Home Blog Page 109

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 12 अक्टूबर 2023 दिन – गुरुवार

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 12 अक्टूबर 2023 दिन – गुरुवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – शरद*
*⛅मास – आश्विन*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – त्रयोदशी रात्रि 07:53 तक तत्पश्चात चतुर्दशी*
*⛅नक्षत्र – मघा सुबह 08:45 तक तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुनी*
*⛅योग – शुक्ल सुबह 09:30 तक तत्पश्चात ब्रह्म*
*⛅राहु काल – दोपहर 01:54 से 03:22 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:35*
*⛅सूर्यास्त – 06:17*
*⛅दिशा शूल – दक्षिण दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:57 से 05:46 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:02 से 12:51 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – त्रयोदशी का श्राद्ध, मासिक शिवरात्रि*
*⛅विशेष – त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🌹मासिक शिवरात्रि : 12 अक्टूबर 2023*

*🌹जिस तिथि का जो स्वामी हो उस तिथि में उसकी आराधना-उपासना करना अतिशय उत्तम होता है । चतुर्दशी के स्वामी भगवान शिव है । अतः उनकी रात्रि में किया जानेवाला यह व्रत ‘शिवरात्रि’ कहलाता है । प्रत्येक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को रात्रि में गुरु से प्राप्त हुए मंत्र का जप करें । गुरुप्रदत्त मंत्र न हो तो पंचाक्षर (नमः शिवाय) मंत्र के जप से भगवान शिव को संतुष्ट करें ।*

*🌹कर्ज मुक्ति हेतु -*

*🌹हर मासिक शिवरात्रि को सूर्यास्त के समय घर में बैठकर अपने गुरुदेव का स्मरण करके शिवजी का स्मरण करते-करते ये 17 मंत्र बोलें ! जिनके सिर पर कर्जा ज्यादा हो वो शिवजी के मंदिर में जाकर दिया जलाकर ये 17 मंत्र बोलें ! इससे कर्जे से मुक्ति मिलेगी…*

🌹1) *ॐ शिवाय नमः*
🌹2) *ॐ सर्वात्मने नमः*
🌹3) *ॐ त्रिनेत्राय नमः*
🌹4) *ॐ हराय नमः*
🌹5) *ॐ इन्द्रमुखाय नमः*
🌹6) *ॐ श्रीकंठाय नमः*
🌹7) *ॐ सद्योजाताय नमः*
🌹8) *ॐ वामदेवाय नमः*
🌹9) *ॐ अघोरहृदयाय नम:*
🌹10) *ॐ तत्पुरुषाय नमः*
🌹11) *ॐ ईशानाय नमः*
🌹12) *ॐ अनंतधर्माय नमः*
🌹13) *ॐ ज्ञानभूताय नमः*
🌹14) *ॐ अनंतवैराग्यसिंघाय नमः*
🌹15) *ॐ प्रधानाय नमः*
🌹16) *ॐ व्योमात्मने नमः*
🌹17) *ॐ व्यूक्तकेशात्मरूपाय नम:*

*🔹श्राद्ध में प्रशस्त ब्राह्मण🔹*

*🔸श्राद्ध में जिस किसीको भोजन कराने की विधि नहीं है । शील, शौच एवं प्रज्ञा से युक्त सदाचारी तथा सन्ध्या- वन्दन एवं गायत्री मन्त्र का जप करनेवाले श्रोत्रिय ब्राह्मण को श्राद्ध में निमन्त्रण देना चाहिये । तप, धर्म, दया, दान, सत्य, ज्ञान, वेदज्ञान, कारुण्य, विद्या, विनय तथा अस्तेय (अचौर्य) आदि गुणों से युक्त ब्राह्मण इसका अधिकारी है ।*

*🔹प्रशस्त आसन🔹*

*🔸रेशमी, नेपाली कम्बल, ऊन, काष्ठ, तृण, पर्ण, कुश आदि के आसन श्रेष्ठ हैं । काष्ठासनों में भी शमी काश्मरी, शल्ल, कदम्ब, जामुन, आम, मौलसिरी एवं वरुणके आसन श्रेष्ठ हैं । इनमें भी लोहे की कील नहीं होनी चाहिये ।*

*🔸श्राद्ध में भोजन के समय मौन आवश्यक🔸*

*🔹श्राद्ध में भोजन के समय मौन रहना चाहिये । माँगने या प्रतिषेध करने का संकेत हाथ से ही करना चाहिये । भोजन करते समय ब्राह्मण से अन्न कैसा है, यह नहीं पूछना चाहिये तथा भोजन कर्ता को भी श्राद्धान्न की प्रशंसा या निन्दा नहीं करनी चाहिये ।*

*🔸पिण्ड की अष्टांगता🔸*

*🔹अन्न, तिल, जल, दूध, घी, मधु, धूप और दीप-ये पिण्डके आठ अंग हैं ।*

*🔹श्राद्ध में पात्र🔹*

*🔸सोने, चाँदी, काँसे और ताँबेके पात्र पूर्व पूर्व उत्तमोत्तम हैं । इनके अभाव में पलाश आदि अन्य वृक्ष के पत्तल से काम लेना चाहिये, पर केले के पत्ते में श्राद्ध भोजन सर्वथा निषिद्ध है । साथ ही श्राद्ध में पितरों के भोजन के लिये मिट्टी-के पात्रका भी निषेध है ।*

*🔸श्राद्ध में पाद-प्रक्षालन-विधि🔸*

*🔹श्राद्ध में ब्राह्मणों को बैठाकर पैर धोना चाहिये । खड़े होकर पैर धोने पर पितर निराश होकर चले जाते हैं । पत्नी को दाहिनी ओर खड़ा करना चाहिये । उसे बाँयें रहकर जल नहीं गिराना चाहिये । अन्यथा वह श्राद्ध आसुरी हो जाता है और पितरों को प्राप्त नहीं होता ।*

*🌞🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 11 अक्टूबर 2023 दिन – बुधवार

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 11 अक्टूबर 2023 दिन – बुधवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – शरद*
*⛅मास – आश्विन*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – द्वादशी शाम 05:37 तक तत्पश्चात त्रयोदशी*
*⛅नक्षत्र – मघा सुबह 08:45 तक तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुनी*
*⛅योग – शुभ सुबह 08:42 तक तत्पश्चात शुक्ल*
*⛅राहु काल – दोपहर 12:26 से 01:54 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:35*
*⛅सूर्यास्त – 06:18*
*⛅दिशा शूल – उत्तर दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:56 से 05:46 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:02 से 12:51 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – द्वादशी का श्राद्ध, सन्यासी-यति-वैष्णवों का श्राद्ध, प्रदोष व्रत*
*⛅विशेष – द्वादशी को पूतिका (पोई) खाने से पुत्र का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🔹श्राद्ध के अधिकारी कौन है ?🔹*

*🔸पिता का श्राद्ध करने का अधिकार मुख्यरूप से पुत्र को ही है । कई पुत्र होने पर अन्त्येष्टि से लेकर एकादशाह तथा द्वादशाह तक की सभी क्रियाएँ ज्येष्ठ पुत्र को करनी चाहिये । विशेष परिस्थिति में बड़े भाई की आज्ञा से छोटा भाई भी कर सकता है । यदि सभी भाइयों का संयुक्त परिवार हो तो वार्षिक श्राद्ध भी ज्येष्ठ पुत्र के द्वारा एक ही जगह सम्पन्न हो सकता है। यदि पुत्र अलग-अलग हों तो उन्हें वार्षिक आदि श्राद्ध अलग-अलग करना चाहिये ।”*
*🔸विष्णु पुराण के वचन के अनुसार पुत्र, पौत्र, प्रपौत्र, भाई, भतीजा अथवा अपनी सपिण्ड संतति में उत्पन्न हुआ पुरुष ही श्राद्धादि क्रिया करने का अधिकारी होता है ।*
*🔸यदि इन सबका अभाव हो तो समानोदक की संतति अथवा मातृपक्ष के सपिण्ड अथवा समानोदक को इसका अधिकार है । मातृकुल और पितृकुल दोनोंके नष्ट हो जाने पर स्त्री ही इस क्रिया को करे अथवा (यदि स्त्री भी न हो तो) साथियों में से ही कोई करे या बान्धवहीन मृतक के धन से राजा ही उसके सम्पूर्ण प्रेतकर्म कराये ।*
*🔸मार्कण्डेय पुराण ने बताया है कि चूँकि राजा सभी वर्णों का बन्धु होता है । अतः सभी श्राद्धाधिकारी जनों के अभाव होने पर राजा उस मृत व्यक्ति के धन से उसके जाति के बान्धवों द्वारा भली भाँति दाह आदि सभी और्ध्वदैहिक क्रिया कराये ।*

*🔹श्राद्ध में ग्राह्य पुष्प🔹*

*🔸श्राद्ध में मुख्यरूप से सफेद पुष्प ग्राह्य हैं । सफेद में सुगन्धित पुष्प की विशेष महिमा है । मालती, जूही, चम्पा – प्रायः सभी सुगन्धित श्वेत पुष्प, कमल तथा तुलसी और भृंगराज आदि पुष्प प्रशस्त हैं ।*
*स्मृतिसार के अनुसार अगस्त्यपुष्प, भृंगराज, तुलसी, शतपत्रिका, चम्पा, तिलपुष्प – ये छः पितरों को प्रिय होते हैं ।*

*🔹श्राद्धयोग्य स्थान🔹*

*🔸गया, पुष्कर, प्रयाग, कुशावर्त (हरिद्वार) आदि तीर्थों में श्राद्ध की विशेष महिमा है । सामान्यतः घर में गोशाला में, देवालय, गंगा, यमुना, नर्मदा आदि पवित्र नदियों के तटपर श्राद्ध करने का अत्यधिक महत्त्व है । श्राद्ध-स्थान को गोबर-मिट्टी से लेपन कर शुद्ध कर लेना चाहिये । दक्षिण दिशा की ओर ढालवाली श्राद्ध भूमि प्रशस्त मानी गयी है ।*

*🔸श्राद्ध में प्रशस्त अन्न फलादि🔸*

*🔹ब्रह्माजी ने पशुओं की सृष्टि करते समय सबसे पहले गौओं;को रचा है; अतः श्राद्धमें उन्हींका दूध, दही और घी काम में लेना चाहिये । जौ, धान, तिल, गेहूँ, मूँग, साँवाँ, सरसों का तेल, तिन्नी का चावल, कँगनी आदि से पितरों को तृप्त करना चाहिये ।*
*🔸आम, अमड़ा, बेल, अनार, बिजौरा, पुराना आँवला, खीर, नारियल, फालसा, नारंगी, खजूर, अंगूर, नीलकैथ, परवल, चिरौंजी, बेर आदि श्राद्धमें यत्नपूर्वक लेना चाहिये ।”*
*🔸जौ, कँगनी, मूँग, गेहूँ, धान, तिल, मटर, कचनार और सरसों-इनका श्राद्ध में होना अच्छा है ।*

*🔹नींद किस-किसको नहीं आती ?🔹*

*🔸’महाभारत’ में उद्योग पर्व के अन्तर्गत प्रजागर पर्व में आता है कि धृतराष्ट्र को रात्रि में नींद नहीं आती थी । विदुर उन्हें समझाते हैं कि नींद किस-किसको नहीं आती है :*

*अभियुक्तं बलवता दुर्बलं हीनसाधनम् ।*
*हृतस्वं कामिनं चोरमाविशन्ति प्रजागराः ॥*

*🔸’राजन् ! जिसका बलवान के साथ विरोध हो गया है, जो दुर्बल है, जो साधनहीन है, जिसका सब कुछ हर लिया गया है, जो कामी है अथवा जो चोर है उसको रात में नींद नहीं आती ।’ (उद्योग पर्व : ३३.१३)*

*🌞🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

दिल्ली भेटीत मुख्यमंत्र्यांकडून ठाणे रिंग मेट्रो प्रकल्पाचा पाठपुरावा ठाणेकरांच्या वेगवान,सुलभ प्रवासासाठी रिंग मेट्रो प्रकल्प आवश्यक: मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे

img 20231008 wa0043
मुख्यमंत्र्यांनी घेतली केंद्रीय शहरे विकास मंत्री यांची भेट*

मुंबई,दि. ६: वाढते शहरीकरण आणि त्यासाठी आवश्यक पायाभूत सुविधांची उभारणी महाराष्ट्रात वेगाने सुरू आहे. मुंबई सोबतच ठाणेवासियांना देखील वेगवान आणि सुलभ प्रवासासाठी मेट्रो प्रकल्पाची कामे सुरू आहेत. ठाण्याचा वाढता विस्तार लक्षात घेऊन ‘ठाणे रिंग मेट्रो प्रकल्प’ काळाची गरज असल्याचा मुद्दा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे यांनी आज केंद्रीय शहरे विकासमंत्र्यांसमोर मांडला.

नवी दिल्ली येथे केंद्रीय गृह मंत्रालयाने आयोजित केलेल्या बैठकीसाठी आलेल्या मुख्यमंत्र्यांनी महाराष्ट्राच्या पायाभूत सुविधा प्रकल्पांसाठी केंद्रीय शहरे विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी यांची भेट घेतली. सामान्य नागरिकांना सार्वजनिक दळणवळणाची सुविधा आरामदायी आणि गतिमान आवश्यक आहे या तळमळीतून मुख्यमंत्री श्री. शिंदे आज दिल्ली भेटीत त्यांनी ठाणेकरांसाठी रिंग मेट्रो प्रकल्प किती गरजेचा आहे, हे सांगितले.

याभेटीत महाराष्ट्राच्या नागरी भागातील विविध मूलभूत आणि पायाभूत सुविधा प्रकल्पांबाबत चर्चा करण्यात आली. ठाणे रिंग मेट्रो प्रकल्पाचा पाठपुरावा करताना मेट्रो कोचची संख्या वाढवावी अशी मागणी देखील मुख्यमंत्र्यांनी यावेळी केली.

विज्ञान भवनातील डाव्या विचारसरणीमुळे निर्माण झालेल्या उग्रवादाच्या परिस्थितीबाबतची बैठक आटोपून मुख्यमंत्री श्री. शिंदे लगेचच केंद्रीय शहरे विकास मंत्री श्री. पुरी यांची भेट घेतली. त्यांच्यासमवेत मुख्यमंत्र्यांचे प्रधान सचिव ब्रिजेश सिंह, महामेट्रोचे व्यवस्थापकीय संचालक श्रावण हर्डीकर उपस्थित होते.

महाराष्ट्रात सुरू असलेल्या विविध विकास प्रकल्पांना केंद्र शासनाचे सहकार्य लाभत आहे. त्यामुळे हे प्रकल्प वेळेत पूर्ण करण्यासाठी आम्ही प्रयत्नशील असल्याचे मुख्यमंत्र्यांनी यावेळी सांगितले.

या भेटीत मुख्यमंत्र्यांची केंद्रीय मंत्र्यांसमवेत ठाणे मेट्रोविषयी सविस्तर चर्चा झाली. ठाणे शहरात सध्या दोन मेट्रो प्रकल्पांचे काम सुरू आहे. शहराचा विस्तार होत असून तसेच शहर-जिल्ह्याची लोकसंख्या वाढत आहे. ठाण्यातील एकाच रेल्वे स्थानकावरुन ७ ते ८ लाख प्रवाशांची वर्दळ आहे. त्यामुळे २९ किमी लांबीचा ठाणे रिंग मेट्रोचा सविस्तर प्रकल्प अहवाल मान्यतेसाठी केंद्राला सादर केला असून त्याला मान्यता द्यावी, अशी मागणी करतानाच मेट्रो कोचची संख्या वाढविण्याची विनंतीही मुख्यमंत्र्यांनी यावेळी केली.

सद्यस्थितीत आणि भविष्याच्या दृष्टीने मेट्रो कोच वाढविणे आवश्यक आहे. रिंग मेट्रोच्या प्रकल्प अहवालाला मान्यता देतानाच मेट्रो कोचची संख्या वाढवावी या मुख्यमंत्र्यांनी केलेल्या मागणीवर केंद्रीय मंत्र्यांनी सकारात्मक निर्णय घेण्यात येईल, अशी ग्वाही दिली. महाराष्ट्रातील नागरी भागात सुरु असलेल्या विविध प्रकल्पांविषयी यावेळी चर्चा करण्यात आली.

*असा आहे ठाणे रिंग मेट्रो प्रकल्प-*
एकूण २९ किमी लांबीच्या या प्रकल्पात २६ किमी लांबीचा मार्ग हा इलेव्हेटेड असून ३ किमीचा मार्ग हा भूमिगत आहे. प्रकल्पांर्गत एकूण २२ स्थानके असून त्यातील दोन स्थानके भूमिगत असणार आहेत. त्यातील एक भूमिगत स्थानक ठाणे रेल्वे स्थानकाला जोडले जाणार आहे. अन्य स्थानके शहरातील मेट्रो कॉरिडॉरला जोडली जाणार आहेत.

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे यांच्याकडून गोरेगावच्या आग दुर्घटनेतील जखमींची विचारपूस

img 20231008 wa0032
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे यांच्याकडून गोरेगावच्या आग दुर्घटनेतील जखमींची विचारपूस

*जखमींना दिला धीर, घटनास्थळाची पाहणी*

मुंबई, दि. ६:- गोरेगाव उन्नत नगर येथील जय भवानी एसआरए इमारतीतील आगीत जखमी झालेल्या नागरिकांची मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे यांनी हिंदुहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे ट्रॉमा केअर सेंटर येथे भेट घेऊन विचारपूस केली. तसेच या दुर्घटनेची चौकशी केली जाईल. त्या अहवालानंतर पुढील कारवाई करण्यात येईल, असे ही मुख्यमंत्र्यांनी माध्यम प्रतिनिधींना सांगितले.

नवी दिल्लीतून दौरा आटोपून मुंबईत पोहचताच मुख्यमंत्री श्री. शिंदे विमानतळावरून थेट हिंदुहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे ट्रॉमा केअर सेंटर येथे पोहचले. तेथून त्यांनी गोरेगाव येथील घटनास्थळीही भेट देऊन पाहणी केली. स्थानिकांशी संवाद साधत, त्यांना दिलासा दिला.

‘एसआरएच्या अशा इमारतींचे फायर ऑडिट करण्याचे निर्देश दिले आहेत. जेणेकरून अशा घटना घडू नयेत याची काळजी घेता येईल. यासाठी एक विशेष अधिकारी नियुक्त केला जाईल. इमारतींचे सर्वेक्षण केले जाईल. अधिकारी इमारतींचे ट्रक्चरल ऑडिट, इलेक्ट्रिक ऑडिट करतील, असे मुख्यमंत्र्यांनी माध्यम प्रतिनिधींना सांगितले.

यावेळी खासदार गजानन किर्तीकर, मुंबई महापालिका प्रशासक तथा आयुक्त डॉ. आय. एस. चहल तसेच वैद्यकीय अधिकारी आदी उपस्थित होते.

तत्पुर्वी, सकाळीच मुख्यमंत्री श्री. शिंदे यांनी नवी दिल्ली येथून या घटनेची माहिती घेऊन, दुर्घटनेतील मृत व त्यांच्या कुटुंबियांच्याप्रति सहवेदना प्रकट केली होती. तसेच मृतांच्या कुटुंबियांना पाच लाख रुपयांची मदत जाहीर केली होती. तसेच जखमींवरील उपचाराचा खर्च शासनाकडून करण्यात यावा,असेही निर्देश दिले होते.

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे यांच्याकडून गोरेगावच्या आग दुर्घटनेतील जखमींची विचारपूस

img 20231008 wa0032
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे यांच्याकडून गोरेगावच्या आग दुर्घटनेतील जखमींची विचारपूस

*जखमींना दिला धीर, घटनास्थळाची पाहणी*

मुंबई, दि. ६:- गोरेगाव उन्नत नगर येथील जय भवानी एसआरए इमारतीतील आगीत जखमी झालेल्या नागरिकांची मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे यांनी हिंदुहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे ट्रॉमा केअर सेंटर येथे भेट घेऊन विचारपूस केली. तसेच या दुर्घटनेची चौकशी केली जाईल. त्या अहवालानंतर पुढील कारवाई करण्यात येईल, असे ही मुख्यमंत्र्यांनी माध्यम प्रतिनिधींना सांगितले.

नवी दिल्लीतून दौरा आटोपून मुंबईत पोहचताच मुख्यमंत्री श्री. शिंदे विमानतळावरून थेट हिंदुहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे ट्रॉमा केअर सेंटर येथे पोहचले. तेथून त्यांनी गोरेगाव येथील घटनास्थळीही भेट देऊन पाहणी केली. स्थानिकांशी संवाद साधत, त्यांना दिलासा दिला.

‘एसआरएच्या अशा इमारतींचे फायर ऑडिट करण्याचे निर्देश दिले आहेत. जेणेकरून अशा घटना घडू नयेत याची काळजी घेता येईल. यासाठी एक विशेष अधिकारी नियुक्त केला जाईल. इमारतींचे सर्वेक्षण केले जाईल. अधिकारी इमारतींचे ट्रक्चरल ऑडिट, इलेक्ट्रिक ऑडिट करतील, असे मुख्यमंत्र्यांनी माध्यम प्रतिनिधींना सांगितले.

यावेळी खासदार गजानन किर्तीकर, मुंबई महापालिका प्रशासक तथा आयुक्त डॉ. आय. एस. चहल तसेच वैद्यकीय अधिकारी आदी उपस्थित होते.

तत्पुर्वी, सकाळीच मुख्यमंत्री श्री. शिंदे यांनी नवी दिल्ली येथून या घटनेची माहिती घेऊन, दुर्घटनेतील मृत व त्यांच्या कुटुंबियांच्याप्रति सहवेदना प्रकट केली होती. तसेच मृतांच्या कुटुंबियांना पाच लाख रुपयांची मदत जाहीर केली होती. तसेच जखमींवरील उपचाराचा खर्च शासनाकडून करण्यात यावा,असेही निर्देश दिले होते.

महाज्योती महात्मा ज्योतिबा फुले व सावित्रीबाई फुले यांचे एकत्रित महावाङ्मय प्रकाशित करणार – मंत्री अतुल सावे

महाज्योती महात्मा ज्योतिबा फुले व सावित्रीबाई फुले यांचे एकत्रित महावाङ्मय प्रकाशित करणार – मंत्री अतुल सावे

पुणे, दि. ६: क्रांतीसूर्य महात्मा ज्योतिबा फुले व ज्ञानज्योती सावित्रीबाई फुले यांच्या विचार आणि कार्याची माहिती साहित्यरुपाने जनसामान्यांना सहज उपलब्ध होण्याच्यादृष्टीने महाज्योतीच्यावतीने महात्मा ज्योतिबा फुले व सावित्रीबाई फुले यांचे एकत्रित महावाङ्मय प्रकाशित करण्यात येईल, अशी घोषणा इतर मागास बहुजन कल्याण मंत्री अतुल सावे यांनी केली.

महात्मा ज्योतिबा फुले संशोधन व प्रशिक्षण संस्था (महाज्योती) नागपूर येथील मंडळाच्या आयोजित बैठकीत ते बोलत होते. या बैठकीत महाज्योतीचे व्यवस्थापकीय संचालक राजेश खवले, इतर मागास बहुजन कल्याण विभागाचे संचालक प्रवीण देवरे प्रकल्प व्यवस्थापक कुणाल शिरसाठे व इतर अधिकारी उपस्थित होते.

मंत्री श्री. सावे यांच्या अध्यक्षतेखाली पार पडलेल्या बैठकीत महात्मा ज्योतिबा फुले व सावित्रीबाई फुले यांचे एकत्रित महावाङ्मय प्रकाशित करण्याचा ठराव संमत करण्यात आला. ज्ञानज्योती सावित्रीबाई फुले यांचे जन्मगाव असलेल्या मौजे नायगाव, ता. खंडाळा, जि. सातारा येथे ज्ञानज्योती सावित्रीबाई फुले यांच्या जन्मदिनानिमित्त विविध शैक्षणिक उपक्रम व कार्यक्रम राबविण्यासाठी १० लाख रुपये इतका निधी मंजूर करण्यात आला. याशिवाय सारथीच्या धर्तीवर महाज्योतीच्या लाभार्थ्यांनादेखील समान लाभ देण्याबाबत संचालक मंडळाच्या बैठकीत चर्चा झाली.

श्री. सावे यांच्या हस्ते महात्मा ज्योतिबा फुले व सावित्रीबाई फुले यांच्या एकत्रित समग्र वाङ्मयाच्या मुखपृष्ठाचे प्रकाशन करण्यात करण्यात आले. महाज्योतीच्या जेईई/नीट/एमएचटी-सीईटी योजनेतील विद्यार्थ्यांना टॅब व सीमचे आणि कौशल्य विकास प्रशिक्षणात सहभागी झालेल्या विद्यार्थ्यांना रोजगार पत्राचे वाटपही यावेळी करण्यात आले.
0000

राष्ट्रपती भवन दिल्ली, होळकरांनी दान केलेल्या जमिनीवर भारताचे राष्ट्रपती भवन उभे आहे.

राष्ट्रपती भवन दिल्ली, होळकरांनी दान केलेल्या जमिनीवर भारताचे राष्ट्रपती भवन उभे आहे.
मराठा साम्राज्याच्या अनेक वीरांनी छत्रपती शिवरायांची कीर्ती देशभर गाजवली. एक काळ असा होता उत्तर असो कि दक्षिण सारा प्रदेश मराठी घोड्यांच्या टापाखाली होता. राघोबादादा आणि मल्हारराव होळकर यांच्या सेनेने अटकेपार पेशावर पर्यंत भगवा झेंडा फडकवला होता. नागपुरच्या भोसलेंची दहशत बंगालपर्यंत पसरली होती तर महादजी शिंदेनी दिल्लीच्या लाल किल्ल्यावर आपली हुकुमत स्थापन केली होती. ज्या वेगवेगळ्या सरदार घराण्यांनी मराठी सत्तेला महाराष्ट्राबाहेर नेल त्यातील प्रमुख नाव म्हणजे इंदूरचे होळकर घराणे.
महापराक्रमी मल्हारराव होळकरांनी माळवा प्रांतात स्थापन केलेलं हे घराण पुढे त्यांच्या सुनबाई पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होळकरांच्या परोपकारी राज्यकारभारामुळे पूर्ण देशात आदर्शवत ठरलं. अहिल्याबाईंनी आपल्या राज्यात अस्पृश्यता बंदी, हुंडा बंदी, सतीप्रथेला विरोध, आंतरजातीय विवाह असे अनेक प्रयोग केले. संपूर्ण माळवा प्रांतात रस्ते बांधले. देशभर मंदिरे बांधली, नदीवर घाट उभे केले. अहिल्यादेवींचे राज्य म्हणजे कायद्याचे राज्य होते आणि त्यामुळे त्या काळात जनतेची भरभराट झाली.
पुढे यशवंतराव होळकरांच्या नेतृत्वाखाली परत देशभर होळकरांची घोडी दौडू लागली. इंग्रजांच्या तावडीतून मुघल बादशाहाला परत सत्तेत आणायचे प्रयत्न झाले. असं म्हणतात कि प्रकृतीने साथ दिली असती तर यशवंतराव होळकरांनी ब्रिटीशांना भारतातून हाकलून लावले असते.
अशा या पराक्रमी होळकर घराण्यामध्ये १९०३ साली सत्तेत आलेले सवाई तुकोजीराव होळकर तिसरे. अल्पवयीन असल्यामुळे सुरवातीला ब्रिटीश रिजंटच्या देखरेखीखाली त्यांनी सुरवातीची काही वर्ष राज्यकारभार हाकला. यांच्या कारकिर्दीत राज्याच्या विकासाची अनेक कामे करण्यात आली. त्यांनी बनारस हिंदू विश्वविद्यालयापासून ते अलिगढ विद्यापीठ, पुण्याच्या छत्रपती शिवाजी महाराज स्मारकापासून ते अस्पृश्योद्धार समिती पर्यंत अनेक ठिकाणी लाखो रुपयांची देणगी दिली ज्याची आजच्या काळात किंमत अब्जावधीमध्ये असेल. एवढच नाही तर मध्यप्रदेशात रेल्वे यावी यासाठी इंदूरच्या होळकर घराण्याच्या या महाराजाने ब्रिटीश सरकारला कर्जपुरवठा केला होता.
१९१० साली तुकोजीराव होळकर यांनी पहिल्यांदा युरोप दौरा केला. लंडनमधील वास्तव्यात असताना त्यांचे ब्रिटीश साम्राज्याचे नवनिर्वाचित सम्राट किंग जॉर्ज पंचम आणि त्यांच्या पत्नी क्विन मेरी यांची अनेकदा भेट झाली. दोघांच्यात चांगला संवाद स्थापन झाला. भारताचा एक तरूण राजा निम्म्या जगावर राज्य करणाऱ्या सम्राटाशी मित्रत्वाचे संबंध प्रस्थापित करतो हे एक नवलच समजल जात होत.
नोव्हेंबर १९११मध्ये तुकोजीरावांनी इंदूरचं राज्य अधिकृत रित्या आपल्या ताब्यात घेतल, त्यांचा राज्याभिषेक झाला. पुढच्याच महिन्यात पंचम जॉर्ज भारतात येणार होते. दिल्लीमध्ये आयोजित केलेल्या भव्य दरबारात *कैसर ए हिंद* अर्थात भारताचा सम्राट हा राज्याभिषेक करण्यात येणार होता.
१२ डिसेंबर १९११ रोजी हा दरबार भरला. संपूर्ण देशातून राजेमहाराजे गोळा झाले होते. मोठमोठे नजराणे घेऊन सम्राटाची भेट घेतली जात होती. सगळ्या राजांची बसण्यासाठी त्यांच्या संस्थानच्या मह्त्वानुसार व्यवस्था करण्यात आली होती, यात इंदूरच्या तुकोजीराजे होळकरांच विशेष स्थान होतं. या दरबारात पंचम जॉर्जनी भली मोठी घोषणा केली, *भारताची राजधानी कलकत्त्याहून दिल्लीला हलवण्यात येणार.* तोपर्यत इंग्रजांची भारतातली राजधानी कलकत्ता होती. भारताच्या मध्यवर्ती असलेल्या पुरातन काळापासून देशाची राजधानी असणाऱ्या दिल्लीला राजधानी हलवायची घोषणा तर केली पण तिथे आवश्यक सुखसोई उभा करणे गरजेचे होते. मग ठरलं नवी दिल्ली नावाची नवी राजधानीच वसवायची. ही जबाबदारी देण्यात आली लॉर्ड ल्युटन्स यांच्याकडे. त्याने भारताच्या संसदभवनापासून ते इंडिया गेट पर्यंत अनेक गोष्टी बांधल्या. यात सर्वात महत्वाची वास्तू होती, व्हाईसरॉयचा बंगला. एका अर्थे भारताचा मुख्यराजवाडा. इथे राहूनच व्हाईसरॉय अख्ख्या देशाचा राज्यकारभार हाकणार होता.
याचे ठिकाण नेमके कोणते असावे यावरून बरीच चर्चा झाली. तुघलकाबाद आणखी काही ठिकाणे विचारात घेतली होती पण ल्युटन्सला मुघलांच्या जुन्या दिल्लीच्या जवळच उभी असलेली रायसिनाची टेकडी.
असं सांगितल जातं की होळकरांची रायसिना गावात प्रॉपर्टी होती, त्यांनी ती पंचम जॉर्जच्या शब्दाखातर व्हाईरॉयचा बंगला बांधण्यासाठी देऊन टाकली. जवळपास सतरा वर्ष या बंगल्याच काम सुरु होतं. पहिलं महायुद्ध आणखी बर्याच कारणांनी बांधकाम रखडल होतं. पण ल्युटन्सने कोणतीही हयगय होऊ दिली नाही. १९३१ साली हा राजवाडा बांधून तयार झाला.
*पुढे स्वातंत्र्यानंतर सी. राजगोपालाचारी हे पहिले भारतीय तिथे राहायला गेले. २६ जानेवारी १९५० रोजी राजेंद्रप्रसाद भारताचे पहिले राष्ट्रपती बनले आणि या बंगल्याचे नामकरण करण्यात आले राष्ट्रपती भवन. तुकोजी होळकरांच्या इस्टेटीवर भारताचा अभिमान असलेल राष्ट्रपती भवन उभ आहेच पण असंही सांगतात की प्रजासत्ताक दिनादिवशी राष्ट्रपती भवनावरती राष्ट्रपतींच्या आगमन प्रसंगी प्रथम येणारे घोडदळ जो झेंडा डौलाने मिरवत आणतात तो होळकरांचा राजेशाही झेंडा आहे.*
*ही फक्त तुकोजीरावांची किंवा होळकरांची नाही तर संपूर्ण महाराष्ट्र गौरवाची आणि अभिमानाची गोष्ट आहे.*
🇮🇳🚩🚩🏳️🚩🚩🇳🇱

पीक विमा कंपन्यांची मुख्यमंत्र्यांनी घेतली बैठक नुकसानग्रस्त शेतकऱ्यांना संवेदनशीलपणे मदत करावी मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे यांचे विमा कंपन्यांना निर्देश

पीक विमा कंपन्यांची मुख्यमंत्र्यांनी घेतली बैठक

नुकसानग्रस्त शेतकऱ्यांना संवेदनशीलपणे मदत करावी

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे यांचे विमा कंपन्यांना निर्देश

मुंबई, दि. ४ :- राज्यातील नुकसानग्रस्त शेतकऱ्यांना पीक विमा योजनेतून नुकसान भरपाई देताना कंपन्यांनी संवेदनशीलपणे आणि सकारात्मक भावनेने मदत करावी, असे निर्देश मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे यांनी विमा कंपन्यांना दिले.

वर्षा निवासस्थानी प्रधानमंत्री पीक विमा योजनेच्या खरीप हंगाम अंमलबजावणीबाबत आढावा बैठक मुख्यमंत्र्यांच्या अध्यक्षतेखाली झाली. कृषीमंत्री धनंजय मुंडे, सार्वजनिक बांधकाम मंत्री दादाजी भुसे, मदत व पुनर्वसन मंत्री अनिल पाटील, मुख्य सचिव मनोज सौनिक, कृषी विभागाचे अपर मुख्य सचिव अनुपकुमार, कृषी आयुक्त सुनिल चव्हाण यांच्यासह विमा कंपन्यांचे प्रतिनिधी उपस्थित होते.

मुख्यमंत्री श्री. शिंदे यावेळी म्हणाले, ऑगस्टमध्ये पावसाने ओढ दिल्याने राज्यातील शेतकरी बांधव त्रस्त आहे. त्याला दिलासा देण्यासाठी राज्य शासन खंबीरपणे पाठीशी उभे आहे. विमा कंपन्यांनी देखील याकाळात नुकसानग्रस्त शेतकऱ्यांच्या पाठीशी उभे राहिले पाहिजे. त्यामुळे शेतकरी संकटात असताना त्याला मदत करण्याची भूमिका संवेदनशीलपणे आणि सकारात्मक भावनेने घ्यावी, असे मुख्यमंत्र्यांनी यावेळी सांगितले.

बळीराजाला दिलासा म्हणून राज्य शासनाने एक रुपयामध्ये पीक विमा योजना सुरू केली आहे. अशी विमा योजना सुरू करणारे महाराष्ट्र पहिले राज्य असल्याचे सांगत विम्यापोटी शेतकऱ्यांनी भरायचा हिस्सा राज्य शासन अदा करत आहे. यामागची शासनाची भूमिका विमा कंपन्यांनी समजून घेतली पाहिजे. विमा कंपन्यांनी प्रस्तावांवर जे आक्षेप घेतले आहेत. ते जिल्हाधिकाऱ्यांनी वस्तुनिष्ठ पद्धतीने तपासून घ्यावेत, असेही मुख्यमंत्र्यांनी सांगितले.

विमा कंपन्यांनी शेतकऱ्यांना वेळेवर मदत करावी, असे मंत्री श्री. मुंडे, श्री. भुसे यांनी यावेळी सांगितले. खरीप २०२३ मध्ये प्रधानमंत्री पिकविमा योजनेसाठी १ कोटी ७० लाख अर्ज प्राप्त झाले आहेत. ११३ लाख हेक्टर क्षेत्र विमा संरक्षित आहे. ओरिएन्टल इन्शुरन्स, आयसीआयसीआय लोम्बार्ड, युनिव्हर्सल सोम्पो, युनायटेड इंडिया, चोलामंडलम एम एस., भारतीय कृषी विमा कंपनी, एचडीएफसी एगो, रिलायन्स जनरल या विमा कंपन्या राज्यात कार्यरत आहेत.

पीक विमा कंपन्यांची मुख्यमंत्र्यांनी घेतली बैठक नुकसानग्रस्त शेतकऱ्यांना संवेदनशीलपणे मदत करावी मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे यांचे विमा कंपन्यांना निर्देश

पीक विमा कंपन्यांची मुख्यमंत्र्यांनी घेतली बैठक

नुकसानग्रस्त शेतकऱ्यांना संवेदनशीलपणे मदत करावी

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे यांचे विमा कंपन्यांना निर्देश

मुंबई, दि. ४ :- राज्यातील नुकसानग्रस्त शेतकऱ्यांना पीक विमा योजनेतून नुकसान भरपाई देताना कंपन्यांनी संवेदनशीलपणे आणि सकारात्मक भावनेने मदत करावी, असे निर्देश मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे यांनी विमा कंपन्यांना दिले.

वर्षा निवासस्थानी प्रधानमंत्री पीक विमा योजनेच्या खरीप हंगाम अंमलबजावणीबाबत आढावा बैठक मुख्यमंत्र्यांच्या अध्यक्षतेखाली झाली. कृषीमंत्री धनंजय मुंडे, सार्वजनिक बांधकाम मंत्री दादाजी भुसे, मदत व पुनर्वसन मंत्री अनिल पाटील, मुख्य सचिव मनोज सौनिक, कृषी विभागाचे अपर मुख्य सचिव अनुपकुमार, कृषी आयुक्त सुनिल चव्हाण यांच्यासह विमा कंपन्यांचे प्रतिनिधी उपस्थित होते.

मुख्यमंत्री श्री. शिंदे यावेळी म्हणाले, ऑगस्टमध्ये पावसाने ओढ दिल्याने राज्यातील शेतकरी बांधव त्रस्त आहे. त्याला दिलासा देण्यासाठी राज्य शासन खंबीरपणे पाठीशी उभे आहे. विमा कंपन्यांनी देखील याकाळात नुकसानग्रस्त शेतकऱ्यांच्या पाठीशी उभे राहिले पाहिजे. त्यामुळे शेतकरी संकटात असताना त्याला मदत करण्याची भूमिका संवेदनशीलपणे आणि सकारात्मक भावनेने घ्यावी, असे मुख्यमंत्र्यांनी यावेळी सांगितले.

बळीराजाला दिलासा म्हणून राज्य शासनाने एक रुपयामध्ये पीक विमा योजना सुरू केली आहे. अशी विमा योजना सुरू करणारे महाराष्ट्र पहिले राज्य असल्याचे सांगत विम्यापोटी शेतकऱ्यांनी भरायचा हिस्सा राज्य शासन अदा करत आहे. यामागची शासनाची भूमिका विमा कंपन्यांनी समजून घेतली पाहिजे. विमा कंपन्यांनी प्रस्तावांवर जे आक्षेप घेतले आहेत. ते जिल्हाधिकाऱ्यांनी वस्तुनिष्ठ पद्धतीने तपासून घ्यावेत, असेही मुख्यमंत्र्यांनी सांगितले.

विमा कंपन्यांनी शेतकऱ्यांना वेळेवर मदत करावी, असे मंत्री श्री. मुंडे, श्री. भुसे यांनी यावेळी सांगितले. खरीप २०२३ मध्ये प्रधानमंत्री पिकविमा योजनेसाठी १ कोटी ७० लाख अर्ज प्राप्त झाले आहेत. ११३ लाख हेक्टर क्षेत्र विमा संरक्षित आहे. ओरिएन्टल इन्शुरन्स, आयसीआयसीआय लोम्बार्ड, युनिव्हर्सल सोम्पो, युनायटेड इंडिया, चोलामंडलम एम एस., भारतीय कृषी विमा कंपनी, एचडीएफसी एगो, रिलायन्स जनरल या विमा कंपन्या राज्यात कार्यरत आहेत.

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 05 अक्टूबर 2023 दिन – गुरुवार

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 05 अक्टूबर 2023
दिन – गुरुवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – शरद*
*⛅मास – आश्विन*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – सप्तमी पूर्णरात्रि तक*
*⛅नक्षत्र – मृगशिरा रात्रि 07:40 तक तत्पश्चात आर्द्रा*
*⛅योग – व्यतिपात प्रातः 05:43 तक तत्पश्चात वरियान*
*⛅राहु काल – दोपहर 01:57 से 03:26 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:32*
*⛅सूर्यास्त – 06:24*
*⛅दिशा शूल – उत्तर दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:55 से 05:44 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:04 से 12:52 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – सप्तमी का श्राद्ध*
*⛅विशेष – सप्तमी को ताड़ का फल खाया जाय तो वह रोग बढ़ानेवाला तथा शरीर का नाशक होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🌹श्राद्ध से सद्गति🌹*

*जिनको जीवन में श्राद्ध का महत्त्व नहीं पता, वे लोग बड़े घाटे में रहते हैं ।*

*🌹 हनुमानप्रसाद पोद्दार, गीताप्रेस-गोरखपुर के जाने-माने सज्जन संत एक बार मुंबई में रात्रि को समुद्र किनारे बैठे थे । उनके सामने आकर एक पारसी सज्जन (प्रेत) ने प्रार्थना की कि ‘हम जाति के पारसी थे इसलिए घरवालों ने श्राद्ध नहीं किया । मेरी रूह (आत्मा) भटक रही है । आप मेरा श्राद्ध करायें तो मेरी सद्गति होगी ।’*

*🌹हनुमानप्रसाद पोद्दार ने उनका श्राद्ध कराया । दूसरे दिन उस पारसी का जीवात्मा सपने में बड़ा प्रसन्न होकर उनका अभिवादन कर रहा था कि ‘अब मैं ऊँची यात्रा कर रहा हूँ । मेरी सद्गति हो गयी, नहीं तो मैं भटक रहा था ।’*

*🔸संसार में जीना कैसे ?🔸*

*🔹कहीं रहने का यह नियम है कि उपयोगी, उद्योगी और सहयोगी बन कर रहना। जो उपयोगी, उद्योगी और सहयोगी होकर रहता है उसे सभी चाहते हैं और अनुपयोगी, अनुद्योगी और असहयोगी को सभी धिक्कारते हैं ।*

*🔹मुझे एक संत ने कहाः “जहाँ कहीं भी रहना, वहाँ आवश्यक बनकर रहना। वहाँ ऐसा काम करो, इतना काम करो कि वे समझें कि तुम्हारे बिना उनका काम रूक जायेगा। वे तुम्हें अपने लिए आवश्यक समझें। कहीं भी बोझ बनकर मत रहो ।” इस हेतु….*

*🔹पहली बातः शरीर को ठीक रखना चाहिए। शरीर में गड़बड़ी होगी तो कोई साथ नहीं देगा – न पुत्र, न पिता, न पत्नी ।*

*🔹दूसरी बातः निकम्मे रहने का स्वभाव नहीं डालना चाहिए । पहले कुछ लोग इसे पसंद कर सकते हैं किंतु वे साथ नहीं देंगे। इसलिए सदा कर्मठ रहना चाहिए ।*

*🔹तीसरी बातः अपने भोग एवं आराम पर अधिक खर्च नहीं करना चाहिए । मात्र जीवन-निर्वाह के लिए खर्च करना चाहिए, स्वाद पर, मजे पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। स्वाद के लिए शरीर को ही आगे करके सबको पीछे नहीं करना चाहिए। जब भगवान से प्रेम करना है तो किसी सांसारिक वस्तु के लिए दुःखी होना ही नहीं चाहिए । हृदय में भक्ति की, प्रेम की पूँजी इकट्ठी करो ।*

*🔹पुराना जुकाम🔹*

*१) ५ ग्राम सोंठ १ लीटर पानी में उबालें । दिन में ३ बार यह गुनगुना करके पीने से पुराने जुकाम में लाभ होता है ।*

*२) पीने के पानी में सोंठ का टुकड़ा डालकर वह पानी पीते रहने से पुराना जुकाम ठीक होता है । ( सोंठ के टुकड़े को प्रतिदिन बदलते रहें । )*

*🔹सर्दी – जुकाम : ५ ग्राम सोंठ चूर्ण, १० ग्राम गुड़ और १ चम्मच घी को मिलालें । इसमें थोडा -सा पानी डालके आग पर रखके रबड़ी जैसा बना लें । प्रतिदिन सुबह लेने से ३ दिन में ही सर्दी – जुकाम मिट जाता है ।*

*🔸सावधानी – रक्तपित्त की व्याधि में तथा पित्त प्रकृतिवाले ग्रीष्म व शरद ऋतु में सोंठ का उपयोग न करें ।*
*🌞🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

error: Content is protected !!