
जिल्हा प्रशासन व समाज कल्याण विभागाचा पुढाकार

पुणे, दि.22 :- संपादकीय:- रामवर्मा आसबे

तृतीय पंथीयांच्या हक्कांचे संरक्षण अधिनियम २०१९ अंतर्गत जिल्हास्तरीय समितीद्वारे तृतीयपंथीयांना त्यांचे ओळख प्रमाणपत्र व ओळखपत्र देण्याची तरतुद आहे. त्याअंतर्गत पुणे जिल्ह्यामध्ये राष्ट्रीय तृतीयपंथीय पोर्टलवर ऑनलाइन रित्या प्राप्त असलेल्या २२ अर्जांपैकी १२ तृतीयपंथीयांना जिल्हा प्रशासन व सहायक आयुक्त समाज कल्याण पुणे यांच्या प्रयत्नातुन दिनांक २१सप्टेंबर रोजी ओळखपत्र देण्यात आले. जिल्हाधिकारी यांच्या स्वाक्षरीचे ओळख पत्र व ओळख प्रमाणपत्र जिल्हाधिकारी डॉ. राजेश देशमुख यांच्या हस्ते देण्यात आले. राज्यात प्रथमच देण्यात पुणे जिल्हयाने आघाडी घेतली आहे.
जिल्हाधिकारी कार्यालयात झालेल्या कार्यक्रमावेळी सहाय्यक आयुक्त संगीता डावखर, समाज कल्याण निरीक्षक नेत्राली येवले, बिंदू क्वीर राइट्स फाऊंडेशनचे अध्यक्ष बिंदुमाधव खिरे तसेच तृतीयपंथीय उपस्थित होते.
जिल्हाधिकारी डॉ. राजेश देशमुख म्हणाले, ओळखपत्रा पुरतेच मर्यादित न राहता तृतीयपंथीयांना समाजाच्या मुख्य प्रवाहात आणण्यासाठी त्यांना रोजगार संधी व शासनाच्या विविध योजनांचा लाभ कसा देता येईल यावरही प्रामुख्याने विचार करून त्यानुसार शासनाच्या वतीने सर्वोतोपरी मदत केली जाईल तसेच तृतीयपंथीयांनी ओळखपत्रासाठी ऑनलाइन पदधतीने जास्तीत जास्त अर्ज करावेत असे आवाहनही त्यांनी केले.
समाज कल्याण विभागाच्या श्रीमती संगीता डावखरे म्हणाल्या, तृतीयपंथीयांना देण्यात आलेले ओळखपत्र व ओळख प्रमाणपत्रे व त्याअनुषगाने करण्यात आलेल्या कार्यवाहीत पुणे जिल्ह्याने राज्यात आघाडी घेतली आहे. येणा-या काळात जास्तीत जास्त तृतीयपंथीयांना ओळखपत्र व ओळख प्रमाणपत्रे देण्यात येतील. असेही त्यांनी सांगितले.

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक 26 सितम्बर 2021

🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞
⛅ *दिनांक 26 सितम्बर 2021*
⛅ *दिन – रविवार*
⛅ *विक्रम संवत – 2078 (गुजरात – 2077)*
⛅ *शक संवत -1943*
⛅ *अयन – दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु – शरद*
⛅ *मास -अश्विन (गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार – भाद्रपद)*
⛅ *पक्ष – कृष्ण*
⛅ *तिथि – पंचमी दोपहर 01:04 तक तत्पश्चात षष्ठी*
⛅ *नक्षत्र – कृत्तिका दोपहर 02:33 तक तत्पश्चात रोहिणी*
⛅ *योग – वज्र शाम 03:49 तक तत्पश्चात सिद्धि*
⛅ *राहुकाल – शाम 05:01 से शाम 06:31 तक*
⛅ *सूर्योदय – 06:29*
⛅ *सूर्यास्त – 18:30*
⛅ *दिशाशूल – पश्चिम दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण – षष्ठी का श्राद्ध, कृत्तिका का श्राद्ध*
💥 *विशेष – पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *अश्विन माह* 🌷
🙏🏻 *अश्विन हिन्दू धर्म का सप्तम महिना है। अश्विन नक्षत्रयुक्त पूर्णिमा होने के कारण इसका नाम अश्विन पड़ा (अश्विनीनक्षत्रयुक्ता पौर्णमासी यत्र मासे सः)। आश्विन मास का संबंध अश्विनौ से है जो सूर्य के दो पुत्र हैं और देवताओं के चिकित्सक हैं। इस मास का एक नाम क्वार भी है। (उत्तर भारत हिन्दू पंचांग के अनुसार) से अश्विन का आरम्भ हो चुका है। (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार अभी भाद्रपद मास चल रहा है) ।*
🙏🏻 *महाभारत अनुशासन पर्व अध्याय 106 के अनुसार “तथैवाश्वयुजं मासमेकभक्तेन यः क्षिपेत्। प्रज्ञावान्वाहनाढ्यश्च बहुपुत्रश्च जायते।।” जो अश्विन मास को एक समय भोजन करके बिताता है, वह पवित्र, नाना प्रकार के वाहनों से सम्पन्न तथा अनेक पुत्रों से युक्त होता है ।*
🌷 *आश्विने भौमावास्याम जायते खलु पार्वती। विविध विपदाम धनक्षयं पापाचारम वर्धते।।*
🙏🏻 *महाभारत अनुशासन पर्व के अनुसार जो अश्विन मास में ब्राह्माणों को घृत दान करता है, उस पर दैव वैद्य अश्विनीकुमार प्रसन्न होकर उसे रूप प्रदान करते हैं ।*
🙏🏻 *शिवपुराण के अनुसार अश्विन में धान्य दान करने से अन्न तथा धन की वृद्धि होती है।*
🙏🏻 *अग्निपुराण के अनुसार अश्विन के महिने में गोरस- गाय का घी, दूध और दही तथा अन्न देनेवाला सब रोगों से छुटकारा पा जाता है |*
🌷 *आश्विने कृष्णपक्षे तु षष्ठ्यां भौमेऽथ रोहिणी । व्यतीपातस्तदा षष्ठी कपिलानन्तपुण्यदा ।।*
🙏🏻 *अश्विन महिने के कृष्णपक्ष की षष्ठी के दिन मंगलवार, रोहिणी नक्षत्र और व्यतिपात हो तो वह अनंत पुण्य देने वाला कपिला षष्टी योग कहा जाता है। यह योग बहुत दुर्लभ है।*
🙏🏻 *शिवपुराण के अनुसार सती ने अश्विन मास में नंदा (प्रतिपदा, षष्ठी और एकादशी) तिथियों में भक्तिपूर्वक गुड़, भात और नमक चढाकर भगवान शिवका पूजन किया और उन्हें नमस्कार करके उसी नियम के साथ उस मास को व्यतीत किया |*
🙏🏻 *अश्विन कृष्णपक्ष को पितृपक्ष महालय के नाम से जाना जाता है जिसमें पितृ ऋण से मुक्त होने तथा पितरों को तृप्त करने के उद्देश्य से श्राद्ध किया जाता है।*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *श्राद्धकर्म* 🌷
🙏🏻 *अगर श्राद्धकर्म करने के लिए आपके पास बिल्कुल भी धन नहीं है तो आपको उधार मांगकर धन लेना चाहिए और श्राद्ध करना चाहिए। अगर आपको कोई उधार नहीं दे रहा तो पितरों के उद्देश्य से पृथ्वी पर भक्ति विनम्र भाव से सात आठ तिलों से जलाञ्जलि ही दे दें। अगर यह भी संभव नहीं तो कहीं से चारा लाकर गौ को खिला दें। और अगर इतना भी संभव नहीं तो अपनी बगल दिखाते हुए सूर्य तथा दिक्पालों से कहें :*
🌷 *”न मेऽस्ति वित्तं न धनं न चान्यच्छ्राद्धोपयोग्यं स्वपितॄन्‌नतोऽस्मि ।*
*तृप्यन्तु भत्त्या पितरो मयैतौ कृतौ भुजौ वर्त्मनि मारुतस्य ।।”*
➡ *’मेरे पास श्राद्धकर्म के योग्य न धन-संपति है और न कोई अन्य सामग्री। अत: मै अपने पितरों को प्रणाम करता हूँ। वे मेरी भक्ति से ही तृप्तिलाभ करे। मैंने अपनी दोनों भुजाएं आकाश में उठा रखी हैं ।*
💥 *ऐसा विवरण विष्णुपुराण तृतीयांश, अध्यायः 14 तथा वराहपुराण अध्याय 13 में मिलता है।*

🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🙏🏻🌷🌸🌼💐☘🌹🌻🌺🙏🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩

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