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आमचे मीत्र रोहित नलवडे यांना वाढदिवसाच्याखुप खुप शुभेच्छा

आमचे मीत्र रोहित नलवडे यांना वाढदिवसाच्या खुप खुप शुभेच्छा तुमचे जीवन सुखी आनंदी व निरोगि राहो व अशिच राष्ट्र सेवा करावि हिच शुभेच्छा
शुभेच्छुक:- रामवर्मा आसबे
संपादक:- नमोन्युजनेशन

सहसंपादक:-शिव-कल्याण न्युज

राष्ट्रीय मिडिया प्रभारि:- प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर भारत अभियान संघटन
महाराष्ट्र राज्य मिडिया प्रभारी :- टिम मोदी सपोर्टर असोसिएशन

हिन्दू पंचांग दिनांक 13 अक्टूबर 2021 दिन – बुधवार

🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞
⛅ *दिनांक 13 अक्टूबर 2021*
⛅ *दिन – बुधवार*
⛅ *विक्रम संवत – 2078 (गुजरात – 2077)*
⛅ *शक संवत -1943*
⛅ *अयन – दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु – शरद*
⛅ *मास -अश्विन*
⛅ *पक्ष – शुक्ल*
⛅ *तिथि – अष्टमी रात्रि 08:07 तक तत्पश्चात नवमी*
⛅ *नक्षत्र – पूर्वाषाढा सुबह 10:19 तक तत्पश्चात उत्तराषाढा*
⛅ *योग – सुकर्मा 14 अक्टूबर रात्रि 03:48 तक तत्पश्चात धृति*
⛅ *राहुकाल – दोपहर 12:25 सेदोपहर 01:53 तक*
⛅ *सूर्योदय – 06:34*
⛅ *सूर्यास्त – 18:14*
⛅ *दिशाशूल – उत्तर दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण- दुर्गाष्टमी, महाष्टमी, सरस्वती- बलिदान, बुधवारी अष्टमी (सूर्योदय से रात्रि 08:08 तक)*
💥 *विशेष – अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *नेत्रज्योति बढ़ाने के लिए* 🌷
🌙 *दशहरे से शरद पूनम तक चन्द्रमा की चाँदनी में विशेष हितकारी रस, हितकारी किरणें होती हैं । इन दिनों चन्द्रमा की चाँदनी का लाभ उठाना, जिससे वर्षभर आप स्वस्थ और प्रसन्न रहें । नेत्रज्योति बढ़ाने के लिए दशहरे से शरद पूर्णिमा तक प्रतिदिन रात्रि में 15 से 20 मिनट तक चन्द्रमा के ऊपर त्राटक (पलकें झपकाये बिना एकटक देखना) करें ।*
🙏🏻
🌞 *~ हिन्दू पंचाग ~* 🌞

🌷 *दशहरे के दिन* 🌷
➡ *15 अक्टूबर 2021 शुक्रवार को दशहरा, विजयादशमी (पूरा दिन शुभ मुहूर्त), संकल्प, शुभारम्भ, नूतन कार्य, सीमोल्लंघन के लिए विजय मुहूर्त (दोपहर 02:15 से 03:01 तक), गुरु-पूजन, अस्त्र-शस्त्र-शमी वृक्ष-आयुध-वाहन पूजन*
🙏🏻 *दशहरा के दिन शाम को जब सूर्यास्त होने का समय और आकाश में तारे उदय होने का समय हो वो सर्व सिद्धिदायी विजय काल कहलाता है |*
👉🏻 *उस समय घूमने-फिरने मत जाना | दशहरा मैदान मत खोजना … रावण जलता हो देखकर क्या मिलेगा ? धूल उड़ती होगी, मिटटी उड़ती होगी रावण को जलाया उसका धुआं वातावरण में होगा …. गंदा वो श्वास में लेना …. धूल, मिटटी श्वास में लेना पागलपन है |*
*ये दशहरे के दिन शाम को घर पे ही स्नान आदि करके, दिन के कपडे बदल के शाम को धुले हुए कपडे पहनकर ज्योत जलाकर बैठ जाये | थोडा*
🌷 *” राम रामाय नम: । “*
🙏🏻 *मंत्र जपते, विजयादशमी है ना तो रामजी का नाम और फिर मन-ही-मन गुरुदेव को प्रणाम करके गुरुदेव सर्व सिद्धिदायी विजयकाल चल रहा है की हम विजय के लिए ये मंत्र जपते है -*
🌷 *”ॐ अपराजितायै नमः “*
➡ *ये मंत्र १ – २ माला जप करना और इस काल में श्री हनुमानजी का सुमिरन करते हुए इस मंत्र की एक माला जप करें :-*
🌷 *”पवन तनय बल पवन समाना, बुद्धि विवेक विज्ञान निधाना ।*
*कवन सो काज कठिन जग माहि, जो नहीं होत तात तुम पाहि ॥”*
🙏🏻 *पवन तनय समाना की भी १ माला कर ले उस विजय काल में, फिर गुरुमंत्र की माला कर ले । फिर देखो अगले साल की दशहरा तक गृहस्थ में जीनेवाले को बहुत-बहुत अच्छे परिणाम देखने को मिल सकते है |*
🙏🏻
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *शारदीय नवरात्रि* 🌷
🙏🏻 *नवरात्र की अष्टमी यानी आठवें दिन माता दुर्गा को नारियल का भोग लगाएं । इससे घर में सुख समृद्धि आती है ।*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *शारदीय नवरात्रि* 🌷
🙏🏻 *मन की शांति मिलती है मां महागौरी की पूजा से* 🌷
*नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। आदिशक्ति श्री दुर्गा का अष्टम रूप श्री महागौरी हैं। मां महागौरी का रंग अत्यंत गोरा है, इसलिए इन्हें महागौरी के नाम से जाना जाता है। नवरात्रि का आठवां दिन हमारे शरीर का सोम चक्रजागृत करने का दिन है। सोमचक्र ललाट में स्थित होता है। श्री महागौरी की आराधना से सोमचक्र जागृत हो जाता है और इस चक्र से संबंधित सभी शक्तियां श्रद्धालु को प्राप्त हो जाती है। मां महागौरी के प्रसन्न होने पर भक्तों को सभी सुख स्वत: ही प्राप्त हो जाते हैं। साथ ही, इनकी भक्ति से हमें मन की शांति भी मिलती है।*

🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🙏🏻🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩

हिन्दू पंचांग दिनांक 13 अक्टूबर 2021 दिन – बुधवार

🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞
⛅ *दिनांक 13 अक्टूबर 2021*
⛅ *दिन – बुधवार*
⛅ *विक्रम संवत – 2078 (गुजरात – 2077)*
⛅ *शक संवत -1943*
⛅ *अयन – दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु – शरद*
⛅ *मास -अश्विन*
⛅ *पक्ष – शुक्ल*
⛅ *तिथि – अष्टमी रात्रि 08:07 तक तत्पश्चात नवमी*
⛅ *नक्षत्र – पूर्वाषाढा सुबह 10:19 तक तत्पश्चात उत्तराषाढा*
⛅ *योग – सुकर्मा 14 अक्टूबर रात्रि 03:48 तक तत्पश्चात धृति*
⛅ *राहुकाल – दोपहर 12:25 सेदोपहर 01:53 तक*
⛅ *सूर्योदय – 06:34*
⛅ *सूर्यास्त – 18:14*
⛅ *दिशाशूल – उत्तर दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण- दुर्गाष्टमी, महाष्टमी, सरस्वती- बलिदान, बुधवारी अष्टमी (सूर्योदय से रात्रि 08:08 तक)*
💥 *विशेष – अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *नेत्रज्योति बढ़ाने के लिए* 🌷
🌙 *दशहरे से शरद पूनम तक चन्द्रमा की चाँदनी में विशेष हितकारी रस, हितकारी किरणें होती हैं । इन दिनों चन्द्रमा की चाँदनी का लाभ उठाना, जिससे वर्षभर आप स्वस्थ और प्रसन्न रहें । नेत्रज्योति बढ़ाने के लिए दशहरे से शरद पूर्णिमा तक प्रतिदिन रात्रि में 15 से 20 मिनट तक चन्द्रमा के ऊपर त्राटक (पलकें झपकाये बिना एकटक देखना) करें ।*
🙏🏻
🌞 *~ हिन्दू पंचाग ~* 🌞

🌷 *दशहरे के दिन* 🌷
➡ *15 अक्टूबर 2021 शुक्रवार को दशहरा, विजयादशमी (पूरा दिन शुभ मुहूर्त), संकल्प, शुभारम्भ, नूतन कार्य, सीमोल्लंघन के लिए विजय मुहूर्त (दोपहर 02:15 से 03:01 तक), गुरु-पूजन, अस्त्र-शस्त्र-शमी वृक्ष-आयुध-वाहन पूजन*
🙏🏻 *दशहरा के दिन शाम को जब सूर्यास्त होने का समय और आकाश में तारे उदय होने का समय हो वो सर्व सिद्धिदायी विजय काल कहलाता है |*
👉🏻 *उस समय घूमने-फिरने मत जाना | दशहरा मैदान मत खोजना … रावण जलता हो देखकर क्या मिलेगा ? धूल उड़ती होगी, मिटटी उड़ती होगी रावण को जलाया उसका धुआं वातावरण में होगा …. गंदा वो श्वास में लेना …. धूल, मिटटी श्वास में लेना पागलपन है |*
*ये दशहरे के दिन शाम को घर पे ही स्नान आदि करके, दिन के कपडे बदल के शाम को धुले हुए कपडे पहनकर ज्योत जलाकर बैठ जाये | थोडा*
🌷 *” राम रामाय नम: । “*
🙏🏻 *मंत्र जपते, विजयादशमी है ना तो रामजी का नाम और फिर मन-ही-मन गुरुदेव को प्रणाम करके गुरुदेव सर्व सिद्धिदायी विजयकाल चल रहा है की हम विजय के लिए ये मंत्र जपते है -*
🌷 *”ॐ अपराजितायै नमः “*
➡ *ये मंत्र १ – २ माला जप करना और इस काल में श्री हनुमानजी का सुमिरन करते हुए इस मंत्र की एक माला जप करें :-*
🌷 *”पवन तनय बल पवन समाना, बुद्धि विवेक विज्ञान निधाना ।*
*कवन सो काज कठिन जग माहि, जो नहीं होत तात तुम पाहि ॥”*
🙏🏻 *पवन तनय समाना की भी १ माला कर ले उस विजय काल में, फिर गुरुमंत्र की माला कर ले । फिर देखो अगले साल की दशहरा तक गृहस्थ में जीनेवाले को बहुत-बहुत अच्छे परिणाम देखने को मिल सकते है |*
🙏🏻
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *शारदीय नवरात्रि* 🌷
🙏🏻 *नवरात्र की अष्टमी यानी आठवें दिन माता दुर्गा को नारियल का भोग लगाएं । इससे घर में सुख समृद्धि आती है ।*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *शारदीय नवरात्रि* 🌷
🙏🏻 *मन की शांति मिलती है मां महागौरी की पूजा से* 🌷
*नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। आदिशक्ति श्री दुर्गा का अष्टम रूप श्री महागौरी हैं। मां महागौरी का रंग अत्यंत गोरा है, इसलिए इन्हें महागौरी के नाम से जाना जाता है। नवरात्रि का आठवां दिन हमारे शरीर का सोम चक्रजागृत करने का दिन है। सोमचक्र ललाट में स्थित होता है। श्री महागौरी की आराधना से सोमचक्र जागृत हो जाता है और इस चक्र से संबंधित सभी शक्तियां श्रद्धालु को प्राप्त हो जाती है। मां महागौरी के प्रसन्न होने पर भक्तों को सभी सुख स्वत: ही प्राप्त हो जाते हैं। साथ ही, इनकी भक्ति से हमें मन की शांति भी मिलती है।*

🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🙏🏻🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩

कर्मयोगी शंकरराव पाटील सहकारी साखर कारखान्याच्या संचालक पदी”हिरालाल पारेकर”बिनविरोध!

कर्मयोगी शंकरराव पाटील सहकारी साखर कारखान्याच्या संचालक पदी”हिरालाल पारेकर”बिनविरोध!

पुणे जिल्ह्यातील अत्यंत महत्वपूर्ण व शेतकऱ्यांची संजीवनी म्हणून ओळखल्या जाणाऱ्या बिजवडी (इंदापूर)येथील कर्मयोगी शंकरराव बाजीराव पाटील सहकारी साखर कारखाना च्या 21 जागे करीता 21अर्ज आल्याने संपूर्ण निवडणूक बिनविरोध झाल्याचे प्रशासनाने आज जाहीर केले.

भटक्या विमुक्त जाती व जमाती प्रवर्गातील जागेवर वनगळी येथील हिरालाल पारेकर यांची बिनवरोध निवड झाल्याचे प्रशासनाने जाहीर केले.

हिरालाल पारेकर हे वनगळी गावचे रहिवासी असून त्यांनी बिजवडी ग्रामपंचायत चे सरपंच,सदस्य तसेच वनगळी विविध कार्यकारी सोसायटीचे अध्यक्ष म्हणून काम पाहिले आहे

त्यांच्या निवडीचे कौतुक सर्वत्र होत आहे.

दर्द :- रामवर्मा आसबे

दर्द

-हमें दर्द तब होता है़ जब हम नियमो का उलंघन करेंगें ।

-समाज विरोधी बनेगे तो समाज दुःख देगा ।  इसलिए समाजिक मर्यादाओं में चलो ।

-परिवार विरोधी कार्य करेंगें तो परिवार दुःख देगा  ।  इस लिये परिवार के नियमो पर चलो ।

-जब हम भोजन के नियमो को नहीं मानते है़ तो अनेको रोग खड़े हो जाते हैं  ।

– अब देखो आप को किस चीज का दुःख है़ ।

-किस से दुःख है़,  रोग से,  व्यक्ति से,  परिवार से,  समाज से,  सरकार  से,  या मन में दुःख है़ ।  जिस से  भी दुःख  है़   तो  समझ लो हम उस  से संबन्धित नियमो का पालन नहीं कर रहे हैं ।

-नियम पुस्तकों   में लिखे हुए है़ ।  अपने दुःख से संबन्धित पुस्तकें पढ़ना शुरू कर दो आप के सभी दुःख खत्म  हो जाएगे  ।

-राजयोग के अभ्यास से आधी व्याधि सब प्रकार के दुःख खत्म हो जाते हैँ ।

-किसी भी साधना को सिर्फ मानने से नही उस का  का अभ्यास करने से भी दुख दूर होते हैं

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक 12 अक्टूबर 2021 दिन – मंगलवार

🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞
⛅ *दिनांक 12 अक्टूबर 2021*
⛅ *दिन – मंगलवार*
⛅ *विक्रम संवत – 2078 (गुजरात – 2077)*
⛅ *शक संवत -1943*
⛅ *अयन – दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु – शरद*
⛅ *मास -अश्विन*
⛅ *पक्ष – शुक्ल*
⛅ *तिथि – सप्तमी रात्रि 09:47 तक तत्पश्चात अष्टमी*
⛅ *नक्षत्र – मूल सुबह 11:27 तक तत्पश्चात पूर्वाषाढा*
⛅ *योग – शोभन सुबह 08:51 तक तत्पश्चात अतिगण्ड*
⛅ *राहुकाल – शाम 03:21 से शाम 04:49 तक*
⛅ *सूर्योदय – 06:34*
⛅ *सूर्यास्त – 18:15*
⛅ *दिशाशूल – उत्तर दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण- सरस्वती-पूजन*
💥 *विशेष – *सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है तथा शरीर का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *बुधवारी अष्टमी* 🌷
➡ *13 अक्टूबर 2021 बुधवार को (सूर्योदय से रात्रि 08:08 तक) बुधवारी अष्टमी है ।*
👉🏻 *मंत्र जप एवं शुभ संकल्प हेतु विशेष तिथि*
🙏🏻 *सोमवती अमावस्या, रविवारी सप्तमी, मंगलवारी चतुर्थी, बुधवारी अष्टमी – ये चार तिथियाँ सूर्यग्रहण के बराबर कही गयी हैं।*
🙏🏻 *इनमें किया गया जप-ध्यान, स्नान , दान व श्राद्ध अक्षय होता है। (शिव पुराण, विद्येश्वर संहिताः अध्याय 10)*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *काम धंधे में सफलता एवं राज योग के लिए*
🙏🏻 *अगर काम धंधा करते समय सफलता नहीं मिलती हो या विघ्न आते हों तो शुक्ल पक्ष की अष्टमी हो.. बेल के कोमल कोमल पत्तों पर लाल चन्दन लगा कर माँ जगदम्बा को अर्पण करने से …. मंत्र बोले ” ॐ ह्रीं नमः । ॐ श्रीं नमः । ” और थोड़ी देर बैठ कर प्रार्थना और जप करने से राज योग बनता है गुरु मंत्र का जप और कभी कभी ये प्रयोग करें नवरात्रियों में तो खास करें | देवी भागवत में वेद व्यास जी ने बताया है।*
🙏🏻
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *दुर्गाष्टमी* 🌷
➡ *13 अक्टूबर, बुधवार को दुर्गाष्टमी है ।*
🙏🏻 *प्राचीन काल में दक्ष के यज्ञ का विध्वंश करने वाली महाभयानक भगवती भद्रकाली करोङों योगिनियों सहित अष्टमी तिथि को ही प्रकट हुई थीं।*
🌷 *नारदपुराण पूर्वार्ध अध्याय 117*
*आश्विने शुक्लपक्षे तु प्रोक्ता विप्र महाष्टमी ।। ११७-७६ ।।*
*तत्र दुर्गाचनं प्रोक्तं सव्रैरप्युपचारकैः ।।*
*उपवासं चैकभक्तं महाष्टम्यां विधाय तु ।। ११७-७७ ।।*
*सर्वतो विभवं प्राप्य मोदते देववच्चिरम् ।।*
🙏🏻 *आश्विन मास के शुक्लपक्ष में जो अष्टमी आती है, उसे महाष्टमी कहा गया है (महाष्टमी 13 अक्टूबर, बुधवार को है ) उसमें सभी उपचारों से दुर्गा के पूजन का विधान है। जो महाष्टमी को उपवास अथवा एकभुक्त व्रत करता है, वह सब ओर से वैभव पाकर देवता की भाँति चिरकाल तक आनंदमग्न रहता है।*
🌷 *भविष्यपुराण, उत्तरपर्व, अध्याय – २६*
*देव, दानव, राक्षस, गन्धर्व, नाग, यक्ष, किन्नर, नर आदि सभी अष्टमी तथा नवमी को उनकी पूजा-अर्चना करते हैं | आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी और नवमी को जगन्माता भगवती श्रीअम्बिका का पूजन करने से सभी शत्रुओं पर विजय प्राप्त हो जाती है | यह तिथि पुण्य, पवित्रता, धर्म और सुख को देनेवाली है | इस दिन मुंडमालिनी चामुंडा का पूजन अवश्य करना चाहिये |*
🌷 *देवीभागवतपुराण पञ्चम स्कन्ध*
*अष्टम्याञ्च चतुर्दश्यां नवम्याञ्च विशेषतः ।*
*कर्तव्यं पूजनं देव्या ब्राह्मणानाञ्च भोजनम् ॥*
*निर्धनो धनमाप्नोति रोगी रोगात्प्रमुच्यते ।*
*अपुत्रो लभते पुत्राञ्छुभांश्च वशवर्तिनः ॥*
*राज्यभ्रष्टो नृपो राज्यं प्राप्नोति सार्वभौमिकम् ।*
*शत्रुभिः पीडितो हन्ति रिपुं मायाप्रसादतः ॥*
*विद्यार्थी पूजनं यस्तु करोति नियतेन्द्रियः ।*
*अनवद्यां शुभा विद्यां विन्दते नात्र संशयः ॥*
🙏🏻 *अष्टमी, नवमी एवं चतुर्दशी को विशेष रूप से देवीपूजन करना चाहिए और इस अवसर पर ब्राह्मण भोजन भी कराना चाहिए। ऐसा करने से निर्धन को धन की प्राप्ति होती है, रोगी रोगमुक्त हो जाता है, पुत्रहीन व्यक्ति सुंदर और आज्ञाकारी पुत्रों को प्राप्त करता है और राज्यच्युत राज को सार्वभौम राज्य प्राप्त करता है। देवी महामाया की कृपा से शत्रुओं से पीड़ित मनुष्य अपने शत्रुओं का नाश कर देता है। जो विद्यार्थी इंद्रियों को वश में करके इस पूजन को करता है, वह शीघ्र ही पुण्यमयी उत्तम विद्या प्राप्त कर लेता है इसमें संदेह नहीं है।*
🌷 *नवरात्रि अष्टमी को महागौरी की पूजा सर्वविदित है साथ ही*
🙏🏻 *अग्निपुराण के अध्याय 268 में आश्विन् शुक्ल अष्टमी को भद्रकाली की पूजा का विधान वर्णित है।*
🙏🏻 *स्कन्दपुराण माहेश्वरखण्ड कुमारिकाखण्ड में आश्विन् शुक्ल अष्टमी को वत्सेश्वरी देवी की पूजा का विधान बताया है।*
🙏🏻 *गरुड़पुराण अष्टमी तिथिमें दुर्गा और नवमी तिथिमें मातृका तथा दिशाएँ पूजित होनेपर अर्थ प्रदान करती है ।*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *शारदीय नवरात्रि* 🌷
🙏🏻 *नवरात्रि की सप्तमी तिथि यानी सातवें दिन माता दुर्गा को गुड़ का भोग लगाएं ।इससे हर मनोकामना पूरी हो सकती है।*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *शारदीय नवरात्रि* 🌷
🙏🏻 *शत्रुओं का नाश करती हैं मां कालरात्रि*
*महाशक्ति मां दुर्गा का सातवां स्वरूप हैं कालरात्रि। मां कालरात्रि काल का नाश करने वाली हैं, इसी वजह से इन्हें कालरात्रि कहा जाता है। मां कालरात्रि की आराधना के समय भक्त को अपने मन को भानु चक्र जो ललाट अर्थात सिर के मध्य स्थित करना चाहिए। इस आराधना के फलस्वरूप भानु चक्र की शक्तियां जागृत होती हैं। मां कालरात्रि की भक्ति से हमारे मन का हर प्रकार का भय नष्ट होता है। जीवन की हर समस्या को पल भर में हल करने की शक्ति प्राप्त होती है। शत्रुओं का नाश करने वाली मां कालरात्रि अपने भक्तों को हर परिस्थिति में विजय दिलाती हैं ।*

🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🙏🏻🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩

केळी खातांना सावधान

केळी खातांना सावधान
😳😳😳😳😳😳
सर्वाना विनंती आहे कि, हा मॅसेज काळजीपूर्वक वाचा व विचार करा आणि शक्यतो ..जास्तीत जास्त फोरवर्ड करा

25 /-30 /- रुपये डझन या दराने मृत्यू विकला जात आहे. माझी सर्वाना विनंती आहे कि सावध राहा.

मित्रांनो आपण सर्वाना केळे खूप आवडते आणि आपण भरपूर खातो. परंतू सध्या बाजारात येणारी केळी हि carbide युक्त पाण्यात भिजवून पिकवली जात आहेत. हि केळी खाल्ल्यास १००% “CANCER” अथवा पोटाचे विकार होऊ शकतात. त्यामुळे शहाणे व्हा आणि अशी केळी खाऊ नका.

एखादे केळे carbide चा वापर करून पिकवले आहे हे कसे ओळखल.?

केळे नैसर्गिक रित्या पिकवले जाते त्या वेळी त्याचे देठ कोमेजते ( काळे पडते ). नैसर्गिक पिकवलेल्या केळ्याचा रंग गर्द पिवळा असतो आणि त्याच्यावर थोडेफार काळे काळे डाग असतात. जर तेच केळे carbide चा वापर करून पिकवले असेल तर त्याचे देठ हिरवे असते आणि केळ्याचा रंग lemon yellow असतो. इतकेच नाही तर ते एकदम स्वच्छ पिवळे दिसते. बिलकुल डाग नसतात.

Carbide म्हंजे काय आणि त्याचे गुणधर्म kay.?

Carbide जर पाण्यात मिसळले तर ते heat emit करते. खेड्यामध्ये जिथे LPG cylinder उपलब्ध नसतात तिथे एका close tank मध्ये पाण्यात carbide मिसळतात व त्यातून येणाऱ्या gas वर gas cutting केले जाते. ( म्हणजे त्याची calorific value एवढी high आहे कि it can replace LPG gas .)

याच प्रमाणे ज्या वेळी एखादा केल्याचा घड त्या carbide युक्त पाण्यात बुडवून काढला जातो त्यावेळी हि उष्णता केल्यात उतरते आणि आणि त्यामुळे केळे पिकते. हि प्रक्रिया वापरणारे व्यापारी इतके शहाणे नसतात कि त्यांना हे कळेल कि किती डझन केल्याच्या साठी किती carbide वापरावे त्यामुळे carbide चा अनिर्बंध वापर होतो. ज्यामुळे अतिरिक्त उष्णता केळ्यामध्ये साठून राहते व आपल्या पोटात जाते. यामुळे आपल्या
1 पचनसंस्थे मध्ये
2 बिघाड होते
3 डोळ्यात जळजळ
4 छाती मधे त्रास
5 मळमळ
6 पोटात दुखने
7 घशात जळजळ
8 अल्सर
व tumour तयार
होऊ शकतो.
👇
म्हणून विनंती करतो. केळ्यावर बहिष्कार घाला. आंब्यावर पण हाच प्रयोग केला जात होते. लोकांनी म्हणून या वर्षी कमी आंबे खाल्ले आणि आंबे व्यापार्यांचे डोळे उघडले.
👇
आता केळ्यावर बहिष्कार
घाला. हि Post सर्व जणांना Share करावी हि नम्र विनंती.आहे
🙏🏾

हिंदु पंचांग दिनांक-: 11/10/2021,सोमवार

🔯🚩*षष्ठं कात्यायनी* 🚩🔯
🙏🌺🙏 *अथ पंचांगम्* 🙏🌺🙏

*दिनाँक-: 11/10/2021,सोमवार*

तिथि————- षष्ठी 23:50 तक
पक्ष————————— शुक्ल
नक्षत्र————-ज्येष्ठा 12:54
योग———– सौभाग्य 11:47
करण———— कौलव 12:59
वार———————— सोमवार
माह————————-आश्विन
चन्द्र राशि———वृश्चिक 12:54
चन्द्र राशि————————धनु
सूर्य राशि——————— कन्या
रितु—————————-शरद
आयन——————- दक्षिणायण
संवत्सर —— ———आनंद
सूर्योदय—————- 06:08
सूर्यास्त—————— 17:43

राहू काल 07:35 – 09:02 अशुभ
अभिजित 11:33 -12:19 शुभ

🚩गंड मूल अहोरात्र अशुभ

💮चोघडिया, दिन
अमृत 06:08 – 07:45 शुभ
काल 07:45 – 09:12 अशुभ
शुभ 09:12 – 10:39 शुभ
रोग 10:39 – 12:06 अशुभ
उद्वेग 12:06 – 13:33 अशुभ
चर 13:33 – 14:59 शुभ
लाभ 14:59 – 16:26 शुभ
अमृत 16:26 – 17:43 शुभ

🚩चोघडिया, रात
चर 17:43 – 19:26 शुभ
रोग 19:26 – 20:59 अशुभ
काल 20:59 – 22:33 अशुभ
लाभ 22:33 – 24:06* शुभ
उद्वेग 24:06* – 25:39* अशुभ

*💮दिशा शूल ज्ञान————-पूर्व*
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा काजू खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
*शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l*
*भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll*

*🚩 अग्नि वास ज्ञान -:*
*यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,*
*चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।*
*दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,*
*नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।* *महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्*
*नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।*

6 + 2 + 1 = 9 ÷ 4 = 1 शेष
पाताल लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l

*💮 शिव वास एवं फल -:*

6 + 6 + 5 = 17 ÷ 7 = 3 शेष

वृषभारूढ़ = शुभ कारक

*🚩भद्रा वास एवं फल -:*

*स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।*
*मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।*

*💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮*

* नवरात्रि षष्ठी कात्यायनी पूजन

* आमेर छट मेला

* जयप्रकाश नारायण जयन्ती

* तप षष्ठी (उड़ीसा)

*💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮*

🐏मेष
मेहनत का फल पूरा-पूरा मिलेगा। यात्रा लाभदायक रहेगी। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। मित्रों का सहयोग कर पाएंगे। बड़ा काम करने का मन बनेगा। पारिवारिक सहयोग मिलेगा। आय में वृद्धि होगी। भाग्य अनुकूल रहेगा। रुके कार्य पूरे होंगे। प्रसन्नता रहेगी। किसी प्रभावशाली व्यक्ति से परिचय होगा।

🐂वृष
विवाद को बढ़ावा न दें। किसी व्यक्ति के व्यवहार से स्वाभिमान को ठेस पहुंच सकती है। दु:खद समाचार मिल सकता है। नए कार्य में बनेंगे। बेकार बातों की तरफ ध्यान न दें। दौड़धूप अधिक होगी। नौकरी में मातहतों का सहयोग कम मिलेगा। कार्य की अधिकता रहेगी। जल्दबाजी न करें।

👫मिथुन
रचनात्मक कार्य पूर्ण व सफल रहेंगे। पार्टी व पिकनिक का आयोजन होगा। आय में वृद्धि होगी। परीक्षा व साक्षात्कार में सफलता प्राप्त होगी। व्यस्तता रहेगी। स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद प्राप्त होगा। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। घर-बाहर सभी ओर से सफलता तथा प्रसन्नता प्राप्त होगा।

🦀कर्क
स्थायी संपत्ति में वृद्धि हो सकती है। प्रॉपर्टी के कामकाज बड़ा लाभ दे सकते हैं। निवेश शुभ रहेगा। नौकरी में प्रशंसा मिलेगी। रोजगार मिलेगा। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। पार्टनरों से मतभेद दूर होंगे। जल्दबाजी में कोई निर्णय न लें। स्वास्थ्य कमजोर रह सकता है। लापरवाही न करें।

🐅सिंह
स्वास्थ्य का ध्यान रखें। उत्साह की अधिकता तथा व्यस्तता रहेगी। राजकीय बाधा दूर होगी। कारोबार ठीक चलेगा। महत्वपूर्ण निर्णय लेने में जल्दबाजी न करें। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। भाग्य अनुकूल है, लाभ लें। घर-बाहर सभी ओर से सहयोग प्राप्त होगा। प्रसन्नता रहेगी।

🙍‍♀️कन्या
धन प्राप्ति सुगम होगी। नौकरी में चैन रहेगा। लंबे समय से रुके कार्यों में गति आएगी। धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने का अवसर मिल सकता है। सत्संग का लाभ मिलेगा। जल्दबाजी न करें। व्यवसाय ठीक चलेगा। कानूनी अड़चन दूर होकर स्थिति मनोनुकूल रहेगी। कारोबार में वृद्धि के योग हैं।

⚖️तुला
डूबी हुई रकम प्राप्त हो सकती है, प्रयास करें। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। निवेशादि मनोनुकूल लाभ देंगे। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। व्यापार में लाभ बढ़ेगा। किसी मांगलिक कार्य में भाग लेने का अवसर मिल सकता है। पारिवारिक सहयोग मिलेगा। घर-बाहर सुख-शांति बनी रहेगी। आज नए कार्य में लाभ मिलेगा।

🦂वृश्चिक
नए कार्य में लाभ मिलेगा। उत्साहवर्द्धक सूचना मिलेगी। भूले-बिसरे साथियों से मुलाकात होगी। फालतू खर्च होगा। बड़ा काम करने का मन बनेगा। कारोबार में लाभ होगा। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड आदि मनोनुकूल लाभ देंगे। भाइयों का सहयोग मिलेगा। आत्मसम्मान बना रहेगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। लाभ होगा।

🏹धनु
बुरी खबर मिल सकती है, धैर्य रखें। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। काम करने की इच्छा नहीं होगी। विवाद से क्लेश संभव है। बनते कामों में बाधा उत्पन्न होगी। मेहनत अधिक और लाभ कम रहेगा। नौकरी में कार्यभार रहेगा। घर में तनाव रह सकता है। दूसरे लोग आपसे अधिक अपेक्षा करेंगे।

🐊मकर
व्यवसाय ठीक चलेगा। आय बनी रहेगी। विवाद को बढ़ावा न दें। फालतू खर्च पर नियंत्रण रखें। कुसंगति से बचें। घर-परिवार की चिंता रहेगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। किसी व्यक्ति के उकसाने में न आएं। जोखिम व जमानत के कार्य टालें।

🍯कुंभ
योजना फलीभूत होगी। कार्यस्थल पर परिवर्तन संभव है। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। मित्रों का सहयोग कर पाएंगे। निवेश शुभ रहेगा। नौकरी में कार्यभार तथा अधिकार दोनों बढ़ सकते हैं। बाहर जाने की योजना बनेगी। शत्रुओं का पराभव होगी। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी।

🐟मीन
यात्रा लाभदायक रहेगी। भेंट व उपहार की प्राप्ति होगी। कारोबार में वृद्धि होगी। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। समय अनुकूल है, लाभ लें। प्रमाद न करें। पार्टनरों का सहयोग मिलेगा। प्रसन्नता रहेगी। चोट व रोग से बाधा संभव है। झंझटों में न पड़ें। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं।

🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏
🌺🌺🌺🌺🙏🌺🌺🌺🌺

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक 11 अक्टूबर 2021 दिन – सोमवार

🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞
⛅ *दिनांक 11 अक्टूबर 2021*
⛅ *दिन – सोमवार*
⛅ *विक्रम संवत – 2078 (गुजरात – 2077)*
⛅ *शक संवत -1943*
⛅ *अयन – दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु – शरद*
⛅ *मास -अश्विन*
⛅ *पक्ष – शुक्ल*
⛅ *तिथि – षष्ठी रात्रि 11:50 तक तत्पश्चात सप्तमी*
⛅ *नक्षत्र – जेष्ठा दोपहर 12:56 तक तत्पश्चात मूल*
⛅ *योग – सौभाग्य सुबह 11:50 तक तत्पश्चात शोभन*
⛅ *राहुकाल – सुबह 08:01 से सुबह 09:29 तक*
⛅ *सूर्योदय – 06:33*
⛅ *सूर्यास्त – 18:16*
⛅ *दिशाशूल – पूर्व दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण – तप षष्ठी (ओडिशा),सरस्वती आवाहन-स्थापन*
💥 *विशेष – *षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *चिंता, चिडचिडापन व तनाव कम करने हेतु* 🌷
👉🏻 *जो व्यक्ति स्नान करते समय पानी में ( ५ मि.ली.) गुलाबजल मिलाकर ‘ॐ ह्रीं गंगायै ॐ ह्रीं स्वाहा |’ यह मंत्र बोलते हुए सर पर जल डालता है, उसे गंगा-स्नान का पुण्य होता है तथा साथ ही मानसिक चिंताओं में कमी आती है और तनाव धीरे-धीरे दूर होने लगता है, विचारों का शोधन होने लगता है, चिडचिडापन कम होता है तथा वह अपने – आपको तरोताजा अनुभव करता है |*
🙏🏻
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *शारदीय नवरात्रि* 🌷
🙏🏻 *भय का नाश करती हैं मां कात्यायनी*
*नवरात्रि के षष्ठी तिथि पर आदिशक्ति दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की पूजा करने का विधान है। महर्षि कात्यायनी की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया था। इसलिए वे कात्यायनी कहलाती हैं। नवरात्रि के छठे दिन इनकी पूजा और आराधना होती है। माता कात्यायनी की उपासना से आज्ञा चक्र जाग्रृति की सिद्धियां साधक को स्वयंमेव प्राप्त हो जाती हैं। वह इस लोक में स्थित रहकर भी अलौलिक तेज और प्रभाव से युक्त हो जाता है तथा उसके रोग, शोक, संताप, भय आदि सर्वथा विनष्ट हो जाते हैं।*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *शारदीय नवरात्रि* 🌷
🙏🏻 *नवरात्र की षष्ठी तिथि यानी छठे दिन माता दुर्गा को शहद का भोग लगाएं ।इससे धन लाभ होने के योग बनने हैं ।*

🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🙏🏻🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩

नवरात्रीचा भक्ती भाव

*ऊँ नमःशिवाय*
*श्री गणेशाय नमो नमः*
*श्री कुलदेवता नमो नमः*
*श्री कुलदेवी माता नमो नमः*
*श्री ग्राम देवी माता नमो नम* :
*श्री नवदूर्गा माता नमो नमः*

*या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता ।*
*नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।।*
*अर्थ : जी देवी सर्व प्राणिमात्रांमध्ये मातृरूपाने स्थित आहे त्या श्रीदुर्गादेवीला मी त्रिवार नमस्कार करतो.*

*नवरात्रीत देवीतत्त्व नेहमीपेक्षा १००० पटीने कार्यरत असते. देवीतत्त्वाचा अधिकाधिक लाभ मिळण्यासाठी नवरात्रीच्या काळात ‘श्री दुर्गादेव्यै नम: ।’ हा नामजप जास्तीतजास्त करावा.*

*नवरात्रसंकल्प*

॥ श्रीमन्महागणाधिपतये नमः ॥
अद्य पूर्वोच्चरित । फलप्राप्त्यर्थ सावर्णिसगोत्रोत्पन्नस्य यजमानस्य सकुटुंबस्य सपरिवारस्य द्विपादचतुष्पादसहितस्य मम क्षेम – स्थैर्यायुरारोग्यैश्वर्याभिवृद्धि – सकलापच्छांति – सर्व शत्रु परजाऽखंडैश्वर्याभिवृद्धिसकलेष्टमनोरथसिद्धिसद्बुद्धिप्राप्तिपूर्वकसत्कीर्तिसिद्धि – पुत्रपौत्राखंडदंडायमानसंततिप्रार्तिअस्वगतराज्यस्य स्थिरीकरणद्वारा च श्रीमहाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वतीत्रिगुणात्मकश्रीदुर्गाभवानीशंकरप्रीत्यर्थं प्रतिवार्षिकविहितमाश्विन शुद्ध प्रतिपद्दिनमारभ्य महानवमीदिनपर्यंत ब्राह्मणद्वारा त्रिकाल महापूजोपवासपूर्वक शारदीय नवरात्रमहोत्सवाख्यं कर्म करिष्ये । तथा च तदंगतया शतावृत्तिभिः श्रीसूक्तजयं तावत्संख्याकं बटुभैरवस्तोत्रजपं तावत्संख्याकं सौदर्यलहरीस्तोत्रजपं तावत्संख्याकं शिवकवचस्तोत्रमालामंत्रजपं तावत्संख्याकं महिम्नस्तोत्रजपं तथा चायुतसंख्याकं महामृत्युंजयजपं तावत्संख्याकमादित्यादिनवग्रह मंत्र जपं तथा च लघुरुद्रजप प्रतिदिनं चाष्टोत्तरशतनमस्कारांस्तावतीः प्रदक्षिणश्च करिष्ये । तथा च तन्निमित्ततया मार्कंडेयपुराणांतर्गत श्रीसप्तशतीस्तोत्रमालामंत्रस्मादौ कवचार्गलाकीलकयुतस्यांते रहस्यत्रयसहितस्य प्रत्यावृत्यष्टोत्तर शतनावर्ण मंत्रजप संपुटितस्य सहस्रावृत्तिजपं तथा च तद्दशांशेन विहितहोम प्रत्याम्नायहिगुणजपं तथा च शतावृत्तिभिर्भवानी सहस्रनामस्तोत्र जपं तथा चायुत संख्याकं मूलमंत्रजपं तावत्संख्याकं दुर्गामंत्रजपमद्यप्रभृति यावत्समाति ब्राह्मणद्वारा करिष्ये । तत्रादौ निर्विघ्नतासिद्ध्यर्थं महागणपतिपूजनपूर्वकं स्वस्तिपुण्याहवाचनं मातृकापूजनं वसोर्धारापूजनमायुष्यमंत्रजपं नांदीश्राद्धमाचार्यवरणं च करिष्ये ॥ इति संकल्पः ॥

*ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ॐ शैलपुत्री देव्यै नम:।*

*नवदुर्गेचे पहिले रूप (१)*
*शैलपुत्री देव*
*अस्त्र-शस्त्र : त्रिशुळ*
*वाहन : गो माता*

दुर्गेचे पहिले रूप ‘ शैलपुत्री’ या नावाने ओळखले
जाते. ही नवदुर्गांपैकी पहिली दुर्गा आहे.
पर्वतराज हिमालयाची मुलगी म्हणून जन्म
घेतल्यामुळे तिला ‘शैलपुत्री’ असे नाव पडले आहे.
नवरात्रीच्या पहिल्याच दिवशी तिची पूजा
आणि आराधना केली जाते. या पहिल्याच
दिवशीच्या पूजेत संत-महंत आपल्या मनाला
‘मूलाधार’ चक्रात स्थिर करतात. या
दिवसापासून त्यांच्या योग साधनेला सुरवात
होते.
या दुर्गेच्या उजव्या हातात त्रिशूळ आणि
डाव्या हाता कमळाचे फूल आहे. आपल्या
पूर्वजन्मात तीने प्रजापती दक्ष राजाची
कन्या म्हणून जन्म घेतला होता. त्यावेळी तिचे
नाव ‘सती’ असे होते. तिचा विवाह शंकराशी
झाला होता.
एकदा राजा प्रजापतीने मोठा यज्ञ केला. या
यज्ञासाठी त्याने सर्व देवदेवतांना निमंत्रित
केले होते. परंतु, त्याने शंकराला निमंत्रित केले
नव्हते. आपले वडील मोठा यज्ञ करणार असल्याचे
समजल्यावर सतीला तिथे जाण्याची तीव्र
इच्छा झाली. तिने आपली इच्छा शंकराजवळ
प्रकट केली. तेव्हा शंकराने तिला सांगितले, की
प्रजापती दक्ष काही कारणास्तव माझ्यावर
नाराज आहेत. त्यांनी सर्व देवदेवतांना
यज्ञासाठी बोलावले आहे.
परंतु, मला मुद्दाम यज्ञाचे निमंत्रण दिले नाही.
अशा परिस्थितीत तू तिथे जाणे मला योग्य
वाटत नाही. शंकराने समजावून सांगितले
तरीही तिचे समाधान झाले नाही. वडीलांचा
यज्ञ पाहणे, तसेच आपली आई आणि बहिणींना
भेटण्यासाठी तिचे मन व्याकूळ झाले होते.
तिचा आग्रह पाहून शंकराने तिला यज्ञासाठी
जाण्याची परवानगी दिली.
सती वडिलांच्या घरी गेल्यावर कुणीही तिचे
स्वागत केले नाही. तिला कुणीही आदराची
वागणूक दिली नाही. आई आणि बहिणींनी
देखील तिला गळाभेट दिली नाही. सर्वजण
तिच्याकडे पाहून तोंड फिरवत होते.
नातेवाईकांची ही वागणूक पाहून तिला अत्यंत
राग आला. तिथे शंकराच्या प्रती
तिरस्काराची भावना असल्याचे तिला दिसून
आले. दक्षाने शंकराविषयी काही अपमानकारक
शब्दही वापरले होते. हे सर्व पाहून ती रागाने
संतप्त झाली आणि शंकरानसांगितले तेच योग्य
होते, असे तिला वाटले
आपण इथे येऊन खूप मोठी चूक केली आहे याची
जाणीव होऊन नवर्याचा अपमान सहन न
झाल्याने तिने स्वत:ला योगाग्नीत जाळून
घेतले. याची माहीती शंकराला मिळाल्यावर
त्याने लगेच आपल्या गणांना पाठवून
प्रजापतीचा संपूर्ण यज्ञ उध्वस्त केला. सतीने
पुढील जन्मात शैलराज हिमालयाच्या
कन्येच्या रूपात जन्म घेतला. यावेळी ती
‘शैलपुत्री’ या नावाने प्रसिद्ध झाली.
पार्वती, हेमवती हे तिचेच नाव होते. ‘शैलपुत्री’
देवीचा विवाहदेखील शंकराशी झाला
होता. पूर्वजन्माप्रमाणे या जन्मीही ती
शंकराची अर्धांगिनी बनली. म्हणून
नवदुर्गांपैकी प्रथम शैलपुत्री दुर्गेचे महत्त्व आणि
शक्ती अनंत आहे.

*ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ॐ शैलपुत्री देव्यै नम* :।

*ॐ शं शैलपुत्री देव्यै: नम* :

*स्तोत*
*प्रथम दुर्गा त्वंहि भवसागर: तारणीम्।*
*धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यम्॥*
*त्रिलोजननी त्वंहि परमानंद प्रदीयमान्।*
*सौभाग्यरोग्य दायनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यहम्॥*
*चराचरेश्वरी त्वंहि महामोह: विनाशिन।*
*मुक्ति भुक्ति दायनीं शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥*

*स्तुति मंत्र :- या देवी सर्वभू‍तेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता |*
*नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ||*

*मूलमंत्र:-*
*वन्दे वांच्छितलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्‌ | वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌ ||*

*शैलपुत्री की आरती*

शैलपुत्री मां बैल पर सवार। करें देवता जय जयकार।
शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी।

पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू।

सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी जिसने उतारी।
उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो।

घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।

जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।
मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।

*देवी :बीज मंत्*
*शैलपुत्री : ह्रीं शिवायै नम:।*

*आश्विनशुद्धपक्षी अंबा बैस…*

आश्विनशुद्धपक्षी अंबा बैसलि सिंहासनी हो । प्रतिपदेपासुन घटस्थापना ती करुनि हो ।
मुलमंत्रजप करुनी भोवतें रक्षक ठेउनि । हो ब्रह्मविष्णुरुद्र आईचे पुजन करिती हो ॥ १ ॥

उदो बोला उदो अंबाबाई माउलीचा हो । उदोकारे गर्जती काय महिमा वर्णू तिचा हो ॥ धृ. ॥

द्वितीयेचे दिवशी मिळती चौसष्ट योगिनि हो । सकळांमध्ये श्रेष्ठ परशुरामाची जननी हो ।
कस्तुरीमळवट भांगी शेंदूर भरुनी हो उदोकारे गर्जती सकळ चामुंडा मिळुनी हो ॥ उदो. ॥ २ ॥

तृतीयेचे दिवशी अंबे शृंगार मांडिला हो । मळवट पातळ चोळी कंठी हार मुक्ताफळा हो ।
कंठीची पदके कांसे पितांबर पिवळा हो । अष्ठभुजा मिरविती अंबे सुंदर दिसे लीला हो ॥ उदो. ॥ ३ ॥

चतुर्थीचे दिवशी विश्वव्यापक जननी हो । उपासकां पाहसी अंबे प्रसन्न अंत:करणीं हो ॥
पूर्णकृपें पाहसी जगन्माते मनमोहिनी हो । भक्तांच्या माउली सुर ते येती लोटांगणी हो ॥ उदो.॥ ४ ॥

पंचमीचे दिवशी व्रत तें उपांगललिता हो । अर्घ्यपाद्यपीजनें तुजला भवानी स्तविती हो ॥
रात्रीचे समयी करिती जागरण हरिकथा हो ।आनंदे प्रेम ते आले सद्‌भावें क्रीडतां हो ॥ उदो. ॥ ५ ॥

षष्ठीचे दिवशी भक्तां आनंद वर्तला हो । घेउनि दिवट्या हस्ती हर्षे गोंधळ घातला हो ॥
कवडी एक अर्पिता देसी हार मुक्ताफलांचा हो । जोगवा मागतां प्रसन्न झाली भक्तकुळा हो ॥ उदो.॥ ६ ॥

सप्तमीचे दिवशी सप्तशृंगगडावरीहो । तेथें तू नांदसी भोवतें पुष्पें नानापरी हो ॥
जाईजुईशेवंती पूजा रेखियली बरवी हो । भक्तसंकटी पडतां झेलूनि घेसी वरचे वरी हो ॥ उदो. ॥ ७ ॥

अष्टमीचे दिवशी अष्टभुजां नारायणी हो । सह्याद्रीपर्वती पाहिली उभी जगज्जननी हो ।
मन माझें मोहिले शरण आलो तुजलागुनी हो । स्त्नपान देऊनि सुखी केले अंत:करणी हो ॥ उदो. ॥ ८ ॥

नवमीचे दिवशीं नवदिवसाचे पारणें हो । सप्तशतीजप होम हवनें सद्‌भक्ती करुनी हो ।
षड्रस अन्ने नैवेद्यासी अर्पियली भोजनी हो । आचार्याब्राह्मणां तृप्त केले कृपेकरुनी हो ॥ उदो. ॥ ९ ॥

दशमीच्या दिवशी अंबा निघे सीमोलंघनी हो । सिंहारुढे दारुण शस्त्रें अंबे त्वां घेऊनी हो ।
शुंभनिशुंभादिक राक्षसा किती मारिसी रणी हो । विप्रा रामदासा आश्रय दिधला तो चरणी हो । उदो. ॥ १० ॥

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