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सुंदर विचार 104

जीवन को यदि तेजस्वी, सफल और उन्नत बनाना हो तो मनुष्य को त्रिकाल संध्या जरूर करनी चाहिए

*🌻 जो नित्य है वह कारण है और अनित्य है वह कार्य है.. मैं तो नित्य हुँ, शरीर अनित्य है.. इस शरीर के पहले भी मैं था, शरीर के बाद भी मैं रहूँगा.. बचपन में भी मैं था बचपन बदल गया.. जवानी में भी मैं हुँ.. रोग में भी मैं था.. रोग चला गया, मैं तो हुँ.. ऐसे ही मौत आ जाएगी शरीर मर जायेगा, मैं तो रहूँगा ।*

*🌻मन से पार होना हो तो सद्गुरु के आज्ञापालन में, सद्गुरु के अनुसार साधना करने में तत्पर हों ।*

भारताला पहिले सुवर्ण  नेमबाज रुद्रांक्ष, दिव्यांक्ष,ऐश्वर्यसह वर्ल्ड रेकॉर्ड

भारताला पहिले सुवर्ण
नेमबाज रुद्रांक्ष, दिव्यांक्ष,ऐश्वर्यसह वर्ल्ड रेकॉर्ड

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हांगझोउ (चीन) :-भारतीय खेळाडूंनी १९ व्या आशियाई क्रीडा स्पर्धेच्या पहिल्या दिवशी ३ रौप्य व २ कांस्य अशी ५ पदकांची कमाई करून पदकतालिकेत सातवे स्थान पटकावले.नौकानयन स्पर्धेत अनपेक्षित दोन रौप्य व एक कांस्य, तसेच नेमबाजीमध्ये एक रौप्य आणि एक कांस्यपदकं भारतीयांनी जिंकली.सोमवारी नेमबाजीत 10m Men’s Air Rifle प्रकारात भारताने सांघिक गटात सुवर्णपदक जिंकले. दिव्यांश सिंग पनवार, रुद्रांक्ष पाटील आणि ऐश्वर्य तोमर या नेमबाजांनी यांदाच्या आशियाई स्पर्धेतील भारताला पहिले सुवर्णपदक जिंकून दिले. रुद्रांक्षने ६३२.५ गुणांसह आणि ऐश्वर्यने ६३१.६ गुणांसह वैयक्तिक गटाच्या फायनलमध्येही प्रवेश मिळवला.*

*👉🅾️🅾️👉नौकानयनमध्ये पुरुष सिंगल स्कलमध्ये भारताच्या बलराज पनवार याचे ७ सेकंदाच्या फरकाने कांस्यपदक हुंकले. त्याला ७:०८.७९ सेकंदाच्या वेळेसह चौथ्या क्रमांकावर समाधान मानावे लागले.*

*👉🅾️🅾️👉दिव्यांश सिंग पनवार, रुद्रांक्ष पाटील आणि ऐश्वर्य तोमर या भारतीय नेमबाजांना चीन व दक्षिण कोरियाच्या खेळाडूंकडून कडवी टक्कर मिळाली. भारतीय खेळाडूंनी पहिल्या चार फेरीत 313.7, 315.9, 313.7, 315.9 असे गुण घेत कांस्यपदकाच्या शर्यतीत स्वतःला कायम ठेवले होते. पाचव्या फेरीत 308.2 गुणांसह भारतीय नेमबाजांनी थेट सुवर्णपदकासाठी अव्वल स्थानी मुसंडी मारली. या तिघांनी चीनचा ( ३ सप्टेंबर २०१८) १८८७.४ गुणांचा आशियाई स्पर्धा विक्रमही मोडला. अखेरच्या फेरीत त्यांनी 315.8 गुण कमावले अन् चीनचा वर्ल्ड रेकॉर्डही मोडला. चीनने १९ ऑगस्ट २०२३ मध्ये बाकू येथे १८९३.३ गुणांची कमाई करून वर्ल्ड रेकॉर्ड नोंदवला होता.*

*👉🛑🛑👉ठाण्याचा रुद्रांक्ष हा वर्ल्ड चॅम्पियन आहे. त्याने नेमबाजीचा वर्ल्ड कप जिंकला आणि डिसेंबर २०२२ मध्ये १० मीटर एअर रायफल प्रकारात अव्वल स्थान पटकावले. २०२२च्या जागतिक अजिंक्यपद स्पर्धेत १० मीटर एअर रायफल प्रकारात सुवर्ण जिंकून त्याने २०२४च्या पॅरिस ऑलिम्पिकचे तिकीटही जिंकले होते.*

*👉🟥🟥👉पहिल्या दिवसाचे हायलाईट्स*

*नौकानयन स्पर्धेच्या दुहेरी लाइटवेट स्कल्समध्ये अर्जुन लाल जाट आणि अरविंद सिंग यांनी अप्रतिम कामगिरी करत रौप्य पदकाची कमाई केली. पुरुष कॉक्स एट गटातही भारताला रौप्य पदकावर समाधान मानावे लागले. भारतीय संघात नीरज, नरेश कलवानिया, नितीश कुमार, चरणजीत सिंग, जसविंदर सिंग, पुनीत कुमार आणि आशिष यांचा समावेश होता. यानंतर कॉक्सलेस दुहेरी प्रकारात भारताला बाबूलाल यादव-लेख राम यांनी कांस्य जिंकून दिले. नेमबाजीतही भारताने दोन पदकांची कमाई केली. महिला १० मीटर एअर रायफल प्रकारात ज्युनिअर विश्वविजेती रमिताने वैयक्तिक गटात कांस्य पदकाची कमाई केली. भारताच्या रमिता, मेहुली आणि आशी यांनी मिळून महिलांच्या १० मीटर एअर रायफल प्रकारात रौप्य पदक जिंकले.*

आज का हिन्दू पंचांग  दिनांक – 26 सितम्बर 2023 दिन – मंगलवार

आज का हिन्दू पंचांग
दिनांक – 26 सितम्बर 2023
दिन – मंगलवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – शरद*
*⛅मास – भाद्रपद*
*⛅पक्ष – शुक्ल*
*⛅तिथि – एकादशी प्रातः 05:00 तक तत्पश्चात द्वादशी रात्रि 01:45 तक*
*⛅नक्षत्र – श्रवण सुबह 09:42 तक तत्पश्चात धनिष्ठा*
*⛅योग – सुकर्मा सुबह 11:46 तक तत्पश्चात धृति*
*⛅राहु काल – दोपहर 03:32 से 05:02 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:29*
*⛅सूर्यास्त – 06:32*
*⛅दिशा शूल – उत्तर दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:54 से 05:42 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:07 से 12:55 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – पद्मा-परिवर्तिनी एकादशी ( वैष्णव), वामन जयन्ती*
*⛅विशेष – द्वादशी को पूतिका (पोई) खाने से पुत्र का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🌹पद्मा-परिवर्तिनी एकादशी : 26 सितम्बर 2023🌹*

*🔹एकादशी में क्या करें, क्या न करें ?🔹*

*🌹1. एकादशी को लकड़ी का दातुन तथा पेस्ट का उपयोग न करें । नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और उँगली से कंठ शुद्ध कर लें । वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है, अत: स्वयं गिरे हुए पत्ते का सेवन करें ।*

*🌹2. स्नानादि कर के गीता पाठ करें, श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें ।*

*🌹हर एकादशी को श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है ।*
*राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।*
*सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ।।*

*एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से श्री विष्णुसहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l*

*🌹3. `ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ इस द्वादश अक्षर मंत्र अथवा गुरुमंत्र का जप करना चाहिए ।*

*🌹4. चोर, पाखण्डी और दुराचारी मनुष्य से बात नहीं करना चाहिए, यथा संभव मौन रहें ।*

*🌹5. एकादशी के दिन भूल कर भी चावल नहीं खाना चाहिए न ही किसी को खिलाना चाहिए । इस दिन फलाहार अथवा घर में निकाला हुआ फल का रस अथवा दूध या जल पर रहना लाभदायक है ।*

*🌹6. व्रत के (दशमी, एकादशी और द्वादशी) – इन तीन दिनों में काँसे के बर्तन, मांस, प्याज, लहसुन, मसूर, उड़द, चने, कोदो (एक प्रकार का धान), शाक, शहद, तेल और अत्यम्बुपान (अधिक जल का सेवन) – इनका सेवन न करें ।*

*🌹7. फलाहारी को गोभी, गाजर, शलजम, पालक, कुलफा का साग इत्यादि सेवन नहीं करना चाहिए । आम, अंगूर, केला, बादाम, पिस्ता इत्यादि अमृत फलों का सेवन करना चाहिए ।*

*🌹8. जुआ, निद्रा, पान, परायी निन्दा, चुगली, चोरी, हिंसा, मैथुन, क्रोध तथा झूठ, कपटादि अन्य कुकर्मों से नितान्त दूर रहना चाहिए ।*

*🌹9. भूलवश किसी निन्दक से बात हो जाय तो इस दोष को दूर करने के लिए भगवान सूर्य के दर्शन तथा धूप-दीप से श्रीहरि की पूजा कर क्षमा माँग लेनी चाहिए ।*

*🌹10. एकादशी के दिन घर में झाडू नहीं लगायें । इससे चींटी आदि सूक्ष्म जीवों की मृत्यु का भय रहता है ।*

*🌹11. इस दिन बाल नहीं कटायें ।*

*🌹12. इस दिन यथाशक्ति अन्नदान करें किन्तु स्वयं किसीका दिया हुआ अन्न कदापि ग्रहण न करें ।*

*🌹13. एकादशी की रात में भगवान विष्णु के आगे जागरण करना चाहिए (जागरण रात्र 1 बजे तक) ।*

*🌹14. जो श्रीहरि के समीप जागरण करते समय रात में दीपक जलाता है, उसका पुण्य सौ कल्पों में भी नष्ट नहीं होता है ।*

*🔹 इस विधि से व्रत करनेवाला उत्तम फल को प्राप्त करता है ।*

🌞*🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

आज का हिन्दू पंचांग  दिनांक – 26 सितम्बर 2023 दिन – मंगलवार

आज का हिन्दू पंचांग
दिनांक – 26 सितम्बर 2023
दिन – मंगलवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – शरद*
*⛅मास – भाद्रपद*
*⛅पक्ष – शुक्ल*
*⛅तिथि – एकादशी प्रातः 05:00 तक तत्पश्चात द्वादशी रात्रि 01:45 तक*
*⛅नक्षत्र – श्रवण सुबह 09:42 तक तत्पश्चात धनिष्ठा*
*⛅योग – सुकर्मा सुबह 11:46 तक तत्पश्चात धृति*
*⛅राहु काल – दोपहर 03:32 से 05:02 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:29*
*⛅सूर्यास्त – 06:32*
*⛅दिशा शूल – उत्तर दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:54 से 05:42 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:07 से 12:55 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – पद्मा-परिवर्तिनी एकादशी ( वैष्णव), वामन जयन्ती*
*⛅विशेष – द्वादशी को पूतिका (पोई) खाने से पुत्र का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🌹पद्मा-परिवर्तिनी एकादशी : 26 सितम्बर 2023🌹*

*🔹एकादशी में क्या करें, क्या न करें ?🔹*

*🌹1. एकादशी को लकड़ी का दातुन तथा पेस्ट का उपयोग न करें । नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और उँगली से कंठ शुद्ध कर लें । वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है, अत: स्वयं गिरे हुए पत्ते का सेवन करें ।*

*🌹2. स्नानादि कर के गीता पाठ करें, श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें ।*

*🌹हर एकादशी को श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है ।*
*राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।*
*सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ।।*

*एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से श्री विष्णुसहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l*

*🌹3. `ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ इस द्वादश अक्षर मंत्र अथवा गुरुमंत्र का जप करना चाहिए ।*

*🌹4. चोर, पाखण्डी और दुराचारी मनुष्य से बात नहीं करना चाहिए, यथा संभव मौन रहें ।*

*🌹5. एकादशी के दिन भूल कर भी चावल नहीं खाना चाहिए न ही किसी को खिलाना चाहिए । इस दिन फलाहार अथवा घर में निकाला हुआ फल का रस अथवा दूध या जल पर रहना लाभदायक है ।*

*🌹6. व्रत के (दशमी, एकादशी और द्वादशी) – इन तीन दिनों में काँसे के बर्तन, मांस, प्याज, लहसुन, मसूर, उड़द, चने, कोदो (एक प्रकार का धान), शाक, शहद, तेल और अत्यम्बुपान (अधिक जल का सेवन) – इनका सेवन न करें ।*

*🌹7. फलाहारी को गोभी, गाजर, शलजम, पालक, कुलफा का साग इत्यादि सेवन नहीं करना चाहिए । आम, अंगूर, केला, बादाम, पिस्ता इत्यादि अमृत फलों का सेवन करना चाहिए ।*

*🌹8. जुआ, निद्रा, पान, परायी निन्दा, चुगली, चोरी, हिंसा, मैथुन, क्रोध तथा झूठ, कपटादि अन्य कुकर्मों से नितान्त दूर रहना चाहिए ।*

*🌹9. भूलवश किसी निन्दक से बात हो जाय तो इस दोष को दूर करने के लिए भगवान सूर्य के दर्शन तथा धूप-दीप से श्रीहरि की पूजा कर क्षमा माँग लेनी चाहिए ।*

*🌹10. एकादशी के दिन घर में झाडू नहीं लगायें । इससे चींटी आदि सूक्ष्म जीवों की मृत्यु का भय रहता है ।*

*🌹11. इस दिन बाल नहीं कटायें ।*

*🌹12. इस दिन यथाशक्ति अन्नदान करें किन्तु स्वयं किसीका दिया हुआ अन्न कदापि ग्रहण न करें ।*

*🌹13. एकादशी की रात में भगवान विष्णु के आगे जागरण करना चाहिए (जागरण रात्र 1 बजे तक) ।*

*🌹14. जो श्रीहरि के समीप जागरण करते समय रात में दीपक जलाता है, उसका पुण्य सौ कल्पों में भी नष्ट नहीं होता है ।*

*🔹 इस विधि से व्रत करनेवाला उत्तम फल को प्राप्त करता है ।*

🌞*🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

चेतना कॉलेज ऑफ फार्मसी मध्ये फार्मासिस्ट डे उत्साहात साजरा.

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चेतना कॉलेज ऑफ फार्मसी मध्ये फार्मासिस्ट डे उत्साहात साजरा.
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चेतना फाउंडेशन च्या चेतना कॉलेज ऑफ फार्मसी महाविद्यालयात सोमवारी (ता २५) जागतिक फार्मासिस्ट दिवस साजरा करण्यात आला. यावेळी प्रमुख पाहुणे  म्हणून अश्विनी हॉस्पिटल चे तज्ज्ञ डॉ. श्री एम. के. इनामदार उपस्थित राहिले, त्यांनी विद्यार्थ्यांना औषधनिर्माण क्षेत्रात येणारी आव्हाने आणि जबाबदारी यावर मोलाचे मार्गदर्शन केले. तसेच कार्यक्रमाचे अध्यक्षा म्हणून डॉ. सौ. कल्पना खाडे मॅडम उपस्थित होत्या, त्यांनी औषधनिर्माणकर्त्याचे आरोग्य क्षेत्रात असलेले महत्व व सामाजिक जबाबदाऱ्या सांगितल्या. या कार्यक्रमास सत्यशील पाटील, धनंजय रणवरे , गणेश ठोंबरे आणि इंदापूर तालुक्यातील सर्व फार्मासिस्ट यांनीही उपस्थिती दाखवली. तसेच चेतना फाउंडेशन चे अध्यक्ष श्री. उदय देशपांडे, सचिव विलास भोसले सर यांनी विद्यार्थ्यांना फार्मसी किट देऊन शुभेच्छा दिल्या. या कार्यक्रमास उपस्थित असलेल्या सर्व फार्मासिस्ट ने फार्मासिस्ट दिना निमित्त शपथ घेतली व मान्यवरांच्या हस्ते वृक्षारोपण करून या कार्यक्रमाची सांगता झाली. यावेळी सर्व मान्यवर व चेतना इंटरनॅशनल स्कूलच्या प्राचार्या निकिता माने यांनी फार्मासिस्ट डे बद्दल आपले मनोगत व्यक्त केले. कार्यक्रमाचे  प्रास्ताविक संस्थेचे खजिनदार सोमनाथ माने सर यांनी केले व फौजिया पठाण यांनी आभार मानले. सूत्रसंचालन पूजा बनसुडे यांनी केले.

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आज का हिन्दू पंचांग  दिनांक – 24 सितम्बर 2023 दिन – रविवार

आज का हिन्दू पंचांग
दिनांक – 24 सितम्बर 2023
दिन – रविवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – शरद*
*⛅मास – भाद्रपद*
*⛅पक्ष – शुक्ल*
*⛅तिथि – नवमी सुबह 10:23 तक तत्पश्चात दशमी*
*⛅नक्षत्र – पूर्वाषाढ़ा दोपहर 01:42 तक तत्पश्चात उत्तराषाढ़ा*
*⛅योग – शोभन शाम 06:40 तक तत्पश्चात अतिगण्ड*
*⛅राहु काल – शाम 05:04 से 06:34 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:29*
*⛅सूर्यास्त – 06:34*
*⛅दिशा शूल – पश्चिम दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:54 से 05:41 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:08 से 12:56 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – श्री रामदेव पीर नवरात्रि समाप्त*
*⛅विशेष – नवमी को लौकी एवं दशमी को कलम्बी शाक खाना त्याज्य है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🔹त्रिकाल संध्या : (भाग -2)🔹*

*👉 ११] जैसे आत्मज्ञानी महापुरुष का चित्त आकाशवत व्यापक होता है, वैसे ही उत्तम प्रकार से त्रिकाल संध्या और आत्मज्ञान का विचार करनेवाले साधक का चित्त विशाल होंते – होते सर्वव्यापी चिदाकाशमय होने लगता है ।*

*👉 ऐसे महाभाग्यशाली साधक-साधिकाओं के प्राण लोक – लोकांतर में भटकने नहीं जाते । उनके प्राण तो समष्टि प्राण में मिल जाते हैं और वे विदेहमुक्त दशा का अनुभव करते हैं ।*

*👉 १२] जैसे पापी मनुष्य को सर्वत्र अशांति और दुःख ही मिलता है, वैसे ही त्रिकाल संध्या करनेवाले साधक को सर्वत्र शांति, प्रसन्नता, प्रेम तथा आनंद का अनुभव होता है ।*

*👉 १३] जैसे सूर्य को रात्रि की मुलाकात नहीं होती, वैसे ही त्रिकाल संध्या करनेवाले में दुश्चरित्रता टिक नहीं पाती ।*

*👉 १४] जैसे गारुड़ मंत्र से सर्प भाग जाते हैं, वैसे ही गुरुमंत्र से पाप भाग जाते हैं और त्रिकाल संध्या करनेवाले शिष्य के जन्म-जन्मान्तर के कल्मष, पाप – ताप जलकर भस्म हो जाते हैं ।*

*👉 आज के युग में हाथ में जल लेकर सूर्यनारायण को अर्घ्य देने से भी अच्छा साधन मानसिक संध्या करना है । इसलिए जहाँ भी रहें, तीनों समय थोड़े – से जल से आचमन करके त्रिबंध प्राणायाम करते हुए संध्या आरम्भ कर देनी चाहिए तथा प्राणायाम के दौरान अपने इष्टमंत्र, गुरुमंत्र का जप करना चाहिए ।*

*👉 १५] त्रिकाल संध्या व त्रिकाल प्राणायाम करने से थोड़े ही सप्ताह में अंत:करण शुद्ध हो जाता है । प्राणायाम, जप, ध्यान से जिनका अंत:करण शुद्ध हो जाता है उन्हींको ब्रह्मज्ञान का रंग जल्दी लगता है ।*

*🔹 रविवार विशेष🔹*

*🔹 रविवार के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*

*🔹 रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90)*

*🔹 रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75)*

*🔹 रविवार सूर्यदेव का दिन है, इस दिन क्षौर (बाल काटना व दाढ़ी बनवाना) कराने से धन, बुद्धि और धर्म की क्षति होती है ।*

*🔹 रविवार को आँवले का सेवन नहीं करना चाहिए ।*

*🔹 स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए । इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं ।*

*🔹 रविवार के दिन पीपल के पेड़ को स्पर्श करना निषेध है ।*

*🔹 रविवार के दिन तुलसी पत्ता तोड़ना वर्जित है ।*

🌞*🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

आज का हिन्दू पंचांग  दिनांक – 23 सितम्बर 2023 दिन – शनिवार

आज का हिन्दू पंचांग
दिनांक – 23 सितम्बर 2023
दिन – शनिवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – शरद*
*⛅मास – भाद्रपद*
*⛅पक्ष – शुक्ल*
*⛅तिथि – अष्टमी दोपहर 12:17 तक तत्पश्चात नवमी*
*⛅नक्षत्र – मूल दोपहर 03:56 तक तत्पश्चात पूर्वाषाढ़ा*
*⛅योग – सौभाग्य रात्रि 09:31 तक तत्पश्चात शोभन*
*⛅राहु काल – सुबह 09:30 से 11:01 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:28*
*⛅सूर्यास्त – 06:35*
*⛅दिशा शूल – पूर्व दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:54 से 05:41 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:08 से 12:56 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – गौरी-विसर्जन, दधीचि ऋषि जयन्ती, राधाष्टमी*
*⛅विशेष – अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है । नवमी को लौकी खाना त्याज्य है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🔹त्रिकाल संध्या : (भाग -1)🔹*

*🌹त्रिकाल संध्या से होनेवाले लाभों को बताते हुए कहते हैं कि  “त्रिकाल संध्या माने हृदयरूपी घर में तीन बार साफ-सफाई । इससे बहुत फायदा होता है ।*

*🔹त्रिकाल संध्या करने से:–*

*👉 १] अपमृत्यु आदि से रक्षा होती है और कुल में दुष्ट आत्माएँ, माता-पिता को सतानेवाली आत्माएँ नहीं आतीं ।*

*👉 २] किसीके सामने हाथ फैलाने का दिन नहीं आता । रोजी – रोटी की चिंता नहीं सताती ।*

*👉 ३] व्यक्ति का चित्त शीघ्र निर्दोष एवं पवित्र हो जाता है । उसका तन तंदुरुस्त और मन प्रसन्न रहता है  तथा उसमें मंद व तीव्र प्रारब्ध को परिवर्तित करने का सामर्थ्य आ जाता है । वह तरतीव्र प्रारब्ध के उपभोग में सम एवं प्रसन्न रहता है । उसको दुःख, शोक, ‘हाय-हाय’ या चिंता अधिक नहीं दबा सकती ।*

*👉 ४] त्रिकाल संध्या करनेवाली पुण्यशीला बहनें और पुण्यात्मा भाई अपने कुटुम्बियों एवं बच्चों को भी तेजस्विता प्रदान कर सकते हैं ।*

*👉 ५] त्रिकाल संध्या करनेवाले माता – पिता के बच्चे दूसरे बच्चों की अपेक्षा कुछ विशेष योग्यतावाले होने की सम्भावना अधिक होती है ।*

*👉 ६] चित्त आसक्तियों में अधिक नहीं डूबता । उन भाग्यशालियों के संसार-बंधन ढीले पड़ने लगते हैं ।*

*👉 ७] ईश्वर – प्रसाद पचाने का सामर्थ्य आ जाता है ।*

*👉 ८] मन पापों की ओर उन्मुख नहीं होता तथा पुण्यपुंज बढ़ते ही जाते हैं ।*

*👉 ९] ह्रदय और फेफड़े स्वच्छ व शुद्ध होने लगते हैं ।*

*👉 १०] ह्रदय में भगवन्नाम, भगवदभाव अनन्य भाव से प्रकट होता है तथा वह साधक सुलभता से अपने परमेश्वर को, सोऽहम्  स्वभाव को, अपने आत्म-परमात्मरस  को यही अनुभव कर लेता है ।*

*🌹 शनिवार के दिन विशेष प्रयोग 🌹*

*🌹 शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है । (ब्रह्म पुराण)*

*🌹 हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है । (पद्म पुराण)*

*🔹आर्थिक कष्ट निवारण हेतु🔹*

*🔹एक लोटे में जल, दूध, गुड़ और काले तिल मिलाकर हर शनिवार को पीपल के मूल में चढ़ाने तथा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र जपते हुए पीपल की ७ बार परिक्रमा करने से आर्थिक कष्ट दूर होता है ।*

*🌞🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

आज का हिन्दू पंचांग  दिनांक – 23 सितम्बर 2023 दिन – शनिवार

आज का हिन्दू पंचांग
दिनांक – 23 सितम्बर 2023
दिन – शनिवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – शरद*
*⛅मास – भाद्रपद*
*⛅पक्ष – शुक्ल*
*⛅तिथि – अष्टमी दोपहर 12:17 तक तत्पश्चात नवमी*
*⛅नक्षत्र – मूल दोपहर 03:56 तक तत्पश्चात पूर्वाषाढ़ा*
*⛅योग – सौभाग्य रात्रि 09:31 तक तत्पश्चात शोभन*
*⛅राहु काल – सुबह 09:30 से 11:01 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:28*
*⛅सूर्यास्त – 06:35*
*⛅दिशा शूल – पूर्व दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:54 से 05:41 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:08 से 12:56 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – गौरी-विसर्जन, दधीचि ऋषि जयन्ती, राधाष्टमी*
*⛅विशेष – अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है । नवमी को लौकी खाना त्याज्य है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🔹त्रिकाल संध्या : (भाग -1)🔹*

*🌹त्रिकाल संध्या से होनेवाले लाभों को बताते हुए कहते हैं कि  “त्रिकाल संध्या माने हृदयरूपी घर में तीन बार साफ-सफाई । इससे बहुत फायदा होता है ।*

*🔹त्रिकाल संध्या करने से:–*

*👉 १] अपमृत्यु आदि से रक्षा होती है और कुल में दुष्ट आत्माएँ, माता-पिता को सतानेवाली आत्माएँ नहीं आतीं ।*

*👉 २] किसीके सामने हाथ फैलाने का दिन नहीं आता । रोजी – रोटी की चिंता नहीं सताती ।*

*👉 ३] व्यक्ति का चित्त शीघ्र निर्दोष एवं पवित्र हो जाता है । उसका तन तंदुरुस्त और मन प्रसन्न रहता है  तथा उसमें मंद व तीव्र प्रारब्ध को परिवर्तित करने का सामर्थ्य आ जाता है । वह तरतीव्र प्रारब्ध के उपभोग में सम एवं प्रसन्न रहता है । उसको दुःख, शोक, ‘हाय-हाय’ या चिंता अधिक नहीं दबा सकती ।*

*👉 ४] त्रिकाल संध्या करनेवाली पुण्यशीला बहनें और पुण्यात्मा भाई अपने कुटुम्बियों एवं बच्चों को भी तेजस्विता प्रदान कर सकते हैं ।*

*👉 ५] त्रिकाल संध्या करनेवाले माता – पिता के बच्चे दूसरे बच्चों की अपेक्षा कुछ विशेष योग्यतावाले होने की सम्भावना अधिक होती है ।*

*👉 ६] चित्त आसक्तियों में अधिक नहीं डूबता । उन भाग्यशालियों के संसार-बंधन ढीले पड़ने लगते हैं ।*

*👉 ७] ईश्वर – प्रसाद पचाने का सामर्थ्य आ जाता है ।*

*👉 ८] मन पापों की ओर उन्मुख नहीं होता तथा पुण्यपुंज बढ़ते ही जाते हैं ।*

*👉 ९] ह्रदय और फेफड़े स्वच्छ व शुद्ध होने लगते हैं ।*

*👉 १०] ह्रदय में भगवन्नाम, भगवदभाव अनन्य भाव से प्रकट होता है तथा वह साधक सुलभता से अपने परमेश्वर को, सोऽहम्  स्वभाव को, अपने आत्म-परमात्मरस  को यही अनुभव कर लेता है ।*

*🌹 शनिवार के दिन विशेष प्रयोग 🌹*

*🌹 शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है । (ब्रह्म पुराण)*

*🌹 हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है । (पद्म पुराण)*

*🔹आर्थिक कष्ट निवारण हेतु🔹*

*🔹एक लोटे में जल, दूध, गुड़ और काले तिल मिलाकर हर शनिवार को पीपल के मूल में चढ़ाने तथा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र जपते हुए पीपल की ७ बार परिक्रमा करने से आर्थिक कष्ट दूर होता है ।*

*🌞🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 20 सितम्बर 2023 दिन – बुधवार

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 20 सितम्बर 2023 दिन – बुधवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – शरद*
*⛅मास – भाद्रपद*
*⛅पक्ष – शुक्ल*
*⛅तिथि – पंचमी दोपहर 02:16 तक तत्पश्चात षष्ठी*
*⛅नक्षत्र – विशाखा दोपहर 02:59 तक तत्पश्चात अनुराधा*
*⛅योग – विष्कम्भ 21 सितम्बर प्रातः 03:06 तक तत्पश्चात प्रीति*
*⛅राहु काल – दोपहर 12:33 से 02:02 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:28*
*⛅सूर्यास्त – 06:39*
*⛅दिशा शूल – उत्तर दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:53 से 05:40 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:10 से 12:57 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – ऋषि पंचमी, गुरु पंचमी (ओड़िशा), रक्षा पंचमी (बंगाल)*
*⛅विशेष – पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है । षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🌹ऋषि पंचमी : 20 सितम्बर 2023🌹*

*🌹वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह बात सिद्ध हो चुकी है कि मासिक धर्म के दिनों में स्त्री के शरीर से अशुद्ध परमाणु निकलते हैं, उसके मन-प्राण विशेषकर नीचे के केन्द्रों में होते हैं । इसलिए उन दिनों के लिए शास्त्रों में जो व्यवहार्य नियम बताये गये हैं, उनका पालन करने से हमारी उन्नति होती है ।*

*🌹इस व्रत की कथा के अनुसार जिस किसी महिला ने मासिक धर्म के दिनों में शास्त्र-नियमों का पालन नहीं किया हो या अनजाने में ऋषि के दर्शन कर लिये हों या इन दिनों में उनके आगे चली गयी हो तो उस गलती के कारण जो दोष लगता है, उस दोष के निवारण हेतु, इस अपराध के लिए क्षमा माँगने हेतु यह व्रत रखा जाता है ।*

*🌹ऋषि-मुनियों को आर्षद्रष्टा कहते हैं । उन्होंने कितना अध्ययन करने के बाद सब रहस्य बताये हैं ! ऐसे ही नहीं कह दिया है । अभी भी आप अनुभव कर सकते हैं कि जिन दिनों घर की महिलाएँ मासिक धर्म में होती हैं, उन दिनों में प्रायः आपका मन उतना प्रसन्न और उन्नत नहीं रहता जितना और दिनों में रहता है ।*

*🌹जिन घरों में शास्त्रोक्त नियमों का पालन होता है, लोग कुछ संयम से जीते हैं, उन घरों में तेजस्वी संतानें पैदा होती हैं ।*

*🌹व्रत-विधि🌹*

*🌹ऋषि पंचमी का दिन त्यौहार का दिन नहीं है, व्रत का दिन है । आज के दिन हो सके तो अधेड़ा का दातुन करना चाहिए । दाँतों में छिपे हुए कीटाणु आदि निकल जायें और पायरिया जैसी बीमारियाँ नहीं हों तथा दाँत मजबूत हों – इस तरह दाँतों की तंदुरुस्ती का ख्याल रखते हुए यह बात बतायी गयी हो, ऐसा हो सकता है ।*

*🌹इस दिन शरीर पर गाय के गोबर का लेप करके नदी में 108 बार गोते मारने होते हैं । गोबर के लेप से शरीर का मर्दन करते हुए स्नान करने के पीछे रोमकूप खुल जायें, चमड़ी पर से कीटाणु आदि का नाश हो जाय और साथ में एक्युप्रेशर व मसाज भी हो जाय – ऐसा उद्देश्य हो सकता है । 108 बार गोते मारने के पीछे ठंडी, गर्मी या वातावरण की प्रतिकूलता झेलने की जो रोगप्रतिकारक शक्ति शरीर में है, उसे जागृत करने का हेतु भी हो सकता है ।*

*🌹अब आज के जमाने में नदी में जाकर 108 बार गोते मारना सबके लिए तो संभव नहीं है, इसलिए ऐसा आग्रह भी मैं नहीं रखता हूँ, लेकिन स्नान करो तब 108 बार हरिनाम लेकर अपने दिल को तो हरिरस से जरूर नहलाओ ।*

*🌹स्नान के बाद सात कलश स्थापित करके सप्त ऋषियों का आवाहन करते हैं । उन ऋषियों की पत्नियों का स्मरण करके, उनका आवाहन, अर्चन-पूजन करते हैं । जो ब्राह्मण हो, ब्रह्मचिंतन करता हो, उसे सात केले घी-शक्कर मिलाकर देने चाहिए – ऐसा विधान है । अगर कुछ भी देने की शक्ति नहीं है और न दे सकें तो कोई बात नहीं, पर दुबारा ऐसा अपराध नहीं करेंगे यह दृढ़ निश्चय करना चाहिए ।*

*🌹ऋषि पंचमी के दिन बहनें मिर्च, मसाला, घी, तेल, गुड़, शक्कर, दूध नहीं लेतीं । उस दिन लाल वस्त्र का दान करने का विधान है ।*

*🌹आज के दिन सप्तर्षियों को प्रणाम करके प्रार्थना करें कि ‘हमसे कायिक, वाचिक एवं मानसिक जो भी भूलें हो गयी हों, उन्हें क्षमा करना । आज के बाद हमारा जीवन ईश्वर के मार्ग पर शीघ्रता से आगे बढ़े, ऐसी कृपा करना ।’*

*🌹ऋषि पंचमी का यह व्रत हमें ऋषिऋण से मुक्त होने के अवसर की याद दिलाता है । लौकिक दृष्टि से तो यह अपराध के लिए क्षमा माँगने का और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, पर सूक्ष्म दृष्टि से अपने जीवन को ब्रह्मपरायण बनाने का संदेश देता है । ऋषियों की तरह हमारा जीवन भी संयमी, तेजस्वी, दिव्य, ब्रह्मप्राप्ति के लिए पुरुषार्थ करनेवाला हो – ऐसी मंगल कामना करते हुए ऋषियों और ऋषिपत्नियों को मन-ही-मन आदरपूर्वक प्रणाम करते हैं ।*

*🌞🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 20 सितम्बर 2023 दिन – बुधवार

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 20 सितम्बर 2023 दिन – बुधवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – शरद*
*⛅मास – भाद्रपद*
*⛅पक्ष – शुक्ल*
*⛅तिथि – पंचमी दोपहर 02:16 तक तत्पश्चात षष्ठी*
*⛅नक्षत्र – विशाखा दोपहर 02:59 तक तत्पश्चात अनुराधा*
*⛅योग – विष्कम्भ 21 सितम्बर प्रातः 03:06 तक तत्पश्चात प्रीति*
*⛅राहु काल – दोपहर 12:33 से 02:02 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:28*
*⛅सूर्यास्त – 06:39*
*⛅दिशा शूल – उत्तर दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:53 से 05:40 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:10 से 12:57 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – ऋषि पंचमी, गुरु पंचमी (ओड़िशा), रक्षा पंचमी (बंगाल)*
*⛅विशेष – पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है । षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🌹ऋषि पंचमी : 20 सितम्बर 2023🌹*

*🌹वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह बात सिद्ध हो चुकी है कि मासिक धर्म के दिनों में स्त्री के शरीर से अशुद्ध परमाणु निकलते हैं, उसके मन-प्राण विशेषकर नीचे के केन्द्रों में होते हैं । इसलिए उन दिनों के लिए शास्त्रों में जो व्यवहार्य नियम बताये गये हैं, उनका पालन करने से हमारी उन्नति होती है ।*

*🌹इस व्रत की कथा के अनुसार जिस किसी महिला ने मासिक धर्म के दिनों में शास्त्र-नियमों का पालन नहीं किया हो या अनजाने में ऋषि के दर्शन कर लिये हों या इन दिनों में उनके आगे चली गयी हो तो उस गलती के कारण जो दोष लगता है, उस दोष के निवारण हेतु, इस अपराध के लिए क्षमा माँगने हेतु यह व्रत रखा जाता है ।*

*🌹ऋषि-मुनियों को आर्षद्रष्टा कहते हैं । उन्होंने कितना अध्ययन करने के बाद सब रहस्य बताये हैं ! ऐसे ही नहीं कह दिया है । अभी भी आप अनुभव कर सकते हैं कि जिन दिनों घर की महिलाएँ मासिक धर्म में होती हैं, उन दिनों में प्रायः आपका मन उतना प्रसन्न और उन्नत नहीं रहता जितना और दिनों में रहता है ।*

*🌹जिन घरों में शास्त्रोक्त नियमों का पालन होता है, लोग कुछ संयम से जीते हैं, उन घरों में तेजस्वी संतानें पैदा होती हैं ।*

*🌹व्रत-विधि🌹*

*🌹ऋषि पंचमी का दिन त्यौहार का दिन नहीं है, व्रत का दिन है । आज के दिन हो सके तो अधेड़ा का दातुन करना चाहिए । दाँतों में छिपे हुए कीटाणु आदि निकल जायें और पायरिया जैसी बीमारियाँ नहीं हों तथा दाँत मजबूत हों – इस तरह दाँतों की तंदुरुस्ती का ख्याल रखते हुए यह बात बतायी गयी हो, ऐसा हो सकता है ।*

*🌹इस दिन शरीर पर गाय के गोबर का लेप करके नदी में 108 बार गोते मारने होते हैं । गोबर के लेप से शरीर का मर्दन करते हुए स्नान करने के पीछे रोमकूप खुल जायें, चमड़ी पर से कीटाणु आदि का नाश हो जाय और साथ में एक्युप्रेशर व मसाज भी हो जाय – ऐसा उद्देश्य हो सकता है । 108 बार गोते मारने के पीछे ठंडी, गर्मी या वातावरण की प्रतिकूलता झेलने की जो रोगप्रतिकारक शक्ति शरीर में है, उसे जागृत करने का हेतु भी हो सकता है ।*

*🌹अब आज के जमाने में नदी में जाकर 108 बार गोते मारना सबके लिए तो संभव नहीं है, इसलिए ऐसा आग्रह भी मैं नहीं रखता हूँ, लेकिन स्नान करो तब 108 बार हरिनाम लेकर अपने दिल को तो हरिरस से जरूर नहलाओ ।*

*🌹स्नान के बाद सात कलश स्थापित करके सप्त ऋषियों का आवाहन करते हैं । उन ऋषियों की पत्नियों का स्मरण करके, उनका आवाहन, अर्चन-पूजन करते हैं । जो ब्राह्मण हो, ब्रह्मचिंतन करता हो, उसे सात केले घी-शक्कर मिलाकर देने चाहिए – ऐसा विधान है । अगर कुछ भी देने की शक्ति नहीं है और न दे सकें तो कोई बात नहीं, पर दुबारा ऐसा अपराध नहीं करेंगे यह दृढ़ निश्चय करना चाहिए ।*

*🌹ऋषि पंचमी के दिन बहनें मिर्च, मसाला, घी, तेल, गुड़, शक्कर, दूध नहीं लेतीं । उस दिन लाल वस्त्र का दान करने का विधान है ।*

*🌹आज के दिन सप्तर्षियों को प्रणाम करके प्रार्थना करें कि ‘हमसे कायिक, वाचिक एवं मानसिक जो भी भूलें हो गयी हों, उन्हें क्षमा करना । आज के बाद हमारा जीवन ईश्वर के मार्ग पर शीघ्रता से आगे बढ़े, ऐसी कृपा करना ।’*

*🌹ऋषि पंचमी का यह व्रत हमें ऋषिऋण से मुक्त होने के अवसर की याद दिलाता है । लौकिक दृष्टि से तो यह अपराध के लिए क्षमा माँगने का और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, पर सूक्ष्म दृष्टि से अपने जीवन को ब्रह्मपरायण बनाने का संदेश देता है । ऋषियों की तरह हमारा जीवन भी संयमी, तेजस्वी, दिव्य, ब्रह्मप्राप्ति के लिए पुरुषार्थ करनेवाला हो – ऐसी मंगल कामना करते हुए ऋषियों और ऋषिपत्नियों को मन-ही-मन आदरपूर्वक प्रणाम करते हैं ।*

*🌞🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

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