एक समाज श्रेष्ठ समाज संस्था संरक्षक हरीश चन्द्र पाण्डेय अध्यक्ष योगेन्द्र कुमार साहू के नेतृत्व में संस्था के माध्यम से निर्धन परिवारों के बच्चों की मदद के लिए संस्था पदाधिकारियों ने
हल्द्वानी राजपुरा वार्ड नम्बर 13 में निर्धन के बच्चों को गरम स्वेटर वितरण किया गया
इस दौरान एक समाज श्रेष्ठ समाज संस्था उपाध्यक्ष लोकेश कुमार साहू एक्टर साहिल राज ने संयुक्त रूप से कहा की हमने संस्था के माध्यम से निर्धन गरीब परिवारों की मदद करने के लिए गरीब परिवारों के बच्चों को गरम स्वेटर वितरण कर रहे हैं क्योंकि सबका यह कर्तव्य है कि निर्धन असहाय लोगों की हम सब जितनी मदद कर सकते हैं उतनी मदद करनी चाहिए क्योंकि बहुत बच्चों के पास कपड़े न होने की वजह से बहुत से बच्चे गंदगी के कारण बीमार हो जाते हैं ऐसे में हम सबको आगे आकर असहाय निर्धन लोगों की हर संभव मदद करना चाहिए क्योंकि हो सकता है की हम सबके एक छोटे से अच्छे कदम के कारण बहुत से गरीब बच्चों के चेहरे पर खुशी झलक सकती है और हम सब मिलकर यदि असहाय निर्धन लोगों की मदद करें तो उन्हें भी अपना जीवन यापन करने में कोई दिक्कत नहीं होगी क्योंकि हमारे द्वारा किए गए अच्छे कार्यों से निर्धन व्यक्तियों को भी यह महसूस होगा कि इस दुनिया में भगवान के आशीर्वाद से उनकी भी मदद करने वालों की कोई कमी नहीं है और उन्हें भी एक घर परिवार की तरह खुशी का वातावरण एहसास होगा इसलिए एक समाज श्रेष्ठ समाज संस्था हमेशा जनहित में कार्य करती रहती है और आगे भी जनहित में कार्य करती रहेगी
इस दौरान बच्चों को गरम स्वेटर वितरण करने में संस्था संरक्षक हरीश चन्द्र पाण्डेय अध्यक्ष योगेन्द्र कुमार साहू उपाध्यक्ष लोकेश कुमार साहू कोषाध्यक्ष बलराम हालदार मीडिया प्रभारी मुकेश सरकार कांग्रेस जिला महामंत्री हेमन्त कुमार साहू एक्टर साहिल राज प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल उपाध्यक्ष सचिन गुप्ता अभिषेक साहू रितिक साहू दीपक कुमार संदीप यादव किरन महेश्वरी पूनम सरकार संध्या कुमारी मनीष साहू अशोक कुमार सूरज कुम्हार सूरज मिस्त्री सुशील राय मुकेश कुमार आदि लोग उपस्थित रहे
एक समाज श्रेष्ठ समाज संस्था अध्यक्ष योगेन्द्र कुमार साहू के नेतृत्व में संस्था के माध्यम से निर्धन परिवारों के बच्चों की मदद
हिंदु पंचांग राशिभविष्य दिनाँक-: 25/11/2021,गुरुवार
🙏🌺🙏 *अथ पंचांगम्* 🙏🌺🙏
*दिनाँक-: 25/11/2021,गुरुवार*
तिथि————– षष्ठी 28:41 तक
पक्ष————————– कृष्ण
नक्षत्र————– पुष्य 18:48
योग————- शुक्ल 07:56
करण————— गर 15:56
वार———————— गुरूवार
माह————————मार्गशीर्ष
चन्द्र राशि——————– कर्क
सूर्य राशि——————– वृश्चिक
रितु—————————हेमन्त
अयन——————- दक्षिणायन
संवत्सर ——————– आनन्द
सूर्योदय————— 06:39
सूर्यास्त——————-17:13
राहू काल 13:15 – 14:35 अशुभ
अभिजित 11:35 -12:17 शुभ
🚩गंड मूल 18:48 – अहोरात्र अशुभ
💮चोघडिया, दिन
शुभ 06:39 – 08:08 शुभ
रोग 08:08 – 09:28 अशुभ
उद्वेग 09:28 – 10:47 अशुभ
चर 10:47 – 12:06 शुभ
लाभ 12:06 – 13:25 शुभ
अमृत 13:25 – 14:45 शुभ
काल 14:45 – 16:04 अशुभ
शुभ 16:04 – 17:13 शुभ
🚩चोघडिया, रात
अमृत 17:13 – 19:04 शुभ
चर 19:04 – 20:45 शुभ
रोग 20:45 – 22:26 अशुभ
काल 22:26 – 24:07* अशुभ
लाभ 24:07* – 25:47* शुभ
*💮दिशा शूल ज्ञान————-दक्षिण*
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा केशर खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
*शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l*
*भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll*
*🚩 अग्नि वास ज्ञान -:*
*यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,*
*चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।*
*दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,*
*नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।* *महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्*
*नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।*
15 + 6 + 5 + 1 = 27 ÷ 4 = 3 शेष
मृत्यु लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l
*🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮
गुरु ग्रह मुखहुति
*💮 शिव वास एवं फल -:*
21 + 21 + 5 = 47 ÷ 7 = 5 शेष
ज्ञानवेलायां = कष्ट कारक
*🚩भद्रा वास एवं फल -:*
*स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।*
*मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।*
रात्रि 28:42 से प्रारम्भ
मृत्यु लोक = सर्वकार्य विनाशनी
*💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮*
* गुरुपुष्य योग 18:48 तक
*सर्वार्थसिद्धि एवं अमृतसिद्धि योग 18:48 तक
*निम्बार्काचार्य भगवान का छटी महोत्स
*💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮*
🐏मेष
व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी। घर में तनाव रहेगा। पार्टनरों से मतभेद व कहासुनी हो सकती है। वाणी पर नियंत्रण रखें। किसी व्यक्ति विशेष से कहासुनी हो सकती है। लेन-देन में सावधानी रखें। बनते काम बिगड़ सकते हैं। चोट व दुर्घटना से बचें। नकारात्मकता बढ़ेगी।
🐂वृष
राजकीय सहयोग प्राप्त होगा। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। सभी तरफ से सफलता प्राप्त होगी। प्रसन्नता में वृद्धि होगी। व्यस्तता के चलते स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। थकान रहेगी। तंत्र-मंत्र में रुचि जागृत होगी। सत्संग का लाभ मिलेगा। कारोबार में वृद्धि होगी।
👫मिथुन
रोजगार में वृद्धि होगी। सामाजिक कार्य करने का अवसर प्राप्त हो सकता है। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। नए काम मिल सकते हैं। बाहर जाने का मन बनेगा। प्रसन्नता तथा संतुष्टि रहेगी। जल्दबाजी न करें। नई योजना बनेगी। कार्यस्थल पर परिवर्तन हो सकता है।
🦀कर्क
जीवनसाथी से असहयोग मिलेगा। चिंता तथा तनाव रहेंगे। लेन-देन में जल्दबाजी व लापरवाही न करें। धनहानि हो सकती है। विवाद से बचें। झंझटों से दूर रहें। आय में निश्चितता रहेगी। फालतू खर्च होगा। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा।
🐅सिंह
घर-बाहर जीवन सुखमय रहेगा। रुका हुआ धन मिलने के योग हैं, प्रयास करते रहें। यात्रा लाभदायक रहेगी। भाग्य का साथ मिलेगा। रोजगार में वृद्धि होगी। आय बढ़ेगी। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। भाइयों का सहयोग प्रसन्नता में वृद्धि करेगा। जोखिम व जमानत के कार्य टालें।
🙎♀️कन्या
भेंट व उपहार की प्राप्ति होगी। बेरोजगारी दूर होगी। कारोबार में वृद्धि होगी। नौकरी में प्रमोशन मिल सकता है। निवेश शुभ रहेगा। भाग्य की अनुकूलता रहेगी। प्रमाद न करें। उत्साह व प्रसन्नता से काम कर पाएंगे। कोई बड़ा कार्य होने से प्रसन्नता में वृद्धि होगी।
⚖️तुला
व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। नए मित्र बनेंगे। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। आय में निश्चितता रहेगी। आत्मसम्मान बना रहेगा। अच्छे समाचार मिलेंगे। अतिथियों का आगमन होगा। प्रसन्नता में वृद्धि होगी। किसी बड़े काम को करने का मन बनेगा। जल्दबाजी न करें।
🦂वृश्चिक
निवेश शुभ रहेगा। मेहनत का फल प्राप्त होगा। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। नौकरी में प्रभाव वृद्धि होगी। उच्चाधिकारी की प्रसन्नता प्राप्त होगी। पारिवारिक चिंता में वृद्धि होगी। शत्रुओं से सावधानी आवश्यक है।
🏹धनु
रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। कारोबारी व्यस्तता रहेगी। कोई आनंददायक यात्रा का आयोजन हो सकता है। मनपसंद भोजन का आनंद प्राप्त होगा। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। घर-परिवार की चिंता रहेगी। भाग्य का साथ मिलेगा। प्रभावशाली व्यक्तियों से परिचय होगा। प्रमाद न करें।
🐊मकर
व्यवसाय में मनोनुकूल लाभ होगा। आय बनी रहेगी। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। दूसरों के काम में हस्तक्षेप न करें। मेहनत अधिक होगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। शत्रु हानि पहुंचा सकते हैं। विवाद को बढ़ावा न दें। शोक समाचार मिल सकता है। स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
🍯कुंभ
प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। नौकरी में प्रभाव वृद्धि होगी। सभी कार्य समय पर होंगे। निवेश शुभ रहेगा। आय में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। कानूनी अड़चन दूर होकर लाभ की स्थिति बनेगी। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा।
🐟मीन
स्थायी संपत्ति में वृद्धि होगी। कोई बड़ा सौदा हो सकता है। बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। कारोबार में वृद्धि होगी। घर-बाहर सभी तरफ से सहयोग प्राप्त होगा। प्रसन्नता रहेगी। प्रमाद न करें। प्रतिद्वंद्विता में वृद्धि होगी। थकान व कमजोरी रहेगी।
✍🏻✍🏻
🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏
हिन्दू पंचांग दिनांक – 25 नवंबर 2021 दिन – गुरुवार
🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞
⛅ *दिनांक – 25 नवंबर 2021*
⛅ *दिन – गुरुवार*
⛅ *विक्रम संवत – 2078*
⛅ *शक संवत -1943*
⛅ *अयन – दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु – हेमंत*
⛅ *मास – मार्ग शीर्ष मास (गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार कार्तिक*)
⛅ *पक्ष – कृष्ण*
⛅ *तिथि – षष्ठी 26 नवंबर प्रातः 04:42 तक तत्पश्चात सप्तमी*
⛅ *नक्षत्र – पुष्य शाम 06:50 तक तत्पश्चात अश्लेशा*
⛅ *योग – शुक्ल सुबह 07:58 तक तत्पश्चात ब्रह्म*
⛅ *राहुकाल – दोपहर 01:48 सेशाम 03:11 तक*
⛅ *सूर्योदय – 06:56*
⛅ *सूर्यास्त – 17:54*
⛅ *दिशाशूल – दक्षिण दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण – गुरुपुष्यामृत योग (सूर्योदय से शाम 6:50 तक)*
💥 *विशेष – षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🌷 *स्वास्थ्यवर्धक खजूर* 🌷
➡ *खजूर मधुर, शीतल, पौष्टिक व सेवन करने के बाद तुरंत शक्ति-स्फूर्ति देनेवाला है | यह रक्त, मांस व वीर्य की वृद्धि करता है | ह्रदय व मस्तिष्क को शक्ति देता है | वात, पित्त व कफ इन तीनों दोषों का शामक है | यह मल व मूत्र को साफ लाता है | खजूर में कार्बोहाइड्रेटस, प्रोटीन्स, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नेशियम, लौह आदि प्रचुर मात्रा में पाया जाता है | ‘ अमेरिकन कैंसर सोसाइटी ‘ के अनुसार शरीर को एक दिन में २०-३५ ग्राम डाएटरी फाइबर (खाद्य पदार्थों में स्थित रेशा) की जरुरत होती है, जो खजूर खाने से पूरी हो जाती है |*
➡ *खजूर रात भर पानी में भिगोकर सुबह लेना लाभदायक है | खजूर रक्त को बढ़ाता है और यकृत (लीवर) के रोगों में लाभकारी है | रक्ताल्पता में इसका नियमित सेवन लाभकारी है | नींबू के रस में खजूर की चटनी बनाकर खाने से भोजन की अरुचि मिटती है | खजूर का सेवन बालों को लंबा, घना और मुलायम बनाता है |*
💊 *औषधि-प्रयोग* 💊
👉🏻 *कब्जनाशक : खजूर में रेचक गुण भरपूर है | ८-१० खजूर २०० ग्राम पानी में भिगों दें,सुबह मसलकर इनका शरबत बना लें | फिर इसमें ३०० ग्राम पानी और डालकर गुनगुना गर्म करें | खाली पेट चाय की की तरह पी जायें | कुछ देर बाद दस्त होगा | इससे आँतों को बल और शरीर को स्फूर्ति भी मिलेगी | उम्र के अनुसार खजूर की मात्रा कम-ज्यादा करें |*
👉🏻 *नशा निवारक : शराबी प्राय: नशे की झोंक में इतनी शराब पी जाता है की उसका यकृत नष्ट होकर मृत्यु का कारण बन सकता है | इस स्थिति में ताजे पानी में खजूर को अच्छी तरह मसलते हुए शरबत बनायें | यह शरबत पीने से शराब का विषैला प्रभाव नष्ट होने लगता है |*
👉🏻 *आँतों की पुष्टि : खजूर आँतों के हनिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है, साथ ही खजूर के विशिष्ट तत्त्व ऐसे जीवाणुओं को जन्म देते हैं जो आँतों को विशेष शक्तिशाली तथा अधिक सक्रिय बनाते हैं |*
👉🏻 *हृदय रोगों में : लगभग ५० ग्राम गुठली रहित छुहारे (खारक) २५० मी. ली. पानी में रात को भिगो दें | सुबह छुहारों को पीसकर पेस्ट बना के उसी बचे हुए पानी में घोल लें | इसे प्रात: खाली पेट पी जाने से कुछ ही माह में ह्रदय को पर्याप्त सबलता मिलती है | इसमें १ ग्राम इलायची चूर्ण मिलाना विशेष लाभदायी है |*
👉🏻 *तन-मन की पुष्टि : बच्चों को दूध में खजूर उबाल के देने से उन्हें शारीरिक-मानसिक पोषण मिलता है व शरीर सुदृढ़ बनता है |*
👉🏻 *शैयामूत्र : जो बच्चे रात्रि में बिस्तर गीला करते हों, उन्हें दो छुहारे रात्रि में भिगोकर सुबह दूध में उबाल के दें |*
👉🏻 *बच्चों के दस्त में : बच्चों के दाँत निकलते समय उन्हें बार बार गारे दस्त होते हों या पेचिश पड़ती हो तो खजूर के साथ शहद को अच्छी तरह फेंटकर एक-एक चमच दिन में २-३ बार चटाने से लाभ होता है |*
👉🏻 *मस्तिष्क व हृदय की कमजोरीः रात को खजूर भिगोकर सुबह दूध या घी के साथ खाने से मस्तिष्क व हृदय की पेशियों को ताकत मिलती है। विशेषतः रक्त की कमी के कारण होने वाली हृदय की धड़कन व एकाग्रता की कमी में यह प्रयोग लाभदायी है।*
👉🏻 *मलावरोधः रात को भिगोकर सुबह दूध के साथ लेने से पेट साफ हो जाता है।*
👉🏻 *कृशताः खजूर में शर्करा, वसा (फैट) व प्रोटीन्स विपुल मात्रा में पाये जाते हैं। इसके नियमित सेवन से मांस की वृद्धि होकर शरीर पुष्ट हो जाता है।*
👉🏻 *रक्ताल्पताः खजूर रक्त को बढ़ाकर त्वचा में निखार लाता है।*
👉🏻 *शुक्राल्पताहा खजूर उत्तम वीर्यवर्धक है। गाय के घी अथवा बकरी के दूध के साथ लेने से शुक्राणुओं की वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त अधिक मासिक स्राव, क्षयरोग, खाँसी, भ्रम(चक्कर), कमर व हाथ पैरों का दर्द एवं सुन्नता तथा थायराइड संबंधी रोगों में भी यह लाभदायी है।*
💥 *सावधानी* 💥
❌ *- आजकल खजूर को वृक्ष से अलग करने के बाद रासायनिक पदार्थों के द्वारा सुखाया जाता है | ये रसायन शरीर के लिए हानिकारक होते है | अत: उपयोग करने से पहले खजूर को अच्छी तरह से धों लें | धोकर सुखाने के बाद इन्हें विभिन्न प्रकार से उपयोग किया जा सकता है |*
❌ *- होली के बाद खजूर खाना हितकारी नहीं है।*
❌ *- Diabities वाले खजूर की जगह पर किशमिश का उपयोग करना |*
🙏🏻
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🙏🍀🌷🌻🌺🌸🌹🍁🙏🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩
अधिकाऱ्यांना खासगी संस्थांचे पुरस्कार स्वीकारण्यावर अंकुश
अधिकाऱ्यांना खासगी संस्थांचे पुरस्कार स्वीकारण्यावर अंकुश*
*👉👉तर सरकारी वा खासगी असा कोणताही पुरस्कार स्वीकारण्यापूर्वी*
*👉👉सरकारची परवानगी घेणे अधिकाऱ्यांना बंधनकारक करण्यात आले आहे.*
*मुंबई – खासगी संस्थांचे पुरस्कार स्वीकारून समाजमाध्यमांवर आपली पाठ थोपटून घेणाऱ्या आणि आपल्या माहितीपत्राची (सीव्ही) पाने वाढविणाऱ्या भारतीय प्रशासकीय सेवेतील (आयएएस ) अधिकाऱ्यांवर अंकुश येणार आहे.*
*👉सरकारी वा खासगी असा कोणताही पुरस्कार स्वीकारण्यापूर्वी सरकारची परवानगी घेणे अधिकाऱ्यांना बंधनकारक करण्यात आले आहे. याशिवाय प्रशस्तिपत्रक व सन्मानचिन्ह स्वरूपातच पुरस्कार स्वीकारता येईल. या पुरस्कारात रोख रक्कम, सोने, चांदी वा इतर कोणत्याही मौल्यवान धातू स्वरूपातील सन्मानचिन्ह वा वस्तू स्वीकारता येणार नाही. हे नियम खासगीबरोबरच सरकारी संस्थांकडून दिल्या जाणाऱ्या पुरस्कारांनाही लागू राहतील.*
*👉अनेक अधिकारी खासगी संस्थांकडून वा अन्य राज्यांच्या सरकारी यंत्रणांकडून मिळालेल्या पुरस्कारांची स्वत:हून विविध माध्यमांवर माहिती देत आपली पाठ थोपटून घेत असतात. करोनाकाळात तर हे प्रकार खूपच वाढले आहेत. अनेकदा संबंधित संस्था या फारशा माहितीतल्याही नसतात. सामान्य प्रशासन विभागाने आखून दिलेल्या मार्गदर्शक सूचनांनुसार एखाद्या संस्थेकडून आयएएस अधिकाऱ्याला पुरस्कार जाहीर झाल्यास तो स्वीकारण्यासाठी सरकारकडे अर्ज सादर करून पूर्वपरवानगी घेणे बंधनकारक राहील. याशिवाय पुरस्कार देणाऱ्या संस्थेचे स्वरूप अराजकीय आणि असांप्रदायिक असावे. तसेच ही संस्था राष्ट्रीय किंवा राज्यस्तरावर नावलौकिक असलेली असणे आवश्यक आहे. तसेच संस्थेची कार्ये सरकारच्या प्रचलित ध्येयधोरणांच्या विरोधात नसावी. याशिवाय संबंधित अधिकाऱ्याने संस्था नोंदणीकृत आहे का, संस्थेचा दर्जा, कार्यक्षेत्र, पदाधिकारी (गुन्हेगारी पार्श्वभूमी आहे का), संस्थेचा आर्थिक स्रोत, आधी सन्मानित केलेल्या व्यक्ती, संस्थेचा इतर भारतीय प्रशासकीय सेवेतील अधिकाऱ्यांशी कार्यालयीन संबंध आला आहे का, आदी माहिती अर्जासोबत देणे आवश्यक असेल. पुरस्कार प्रदान कार्यक्रमाच्या किमान १५ दिवस आधी ही माहिती सरकारकडे पोहचेल याची दक्षता अधिकाऱ्यांनी घ्यायची आहे.*
*👉वास्तविक अखिल भारतीय सेवा नियम, १९६८ च्या नियम १२ मध्ये भारतीय प्रशासकीय सेवेतील अधिकाऱ्यांनी खासगी संस्थेकडून पुरस्कार स्वीकारताना काय खबरदारी घ्यावी, या संदर्भात स्पष्ट तरतुदी आहेत. यानुसार तर आपल्या किंवा इतरी सरकारी कर्मचाऱ्यांच्या गौरवपर वा निरोप समांरभात उपस्थिती लावताना वा भाषण करतानाही सरकारची पूर्वपरवानगी घेणे आवश्यक आहे. मात्र, या अटींचे उल्लंघन होत असल्याने सरकारने हे नियम पुन्हा अधोरेखित केले आहेत.*
*👉अकारण प्रसिद्धी नको*
*खासगी संस्थांकडून पुरस्कार स्वीकारल्यानंतर अनेकदा काही अधिकाऱ्यांना अकारण प्रसिद्धी मिळते. अनेकदा ज्या कामाबद्दल संबंधित अधिकाऱ्याचे कौतुक होते, त्यात सामूहिक प्रयत्न कारणीभूत असतात. त्यामुळे अशा पुरस्कारांना उत्तेजन देण्यात येऊ नये, अशी अपेक्षा नव्याने मार्गदर्शक तत्त्वे ठरवून देताना व्यक्त करण्यात आली आहे.*
*👉नामांकितपणाची फुटपट्टी काय*
*नामांकित खासगी संस्थेकडूनच पुरस्कार स्वीकारला जावा, अशी अट नव्या मार्गदर्शक तत्त्वात घालण्यात आली आहे. नामांकितपणा ही व्यक्तीनिष्ठ बाब असून ते ठरविण्याची कोणतीही फुटपट्टी नाही. त्यामुळे एखादी संस्था नामांकित आहे की नाही, हे कसे ठरविणार असा प्रश्न आहे.*
हिन्दू पंचांग दिनांक – 24 नवंबर 2021 दिन – बुधवार
🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞
⛅ *दिनांक – 24 नवंबर 2021*
⛅ *दिन – बुधवार*
⛅ *विक्रम संवत – 2078*
⛅ *शक संवत -1943*
⛅ *अयन – दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु – हेमंत*
⛅ *मास – मार्ग शीर्ष मास (गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार कार्तिक*)
⛅ *पक्ष – कृष्ण*
⛅ *तिथि – पंचमी 25 नवंबर रात्रि 03:03 तक तत्पश्चात षष्ठी*
⛅ *नक्षत्र – पुनर्वसु शाम 04:29 तक तत्पश्चात पुष्य*
⛅ *योग – शुभ सुबह 07:31 तक तत्पश्चात शुक्ल*
⛅ *राहुकाल – दोपहर 12:25 से दोपहर 01:48 तक*
⛅ *सूर्योदय – 06:56*
⛅ *सूर्यास्त – 17:54*
⛅ *दिशाशूल – उत्तर दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण -*
💥 *विशेष – पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🌷 *पुष्य नक्षत्र योग* 🌷
➡ *25 नवम्बर 2021 गुरुवार को (सूर्योदय से शाम 06:50 तक) गुरुपुष्यामृत योग है ।*
🙏🏻 *१०८ मोती की माला लेकर जो गुरुमंत्र का जप करता है, श्रद्धापूर्वक तो २७ नक्षत्र के देवता उस पर खुश होते हैं और नक्षत्रों में मुख्य है पुष्य नक्षत्र, और पुष्य नक्षत्र के स्वामी हैं देवगुरु ब्रहस्पति | पुष्य नक्षत्र समृद्धि देनेवाला है, सम्पति बढ़ानेवाला है | उस दिन ब्रहस्पति का पूजन करना चाहिये | ब्रहस्पति को तो हमने देखा नहीं तो सद्गुरु को ही देखकर उनका पूजन करें और मन ही मन ये मंत्र बोले –*
*ॐ ऐं क्लीं ब्रहस्पतये नम : |…… ॐ ऐं क्लीं ब्रहस्पतये नम : |*
🙏🏻
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🌷 *कैसे बदले दुर्भाग्य को सौभाग्य में* 🌷
🌳 *बरगद के पत्ते पर गुरुपुष्य या रविपुष्य योग में हल्दी से स्वस्तिक बनाकर घर में रखें |*
🙏🏻
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🌷 *गुरुपुष्यामृत योग* 🌷
🙏🏻 *‘शिव पुराण’ में पुष्य नक्षत्र को भगवान शिव की विभूति बताया गया है | पुष्य नक्षत्र के प्रभाव से अनिष्ट-से-अनिष्टकर दोष भी समाप्त और निष्फल-से हो जाते हैं, वे हमारे लिए पुष्य नक्षत्र के पूरक बनकर अनुकूल फलदायी हो जाते हैं | ‘सर्वसिद्धिकर: पुष्य: |’ इस शास्त्रवचन के अनुसार पुष्य नक्षत्र सर्वसिद्धिकर है | पुष्य नक्षत्र में किये गए श्राद्ध से पितरों को अक्षय तृप्ति होती है तथा कर्ता को धन, पुत्रादि की प्राप्ति होती है |*
🙏🏻 *इस योग में किया गया जप, ध्यान, दान, पुण्य महाफलदायी होता है परंतु पुष्य में विवाह व उससे संबधित सभी मांगलिक कार्य वर्जित हैं | (शिव पुराण, विद्येश्वर संहिताः अध्याय 10)*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🙏🍀🌻🌹💐🍁🌷🌺🙏🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩
सिन्धु नरेश महाराजा दाहिर” जि का इतिहास
पश्चिम में एक कहावत है कि “ पहले दुश्मन को बुरा नाम दो और फिर उसे मार दो ! “ ऐसा कुछ ही मुस्लिम इतिहासकारों ने किया ! उन्होंने सिंध के आखिरी हिन्दू राजा को बदनाम करने में कोई कसर न छोड़ी , क्यूंकि उस हिन्दू राजा ने अकेले अपनी दम पर 32 वर्षों तक मुस्लिम आक्रान्ता मोहम्मद बिन कासिम को सिंध से आगे नहीं बढ़ने दिया !
उन्होंने पुष्करणा ब्राह्मण राजा को बदनाम करने के लिए अपनी ही बहन से विवाह करने के मनगढंत किस्से लिखने शुरू किये ! अब अगर कोई हिन्दू धर्म को समझता है तो वो समझ सकता है कि अपनी ही बहन से विवाह करना हिन्दू धर्म की नही दुसरे धर्मों की प्रथा है और ये मुस्लिम इतिहासकारों का सफेद झूठ था, उनको आने वाले समय में बदनाम करने के लिए !
इन इतिहासकारों ने एक और झूठ फैलाया कि ये महान हिन्दू राजा हर रात को एक नवयौवना (कुंवारी लड़की) का बलात्कार करता था ! 32 वर्षों तक राजधर्म का पालन करने वाले राजा के बारे में ये भी महज़ एक झूठ था !]
हिन्दू इतिहास पर गौर किया जाए तो पुण्य सलिला सिंध भूमि वैदिक काल से ही वीरों की भूमि रही है ! वेदों की ऋचाओं की गूंज इस पवित्र भूमि पर बहने वाली सिंधु नदी के किनारों पर हुई ! इसी पवित्र भूमि पर पौराणिक काल में कई वीरों व वीरांगनाओं को जन्म दिया है ! जिनमें त्रेता युग में महाराज दशरथ की पत्नी कैकेयी और द्वापर युग में महाराजा जयदरथ का नाम भी शामिल है !
महाराजा दाहिर को 7 राज्य की सत्ता संभालते समय ही कई प्रकार के विरोधों का सामना करना पड़ा ! उस समय गुर्जर, जाट और लोहाणा समाज उनके पिता द्वारा किए गए शासन से नाराज थे, तो ब्राह्मण समाज बौद्ध धर्म को राजधर्म घोषित करने के कारण नाराज थे ! मगर राजा दाहिर ने सभी समाजों को अपने साथ लेकर चलने का संकल्प लिया ! आगे चलकर महाराजा दाहिर ने सिंध का राजधर्म सनातन हिन्दू धर्म को घोषित कर ब्राह्मण समाज की भी नाराजगी दूर कर दूरदर्शिता और धर्मनिष्ठा का परिचय दिया !
दाहिर की पत्नी ने कई दूसरी महिलाओं के साथ जौहर कर लिया ताकि कोई भी अरबी म्लेक्ष उनके मृत शरीर से भी बलात्कार न कर सके !
मुस्लिमों को भी राजा दाहिर के बारे में मालूम होना आवश्यक है एवं उनका शुक्रगुजार भी होना चाहिए कि उन्होंने पैगम्बर मोहम्मद के भागे हुए परिवार को खतरनाक उमायादों से बचाते हुए अपने पास रहने का स्थान दिया !
राजा दाहिर ने अपने महल में इमाम हुसैन के अनुयायी मुहम्मद बिन अल्लाफी को रहने की जगह दी ! उस समय अल्लाफी को उमायाद जान से मार देने के लिए तलाश रहे थे क्योंकि अल्लाफी अहल-ए-बैत (पैगम्बर मोहम्मद का सीधा खून) का आखिरी वंशज था !
यही नही राजा दाहिर ने पैगम्बर मोहम्मद के पौते हुसैन को भी शरण देने की पेशकश की थी ! मगर जब हुसैन शरण के लिए बढ़ रहा था, उसे कर्बला इराक में बंदी बना लिया गया और बाद में कड़ी यातनाएं देते हुए मार दिया गया !
राजा दाहिर एक महान हिन्दू शासक थे जिहोने युद्ध क्षेत्र में लड़ते हुए प्राण न्योछावर किये यह भयंकर युद्ध सन 712 ई. में हुआ था इस युद्ध में राजा दाहिर के साथियों ने ही उन्हें छल-कपट से मार दिया था ! उनकी सुंदर बेटियों को इस्लामी परंपरा के तहत युद्ध में लूट के रूप में कब्जा लिया गया ! अरब से भारत लूट के इरादे से आये मुहम्मद बिन कासिम ने उनकी बेटियों को उस समय के खलीफा सुलेमान बिन अब्द अल मलिक के सामने उपहार के रूप में भेजा !
अंत में उनकी ही बेटियों ने पहले सूझ बूझ और अक्लमंदी से खलीफा के हाथों मुहम्मद बिन कासिम को मरवा कर अपना बदला लिया और बाद में खुद को खलीफा से बचाते हुए एक दुसरे को ही मार दिया !
स्वतंत्र भारत का दुर्भाग्य है कि पराक्रमी राजा दाहिर का नाम भी हममें से अधिकाँश नहीं जानते ! इतिहासकारों ने भी उनके साथ न्याय नहीं किया ! अपने साथियों के ही धोखे का शिकार हुए राजा दाहिर की मृत्यु के बाद ही आतताई मोहम्मद बिन कासिम देश में घुस पाया था !
सन 715 ई.
दमिश्क के राजपथ पर सत्रह और सोलह वर्ष आयु की दो बालिकाओं को घोड़े में बांध कर घसीटा जा रहा था। घोड़े जब उछलते तो दोनों बालिकाओं का शरीर हवा में उछल जाता, और फिर धड़ाम से भूमि पर गिरता। दोनों का शरीर पीड़ा से चीख उठता, पर दोनों के मुख पर एक अद्भुत मुस्कुराहट पसर जाती, गर्व से उनका मस्तक चमक उठता। धीरे धीरे दोनों की मुस्कान मंद होने लगी, शरीर निस्तेज होने लगा। कुछ पल पश्चात दोनों के शरीर निर्जीव हो गए। मृत शरीरों को कुत्तों के आगे फेंक दिया गया, वे माँस नोच कर खाने लगे…
सिन्धु नरेश दाहिर के दो पुत्र जयसिंह और जयवर्धन ब्राह्मणवाद और आरोर पर शासन करते थे। रावर के युद्ध में महाराज दाहिर की पराजय के बाद मोहम्मद बिन कासिम ब्राह्मणवाद की ओर बढ़ा। ब्राह्मणवाद में जयसिंह की सेना ने पूरी शक्ति के साथ युद्ध किया, किन्तु अल्प सैन्यबल और कासिम की सशक्त अश्व सेना के कारण पराजय मिली। कासिम की सेना ने अपना संस्कार दिखाया, और आरोर की हजारों नारियां और बालिकाएं बन्दी बना ली गईं। साथ ही बन्दी हुईं महाराज दाहिर की छोटी पत्नी महारानी लाड़ी, और उनकी पुत्रियां सूर्या देवी और परमाल देवी। अरब के लिए स्त्री सदैव “सेक्स ऑब्जेक” रही है, कासिम की सेना ने सामान्य स्त्रियों को अपनी वासनापूर्ति हेतु बांट लिया और राजपरिवार की स्त्रियों को खलीफा के पास उपहार के रूप में भेज दिया गया।
कई मास पश्चात जब देवल, निरून, मुल्तान, ब्राह्मणवाद, आरोर, सेहवान, सीसम और रावर के मंदिरों से लुटे गए सैकड़ों टन स्वर्ण के साथ सौ स्त्रियां दश्मिक पहुँची तो उन्हें खलीफा ‘सुलेमान-बिन-अब्द-अल-मलिक’ की सेवा में प्रस्तुत किया गया। अरब की संस्कृति में स्त्रियां मात्र “औरत” होती हैं, माँ, बेटी, बहन जैसे पवित्र सम्बन्ध नहीं। सत्तर वर्ष के बूढ़े खलीफा के लिए भी स्त्रियां भोग्या ही थीं, सो खलीफा ने मुस्कुरा कर कहा- “कासिम ने हमें बड़ा ही खूबसूरत तोहफ़ा भेजा है, हम उसके शुक्रगुजार हैं। शहजादियों को हमारे हरम में भेज दिया जाय।”
खलीफा के आदेश का पालन होता, किन्तु तभी राजकुमारी सूर्या देवी ने आगे बढ़ कर कहा- “हम आपको स्वीकार नहीं कर सकते महाराज! कासिम हमें भ्रष्ट कर चुका है।”
खलीफा क्रोध से उबल पड़ा- क्या कह रही हो लड़की? कासिम ऐसा कैसे कर सकता है?
परमाल ने आगे बढ़ कर कहा- “राजकुमारी ठीक कह रही हैं महाराज! आपके पास भेजने के पूर्व कासिम ने हमे अपवित्र किया है, आप चाहें तो हमारे शरीर पा सकते हैं पर हमारी आत्मा मर चुकी है।”
खलीफा ने हाथ पटक कर कहा,” कासिम ने हमें अपना “जूठा” उपहार भेजा, उसे इसकी सजा भुगतनी ही होगी। उसे हिन्द से वापस बुलाया जाय और उसकी खाल में भूसा भर के दरबार में पेश किया जाय… हिन्द से आई औरतों को कनीज़ों में शामिल कर लिया जाय।”
इधर भारत में कासिम मुल्तान तक बढ़ चुका था। लूट में उसे इतना धन प्राप्त हो चुका था कि वह अब सम्पूर्ण भारत पर शासन के स्वप्न देखने लगा था। अब उसका लक्ष्य था कन्नौज, जिसको जीतने के लिए उसने अपने सेनापति अबुहाकिम के नेतृत्व में दस हजार की अश्वरोही सेना बनाई। पर अभी वह अपनी सेना को कन्नौज भेज पाता तबतक उसे खलीफा का सन्देश मिला कि भारत विजय के लिए उसके सम्मान में एक भव्य आयोजन किया जा रहा है, जिसमें उसे अवश्य उपस्थित रहना है। खलीफा की आज्ञा को टाल सकने की सामर्थ्य कासिम जैसे दास में नहीं थी, वह अगले दिन ही दश्मिक के लिए चल पड़ा।
कासिम जब दमिश्क पहुँचा तो खलीफा से मिलने के पूर्व ही उसे बन्दी बना लिया गया, और उसकी हत्या कर दी गयी। उसकी खाल में भूसा भर कर राजदरबार में प्रस्तुत किया गया। खलीफा के सामने जब उसका शव लाया गया तो खलीफा खिलखिला उठा था। उसने आदेश दिया कि सिन्धु राजकुमारियों को दरबार में लाया जाय।
राजकुमारियां दरबार में आईं तो पागलों की भांति हँस रही थीं। आश्चर्यचकित खलीफा ने क्रोध से गरजते हुए पूछा- “हँस क्यों रही हो?”
दोनों ने एक ही साथ उत्तर दिया- भारत की असंख्य निर्दोष प्रजा के हत्यारे को उसका दण्ड मिल चुका खलीफा, अब हँसे न तो क्या करें? इसने हमें भ्रष्ट नहीं किया था, पर इसे दण्ड देने के लिए हमें झूठ बोलना पड़ा।
खलीफा जैसे तड़प उठा। गरजा- तुम हिन्दू तो झूठ नहीं बोलते, फिर यह क्या था?
सूर्या ने मुस्कुरा कर कहा- कासिम जैसे अधर्मियों को दण्डित करने के लिए बोला गया असत्य भी पवित्र है खलीफा! नैतिकता सज्जनों के समक्ष शोभती है, अधर्मियों के समक्ष नहीं।
खलीफा ने चिढ़ कर आदेश दिया- इन्हें बन्दी बना लिया जाय, इनके अपराध की सजा हम बाद में तय करेंगे।
सैनिक खलीफा के आदेश को पूरा करने के लिए आगे बढ़े, पर राजकुमारियों ने अपने वस्त्रों में छिपाया कटार निकाला और अपने-अपने पेट मे भोंक लिया।
खलीफा चिल्लाया- इन्हें घोड़े से बांध कर घसीटा जाय। तबतक, जबतक कि खाल न उतर जाय…
खलीफा के आदेश का पालन हुआ, पर राजकुमारियों ने अपना कर्तव्य पूरा कर दिया था।
हजारों वर्ष बीत गए, इतिहास जब भी दाहिर की पुत्रियों का स्मरण करता है तो गर्व से कहता है-“क्षत्रिय कंगन की सामर्थ्य क्षत्रिय तलवार से तनिक भी कम नहीं।”
राजा दाहिर , सिंध और सिंध की प्रजा के साथ जो हुआ वो कोई विरली घटना न थी
आगे पढ़िये
*मुगलों का रक्तरंजित हवसभरा इतिहास-*
1. *आठवीं सदी में मुहम्मद बिन क़ासिम* का जिहादी जंगी जुनून, काफ़िर राजा दाहिर का कटा सर, इराक़ में हज्जाज इब्न यूसुफ़ के हरम में दाहिर की बेटियों के कुचले हुए जिस्म, लड़ाई के बाद सिंध में सड़कों पर सड़ती काफ़िरों की लाशें, अधमरे सैनिकों की दिल चीर देने वाली चिंघाड़, क़ासिम के जिहादियों के चंगुल में आयीं हज़ारों काफ़िर औरतें, उनकी बोटी बोटी नोचे जाने से उठी चीत्पुकार, १०-१० जिहादियों के नीचे फँसी उस माँ को जिसके दुधमुँहे बच्चे को अल्लाहु अकबर के नारे के साथ भाले की नोक पर घुसा कर हवा में उछाल दिया गया था, उस माँ को जो यह नहीं जान पा रही थी कि कौन सी तकलीफ़ ज़्यादा बड़ी है- एक साथ १० हैवानों के बीच अपने जिस्म को नुचवाना या अपने बच्चे को भाले की नोक पर लटके हुए देखना या उस जिगर के टुकड़े को आख़िरी आशीर्वाद भी नहीं दे पाना।
2. *ग्यारहवीं सदी के पहले साल से ही महमूद ग़जनवी* के जंगी दस्ते, १/२/३/१७ बार सोमनाथ मंदिर का विध्वंस, करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक ज्योतिर्लिंग जो अब टुकड़े टुकड़े होकर जिहादियों के क़दमों में पड़ा था, हज़ारों सर जो धड़ों से जुदा करके खेतों में फेंक दिए गए, पेशावर, मुल्तान, लाहौर, के वो जले हुए शहर, उनमें भुट्टों की तरह भून दिए गए बुतपरस्त काफ़िर।
3. *बारहवीं सदी के वो गुरु चेले- ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती और मुहम्मद गौरी,* राजा पृथ्वीराज के राज्य में उसी के टुकड़ों और दया पर पलने वाले चिश्ती के ख़्वाब में आए इस्लामी नबी, उसका हिन्दुस्तान पर हमला करके बुतपरस्त काफ़िरों को सबक़ सिखाने के लिए गौरी को चिट्ठी, पहली लड़ाई में पृथ्वीराज के सामने घुटनों पर आकर सिर झुकाने वाले गोरी का अगली बार फिर से झपटना, और अपनी जान बख़्शने वाले के सर को अपने मुल्क ले जाकर क़िले के दरवाज़े पर टाँग देना, उसके साथ हुआ अल्लाहु अकबर का अट्टाहस, हिन्दुस्तान में मूर्तिपूजकों के ख़ून से घुटनों तक दरया बहाने के गुरु चेलों के मंसूबे और कत्लेआम।
4. *तेरहवीं सदी में बख़्तियार ख़िलजी का हमला*। नालंदा और विक्रमशिला के महीनों तक धूँ धूँ करके जलते भवन, तकबीर के नारों और फ़तह के जश्न के शोर के बीच मौत के आग़ोश में समा गए हज़ारों आचार्य, शिक्षक, शिष्य, मर्द, औरत, बच्चे।
5. *चौदहवीं सदी में महारानी पद्मिनी को पाने के लिए अलाउद्दीन ख़िलजी का चित्तौड़ का हमला,* शादीशुदा माँ समान रानी को अपने बिस्तर में देखने के जिहादी मंसूबे, हज़ारों महारानियों, रानियों, राजकुमारियों, और साथी स्त्रियों की सामूहिक पूजा, पूरा शृंगार करके आरती अर्चना, भीमकाय क़िले के बीचोंबीच हज़ारों मन लकड़ियों को इकट्ठा करते शाही हाथी, अहाते के चारों तरफ़ उन लकड़ियों को जमता देखती कन्याओं की टोली, प्रचण्ड आग में कूदने के पहले एक दूसरे से आख़िरी गले मिलना, धर्म की विजय की कामना करते हुए महारानी पद्मिनी का अग्निकुण्ड में प्रवेश, एक पल में लकड़ी को कोयला कर देने वाली दहकती आग में माँ समान कोमल महारानी और हज़ारों स्त्रियों का अंतिम प्रयाण, मर कर भी किसी जिहादी के हाथ ना आने का अतुल्य संतोष, मर कर भी सम्मान नहीं मरने देने का सुख, आने वाली पीढ़ी के वीर पुत्र अपनी जलती माताओं का प्रतिशोध ज़रूर लेंगे, इस संदेश के साथ उस ऊँची उठती आग में धुआँ हो जाने वाली राजमाताएँ और पुत्रियाँ।
*इसी सदी में काफ़िरों के कटे सरों की मीनारें बनाने वाला तैमूर*, दिल्ली शहर का वो कत्लेआम, दहाईयों तक इंसानी वजूद से ख़ाली हो जाने वाले शहर, गिद्ध, चील, भेड़ियों और जानवरों के शोर में ढके हुए शहर, क़रीब २ करोड़ इंसानों के क़ातिल का दिल्ली की गलियों में बेख़ौफ़ घूमना, पूरी दुनिया की इंसानी आबादी के ५% हिस्से को अपनी तलवार से ख़त्म करने वाले उस लंगड़े के चेहरे के भद्दे चेचकी दाग़।
6. *सोलहवीं सदी के मुग़ल बाबर के हाथों से काटे गए हज़ारों सरों की मीनारों के जुलूस,* मीनारों के ख़ौफ़ से पूरे के पूरे शहरों का इस्लाम क़ुबूल करना, बाजौड़ की औरतों की दर्दनाक दास्ताँ, बाबर के हरम से हर रात निकलने वाली कमसिन बच्चों की चीख़ें, अफ़ीम के नशे में सर काटने की प्रतियोगिता। करोड़ों हिंदुओं के भगवान राम के मंदिर का ज़मीन में दफ़न किया जाना।
*इसी सदी में बाबर के पोते अकबर* का अपने उस्ताद बैरम खाँ को फ़ारिग़ करके माँ समान उसकी बीवी से निकाह, चित्तौड़ के क़ब्ज़े के दिन ३०,००० बेगुनाह औरतों, बच्चों, बूढ़ों और जवानों का अपने हाथों से कत्लेआम, सैंकड़ों राजस्त्रियों का जौहर की आग में फिर से पलायन, ५,००० काफ़िर औरतों और बच्चों से भरा हुआ हरम, रिश्ते में बेटी, पोती और बहू लगने वाली औरतों/बच्चों की दर्दनाक चीख़ों से भरी हुई हरम की रातें।
7. *सत्रहवीं सदी में अकबर के बेटे जहांगीर का हिंदू-सिखों के गुरु अर्जन देव जी को इस्लाम क़ुबूल करने का हुक्म*, गुरु का इनकार, गुरु की मौत का फ़रमान, जलते लोहे के तवे पर गुरु का बैठना, ऊपर से गरम रेत से बदन को छलनी करना, भालों से गुरु का माँस उतारना, बादशाह जहांगीर का आख़िरी बार इस्लाम क़ुबूल करने का हुक्म? गुरु का आख़िरी इनकारी जवाब, गुरु को उनकी गाय माता की खाल में सिल कर मारने का फ़रमान, इस पर गुरु का रावी नदी में स्नान के लिए जाना और फिर कभी वापस नहीं आना।
*इसी सदी में अकबर महान के पड़पोते औरंगज़ेब के हाथों इस्लाम क़ुबूल नहीं करने पर लाखों हिंदुओं का कत्लेआम*।हज़ारों मन्दिरों को ज़मींदोज़ करके मूर्तिपूजक हिंदुओं को असली खुदा की ताक़त का एहसास करवाना, हिंदू-सिखों के गुरु तेग़ बहादुर जी को इस्लाम क़ुबूल नहीं करने पर क़त्ल का फ़रमान, दिल्ली की धरती पर गुरु का उड़ता हुआ सर, भाई मति दास का आरे से चीरा गया बदन, भाई सती दास का रुई में लपेट कर जलाया गया जिस्म, भालों पर झूलते ७०० सिखों के कटे सर, दिल्ली में कटे सरों के जुलूस, छत्रपति शिवाजी महाराज के बेटे छत्रपति संभाजी की यातनाओं के २० दिन, इस्लाम नहीं क़ुबूल करने के लिए ख़ंजर से निकाली गयीं आँखें, अल्लाहु अकबर नहीं बोलने के लिए खींची गयी ज़बान, उँगलियों के खींचे गए नाख़ून, पत्थरों से कुचली गयीं उँगलियाँ, चिमटों से खींची गयी जिस्म की खाल, ख़ंजरों से काटी गयी बोटी बोटी, तलवार से कलम किया गया सर।
8. *अठारहवीं सदी में हिंदू-सिखों के दसवें गुरु गोबिन्द सिंह जी के ५ और ८ साल के छोटे छोटे बच्चों का अपहरण*- उन्हें इस्लाम क़ुबूल करने का हुक्म, बच्चों का इनकार, दीवार में ज़िंदा चिनवाए गए बच्चे, अल्लाहु अकबर का शोर। बच्चों के बलिदान का बदला लेने वाले बंदा वैरागी का दिल्ली आना, शेर के पिंजरे में उसे क़ैद करके दिल्ली शहर में घुमाना, दुधमुँहे बच्चे का माँस ख़ंजर से निकाल के पिता बंदा के मुँह में ठूँसना, इस्लाम क़ुबूल नहीं करने पर बदन के टुकड़े टुकड़े दिल्ली की सड़कों पर। देवी के अपमान पर पैग़म्बर का अपमान करने के जुर्म में १४ साल के बालक हक़ीक़त राय का लाहौर में माँ की आँखों के सामने तन से जुदा सर। इतना सुनना था कि खाने की मेज़ पर रोटी के निवाले हलक में अटक गए। रूँधे हुए गले से रोटी नीचे नहीं उतरती थी। भाई, ये सब क्या था? अगर ये सब सच है तो हमने स्कूल में ये सब क्यों नहीं पढ़ा? १४ आँखों से आँसू लुढ़क रहे थे। कमरे में ख़ामोशी ही ख़ामोशी थी जो ७ लोगों के सुबकने से टूट रही थी।
*एक सवाल मन में कौंध रहा था, क्या कारण है कि जिस देश में पिछले १३ सदियों का एक एक साल ख़ून में डूबा हो, एक भी सदी बिना औरतों, बच्चों, माँओं की अगणित चीख़ पुकार सुने बिना नहीं बीती, जिस देश में आज भी उन १३०० सालों के हमलावरों, माओं को नंगा घुमाने वालों, उनको अरब की ग़ुलाम मंडियों में बेचने वालों, बलात्कार करने वालों, लाखों मंदिरों-मूर्तियों को तोड़ कर उन पर मस्जिद बनाने वालों, करोड़ों लोगों को तलवार के ज़ोर पर हिंदू से मुसलमान बनाने वालों को हीरो, वली और इस्लाम का ग़ाज़ी समझा जाता हो, ग़ज़नी, बाबर और औरंगज़ेब के नाम की मस्जिदें बनाकर उनमें बैठ कर करोड़ों हिंदुओं के ज़ख़्मों पर दिन में ५ बार, सप्ताह में ३५ बार, महीने में १५० बार और साल में १८२५ बार नमक मिर्च रगड़ा जाता हो, जिस देश में बलात्कारी बाबर के नाम की मस्जिद के लिए लाखों लोग सड़कों पर उतर आते हों, औरंगज़ेब के नाम की मस्जिद से दिल्ली में तकारीर की जाती हों, जिस देश को ७० साल पहले इन्हीं क़ातिल लुटेरों के मानने वालों ने दो टुकड़े कर के फेंक दिया*
*जिस देश के टुकड़े होने के बाद भी बचे खुचे पर शरीयत के काले क़ानून के साये हैं, जिस देश के २०% लोग देश का क़ानून मानने से इनकारी हों, मज़हब मुल्क से ऊपर है, इस बात का खुल्लम खुल्ला एलान करते घूमते हों, जिस देश में ६०० में से ८६ जिलों में ऐसे लोगों की संख्या २०% के पार हो चुकी हो, जिस देश में हिंदू को कश्मीर से साफ़ किया गया हो, राजधानी दिल्ली से १०० किलोमीटर दूर कैराना में हिंदुओं का पलायन किया जा चुका हो, मेरठ, मुज़फ़्फ़रनगर, सहारनपुर, बुलन्दशहर, रामपुर, मुरादाबाद आदि में पलायन की तैयारी हो चुकी हो, जिस देश में बचे खुचे हिंदू ८ राज्यों में अल्पसंख्यक बन चुके हों, जिस देश के स्कूलों में रमज़ान के दिनों में हिंदू बच्चों के लिए भी खाने पर पाबंदी लगनी शुरू हो गयी हो, जिस देश की राजधानी में हनुमान आरती को रमज़ान के महीने में रुकवा दिया गया हो क्योंकि मूर्तिपूजा से मोहल्ले के लाखों अल्पसंख्यक लोगों की धार्मिक भावनाएँ आहत हो जाती हैं, जिस देश में आपके लिए घेरा तंग से तंगतर होता जा रहा हो, उस देश के युवाओं की समस्या क्या हैं? भ्रष्टाचार,बेरोजगारी, ग्लोबल वार्मिंग, गोरक्षक, आतंकवाद,या इन सबसे बढ कर स्वंय की अस्तित्व ?*
(दाहिर की जाति पर विवाद हो इससे पूर्व कह देना चाहता हूँ, कि मेरे लिए हर वह व्यक्ति क्षत्रिय है जो राष्ट्र की रक्षा हेतु प्राण देता है, और हर वह व्यक्ति ब्राह्मण है जो अपनी मेधा को धर्म और राष्ट्र के उत्थान हेतु झोंक देता है ।
सिन्धु नरेश महाराजा दाहिर” जि का इतिहास
पश्चिम में एक कहावत है कि “ पहले दुश्मन को बुरा नाम दो और फिर उसे मार दो ! “ ऐसा कुछ ही मुस्लिम इतिहासकारों ने किया ! उन्होंने सिंध के आखिरी हिन्दू राजा को बदनाम करने में कोई कसर न छोड़ी , क्यूंकि उस हिन्दू राजा ने अकेले अपनी दम पर 32 वर्षों तक मुस्लिम आक्रान्ता मोहम्मद बिन कासिम को सिंध से आगे नहीं बढ़ने दिया !
उन्होंने पुष्करणा ब्राह्मण राजा को बदनाम करने के लिए अपनी ही बहन से विवाह करने के मनगढंत किस्से लिखने शुरू किये ! अब अगर कोई हिन्दू धर्म को समझता है तो वो समझ सकता है कि अपनी ही बहन से विवाह करना हिन्दू धर्म की नही दुसरे धर्मों की प्रथा है और ये मुस्लिम इतिहासकारों का सफेद झूठ था, उनको आने वाले समय में बदनाम करने के लिए !
इन इतिहासकारों ने एक और झूठ फैलाया कि ये महान हिन्दू राजा हर रात को एक नवयौवना (कुंवारी लड़की) का बलात्कार करता था ! 32 वर्षों तक राजधर्म का पालन करने वाले राजा के बारे में ये भी महज़ एक झूठ था !]
हिन्दू इतिहास पर गौर किया जाए तो पुण्य सलिला सिंध भूमि वैदिक काल से ही वीरों की भूमि रही है ! वेदों की ऋचाओं की गूंज इस पवित्र भूमि पर बहने वाली सिंधु नदी के किनारों पर हुई ! इसी पवित्र भूमि पर पौराणिक काल में कई वीरों व वीरांगनाओं को जन्म दिया है ! जिनमें त्रेता युग में महाराज दशरथ की पत्नी कैकेयी और द्वापर युग में महाराजा जयदरथ का नाम भी शामिल है !
महाराजा दाहिर को 7 राज्य की सत्ता संभालते समय ही कई प्रकार के विरोधों का सामना करना पड़ा ! उस समय गुर्जर, जाट और लोहाणा समाज उनके पिता द्वारा किए गए शासन से नाराज थे, तो ब्राह्मण समाज बौद्ध धर्म को राजधर्म घोषित करने के कारण नाराज थे ! मगर राजा दाहिर ने सभी समाजों को अपने साथ लेकर चलने का संकल्प लिया ! आगे चलकर महाराजा दाहिर ने सिंध का राजधर्म सनातन हिन्दू धर्म को घोषित कर ब्राह्मण समाज की भी नाराजगी दूर कर दूरदर्शिता और धर्मनिष्ठा का परिचय दिया !
दाहिर की पत्नी ने कई दूसरी महिलाओं के साथ जौहर कर लिया ताकि कोई भी अरबी म्लेक्ष उनके मृत शरीर से भी बलात्कार न कर सके !
मुस्लिमों को भी राजा दाहिर के बारे में मालूम होना आवश्यक है एवं उनका शुक्रगुजार भी होना चाहिए कि उन्होंने पैगम्बर मोहम्मद के भागे हुए परिवार को खतरनाक उमायादों से बचाते हुए अपने पास रहने का स्थान दिया !
राजा दाहिर ने अपने महल में इमाम हुसैन के अनुयायी मुहम्मद बिन अल्लाफी को रहने की जगह दी ! उस समय अल्लाफी को उमायाद जान से मार देने के लिए तलाश रहे थे क्योंकि अल्लाफी अहल-ए-बैत (पैगम्बर मोहम्मद का सीधा खून) का आखिरी वंशज था !
यही नही राजा दाहिर ने पैगम्बर मोहम्मद के पौते हुसैन को भी शरण देने की पेशकश की थी ! मगर जब हुसैन शरण के लिए बढ़ रहा था, उसे कर्बला इराक में बंदी बना लिया गया और बाद में कड़ी यातनाएं देते हुए मार दिया गया !
राजा दाहिर एक महान हिन्दू शासक थे जिहोने युद्ध क्षेत्र में लड़ते हुए प्राण न्योछावर किये यह भयंकर युद्ध सन 712 ई. में हुआ था इस युद्ध में राजा दाहिर के साथियों ने ही उन्हें छल-कपट से मार दिया था ! उनकी सुंदर बेटियों को इस्लामी परंपरा के तहत युद्ध में लूट के रूप में कब्जा लिया गया ! अरब से भारत लूट के इरादे से आये मुहम्मद बिन कासिम ने उनकी बेटियों को उस समय के खलीफा सुलेमान बिन अब्द अल मलिक के सामने उपहार के रूप में भेजा !
अंत में उनकी ही बेटियों ने पहले सूझ बूझ और अक्लमंदी से खलीफा के हाथों मुहम्मद बिन कासिम को मरवा कर अपना बदला लिया और बाद में खुद को खलीफा से बचाते हुए एक दुसरे को ही मार दिया !
स्वतंत्र भारत का दुर्भाग्य है कि पराक्रमी राजा दाहिर का नाम भी हममें से अधिकाँश नहीं जानते ! इतिहासकारों ने भी उनके साथ न्याय नहीं किया ! अपने साथियों के ही धोखे का शिकार हुए राजा दाहिर की मृत्यु के बाद ही आतताई मोहम्मद बिन कासिम देश में घुस पाया था !
सन 715 ई.
दमिश्क के राजपथ पर सत्रह और सोलह वर्ष आयु की दो बालिकाओं को घोड़े में बांध कर घसीटा जा रहा था। घोड़े जब उछलते तो दोनों बालिकाओं का शरीर हवा में उछल जाता, और फिर धड़ाम से भूमि पर गिरता। दोनों का शरीर पीड़ा से चीख उठता, पर दोनों के मुख पर एक अद्भुत मुस्कुराहट पसर जाती, गर्व से उनका मस्तक चमक उठता। धीरे धीरे दोनों की मुस्कान मंद होने लगी, शरीर निस्तेज होने लगा। कुछ पल पश्चात दोनों के शरीर निर्जीव हो गए। मृत शरीरों को कुत्तों के आगे फेंक दिया गया, वे माँस नोच कर खाने लगे…
सिन्धु नरेश दाहिर के दो पुत्र जयसिंह और जयवर्धन ब्राह्मणवाद और आरोर पर शासन करते थे। रावर के युद्ध में महाराज दाहिर की पराजय के बाद मोहम्मद बिन कासिम ब्राह्मणवाद की ओर बढ़ा। ब्राह्मणवाद में जयसिंह की सेना ने पूरी शक्ति के साथ युद्ध किया, किन्तु अल्प सैन्यबल और कासिम की सशक्त अश्व सेना के कारण पराजय मिली। कासिम की सेना ने अपना संस्कार दिखाया, और आरोर की हजारों नारियां और बालिकाएं बन्दी बना ली गईं। साथ ही बन्दी हुईं महाराज दाहिर की छोटी पत्नी महारानी लाड़ी, और उनकी पुत्रियां सूर्या देवी और परमाल देवी। अरब के लिए स्त्री सदैव “सेक्स ऑब्जेक” रही है, कासिम की सेना ने सामान्य स्त्रियों को अपनी वासनापूर्ति हेतु बांट लिया और राजपरिवार की स्त्रियों को खलीफा के पास उपहार के रूप में भेज दिया गया।
कई मास पश्चात जब देवल, निरून, मुल्तान, ब्राह्मणवाद, आरोर, सेहवान, सीसम और रावर के मंदिरों से लुटे गए सैकड़ों टन स्वर्ण के साथ सौ स्त्रियां दश्मिक पहुँची तो उन्हें खलीफा ‘सुलेमान-बिन-अब्द-अल-मलिक’ की सेवा में प्रस्तुत किया गया। अरब की संस्कृति में स्त्रियां मात्र “औरत” होती हैं, माँ, बेटी, बहन जैसे पवित्र सम्बन्ध नहीं। सत्तर वर्ष के बूढ़े खलीफा के लिए भी स्त्रियां भोग्या ही थीं, सो खलीफा ने मुस्कुरा कर कहा- “कासिम ने हमें बड़ा ही खूबसूरत तोहफ़ा भेजा है, हम उसके शुक्रगुजार हैं। शहजादियों को हमारे हरम में भेज दिया जाय।”
खलीफा के आदेश का पालन होता, किन्तु तभी राजकुमारी सूर्या देवी ने आगे बढ़ कर कहा- “हम आपको स्वीकार नहीं कर सकते महाराज! कासिम हमें भ्रष्ट कर चुका है।”
खलीफा क्रोध से उबल पड़ा- क्या कह रही हो लड़की? कासिम ऐसा कैसे कर सकता है?
परमाल ने आगे बढ़ कर कहा- “राजकुमारी ठीक कह रही हैं महाराज! आपके पास भेजने के पूर्व कासिम ने हमे अपवित्र किया है, आप चाहें तो हमारे शरीर पा सकते हैं पर हमारी आत्मा मर चुकी है।”
खलीफा ने हाथ पटक कर कहा,” कासिम ने हमें अपना “जूठा” उपहार भेजा, उसे इसकी सजा भुगतनी ही होगी। उसे हिन्द से वापस बुलाया जाय और उसकी खाल में भूसा भर के दरबार में पेश किया जाय… हिन्द से आई औरतों को कनीज़ों में शामिल कर लिया जाय।”
इधर भारत में कासिम मुल्तान तक बढ़ चुका था। लूट में उसे इतना धन प्राप्त हो चुका था कि वह अब सम्पूर्ण भारत पर शासन के स्वप्न देखने लगा था। अब उसका लक्ष्य था कन्नौज, जिसको जीतने के लिए उसने अपने सेनापति अबुहाकिम के नेतृत्व में दस हजार की अश्वरोही सेना बनाई। पर अभी वह अपनी सेना को कन्नौज भेज पाता तबतक उसे खलीफा का सन्देश मिला कि भारत विजय के लिए उसके सम्मान में एक भव्य आयोजन किया जा रहा है, जिसमें उसे अवश्य उपस्थित रहना है। खलीफा की आज्ञा को टाल सकने की सामर्थ्य कासिम जैसे दास में नहीं थी, वह अगले दिन ही दश्मिक के लिए चल पड़ा।
कासिम जब दमिश्क पहुँचा तो खलीफा से मिलने के पूर्व ही उसे बन्दी बना लिया गया, और उसकी हत्या कर दी गयी। उसकी खाल में भूसा भर कर राजदरबार में प्रस्तुत किया गया। खलीफा के सामने जब उसका शव लाया गया तो खलीफा खिलखिला उठा था। उसने आदेश दिया कि सिन्धु राजकुमारियों को दरबार में लाया जाय।
राजकुमारियां दरबार में आईं तो पागलों की भांति हँस रही थीं। आश्चर्यचकित खलीफा ने क्रोध से गरजते हुए पूछा- “हँस क्यों रही हो?”
दोनों ने एक ही साथ उत्तर दिया- भारत की असंख्य निर्दोष प्रजा के हत्यारे को उसका दण्ड मिल चुका खलीफा, अब हँसे न तो क्या करें? इसने हमें भ्रष्ट नहीं किया था, पर इसे दण्ड देने के लिए हमें झूठ बोलना पड़ा।
खलीफा जैसे तड़प उठा। गरजा- तुम हिन्दू तो झूठ नहीं बोलते, फिर यह क्या था?
सूर्या ने मुस्कुरा कर कहा- कासिम जैसे अधर्मियों को दण्डित करने के लिए बोला गया असत्य भी पवित्र है खलीफा! नैतिकता सज्जनों के समक्ष शोभती है, अधर्मियों के समक्ष नहीं।
खलीफा ने चिढ़ कर आदेश दिया- इन्हें बन्दी बना लिया जाय, इनके अपराध की सजा हम बाद में तय करेंगे।
सैनिक खलीफा के आदेश को पूरा करने के लिए आगे बढ़े, पर राजकुमारियों ने अपने वस्त्रों में छिपाया कटार निकाला और अपने-अपने पेट मे भोंक लिया।
खलीफा चिल्लाया- इन्हें घोड़े से बांध कर घसीटा जाय। तबतक, जबतक कि खाल न उतर जाय…
खलीफा के आदेश का पालन हुआ, पर राजकुमारियों ने अपना कर्तव्य पूरा कर दिया था।
हजारों वर्ष बीत गए, इतिहास जब भी दाहिर की पुत्रियों का स्मरण करता है तो गर्व से कहता है-“क्षत्रिय कंगन की सामर्थ्य क्षत्रिय तलवार से तनिक भी कम नहीं।”
राजा दाहिर , सिंध और सिंध की प्रजा के साथ जो हुआ वो कोई विरली घटना न थी
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*मुगलों का रक्तरंजित हवसभरा इतिहास-*
1. *आठवीं सदी में मुहम्मद बिन क़ासिम* का जिहादी जंगी जुनून, काफ़िर राजा दाहिर का कटा सर, इराक़ में हज्जाज इब्न यूसुफ़ के हरम में दाहिर की बेटियों के कुचले हुए जिस्म, लड़ाई के बाद सिंध में सड़कों पर सड़ती काफ़िरों की लाशें, अधमरे सैनिकों की दिल चीर देने वाली चिंघाड़, क़ासिम के जिहादियों के चंगुल में आयीं हज़ारों काफ़िर औरतें, उनकी बोटी बोटी नोचे जाने से उठी चीत्पुकार, १०-१० जिहादियों के नीचे फँसी उस माँ को जिसके दुधमुँहे बच्चे को अल्लाहु अकबर के नारे के साथ भाले की नोक पर घुसा कर हवा में उछाल दिया गया था, उस माँ को जो यह नहीं जान पा रही थी कि कौन सी तकलीफ़ ज़्यादा बड़ी है- एक साथ १० हैवानों के बीच अपने जिस्म को नुचवाना या अपने बच्चे को भाले की नोक पर लटके हुए देखना या उस जिगर के टुकड़े को आख़िरी आशीर्वाद भी नहीं दे पाना।
2. *ग्यारहवीं सदी के पहले साल से ही महमूद ग़जनवी* के जंगी दस्ते, १/२/३/१७ बार सोमनाथ मंदिर का विध्वंस, करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक ज्योतिर्लिंग जो अब टुकड़े टुकड़े होकर जिहादियों के क़दमों में पड़ा था, हज़ारों सर जो धड़ों से जुदा करके खेतों में फेंक दिए गए, पेशावर, मुल्तान, लाहौर, के वो जले हुए शहर, उनमें भुट्टों की तरह भून दिए गए बुतपरस्त काफ़िर।
3. *बारहवीं सदी के वो गुरु चेले- ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती और मुहम्मद गौरी,* राजा पृथ्वीराज के राज्य में उसी के टुकड़ों और दया पर पलने वाले चिश्ती के ख़्वाब में आए इस्लामी नबी, उसका हिन्दुस्तान पर हमला करके बुतपरस्त काफ़िरों को सबक़ सिखाने के लिए गौरी को चिट्ठी, पहली लड़ाई में पृथ्वीराज के सामने घुटनों पर आकर सिर झुकाने वाले गोरी का अगली बार फिर से झपटना, और अपनी जान बख़्शने वाले के सर को अपने मुल्क ले जाकर क़िले के दरवाज़े पर टाँग देना, उसके साथ हुआ अल्लाहु अकबर का अट्टाहस, हिन्दुस्तान में मूर्तिपूजकों के ख़ून से घुटनों तक दरया बहाने के गुरु चेलों के मंसूबे और कत्लेआम।
4. *तेरहवीं सदी में बख़्तियार ख़िलजी का हमला*। नालंदा और विक्रमशिला के महीनों तक धूँ धूँ करके जलते भवन, तकबीर के नारों और फ़तह के जश्न के शोर के बीच मौत के आग़ोश में समा गए हज़ारों आचार्य, शिक्षक, शिष्य, मर्द, औरत, बच्चे।
5. *चौदहवीं सदी में महारानी पद्मिनी को पाने के लिए अलाउद्दीन ख़िलजी का चित्तौड़ का हमला,* शादीशुदा माँ समान रानी को अपने बिस्तर में देखने के जिहादी मंसूबे, हज़ारों महारानियों, रानियों, राजकुमारियों, और साथी स्त्रियों की सामूहिक पूजा, पूरा शृंगार करके आरती अर्चना, भीमकाय क़िले के बीचोंबीच हज़ारों मन लकड़ियों को इकट्ठा करते शाही हाथी, अहाते के चारों तरफ़ उन लकड़ियों को जमता देखती कन्याओं की टोली, प्रचण्ड आग में कूदने के पहले एक दूसरे से आख़िरी गले मिलना, धर्म की विजय की कामना करते हुए महारानी पद्मिनी का अग्निकुण्ड में प्रवेश, एक पल में लकड़ी को कोयला कर देने वाली दहकती आग में माँ समान कोमल महारानी और हज़ारों स्त्रियों का अंतिम प्रयाण, मर कर भी किसी जिहादी के हाथ ना आने का अतुल्य संतोष, मर कर भी सम्मान नहीं मरने देने का सुख, आने वाली पीढ़ी के वीर पुत्र अपनी जलती माताओं का प्रतिशोध ज़रूर लेंगे, इस संदेश के साथ उस ऊँची उठती आग में धुआँ हो जाने वाली राजमाताएँ और पुत्रियाँ।
*इसी सदी में काफ़िरों के कटे सरों की मीनारें बनाने वाला तैमूर*, दिल्ली शहर का वो कत्लेआम, दहाईयों तक इंसानी वजूद से ख़ाली हो जाने वाले शहर, गिद्ध, चील, भेड़ियों और जानवरों के शोर में ढके हुए शहर, क़रीब २ करोड़ इंसानों के क़ातिल का दिल्ली की गलियों में बेख़ौफ़ घूमना, पूरी दुनिया की इंसानी आबादी के ५% हिस्से को अपनी तलवार से ख़त्म करने वाले उस लंगड़े के चेहरे के भद्दे चेचकी दाग़।
6. *सोलहवीं सदी के मुग़ल बाबर के हाथों से काटे गए हज़ारों सरों की मीनारों के जुलूस,* मीनारों के ख़ौफ़ से पूरे के पूरे शहरों का इस्लाम क़ुबूल करना, बाजौड़ की औरतों की दर्दनाक दास्ताँ, बाबर के हरम से हर रात निकलने वाली कमसिन बच्चों की चीख़ें, अफ़ीम के नशे में सर काटने की प्रतियोगिता। करोड़ों हिंदुओं के भगवान राम के मंदिर का ज़मीन में दफ़न किया जाना।
*इसी सदी में बाबर के पोते अकबर* का अपने उस्ताद बैरम खाँ को फ़ारिग़ करके माँ समान उसकी बीवी से निकाह, चित्तौड़ के क़ब्ज़े के दिन ३०,००० बेगुनाह औरतों, बच्चों, बूढ़ों और जवानों का अपने हाथों से कत्लेआम, सैंकड़ों राजस्त्रियों का जौहर की आग में फिर से पलायन, ५,००० काफ़िर औरतों और बच्चों से भरा हुआ हरम, रिश्ते में बेटी, पोती और बहू लगने वाली औरतों/बच्चों की दर्दनाक चीख़ों से भरी हुई हरम की रातें।
7. *सत्रहवीं सदी में अकबर के बेटे जहांगीर का हिंदू-सिखों के गुरु अर्जन देव जी को इस्लाम क़ुबूल करने का हुक्म*, गुरु का इनकार, गुरु की मौत का फ़रमान, जलते लोहे के तवे पर गुरु का बैठना, ऊपर से गरम रेत से बदन को छलनी करना, भालों से गुरु का माँस उतारना, बादशाह जहांगीर का आख़िरी बार इस्लाम क़ुबूल करने का हुक्म? गुरु का आख़िरी इनकारी जवाब, गुरु को उनकी गाय माता की खाल में सिल कर मारने का फ़रमान, इस पर गुरु का रावी नदी में स्नान के लिए जाना और फिर कभी वापस नहीं आना।
*इसी सदी में अकबर महान के पड़पोते औरंगज़ेब के हाथों इस्लाम क़ुबूल नहीं करने पर लाखों हिंदुओं का कत्लेआम*।हज़ारों मन्दिरों को ज़मींदोज़ करके मूर्तिपूजक हिंदुओं को असली खुदा की ताक़त का एहसास करवाना, हिंदू-सिखों के गुरु तेग़ बहादुर जी को इस्लाम क़ुबूल नहीं करने पर क़त्ल का फ़रमान, दिल्ली की धरती पर गुरु का उड़ता हुआ सर, भाई मति दास का आरे से चीरा गया बदन, भाई सती दास का रुई में लपेट कर जलाया गया जिस्म, भालों पर झूलते ७०० सिखों के कटे सर, दिल्ली में कटे सरों के जुलूस, छत्रपति शिवाजी महाराज के बेटे छत्रपति संभाजी की यातनाओं के २० दिन, इस्लाम नहीं क़ुबूल करने के लिए ख़ंजर से निकाली गयीं आँखें, अल्लाहु अकबर नहीं बोलने के लिए खींची गयी ज़बान, उँगलियों के खींचे गए नाख़ून, पत्थरों से कुचली गयीं उँगलियाँ, चिमटों से खींची गयी जिस्म की खाल, ख़ंजरों से काटी गयी बोटी बोटी, तलवार से कलम किया गया सर।
8. *अठारहवीं सदी में हिंदू-सिखों के दसवें गुरु गोबिन्द सिंह जी के ५ और ८ साल के छोटे छोटे बच्चों का अपहरण*- उन्हें इस्लाम क़ुबूल करने का हुक्म, बच्चों का इनकार, दीवार में ज़िंदा चिनवाए गए बच्चे, अल्लाहु अकबर का शोर। बच्चों के बलिदान का बदला लेने वाले बंदा वैरागी का दिल्ली आना, शेर के पिंजरे में उसे क़ैद करके दिल्ली शहर में घुमाना, दुधमुँहे बच्चे का माँस ख़ंजर से निकाल के पिता बंदा के मुँह में ठूँसना, इस्लाम क़ुबूल नहीं करने पर बदन के टुकड़े टुकड़े दिल्ली की सड़कों पर। देवी के अपमान पर पैग़म्बर का अपमान करने के जुर्म में १४ साल के बालक हक़ीक़त राय का लाहौर में माँ की आँखों के सामने तन से जुदा सर। इतना सुनना था कि खाने की मेज़ पर रोटी के निवाले हलक में अटक गए। रूँधे हुए गले से रोटी नीचे नहीं उतरती थी। भाई, ये सब क्या था? अगर ये सब सच है तो हमने स्कूल में ये सब क्यों नहीं पढ़ा? १४ आँखों से आँसू लुढ़क रहे थे। कमरे में ख़ामोशी ही ख़ामोशी थी जो ७ लोगों के सुबकने से टूट रही थी।
*एक सवाल मन में कौंध रहा था, क्या कारण है कि जिस देश में पिछले १३ सदियों का एक एक साल ख़ून में डूबा हो, एक भी सदी बिना औरतों, बच्चों, माँओं की अगणित चीख़ पुकार सुने बिना नहीं बीती, जिस देश में आज भी उन १३०० सालों के हमलावरों, माओं को नंगा घुमाने वालों, उनको अरब की ग़ुलाम मंडियों में बेचने वालों, बलात्कार करने वालों, लाखों मंदिरों-मूर्तियों को तोड़ कर उन पर मस्जिद बनाने वालों, करोड़ों लोगों को तलवार के ज़ोर पर हिंदू से मुसलमान बनाने वालों को हीरो, वली और इस्लाम का ग़ाज़ी समझा जाता हो, ग़ज़नी, बाबर और औरंगज़ेब के नाम की मस्जिदें बनाकर उनमें बैठ कर करोड़ों हिंदुओं के ज़ख़्मों पर दिन में ५ बार, सप्ताह में ३५ बार, महीने में १५० बार और साल में १८२५ बार नमक मिर्च रगड़ा जाता हो, जिस देश में बलात्कारी बाबर के नाम की मस्जिद के लिए लाखों लोग सड़कों पर उतर आते हों, औरंगज़ेब के नाम की मस्जिद से दिल्ली में तकारीर की जाती हों, जिस देश को ७० साल पहले इन्हीं क़ातिल लुटेरों के मानने वालों ने दो टुकड़े कर के फेंक दिया*
*जिस देश के टुकड़े होने के बाद भी बचे खुचे पर शरीयत के काले क़ानून के साये हैं, जिस देश के २०% लोग देश का क़ानून मानने से इनकारी हों, मज़हब मुल्क से ऊपर है, इस बात का खुल्लम खुल्ला एलान करते घूमते हों, जिस देश में ६०० में से ८६ जिलों में ऐसे लोगों की संख्या २०% के पार हो चुकी हो, जिस देश में हिंदू को कश्मीर से साफ़ किया गया हो, राजधानी दिल्ली से १०० किलोमीटर दूर कैराना में हिंदुओं का पलायन किया जा चुका हो, मेरठ, मुज़फ़्फ़रनगर, सहारनपुर, बुलन्दशहर, रामपुर, मुरादाबाद आदि में पलायन की तैयारी हो चुकी हो, जिस देश में बचे खुचे हिंदू ८ राज्यों में अल्पसंख्यक बन चुके हों, जिस देश के स्कूलों में रमज़ान के दिनों में हिंदू बच्चों के लिए भी खाने पर पाबंदी लगनी शुरू हो गयी हो, जिस देश की राजधानी में हनुमान आरती को रमज़ान के महीने में रुकवा दिया गया हो क्योंकि मूर्तिपूजा से मोहल्ले के लाखों अल्पसंख्यक लोगों की धार्मिक भावनाएँ आहत हो जाती हैं, जिस देश में आपके लिए घेरा तंग से तंगतर होता जा रहा हो, उस देश के युवाओं की समस्या क्या हैं? भ्रष्टाचार,बेरोजगारी, ग्लोबल वार्मिंग, गोरक्षक, आतंकवाद,या इन सबसे बढ कर स्वंय की अस्तित्व ?*
(दाहिर की जाति पर विवाद हो इससे पूर्व कह देना चाहता हूँ, कि मेरे लिए हर वह व्यक्ति क्षत्रिय है जो राष्ट्र की रक्षा हेतु प्राण देता है, और हर वह व्यक्ति ब्राह्मण है जो अपनी मेधा को धर्म और राष्ट्र के उत्थान हेतु झोंक देता है ।
स्वामी चिन्मयानंदजी एक प्रसिद्ध संत थे ओ और एक पत्रकार
*अखण्ड सनातन समिति*🚩🇮🇳
स्वामी चिन्मयानंदजी एक प्रसिद्ध संत थे *एक बार* एक *धर्मनिरपेक्ष* दिमाग वाले पत्रकार *जो आम तौर पर हिंदू धर्म को खराब रोशनी में दिखाते हैं* ने अन्य धर्मों की तुलना में *स्वामी जी से एक प्रश्न पूछा―*
*प्रश्न* : इस्लाम का संस्थापक कौन है?
*Ans* : पैगंबर मोहम्मद।
*प्रश्न* : ईसाई धर्म के संस्थापक कौन हैं?
*Ans* : यीशु मसीह।
*प्रश्न* : हिंदू धर्म के संस्थापक कौन हैं?
यह सोचकर कि स्वामी जी के पास कोई उत्तर नहीं है *महिला पत्रकार आगे बढ़ी …*…
कोई संस्थापक नहीं है और इसलिए *हिंदू धर्म कोई धर्म या धर्म नहीं है*।
*Ans* : फिर *स्वामीजी ने कहा* तुम सही हो *हिंदू धर्म कोई धर्म नहीं है* यह एक विज्ञान है।
*वह यह नहीं समझती थी* स्वामीजी ने उनसे कुछ और प्रश्न किए।
*प्रश्न* : भौतिकी के संस्थापक कौन हैं?
*उत्तर* : कोई एक व्यक्ति नहीं।
*प्रश्न* : रसायन विज्ञान के जनक कौन है?
*उत्तर* : कोई एक व्यक्ति नहीं।
*प्रश्न* : जीव विज्ञान के संस्थापक कौन हैं?
*उत्तर* : कोई एक व्यक्ति नहीं।
*किसी भी विज्ञान के ज्ञान-संपदा में समय-समय पर अनेक व्यक्तियों ने अपना योगदान दिया है …*…
*स्वामीजी ने आगे कहा―*
*हिंदू धर्म एक विज्ञान है जो सदियों से विकसित*, *संतों* और *ऋषियों ने अपने स्वयं के शोध और अनुभवों से समाज को सही दिशा देने के लिए योगदान दिया है*।
*इस्लाम की एक ही किताब है- कुरान*
*ईसाई धर्म की एक ही किताब है- बाइबिल*
*लेकिन हिंदू धर्म के लिए* मैं आपको एक पुस्तकालय में ले जा सकता हूं और आपको सैकड़ों किताबें दिखा सकता हूं।
*क्योंकि हिंदू धर्म एक वैज्ञानिक धर्म है जो सनातन धर्म कहलाता है ।।*
*🙏🏻सनातन धर्म🙏🏻*
*सबसे सटीक परिभाषा* : *साभार*
🕉️🐚⚔️🚩🌞🇮🇳⚔️🌷🙏🏻
एक समाज श्रेष्ठ समाज संस्था अध्यक्ष योगेन्द्र कुमार साहू से किया कार्य
एक समाज श्रेष्ठ समाज संस्था अध्यक्ष योगेन्द्र कुमार साहू प्रांतीय उद्योग व्यापार मण्डल वरिष्ठ
उपाध्यक्ष सचिन गुप्ता के नेतृत्व में संस्था के माध्यम से दिव्य कार्य अभियान के अंतर्गत बाल दिवस के अवसर पर निर्धन बच्चों को संस्था पदाधिकारियों ने कॉपी पेंसिल रबर कटर देकर बच्चों को शिक्षित होने के लिए प्रेरित किया
इस दौरान एक समाज श्रेष्ठ समाज संस्था कोषाध्यक्ष बलराम हालदार मीडिया प्रभारी मुकेश सरकार ने संयुक्त रूप से कहा की बच्चे आने वाली पीढ़ी के साथ भारत देश के भविष्य हैं इसलिए बच्चों को अच्छी शिक्षा और दीक्षा दोनों प्राप्त हो इसके लिए हम सभी लोगों को पहल कर कार्य करना चाहिए क्योंकि आज भी बहुत से ऐसे निर्धन परिवारों के बच्चे हैं जिनको पर्याप्त संसाधन न मिल पाने की वजह से शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते हैं इसलिए हम सभी का मानव होने के नाते यह परम कर्तव्य कि हम अपने देश के भविष्य बच्चों को सही शिक्षा और दीक्षा दोनों दिलाकर बच्चों की उन्नति के लिए कार्य करें क्योंकि किसी भी बच्चे का भविष्य उनके आज पर निर्भर करता है इसलिए उनकी वर्तमान आदतें संस्कार बौद्धिक क्षमता और रहन सहन का तौर तरीका ही उनके भविष्य का निर्माण करेगा क्योंकि जब बच्चों को ज्ञान प्राप्त होगा तो उनके अंदर छुपी हुई प्रतिभा प्रखर रूप से बाहर आकर ज्ञान की गंगा बहेगी जिससे यही बच्चे आगे चलकर भारत देश के उज्जवल भविष्य बनकर हर क्षेत्र में भारत की उन्नति प्रगति के लिए हमेशा कार्य करें इसलिए एक समाज श्रेष्ठ समाज संस्था दिव्य कार्य के अंतर्गत निर्धन बच्चों के शिक्षा और दीक्षा के लिए पठन पाठन सामग्री हमेशा वितरण करती है और आगे भी करती रहेगी
इस दौरान बच्चों को पठन पाठन सामग्री वितरण करने में संस्था संरक्षक हरीश चन्द्र पाण्डेय अध्यक्ष योगेन्द्र कुमार साहू कोषाध्यक्ष बलराम हालदार मीडिया प्रभारी मुकेश सरकार एक्टर साहिल राज अभिषेक साहू सचिन गुप्ता पूनम सरकार एकता कुमारी संध्या कुमारी दीपक कुमार गोविन्द मिस्त्री संदीप यादव सुशील राय विशाल कुमार मुकेश कुमार आदि लोग उपस्थित रहे
