Happy birthday sirji

हमारे मित्र या हमारे बिजनेस के आधार मा.श्री हर्दिक जि पटेल
HDN Proseal Pvt.Ltd के मालीक
उनको जन्म दीन की बहुत बहुत शुभकामना.

🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞
⛅ *दिनांक – 07 फरवरी 2022*
⛅ *दिन – सोमवार*
⛅ *विक्रम संवत – 2078*
⛅ *शक संवत -1943*
⛅ *अयन – उत्तरायण*
⛅ *ऋतु – शिशिर*
⛅ *मास – माघ*
⛅ *पक्ष – शुक्ल*
⛅ *तिथि – सप्तमी 08 फरवरी सुबह 06:15 तक तत्पश्चात अष्टमी*
⛅ *नक्षत्र – अश्विनी शाम 06:59 तक तत्पश्चात भरणी*
⛅ *योग – शुभ शाम 04:44 तक तत्पश्चात शुक्ल*
⛅ *राहुकाल – सुबह 08:38 से सुबह 10:03 तक*
⛅ *सूर्योदय – 07:14*
⛅ *सूर्यास्त – 18:31*
⛅ *दिशाशूल – पूर्व दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण – रथ- आरोग्य- विधान-अचला- चंद्रभागा सप्तमी, नर्मदा जयंती*
💥 *विशेष – सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है तथा शरीर का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🌷 *अचला सप्तमी* 🌷
🙏🏻 *अचला सप्तमी ( स्नान, व्रत करके गुरु का पूजन करनेवाला सम्पूर्ण माघ मास के स्नान का फल व वर्षभर के रविवार व्रत का पुण्य पा लेता है | यह सम्पूर्ण पापों को हरनेवाली व सुख-सौभाग्य की वृद्धि करनेवाली है | )*
💥 *विशेष – 07 फरवरी 2022 सोमवार को अचला सप्तमी है ।*
🙏🏻
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🌷 *भीष्म अष्टमी* 🌷
👉🏻 *08 फरवरी 2022 मंगलवार को भीष्म अष्टमी, भीष्म श्राद्ध दिवस है | भीष्मजी के नाम से सूर्य को अर्घ्य दें तो संतान हीन् को संतान मिल सकती है और आरोग्य आदि प्राप्त होता है |*
🙏🏻
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🌷 *भीष्म तर्पण दिवस* 🌷
🙏🏻 *भीष्मजी को जल अर्पण करें और संतान की प्राप्ति की इच्छा करें तो तेजस्वी आत्मा आती है ऐसा 08 फरवरी 2022 मंगलवार को है इस बार शुक्ल अष्टमी तिथि, धवल निबंध ग्रंथ के अनुसार इस तिथि को भीष्म जी का तर्पण दिवस भी है ब्रह्मचारी भीष्म जी का तर्पण करने से लड़के लड़कियाँ तेजस्वी हो सकते हैं।*
🙏🏻
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🙏🏻🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩
🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞
⛅ *दिनांक – 07 फरवरी 2022*
⛅ *दिन – सोमवार*
⛅ *विक्रम संवत – 2078*
⛅ *शक संवत -1943*
⛅ *अयन – उत्तरायण*
⛅ *ऋतु – शिशिर*
⛅ *मास – माघ*
⛅ *पक्ष – शुक्ल*
⛅ *तिथि – सप्तमी 08 फरवरी सुबह 06:15 तक तत्पश्चात अष्टमी*
⛅ *नक्षत्र – अश्विनी शाम 06:59 तक तत्पश्चात भरणी*
⛅ *योग – शुभ शाम 04:44 तक तत्पश्चात शुक्ल*
⛅ *राहुकाल – सुबह 08:38 से सुबह 10:03 तक*
⛅ *सूर्योदय – 07:14*
⛅ *सूर्यास्त – 18:31*
⛅ *दिशाशूल – पूर्व दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण – रथ- आरोग्य- विधान-अचला- चंद्रभागा सप्तमी, नर्मदा जयंती*
💥 *विशेष – सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है तथा शरीर का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🌷 *अचला सप्तमी* 🌷
🙏🏻 *अचला सप्तमी ( स्नान, व्रत करके गुरु का पूजन करनेवाला सम्पूर्ण माघ मास के स्नान का फल व वर्षभर के रविवार व्रत का पुण्य पा लेता है | यह सम्पूर्ण पापों को हरनेवाली व सुख-सौभाग्य की वृद्धि करनेवाली है | )*
💥 *विशेष – 07 फरवरी 2022 सोमवार को अचला सप्तमी है ।*
🙏🏻
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🌷 *भीष्म अष्टमी* 🌷
👉🏻 *08 फरवरी 2022 मंगलवार को भीष्म अष्टमी, भीष्म श्राद्ध दिवस है | भीष्मजी के नाम से सूर्य को अर्घ्य दें तो संतान हीन् को संतान मिल सकती है और आरोग्य आदि प्राप्त होता है |*
🙏🏻
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🌷 *भीष्म तर्पण दिवस* 🌷
🙏🏻 *भीष्मजी को जल अर्पण करें और संतान की प्राप्ति की इच्छा करें तो तेजस्वी आत्मा आती है ऐसा 08 फरवरी 2022 मंगलवार को है इस बार शुक्ल अष्टमी तिथि, धवल निबंध ग्रंथ के अनुसार इस तिथि को भीष्म जी का तर्पण दिवस भी है ब्रह्मचारी भीष्म जी का तर्पण करने से लड़के लड़कियाँ तेजस्वी हो सकते हैं।*
🙏🏻
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🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🙏🏻🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩
🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞
⛅ *दिनांक – 06 फरवरी 2022*
⛅ *दिन – रविवार*
⛅ *विक्रम संवत – 2078*
⛅ *शक संवत -1943*
⛅ *अयन – उत्तरायण*
⛅ *ऋतु – शिशिर*
⛅ *मास – माघ*
⛅ *पक्ष – शुक्ल*
⛅ *तिथि – षष्ठी 07 फरवरी प्रातः 04:37 तक तत्पश्चात सप्तमी*
⛅ *नक्षत्र – रेवती शाम 05:10 तक तत्पश्चात अश्विनी*
⛅ *योग – साध्य शाम 04:54 तक तत्पश्चात शुभ*
⛅ *राहुकाल – शाम 05:07 से शाम 08:32 तक*
⛅ *सूर्योदय – 07:15*
⛅ *सूर्यास्त – 18:30*
⛅ *दिशाशूल – पश्चिम दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण – शीतला षष्ठी (बंगाल)*
💥 *विशेष – षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🌷 *माघ शुक्ल सप्तमी* 🌷
➡ *07 फरवरी 2022 सोमवार को माघ शुक्ल सप्तमी है ।*
🙏🏻 *माघ शुक्ल सप्तमी को अचला सप्तमी, रथ सप्तमी, आरोग्य सप्तमी, भानु सप्तमी, अर्क सप्तमी आदि अनेक नामों से सम्बोधित किया गया है और इसे सूर्य की उपासना के लिए बहुत ही सुन्दर दिन कहा गया है। पुत्र प्राप्ति, पुत्र रक्षा तथा पुत्र अभ्युदय के लिए इस दिन संतान सप्तमी का व्रत भी किया जाता है।*
🙏🏻 *स्कन्द पुराण के अनुसार*
*यस्यां तिथौ रथं पूर्वं प्राप देवो दिवाकरः॥सा तिथिः कथिता विप्रैर्माघे या रथसप्तमी॥ ५.१२९ ॥*
*तस्यां दत्तं हुतं चेष्टं सर्वमेवाक्षयं मतम्॥ सर्वदारिद्र्यशमनं भास्करप्रीतये मतम्॥ ५.१३० ॥*
🙏🏻 *भगवान सूर्य जिस तिथि को पहले-पहल रथ पर आरूढ़ हुए, वह ब्राह्मणों द्वारा माघ मास की सप्तमी बताई गयी है, जिसे रथसप्तमी कहते हैं। उस तिथि को दिया हुआ दान और किया हुआ यज्ञ सब अक्षय माना जाता है। वह सब प्रकार की दरिद्रता को दूर करने वाला और भगवान सूर्य की प्रसन्नता का साधन बताया गया है।*
🙏🏻 *भविष्य पुराण के अनुसार सप्तमी तिथि को भगवान् सूर्य का आविर्भाव हुआ था | ये अंड के साथ उत्पन्न हुए और अंड में रहते हुए ही उन्होंने वृद्धि प्राप्त कि | बहुत दिनोंतक अंड में रहने के कारण ये ‘मार्तण्ड’ के नामसे प्रसिद्ध हुए |*
🙏🏻 *भविष्य पुराण के अनुसार ही सूर्य को अपनी भार्या उत्तरकुरु में सप्तमी तिथि के दिन प्राप्त हुई, उन्हें दिव्य रूप सप्तमी तिथि को ही मिला तथा संताने भी इसी तिथि को प्राप्त हुई, अत: सप्तमी तिथि भगवान् सूर्य को अतिशय प्रिय हैं |*
🙏🏻 *भविष्य पुराण : श्रीकृष्ण उवाच ॥ शुक्लपक्षे तु सप्तम्यां यदादित्यदिनं भवेत् । सप्तमी विजया नाम तव्र दत्तं महाफलम् ॥*
*स्त्रांन दानं जपो होम उपवासस्तथैव च । सर्वें विजयसप्तम्पां महापातकनाशनम् ॥*
*प्रदक्षिणां यः कुरुते फलैः पुष्पौर्दिवाकरम् । स सर्वगुणसंपन्नं पुव्रं प्राप्नोत्यनुत्तमम ॥*
🙏🏻 *भगवान श्रकृष्ण कहते है– राजन! शुक्ल पक्षकी सप्तमी तिथि को यदि आदित्यवार (रविवार) हो तो उसे विजय सप्तमी कहते है. वह सभी पापोका विनाश करने वाली है .उस दिन किया हुआ स्नान ,दान्, जप, होम तथा उपवास आदि कर्म अनन्त फलदायक होता है. जो उस दिन फल् पुष्प आदि लेकर भगवान सूर्यकी प्रदक्षिणा करता है। वह सर्व गुण सम्पन्न उत्तम पुत्र को प्राप्त करता है।*
🙏🏻 *नारद पुराण में माघ शुक्ल सप्तमी को “अचला व्रत” बताया गया है। यह “त्रिलोचन जयन्ती” है। इसी को रथसप्तमी कहते हैं। यही “भास्कर सप्तमी” भी कहलाती है, जो करोङों सूर्य-ग्रहणों के समान है। इसमें अरूणोदय के समय स्नान किया जाता है। आक और बेर के सात-सात पत्ते सिर पर रखकर स्नान करना चाहिए। इससे सात जन्मों के पापों का नाश होता है। इसी सप्तमी को ‘’पुत्रदायक ” व्रत भी बताया गया है। स्वयं भगवान सूर्य ने कहा है – ‘जो माघ शुक्ल सप्तमी को विधिपूर्वक मेरी पूजा करेगा, उसपर अधिक संतुष्ट होकर मैं अपने अंश से उसका पुत्र होऊंगा’। इसलिये उस दिन इन्द्रियसंयमपूर्वक दिन-रात उपवास करे और दूसरे दिन होम करके ब्राह्मणों को दही, भात, दूध और खीर आदि भोजन करावें।*
🙏🏻 *अग्नि पुराण में अग्निदेव कहते हैं – माघ मासके शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथिको (अष्टदल अथवा द्वादशदल) कमल का निर्माण करके उसमें भगवान् सूर्यका पूजन करना चाहिये | इससे मनुष्य शोकरहित हो जाता है |*
🙏🏻 *चंद्रिका में लिखा है “सूर्यग्रहणतुल्या हि शुक्ला माघस्य सप्तमी। अरुणोदगयवेलायां तस्यां स्नानं महाफलम्॥”*
➡ *अर्थात माघ शुक्ल सप्तमी सूर्यग्रहण के तुल्य होती है सूर्योदय के समय इसमें स्नान का महाफल होता है ।*
🙏🏻 *नारद पुराण के अनुसार* *“अरुणोदयवालायां शुक्ला माघस्य सप्तमी ॥ प्रयागे यदि लभ्येत सहस्रार्कग्रहैः समा॥* *अयने कोटिपुण्यं स्याल्लक्षं तु विषुवे फलम् ॥११२॥”*
🙏🏻 *चंद्रिका में भी विष्णु ने लिखा है “अरुणोदयवेलायां शुक्ला माघस्य सप्तमी ॥ प्रयागे यदि लभ्येत कोटिसूर्यग्रहैः समा”*
➡ *अर्थात माघ शुक्ल सप्तमी यदि अरुणोदय के समय प्रयाग में प्राप्त हो जाए तो कोटि सूर्य ग्रहणों के तुल्य होती है ।*
🙏🏻 *मदनरत्न में भविष्योत्तर पुराण का कथन है की “माघे मासि सिते पक्षे सप्तमी कोटिभास्करा। दद्यात् स्नानार्घदानाभ्यामायुरारोग्यसम्पदः॥”*
➡ *अर्थात माघ मास की शुक्लपक्ष सप्तमी कोटि सूर्यों के बराबर है उसमें सूर्य स्नान दान अर्घ्य से आयु आरोग्य संपन्न करते हैं ।*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🙏🏻🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩
🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞
⛅ *दिनांक – 06 फरवरी 2022*
⛅ *दिन – रविवार*
⛅ *विक्रम संवत – 2078*
⛅ *शक संवत -1943*
⛅ *अयन – उत्तरायण*
⛅ *ऋतु – शिशिर*
⛅ *मास – माघ*
⛅ *पक्ष – शुक्ल*
⛅ *तिथि – षष्ठी 07 फरवरी प्रातः 04:37 तक तत्पश्चात सप्तमी*
⛅ *नक्षत्र – रेवती शाम 05:10 तक तत्पश्चात अश्विनी*
⛅ *योग – साध्य शाम 04:54 तक तत्पश्चात शुभ*
⛅ *राहुकाल – शाम 05:07 से शाम 08:32 तक*
⛅ *सूर्योदय – 07:15*
⛅ *सूर्यास्त – 18:30*
⛅ *दिशाशूल – पश्चिम दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण – शीतला षष्ठी (बंगाल)*
💥 *विशेष – षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🌷 *माघ शुक्ल सप्तमी* 🌷
➡ *07 फरवरी 2022 सोमवार को माघ शुक्ल सप्तमी है ।*
🙏🏻 *माघ शुक्ल सप्तमी को अचला सप्तमी, रथ सप्तमी, आरोग्य सप्तमी, भानु सप्तमी, अर्क सप्तमी आदि अनेक नामों से सम्बोधित किया गया है और इसे सूर्य की उपासना के लिए बहुत ही सुन्दर दिन कहा गया है। पुत्र प्राप्ति, पुत्र रक्षा तथा पुत्र अभ्युदय के लिए इस दिन संतान सप्तमी का व्रत भी किया जाता है।*
🙏🏻 *स्कन्द पुराण के अनुसार*
*यस्यां तिथौ रथं पूर्वं प्राप देवो दिवाकरः॥सा तिथिः कथिता विप्रैर्माघे या रथसप्तमी॥ ५.१२९ ॥*
*तस्यां दत्तं हुतं चेष्टं सर्वमेवाक्षयं मतम्॥ सर्वदारिद्र्यशमनं भास्करप्रीतये मतम्॥ ५.१३० ॥*
🙏🏻 *भगवान सूर्य जिस तिथि को पहले-पहल रथ पर आरूढ़ हुए, वह ब्राह्मणों द्वारा माघ मास की सप्तमी बताई गयी है, जिसे रथसप्तमी कहते हैं। उस तिथि को दिया हुआ दान और किया हुआ यज्ञ सब अक्षय माना जाता है। वह सब प्रकार की दरिद्रता को दूर करने वाला और भगवान सूर्य की प्रसन्नता का साधन बताया गया है।*
🙏🏻 *भविष्य पुराण के अनुसार सप्तमी तिथि को भगवान् सूर्य का आविर्भाव हुआ था | ये अंड के साथ उत्पन्न हुए और अंड में रहते हुए ही उन्होंने वृद्धि प्राप्त कि | बहुत दिनोंतक अंड में रहने के कारण ये ‘मार्तण्ड’ के नामसे प्रसिद्ध हुए |*
🙏🏻 *भविष्य पुराण के अनुसार ही सूर्य को अपनी भार्या उत्तरकुरु में सप्तमी तिथि के दिन प्राप्त हुई, उन्हें दिव्य रूप सप्तमी तिथि को ही मिला तथा संताने भी इसी तिथि को प्राप्त हुई, अत: सप्तमी तिथि भगवान् सूर्य को अतिशय प्रिय हैं |*
🙏🏻 *भविष्य पुराण : श्रीकृष्ण उवाच ॥ शुक्लपक्षे तु सप्तम्यां यदादित्यदिनं भवेत् । सप्तमी विजया नाम तव्र दत्तं महाफलम् ॥*
*स्त्रांन दानं जपो होम उपवासस्तथैव च । सर्वें विजयसप्तम्पां महापातकनाशनम् ॥*
*प्रदक्षिणां यः कुरुते फलैः पुष्पौर्दिवाकरम् । स सर्वगुणसंपन्नं पुव्रं प्राप्नोत्यनुत्तमम ॥*
🙏🏻 *भगवान श्रकृष्ण कहते है– राजन! शुक्ल पक्षकी सप्तमी तिथि को यदि आदित्यवार (रविवार) हो तो उसे विजय सप्तमी कहते है. वह सभी पापोका विनाश करने वाली है .उस दिन किया हुआ स्नान ,दान्, जप, होम तथा उपवास आदि कर्म अनन्त फलदायक होता है. जो उस दिन फल् पुष्प आदि लेकर भगवान सूर्यकी प्रदक्षिणा करता है। वह सर्व गुण सम्पन्न उत्तम पुत्र को प्राप्त करता है।*
🙏🏻 *नारद पुराण में माघ शुक्ल सप्तमी को “अचला व्रत” बताया गया है। यह “त्रिलोचन जयन्ती” है। इसी को रथसप्तमी कहते हैं। यही “भास्कर सप्तमी” भी कहलाती है, जो करोङों सूर्य-ग्रहणों के समान है। इसमें अरूणोदय के समय स्नान किया जाता है। आक और बेर के सात-सात पत्ते सिर पर रखकर स्नान करना चाहिए। इससे सात जन्मों के पापों का नाश होता है। इसी सप्तमी को ‘’पुत्रदायक ” व्रत भी बताया गया है। स्वयं भगवान सूर्य ने कहा है – ‘जो माघ शुक्ल सप्तमी को विधिपूर्वक मेरी पूजा करेगा, उसपर अधिक संतुष्ट होकर मैं अपने अंश से उसका पुत्र होऊंगा’। इसलिये उस दिन इन्द्रियसंयमपूर्वक दिन-रात उपवास करे और दूसरे दिन होम करके ब्राह्मणों को दही, भात, दूध और खीर आदि भोजन करावें।*
🙏🏻 *अग्नि पुराण में अग्निदेव कहते हैं – माघ मासके शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथिको (अष्टदल अथवा द्वादशदल) कमल का निर्माण करके उसमें भगवान् सूर्यका पूजन करना चाहिये | इससे मनुष्य शोकरहित हो जाता है |*
🙏🏻 *चंद्रिका में लिखा है “सूर्यग्रहणतुल्या हि शुक्ला माघस्य सप्तमी। अरुणोदगयवेलायां तस्यां स्नानं महाफलम्॥”*
➡ *अर्थात माघ शुक्ल सप्तमी सूर्यग्रहण के तुल्य होती है सूर्योदय के समय इसमें स्नान का महाफल होता है ।*
🙏🏻 *नारद पुराण के अनुसार* *“अरुणोदयवालायां शुक्ला माघस्य सप्तमी ॥ प्रयागे यदि लभ्येत सहस्रार्कग्रहैः समा॥* *अयने कोटिपुण्यं स्याल्लक्षं तु विषुवे फलम् ॥११२॥”*
🙏🏻 *चंद्रिका में भी विष्णु ने लिखा है “अरुणोदयवेलायां शुक्ला माघस्य सप्तमी ॥ प्रयागे यदि लभ्येत कोटिसूर्यग्रहैः समा”*
➡ *अर्थात माघ शुक्ल सप्तमी यदि अरुणोदय के समय प्रयाग में प्राप्त हो जाए तो कोटि सूर्य ग्रहणों के तुल्य होती है ।*
🙏🏻 *मदनरत्न में भविष्योत्तर पुराण का कथन है की “माघे मासि सिते पक्षे सप्तमी कोटिभास्करा। दद्यात् स्नानार्घदानाभ्यामायुरारोग्यसम्पदः॥”*
➡ *अर्थात माघ मास की शुक्लपक्ष सप्तमी कोटि सूर्यों के बराबर है उसमें सूर्य स्नान दान अर्घ्य से आयु आरोग्य संपन्न करते हैं ।*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
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⛅ *दिनांक – 05 फरवरी 2022*
⛅ *दिन – शनिवार*
⛅ *विक्रम संवत – 2078*
⛅ *शक संवत -1943*
⛅ *अयन – उत्तरायण*
⛅ *ऋतु – शिशिर*
⛅ *मास – माघ*
⛅ *पक्ष – शुक्ल*
⛅ *तिथि – पंचमी 06 फरवरी प्रातः 03:46 तक तत्पश्चात षष्ठी*
⛅ *नक्षत्र – उत्तर भाद्रपद शाम 04:09 तक तत्पश्चात रेवती*
⛅ *योग – सिद्ध शाम 05:42 तक तत्पश्चात साध्य*
⛅ *राहुकाल – सुबह 10:04 से सुबह 11:28 तक*
⛅ *सूर्योदय – 07:15*
⛅ *सूर्यास्त – 18:30*
⛅ *दिशाशूल – पूर्व दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण – बसंत पंचमी- श्री पंचमी, सरस्वती पूजा*
💥 *विशेष – पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
💥 *ब्रह्म पुराण’ के 118 वें अध्याय में शनिदेव कहते हैं- ‘मेरे दिन अर्थात् शनिवार को जो मनुष्य नियमित रूप से पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उनके सब कार्य सिद्ध होंगे तथा मुझसे उनको कोई पीड़ा नहीं होगी। जो शनिवार को प्रातःकाल उठकर पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उन्हें ग्रहजन्य पीड़ा नहीं होगी।’ (ब्रह्म पुराण’)*
💥 *शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय।’ का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है। (ब्रह्म पुराण’)*
*शनिवार के दिन करने योग्य विशेष उपाय* ⤵️
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🌷 *वसंत पंचमी* 🌷
➡ *05 फरवरी 2022 शनिवार को वसंत पंचमी हैं ।*
🙏🏻 *ब्रह्मवैवर्त पुराण तथा देवीभागवत पुराण के अनुसार जो मानव माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन संयमपूर्वक उत्तम भक्ति के साथ षोडशोपचार से भगवती सरस्वती की अर्चना करता है, वह वैकुण्ठ धाम में स्थान पाता है। माघ शुक्ल पंचमी विद्यारम्भ की मुख्य तिथि है। “माघस्य शुक्लपञ्चम्यां विद्यारम्भदिनेऽपि च।”*
🙏🏻 *श्रीकृष्ण ने सरस्वती से कहा था*
🌷 *प्रतिविश्वेषु ते पूजां महतीं ते मुदाऽन्विताः । माघस्य शुक्लपञ्चम्यां विद्यारम्भेषु सुन्दरि ।।*
*मानवा मनवो देवा मुनीन्द्राश्च मुमुक्षवः । सन्तश्च योगिनः सिद्धा नागगन्धर्वकिंनराः ।।*
*मद्वरेण करिष्यन्ति कल्पे कल्पे यथाविधि । भक्तियुक्ताश्च दत्त्वा वै चोपचारांश्च षोडश ।।*
*काण्वशाखोक्तविधिना ध्यानेन स्तवनेन च । जितेन्द्रियाः संयताश्च पुस्तकेषु घटेऽपि च ।।*
*कृत्वा सुवर्णगुटिकां गन्धचन्दन चर्च्चिताम् । कवचं ते ग्रहीष्यन्ति कण्ठे वा दक्षिणे भुजे ।।*
*पठिष्यन्ति च विद्वांसः पूजाकाले च पूजिते । इत्युक्त्वा पूजयामास तां देवीं सर्वपूजितः ।।*
*ततस्तत्पूजनं चक्रुर्ब्रह्मविष्णुमहेश्वराः । अनन्तश्चापि धर्मश्च मुनीन्द्राः सनकादयः ।।*
*सर्वे देवाश्च मनवो नृपा वा मानवादयः । बभूव पूजिता नित्या सर्वलोकैः सरस्वती ।।*
🙏🏻 *“सुन्दरि! प्रत्येक ब्रह्माण्ड में माघ शुक्ल पंचमी के दिन विद्यारम्भ के शुभ अवसर पर बड़े गौरव के साथ तुम्हारी विशाल पूजा होगी। मेरे वर के प्रभाव से आज से लेकर प्रलयपर्यन्त प्रत्येक कल्प में मनुष्य, मनुगण, देवता, मोक्षकामी प्रसिद्ध मुनिगण, वसु, योगी, सिद्ध, नाग, गन्धर्व और राक्षस– सभी बड़ी भक्ति के साथ सोलह प्रकार के उपचारों के द्वारा तुम्हारी पूजा करेंगे। उन संयमशील जितेन्द्रिय पुरुषों के द्वारा कण्वशाखा में कही हुई विधि के अनुसार तुम्हारा ध्यान और पूजन होगा। वे कलश अथवा पुस्तक में तुम्हें आवाहित करेंगे। तुम्हारे कवच को भोजपत्र पर लिखकर उसे सोने की डिब्बी में रख गन्ध एवं चन्दन आदि से सुपूजित करके लोग अपने गले अथवा दाहिनी भुजा में धारण करेंगे। पूजा के पवित्र अवसर पर विद्वान पुरुषों के द्वारा तुम्हारा सम्यक प्रकार से स्तुति-पाठ होगा। इस प्रकार कहकर सर्वपूजित भगवान श्रीकृष्ण ने देवी सरस्वती की पूजा की। तत्पश्चात, ब्रह्मा, विष्णु, शिव, अनन्त, धर्म, मुनीश्वर, सनकगण, देवता, मुनि, राजा और मनुगण– इन सब ने भगवती सरस्वती की आराधना की। तब से ये सरस्वती सम्पूर्ण प्राणियों द्वारा सदा पूजित होने लगीं।*
🙏🏻 *वसन्त पंचमी पर सरस्वती मूल मंत्र की कम से कम 1 माला जप जरूर करना चाहिए।*
➡ *मूल मंत्र : “श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा”*
🙏🏻 *सरस्वती जी का वैदिक अष्टाक्षर मूल मंत्र जिसे भगवान शिव ने कणादमुनि तथा गौतम को, श्रीनारायण ने वाल्मीकि को, ब्रह्मा जी ने भृगु को, भृगुमुनि ने शुक्राचार्य को, कश्यप ने बृहस्पति को दिया था जिसको सिद्ध करने से मनुष्य बृहस्पति के समान हो जाता है ।*
🙏🏻 *सरस्वती पूजा के लिए नैवैद्य (ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार)*
*नवनीतं दधि क्षीरं लाजांश्च तिललड्डुकान् । इक्षुमिक्षुरसं शुक्लवर्णं पक्वगुडं मधु ।।*
*स्वस्तिकं शर्करां शुक्लधान्यस्याक्षतमक्षतम्। अस्विन्नशुक्लधान्यस्य पृथुकं शुक्लमोदकम् ।।*
*घृतसैन्धवसंस्कारैर्हविष्यैर्व्यञ्जनैस्तथा । यवगोधूमचूर्णानां पिष्टकं घृतसंस्कृतम् ।।*
*पिष्टकं स्वस्तिकस्यापि पक्वरम्भाफलस्य च । परमान्नं च सघृतं मिष्टान्नं च सुधोपमम् ।।*
*नारिकेलं तदुदकं केशरं मूलमार्द्रकम् । पक्वरम्भाफलं चारु श्रीफलं बदरीफलम् ।।*
*कालदेशोद्भवं पक्वफलं शुक्लं सुसंस्कृतम् ।।*
🙏🏻 *ताजा मक्खन, दही, दूध, धान का लावा, तिल के लड्डू, सफेद गन्ना और उसका रस, उसे पकाकर बनाया हुआ गुड़, स्वास्तिक (एक प्रकार का पकवान), शक्कर या मिश्री, सफेद धान का चावल जो टूटा न हो (अक्षत), बिना उबाले हुए धान का चिउड़ा, सफेद लड्डू, घी और सेंधा नमक डालकर तैयार किये गये व्यंजन के साथ शास्त्रोक्त हविष्यान्न, जौ अथवा गेहूँ के आटे से घृत में तले हुए पदार्थ, पके हुए स्वच्छ केले का पिष्टक, उत्तम अन्न को घृत में पकाकर उससे बना हुआ अमृत के समान मधुर मिष्टान्न, नारियल, उसका पानी, कसेरू, मूली, अदरख, पका हुआ केला, बढ़िया बेल, बेर का फल, देश और काल के अनुसार उपलब्ध ऋतुफल तथा अन्य भी पवित्र स्वच्छ वर्ण के फल – ये सब नैवेद्य के समान हैं।*
🌷 *सुगन्धि शुक्लपुष्पं च गन्धाढ्यं शुक्लचन्दनम् । नवीनं शुक्लवस्त्रं च शङ्खं च सुमनोहरम् ।।*
*माल्यं च शुक्लपुष्पाणां मुक्ताहीरादिभूषणम् ।।*
🙏🏻 *सुगन्धित सफेद पुष्प, सफेद स्वच्छ चन्दन तथा नवीन श्वेत वस्त्र और सुन्दर शंख देवी सरस्वती को अर्पण करना चाहिये। श्वेत पुष्पों की माला और श्वेत भूषण भी भगवती को चढ़ावे।*
🙏🏻 *स्मरण शक्ति प्राप्त करने के लिए वसंत पंचमी से शुरू करके प्रतिदिन याज्ञवल्क्य द्वारा रचित भगवती सरस्वती की स्तुति करनी चाहिए।*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🙏🏻🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩
🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞
⛅ *दिनांक – 05 फरवरी 2022*
⛅ *दिन – शनिवार*
⛅ *विक्रम संवत – 2078*
⛅ *शक संवत -1943*
⛅ *अयन – उत्तरायण*
⛅ *ऋतु – शिशिर*
⛅ *मास – माघ*
⛅ *पक्ष – शुक्ल*
⛅ *तिथि – पंचमी 06 फरवरी प्रातः 03:46 तक तत्पश्चात षष्ठी*
⛅ *नक्षत्र – उत्तर भाद्रपद शाम 04:09 तक तत्पश्चात रेवती*
⛅ *योग – सिद्ध शाम 05:42 तक तत्पश्चात साध्य*
⛅ *राहुकाल – सुबह 10:04 से सुबह 11:28 तक*
⛅ *सूर्योदय – 07:15*
⛅ *सूर्यास्त – 18:30*
⛅ *दिशाशूल – पूर्व दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण – बसंत पंचमी- श्री पंचमी, सरस्वती पूजा*
💥 *विशेष – पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
💥 *ब्रह्म पुराण’ के 118 वें अध्याय में शनिदेव कहते हैं- ‘मेरे दिन अर्थात् शनिवार को जो मनुष्य नियमित रूप से पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उनके सब कार्य सिद्ध होंगे तथा मुझसे उनको कोई पीड़ा नहीं होगी। जो शनिवार को प्रातःकाल उठकर पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उन्हें ग्रहजन्य पीड़ा नहीं होगी।’ (ब्रह्म पुराण’)*
💥 *शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय।’ का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है। (ब्रह्म पुराण’)*
*शनिवार के दिन करने योग्य विशेष उपाय* ⤵️
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🌷 *वसंत पंचमी* 🌷
➡ *05 फरवरी 2022 शनिवार को वसंत पंचमी हैं ।*
🙏🏻 *ब्रह्मवैवर्त पुराण तथा देवीभागवत पुराण के अनुसार जो मानव माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन संयमपूर्वक उत्तम भक्ति के साथ षोडशोपचार से भगवती सरस्वती की अर्चना करता है, वह वैकुण्ठ धाम में स्थान पाता है। माघ शुक्ल पंचमी विद्यारम्भ की मुख्य तिथि है। “माघस्य शुक्लपञ्चम्यां विद्यारम्भदिनेऽपि च।”*
🙏🏻 *श्रीकृष्ण ने सरस्वती से कहा था*
🌷 *प्रतिविश्वेषु ते पूजां महतीं ते मुदाऽन्विताः । माघस्य शुक्लपञ्चम्यां विद्यारम्भेषु सुन्दरि ।।*
*मानवा मनवो देवा मुनीन्द्राश्च मुमुक्षवः । सन्तश्च योगिनः सिद्धा नागगन्धर्वकिंनराः ।।*
*मद्वरेण करिष्यन्ति कल्पे कल्पे यथाविधि । भक्तियुक्ताश्च दत्त्वा वै चोपचारांश्च षोडश ।।*
*काण्वशाखोक्तविधिना ध्यानेन स्तवनेन च । जितेन्द्रियाः संयताश्च पुस्तकेषु घटेऽपि च ।।*
*कृत्वा सुवर्णगुटिकां गन्धचन्दन चर्च्चिताम् । कवचं ते ग्रहीष्यन्ति कण्ठे वा दक्षिणे भुजे ।।*
*पठिष्यन्ति च विद्वांसः पूजाकाले च पूजिते । इत्युक्त्वा पूजयामास तां देवीं सर्वपूजितः ।।*
*ततस्तत्पूजनं चक्रुर्ब्रह्मविष्णुमहेश्वराः । अनन्तश्चापि धर्मश्च मुनीन्द्राः सनकादयः ।।*
*सर्वे देवाश्च मनवो नृपा वा मानवादयः । बभूव पूजिता नित्या सर्वलोकैः सरस्वती ।।*
🙏🏻 *“सुन्दरि! प्रत्येक ब्रह्माण्ड में माघ शुक्ल पंचमी के दिन विद्यारम्भ के शुभ अवसर पर बड़े गौरव के साथ तुम्हारी विशाल पूजा होगी। मेरे वर के प्रभाव से आज से लेकर प्रलयपर्यन्त प्रत्येक कल्प में मनुष्य, मनुगण, देवता, मोक्षकामी प्रसिद्ध मुनिगण, वसु, योगी, सिद्ध, नाग, गन्धर्व और राक्षस– सभी बड़ी भक्ति के साथ सोलह प्रकार के उपचारों के द्वारा तुम्हारी पूजा करेंगे। उन संयमशील जितेन्द्रिय पुरुषों के द्वारा कण्वशाखा में कही हुई विधि के अनुसार तुम्हारा ध्यान और पूजन होगा। वे कलश अथवा पुस्तक में तुम्हें आवाहित करेंगे। तुम्हारे कवच को भोजपत्र पर लिखकर उसे सोने की डिब्बी में रख गन्ध एवं चन्दन आदि से सुपूजित करके लोग अपने गले अथवा दाहिनी भुजा में धारण करेंगे। पूजा के पवित्र अवसर पर विद्वान पुरुषों के द्वारा तुम्हारा सम्यक प्रकार से स्तुति-पाठ होगा। इस प्रकार कहकर सर्वपूजित भगवान श्रीकृष्ण ने देवी सरस्वती की पूजा की। तत्पश्चात, ब्रह्मा, विष्णु, शिव, अनन्त, धर्म, मुनीश्वर, सनकगण, देवता, मुनि, राजा और मनुगण– इन सब ने भगवती सरस्वती की आराधना की। तब से ये सरस्वती सम्पूर्ण प्राणियों द्वारा सदा पूजित होने लगीं।*
🙏🏻 *वसन्त पंचमी पर सरस्वती मूल मंत्र की कम से कम 1 माला जप जरूर करना चाहिए।*
➡ *मूल मंत्र : “श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा”*
🙏🏻 *सरस्वती जी का वैदिक अष्टाक्षर मूल मंत्र जिसे भगवान शिव ने कणादमुनि तथा गौतम को, श्रीनारायण ने वाल्मीकि को, ब्रह्मा जी ने भृगु को, भृगुमुनि ने शुक्राचार्य को, कश्यप ने बृहस्पति को दिया था जिसको सिद्ध करने से मनुष्य बृहस्पति के समान हो जाता है ।*
🙏🏻 *सरस्वती पूजा के लिए नैवैद्य (ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार)*
*नवनीतं दधि क्षीरं लाजांश्च तिललड्डुकान् । इक्षुमिक्षुरसं शुक्लवर्णं पक्वगुडं मधु ।।*
*स्वस्तिकं शर्करां शुक्लधान्यस्याक्षतमक्षतम्। अस्विन्नशुक्लधान्यस्य पृथुकं शुक्लमोदकम् ।।*
*घृतसैन्धवसंस्कारैर्हविष्यैर्व्यञ्जनैस्तथा । यवगोधूमचूर्णानां पिष्टकं घृतसंस्कृतम् ।।*
*पिष्टकं स्वस्तिकस्यापि पक्वरम्भाफलस्य च । परमान्नं च सघृतं मिष्टान्नं च सुधोपमम् ।।*
*नारिकेलं तदुदकं केशरं मूलमार्द्रकम् । पक्वरम्भाफलं चारु श्रीफलं बदरीफलम् ।।*
*कालदेशोद्भवं पक्वफलं शुक्लं सुसंस्कृतम् ।।*
🙏🏻 *ताजा मक्खन, दही, दूध, धान का लावा, तिल के लड्डू, सफेद गन्ना और उसका रस, उसे पकाकर बनाया हुआ गुड़, स्वास्तिक (एक प्रकार का पकवान), शक्कर या मिश्री, सफेद धान का चावल जो टूटा न हो (अक्षत), बिना उबाले हुए धान का चिउड़ा, सफेद लड्डू, घी और सेंधा नमक डालकर तैयार किये गये व्यंजन के साथ शास्त्रोक्त हविष्यान्न, जौ अथवा गेहूँ के आटे से घृत में तले हुए पदार्थ, पके हुए स्वच्छ केले का पिष्टक, उत्तम अन्न को घृत में पकाकर उससे बना हुआ अमृत के समान मधुर मिष्टान्न, नारियल, उसका पानी, कसेरू, मूली, अदरख, पका हुआ केला, बढ़िया बेल, बेर का फल, देश और काल के अनुसार उपलब्ध ऋतुफल तथा अन्य भी पवित्र स्वच्छ वर्ण के फल – ये सब नैवेद्य के समान हैं।*
🌷 *सुगन्धि शुक्लपुष्पं च गन्धाढ्यं शुक्लचन्दनम् । नवीनं शुक्लवस्त्रं च शङ्खं च सुमनोहरम् ।।*
*माल्यं च शुक्लपुष्पाणां मुक्ताहीरादिभूषणम् ।।*
🙏🏻 *सुगन्धित सफेद पुष्प, सफेद स्वच्छ चन्दन तथा नवीन श्वेत वस्त्र और सुन्दर शंख देवी सरस्वती को अर्पण करना चाहिये। श्वेत पुष्पों की माला और श्वेत भूषण भी भगवती को चढ़ावे।*
🙏🏻 *स्मरण शक्ति प्राप्त करने के लिए वसंत पंचमी से शुरू करके प्रतिदिन याज्ञवल्क्य द्वारा रचित भगवती सरस्वती की स्तुति करनी चाहिए।*
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*कृषी यांत्रिकीकरण उप अभियान अंतर्गत ड्रोन खरेदीसाठी अनुदान*
नमोन्युजनेशन:- रामवर्मा आसबे
पुणे दि.३: शेती क्षेत्रात ड्रोनच्या वापरास प्रोत्साहन देण्यासाठी कृषी यांत्रिकीकरण उप अभियान अंतर्गत ड्रोन तंत्रज्ञान आधारीत फवारणी प्रात्यक्षिके राबविण्यासाठी कृषी यंत्रे व औजारे तपासणी संस्था, भारतीय कृषी संशोधन परिषदशी संलग्न संस्था (‘आयसीएआर’शी संलग्न संस्था), कृषी विज्ञान केंद्र, शेतकरी उत्पादन संस्था व कृषी विद्यापीठांना ड्रोन खरेदीसाठी अनुदान उपलब्ध करून देण्यात येणार आहे.
राज्यात विभागनिहाय व हंगामनिहाय विविध प्रकारची पिके घेण्यात येतात. पिकांवर येणाऱ्या कीड व रोगाचा प्रादुर्भाव रोखण्यासाठी कीड व रोग नाशकाची फवारणी तसेच वाढीसाठी आवश्यक मूलद्रव्यांची देखील फवारणी करण्यात येते. सद्यस्थितीत मजूराद्वारे अथवा ट्रॅक्टरचलित पंपाद्वारे फवारणी केली जात आहे. यावर ड्रोनद्वारे फवारणीचा पर्याय पुढे आला आहे. शेतकऱ्यांना ड्रोनद्वारे फवारणीच्या सेवा उपलब्ध होण्यासाठी केंद्र शासनाने मार्गदर्शक सूचना निर्गमित केल्या आहेत.
मार्गदर्शक सूचनांनुसार कृषी यंत्रे व औजारे तपासणी संस्था, ‘आयसीएआर’ संलग्न संस्था, कृषी विज्ञान केंद्र, शेतकरी उत्पादन संस्था व विद्यापीठे ही या प्रकारची प्रात्यक्षिके राबवू शकतात. कृषी संशोधन संस्था, कृषी विज्ञान केंद्र, व कृषी विद्यापीठे यांना ड्रोन व त्यांचे भाग खरेदीसाठी १०० टक्के म्हणजेच १० लाख रूपयांचे अनुदान देण्यात येणार आहे. शेतकरी उत्पादक संस्थांना शेतकऱ्यांच्या शेतावर ड्रोन फवारणी प्रात्यक्षिके राबविण्यासाठी ड्रोन खरेदी साठी ७५ टक्के म्हणजेच ७.५० लाख एवढे अनुदान देण्यात येणार आहे.
ड्रोन खरेदी न करता ड्रोन भाड्याने घेऊन प्रात्यक्षिके राबविणाऱ्या सबंधित यंत्रणेला भाडे व अनुषंगिक खर्चासाठी प्रति हेक्टर ६ हजार अनुदान देण्यात येणार आहे. तर ड्रोन खरेदी करून प्रात्यक्षिके राबविणाऱ्या यंत्रणेला किरकोळ खर्चासाठी प्रति हेक्टर ३ हजार रूपये अनुदान देण्यात येणार आहे.
यंत्र औजारे परिक्षण संस्था, कृषी विद्यापीठे, कृषी विज्ञान केंद्र, आयसीएआर संलग्न संस्थांनी त्यांचे प्रस्ताव केंद्र शासनाच्या संबंधित विभागास, तर शेतकरी उत्पादक कंपन्यांनी त्यांचे प्रस्ताव राज्य शासनाच्या कृषी विभागामार्फत ३१ मार्च २०२३ पर्यंत सादर करावेत.
अस्तित्वात असलेल्या सेवा सुविधा केंद्रांना ड्रोनच्या मूळ किंमतीच्या ४० टक्के अथवा ४ लाख अनुदान देण्यात येणार आहे. नव्याने सेवा सुविधा केंद्र स्थापित करू इच्छिणाऱ्या सहकारी संस्था, शेतकरी उत्पादक संस्था किंवा ग्रामीण नवउद्योजक यांना देखील सेवा सुविधा केंद्राच्या यंत्र सामग्रीत ड्रोनचा समावेश करून या योजनेचा लाभ घेता येईल. यासाठी पुढाकार घेणाऱ्या कृषी पदवीधरांना ड्रोन खरेदीसाठी ५० टक्के अथवा ५ लाख रूपये यापैकी कमी असलेले अनुदान देण्यात येणार आहे. अशा प्रकारे सेवा देणाऱ्या सुविधा केंद्रांकडील दर वाजवी असल्याबाबत जिल्हा अधीक्षक कृषि अधिकारी यांच्याद्वारे पर्यवेक्षण करण्यात येईल.
ग्रामीण नव उद्योजक किमान दहावी उत्तीर्ण असावा तसेच त्याच्याकडे डीजीसीए यांनी निर्देशित केलेल्या संस्थेकडील किंवा कोणत्याही प्राधिकृत रिमोट प्रशिक्षण संस्थेकडील रिमोट पायलट परवाना असावा. ड्रोन नियम २०२१ ची पूर्तता तसेच केंद्र शासनाच्या कृषी विभागाने तयार केलेल्या मार्गदर्शक सूचनांचे पालन आवश्यक आहे, असे कृषी विभागाचे संचालक (निविष्ठा व गुणनियंत्रण) दिलीप झेंडे यांनी कळवले आहे.
शिरुर शहर भाजपा आध्यात्मिक आघाडीच्या वतिने महाराष्ट्र सरकारच्या किराणा दुकानात वाईन विक्रीच्या निषेधार्थ शिरुर तहसीलदार कार्यालय येथे निवेदन देण्यात आले*.
*यावेळी भाजपा शहराध्यक्ष नितीनदादा पाचर्णे, कार्याध्यक्ष मितेशभैया गादिया, आध्यात्मिक आघाडी अध्यक्ष बाळु महाराज जोशी,सरचिटणीस विजय नर्के, उपाध्यक्ष निलेशजी नवले,भाजपा शिक्षक आघाडी तालुका अध्यक्ष अशोक शेळके सर,जिल्हाअध्यक्ष अल्पसंख्यांक राजुभाई शेख,उमाकांत मिश्रा,जी.के.मुळे सर,चिटणिस राजेंद्र महाजन, युवामोर्चा अध्यक्ष उमेश शेळके,राजुभाऊ चोंधे इ.पदाधिकारी व कार्यकर्ते उपस्थित होते*.