आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 25 अक्टूबर 2023 दिन – बुधवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – शरद*
*⛅मास – आश्विन*
*⛅पक्ष – शुक्ल*
*⛅तिथि – एकादशी दोपहर 12:32 तक तत्पश्चात द्वादशी*
*⛅नक्षत्र – शतभिषा दोपहर 01:30 तक तत्पश्चात पूर्वभाद्रपद*
*⛅योग – वृद्धि दोपहर 12:18 तक तत्पश्चात ध्रुव*
*⛅राहु काल – दोपहर 12:24 से 01:49 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:41*
*⛅सूर्यास्त – 06:06*
*⛅दिशा शूल – उत्तर दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:00 से 05:50 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 11:59 से 12:49 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – पापांकुशा-पाशांकुशा एकादशी, भरत मिलाप*
*⛅विशेष – एकादशी को शिम्बी (सेम) खाने से पुत्र का नाश होता है । ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
*🔹पापांकुशा एकादशी – 25 अक्टूबर 2023🔹*
*🔹एकादशी में क्या करें, क्या न करें ?🔹*
*🌹1. एकादशी को लकड़ी का दातुन तथा पेस्ट का उपयोग न करें । नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और उँगली से कंठ शुद्ध कर लें । वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है, अत: स्वयं गिरे हुए पत्ते का सेवन करें ।*
*🌹2. स्नानादि कर के गीता पाठ करें, श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें ।*
*🌹हर एकादशी को श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है ।*
*राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।*
*सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ।।*
*एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से श्री विष्णुसहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l*
*🌹3. `ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ इस द्वादश अक्षर मंत्र अथवा गुरुमंत्र का जप करना चाहिए ।*
*🌹4. चोर, पाखण्डी और दुराचारी मनुष्य से बात नहीं करना चाहिए, यथा संभव मौन रहें ।*
*🌹5. एकादशी के दिन भूल कर भी चावल नहीं खाना चाहिए न ही किसी को खिलाना चाहिए । इस दिन फलाहार अथवा घर में निकाला हुआ फल का रस अथवा दूध या जल पर रहना लाभदायक है ।*
*🌹6. व्रत के (दशमी, एकादशी और द्वादशी) – इन तीन दिनों में काँसे के बर्तन, मांस, प्याज, लहसुन, मसूर, उड़द, चने, कोदो (एक प्रकार का धान), शाक, शहद, तेल और अत्यम्बुपान (अधिक जल का सेवन) – इनका सेवन न करें ।*
*🌹7. फलाहारी को गोभी, गाजर, शलजम, पालक, कुलफा का साग इत्यादि सेवन नहीं करना चाहिए । आम, अंगूर, केला, बादाम, पिस्ता इत्यादि अमृत फलों का सेवन करना चाहिए ।*
*🌹8. जुआ, निद्रा, पान, परायी निन्दा, चुगली, चोरी, हिंसा, मैथुन, क्रोध तथा झूठ, कपटादि अन्य कुकर्मों से नितान्त दूर रहना चाहिए ।*
*🌹9. भूलवश किसी निन्दक से बात हो जाय तो इस दोष को दूर करने के लिए भगवान सूर्य के दर्शन तथा धूप-दीप से श्रीहरि की पूजा कर क्षमा माँग लेनी चाहिए ।*
*🌹10. एकादशी के दिन घर में झाडू नहीं लगायें । इससे चींटी आदि सूक्ष्म जीवों की मृत्यु का भय रहता है ।*
*🌹11. इस दिन बाल नहीं कटायें ।*
*🌹12. इस दिन यथाशक्ति अन्नदान करें किन्तु स्वयं किसीका दिया हुआ अन्न कदापि ग्रहण न करें ।*
*🌹13. एकादशी की रात में भगवान विष्णु के आगे जागरण करना चाहिए (जागरण रात्र 1 बजे तक) ।*
*🌹14. जो श्रीहरि के समीप जागरण करते समय रात में दीपक जलाता है, उसका पुण्य सौ कल्पों में भी नष्ट नहीं होता है ।*
*🔹 इस विधि से व्रत करनेवाला उत्तम फल को प्राप्त करता है ।*
आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 25 अक्टूबर 2023 दिन – बुधवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – शरद*
*⛅मास – आश्विन*
*⛅पक्ष – शुक्ल*
*⛅तिथि – एकादशी दोपहर 12:32 तक तत्पश्चात द्वादशी*
*⛅नक्षत्र – शतभिषा दोपहर 01:30 तक तत्पश्चात पूर्वभाद्रपद*
*⛅योग – वृद्धि दोपहर 12:18 तक तत्पश्चात ध्रुव*
*⛅राहु काल – दोपहर 12:24 से 01:49 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:41*
*⛅सूर्यास्त – 06:06*
*⛅दिशा शूल – उत्तर दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:00 से 05:50 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 11:59 से 12:49 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – पापांकुशा-पाशांकुशा एकादशी, भरत मिलाप*
*⛅विशेष – एकादशी को शिम्बी (सेम) खाने से पुत्र का नाश होता है । ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
*🔹पापांकुशा एकादशी – 25 अक्टूबर 2023🔹*
*🔹एकादशी में क्या करें, क्या न करें ?🔹*
*🌹1. एकादशी को लकड़ी का दातुन तथा पेस्ट का उपयोग न करें । नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और उँगली से कंठ शुद्ध कर लें । वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है, अत: स्वयं गिरे हुए पत्ते का सेवन करें ।*
*🌹2. स्नानादि कर के गीता पाठ करें, श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें ।*
*🌹हर एकादशी को श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है ।*
*राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।*
*सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ।।*
*एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से श्री विष्णुसहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l*
*🌹3. `ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ इस द्वादश अक्षर मंत्र अथवा गुरुमंत्र का जप करना चाहिए ।*
*🌹4. चोर, पाखण्डी और दुराचारी मनुष्य से बात नहीं करना चाहिए, यथा संभव मौन रहें ।*
*🌹5. एकादशी के दिन भूल कर भी चावल नहीं खाना चाहिए न ही किसी को खिलाना चाहिए । इस दिन फलाहार अथवा घर में निकाला हुआ फल का रस अथवा दूध या जल पर रहना लाभदायक है ।*
*🌹6. व्रत के (दशमी, एकादशी और द्वादशी) – इन तीन दिनों में काँसे के बर्तन, मांस, प्याज, लहसुन, मसूर, उड़द, चने, कोदो (एक प्रकार का धान), शाक, शहद, तेल और अत्यम्बुपान (अधिक जल का सेवन) – इनका सेवन न करें ।*
*🌹7. फलाहारी को गोभी, गाजर, शलजम, पालक, कुलफा का साग इत्यादि सेवन नहीं करना चाहिए । आम, अंगूर, केला, बादाम, पिस्ता इत्यादि अमृत फलों का सेवन करना चाहिए ।*
*🌹8. जुआ, निद्रा, पान, परायी निन्दा, चुगली, चोरी, हिंसा, मैथुन, क्रोध तथा झूठ, कपटादि अन्य कुकर्मों से नितान्त दूर रहना चाहिए ।*
*🌹9. भूलवश किसी निन्दक से बात हो जाय तो इस दोष को दूर करने के लिए भगवान सूर्य के दर्शन तथा धूप-दीप से श्रीहरि की पूजा कर क्षमा माँग लेनी चाहिए ।*
*🌹10. एकादशी के दिन घर में झाडू नहीं लगायें । इससे चींटी आदि सूक्ष्म जीवों की मृत्यु का भय रहता है ।*
*🌹11. इस दिन बाल नहीं कटायें ।*
*🌹12. इस दिन यथाशक्ति अन्नदान करें किन्तु स्वयं किसीका दिया हुआ अन्न कदापि ग्रहण न करें ।*
*🌹13. एकादशी की रात में भगवान विष्णु के आगे जागरण करना चाहिए (जागरण रात्र 1 बजे तक) ।*
*🌹14. जो श्रीहरि के समीप जागरण करते समय रात में दीपक जलाता है, उसका पुण्य सौ कल्पों में भी नष्ट नहीं होता है ।*
*🔹 इस विधि से व्रत करनेवाला उत्तम फल को प्राप्त करता है ।*
आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 23 अक्टूबर 2023
दिन – सोमवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – शरद*
*⛅मास – आश्विन*
*⛅पक्ष – शुक्ल*
*⛅तिथि – नवमी शाम 05:44 तक तत्पश्चात दशमी*
*⛅नक्षत्र – श्रवण शाम 05:14 तक तत्पश्चात धनिष्ठा*
*⛅योग – शूल शाम 06:53 तक तत्पश्चात गण्ड*
*⛅राहु काल – सुबह 08:06 से 09:32 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:40*
*⛅सूर्यास्त – 06:08*
*⛅दिशा शूल – पूर्व दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:00 से 05:50 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 11:59 से 12:49 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – महानवमी, शारदीय नवरात्र समाप्त, नवरात्र उत्थापन पारणा, महात्मा बुद्ध जयंती, हेमंत ऋतु प्रारम्भ*
*⛅विशेष – नवमी को लौकी खाना त्याज्य है ।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
*🌹 नवरात्रि – महानवमी – 23 अक्टूबर 🌹*
*🌹 शारदीय नवरात्रि के अंतिम दिन माँ दुर्गा के नौवें अवतार सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है । माँ सिद्धिदात्री भक्तों को हर प्रकार की सिद्धि प्रदान करती हैं । सिद्धिदात्री के आशीर्वाद के बाद श्रद्धालु के लिए कोई कार्य असंभव नहीं रह जाता और उसे सभी सुख-समृद्धि प्राप्त होती है ।*
*🌹 नवरात्रि की नवमी तिथि यानी अंतिम दिन माता दुर्गा को हलवा, चना-पूरी, खीर आदि का भोग लगाएं । इससे वैभव व यश मिलता है ।*
*🌹नवरात्रि में कन्या पूजन का महत्त्व🌹*
*🌹नवरात्रि के नवमी को 9 से 17 साल की कन्या का पूजन भोजन कराने से सर्व मंगल होगा, संकल्प सिद्ध होंगे, सामर्थ्यवान बनेंगे, इसलोक के साथ परलोक को भी प्राप्त कर लेंगे, पाप दूर होते हैं, बुद्धि में औदार्य आता है, नारकीय जीवन छुट जाता है, हर काम में, हर दिशा में सफलता मिलती है ।*
🌹 *नवरात्र के उपवास कब खोलें ?*
*🔸ॐ नवरात्रि समाप्त, उत्थापन व पारणा – 23 अक्टूबर 2023*
*🔸शारदीय-आश्विन नवरात्रि 23 अक्टूबर को समाप्त हो रही है । अतः 23 अक्टूबर को शाम 5 बजे से पहले अन्न ग्रहण करके उपवास खोल सकते हैं । जिन श्रद्धालुओं को हवन, कन्या-पूजन आदि करना हो, वे भी दिन में ही सम्पन्न करके शाम 5 बजे से पहले उपवास खोल लें ।*
*🌹 हेमंत ऋतु में स्वास्थ्य रक्षा 🌹*
*हेमंत ऋतु : 23 अक्टूबर से 22 दिसम्बर 2023*
*🌹यह ऋतु विसर्गकाल अर्थात् दक्षिणायन का अन्तकाल कहलाती है । इस काल में चन्द्रमा की शक्ति सूर्य की अपेक्षा अधिक प्रभावशाली होती है इसलिये इस ऋतु में औषधियाँ, वृक्ष, पृथ्वी व जीव-जन्तुओं की पौष्टिकता में भरपूर वृद्धि होती है । शीत ऋतु में शरीर में कफ का संचार होता है तथा पित्तदोष का नाश होता है ।*
*🌹शीत ऋतु में जठराग्नि अत्यधिक प्रबल रहती है अतः इस समय लिया गया पौष्टिक और बलवर्धक आहार वर्ष भर शरीर को तेज, बल और पुष्टता प्रदान करता है । इस ऋतु में एक स्वस्थ व्यक्ति को अपनी सेहत की तन्दुरुस्ती के लिये किस प्रकार का आहार लेना चाहिए ? शरीररक्षण कैसे हो ? आइये, हम उसे जानें :*
*🌹शीत ऋतु के इस काल में खट्टा, खारा तथा मधुर रसप्रधान आहार लेना चाहिए ।*
*🌹पचने में भारी, पौष्टिकता से भरपूर, गरिष्ठ एवं घी से बने पदार्थों का सेवन अधिक करना चाहिए ।*
*🌹इस ऋतु में सेवन किये हुए खाद्य पदार्थों से ही वर्ष भर शरीर की स्वस्थता की रक्षा का भंडार एकत्रित होता है । अतः उड़दपाक, सोंठपाक जैसे बाजीकारक पदार्थों अथवा च्यवनप्राश आदि का उपयोग करना चाहिए ।*
*🌹जो पदार्थ पचने में भारी होने के साथ-साथ गरम व स्निग्ध प्रकृति के होते हैं, ऐसे पदार्थ लेने चाहिए ।*
*🌹दूध, घी, मक्खन, गुड़, खजूर, तिल, खोपरा, सूखा मेवा तथा चरबी बढ़ानेवाले अन्य पौष्टिक पदार्थ इस ऋतु में सेवन करने योग्य माने जाते हैं ।*
*🌹इन दिनों में ठंडा भोजन नहीं करना चाहिए बल्कि थोड़ा गर्म एवं घी-तेल की प्रधानतावाला भोजन करना चाहिए ।*
आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 23 अक्टूबर 2023
दिन – सोमवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – शरद*
*⛅मास – आश्विन*
*⛅पक्ष – शुक्ल*
*⛅तिथि – नवमी शाम 05:44 तक तत्पश्चात दशमी*
*⛅नक्षत्र – श्रवण शाम 05:14 तक तत्पश्चात धनिष्ठा*
*⛅योग – शूल शाम 06:53 तक तत्पश्चात गण्ड*
*⛅राहु काल – सुबह 08:06 से 09:32 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:40*
*⛅सूर्यास्त – 06:08*
*⛅दिशा शूल – पूर्व दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:00 से 05:50 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 11:59 से 12:49 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – महानवमी, शारदीय नवरात्र समाप्त, नवरात्र उत्थापन पारणा, महात्मा बुद्ध जयंती, हेमंत ऋतु प्रारम्भ*
*⛅विशेष – नवमी को लौकी खाना त्याज्य है ।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
*🌹 नवरात्रि – महानवमी – 23 अक्टूबर 🌹*
*🌹 शारदीय नवरात्रि के अंतिम दिन माँ दुर्गा के नौवें अवतार सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है । माँ सिद्धिदात्री भक्तों को हर प्रकार की सिद्धि प्रदान करती हैं । सिद्धिदात्री के आशीर्वाद के बाद श्रद्धालु के लिए कोई कार्य असंभव नहीं रह जाता और उसे सभी सुख-समृद्धि प्राप्त होती है ।*
*🌹 नवरात्रि की नवमी तिथि यानी अंतिम दिन माता दुर्गा को हलवा, चना-पूरी, खीर आदि का भोग लगाएं । इससे वैभव व यश मिलता है ।*
*🌹नवरात्रि में कन्या पूजन का महत्त्व🌹*
*🌹नवरात्रि के नवमी को 9 से 17 साल की कन्या का पूजन भोजन कराने से सर्व मंगल होगा, संकल्प सिद्ध होंगे, सामर्थ्यवान बनेंगे, इसलोक के साथ परलोक को भी प्राप्त कर लेंगे, पाप दूर होते हैं, बुद्धि में औदार्य आता है, नारकीय जीवन छुट जाता है, हर काम में, हर दिशा में सफलता मिलती है ।*
🌹 *नवरात्र के उपवास कब खोलें ?*
*🔸ॐ नवरात्रि समाप्त, उत्थापन व पारणा – 23 अक्टूबर 2023*
*🔸शारदीय-आश्विन नवरात्रि 23 अक्टूबर को समाप्त हो रही है । अतः 23 अक्टूबर को शाम 5 बजे से पहले अन्न ग्रहण करके उपवास खोल सकते हैं । जिन श्रद्धालुओं को हवन, कन्या-पूजन आदि करना हो, वे भी दिन में ही सम्पन्न करके शाम 5 बजे से पहले उपवास खोल लें ।*
*🌹 हेमंत ऋतु में स्वास्थ्य रक्षा 🌹*
*हेमंत ऋतु : 23 अक्टूबर से 22 दिसम्बर 2023*
*🌹यह ऋतु विसर्गकाल अर्थात् दक्षिणायन का अन्तकाल कहलाती है । इस काल में चन्द्रमा की शक्ति सूर्य की अपेक्षा अधिक प्रभावशाली होती है इसलिये इस ऋतु में औषधियाँ, वृक्ष, पृथ्वी व जीव-जन्तुओं की पौष्टिकता में भरपूर वृद्धि होती है । शीत ऋतु में शरीर में कफ का संचार होता है तथा पित्तदोष का नाश होता है ।*
*🌹शीत ऋतु में जठराग्नि अत्यधिक प्रबल रहती है अतः इस समय लिया गया पौष्टिक और बलवर्धक आहार वर्ष भर शरीर को तेज, बल और पुष्टता प्रदान करता है । इस ऋतु में एक स्वस्थ व्यक्ति को अपनी सेहत की तन्दुरुस्ती के लिये किस प्रकार का आहार लेना चाहिए ? शरीररक्षण कैसे हो ? आइये, हम उसे जानें :*
*🌹शीत ऋतु के इस काल में खट्टा, खारा तथा मधुर रसप्रधान आहार लेना चाहिए ।*
*🌹पचने में भारी, पौष्टिकता से भरपूर, गरिष्ठ एवं घी से बने पदार्थों का सेवन अधिक करना चाहिए ।*
*🌹इस ऋतु में सेवन किये हुए खाद्य पदार्थों से ही वर्ष भर शरीर की स्वस्थता की रक्षा का भंडार एकत्रित होता है । अतः उड़दपाक, सोंठपाक जैसे बाजीकारक पदार्थों अथवा च्यवनप्राश आदि का उपयोग करना चाहिए ।*
*🌹जो पदार्थ पचने में भारी होने के साथ-साथ गरम व स्निग्ध प्रकृति के होते हैं, ऐसे पदार्थ लेने चाहिए ।*
*🌹दूध, घी, मक्खन, गुड़, खजूर, तिल, खोपरा, सूखा मेवा तथा चरबी बढ़ानेवाले अन्य पौष्टिक पदार्थ इस ऋतु में सेवन करने योग्य माने जाते हैं ।*
*🌹इन दिनों में ठंडा भोजन नहीं करना चाहिए बल्कि थोड़ा गर्म एवं घी-तेल की प्रधानतावाला भोजन करना चाहिए ।*
आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 22 अक्टूबर 2023
दिन – रविवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – शरद*
*⛅मास – आश्विन*
*⛅पक्ष – शुक्ल*
*⛅तिथि – अष्टमी रात्रि 09:53 तक तत्पश्चात नवमी*
*⛅नक्षत्र – उत्तराषाढ़ा शाम 06:44 तक तत्पश्चात श्रवण*
*⛅योग – धृति रात्रि 09:53 तक तत्पश्चात शूल*
*⛅राहु काल – शाम 04:43 से 06:09 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:39*
*⛅सूर्यास्त – 06:09*
*⛅दिशा शूल – पश्चिम दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:59 से 05:49 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 11:59 से 12:49 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – महाष्टमी, दुर्गाष्टमी, सरस्वती-विसर्जन, स्वामी रामतीर्थजी जयन्ती (दि. अ. )*
*⛅विशेष – अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
*🌹 नवरात्रि – दुर्गाष्टमी – 22 अक्टूबर 🌹*
*🌹 नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर माँ महागौरी की पूजा की जाती है । माँ महागौरी, माँ दुर्गा का आठवाँ स्वरूप है । इन्हें आठवीं शक्ति कहा जाता है । पुराणों के अनुसार, इनके तेज से संपूर्ण विश्व प्रकाशमान है । माँ के इस रूप के पूजन से शारीरिक क्षमता का विकास होने के साथ मानसिक शांति भी बढ़ती है ।*
*🌹 इस दिन माँ को नारियल चढ़ाया जाता है । इस दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है । अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजा करने से माँ दुर्गा का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है ।*
*🔸ॐ कार का अर्थ एवं महत्त्व🔸*
*🔹ॐ = अ+उ+म+(ँ) अर्ध तन्मात्रा । ॐ का अ कार स्थूल जगत का आधार है। उ कार सूक्ष्म जगत का आधार है । म कार कारण जगत का आधार है । अर्ध तन्मात्रा (ँ) जो इन तीनों जगत से प्रभावित नहीं होता बल्कि तीनों जगत जिससे सत्ता-स्फूर्ति लेते हैं फिर भी जिसमें तिलभर भी फर्क नहीं पड़ता, उस परमात्मा का द्योतक है ।*
*🔸ॐ आत्मिक बल देता है । ॐ के उच्चारण से जीवनशक्ति उर्ध्वगामी होती है । इसके सात बार के उच्चारण से शरीर के रोग को कीटाणु दूर होने लगते हैं एवं चित्त से हताशा-निराशा भी दूर होतीहै । यही कारण है कि ऋषि-मुनियों ने सभी मंत्रों के आगे ॐ जोड़ा है । शास्त्रों में भी ॐ की बड़ी भारी महिमा गायी गयी है ।*
*🔸भगवान शंकर का मंत्र हो तो ॐ नमः शिवाय । भगवान गणपति का मंत्र हो तो ॐ गणेशाय नमः। भगवान राम का मंत्र हो तो ॐ रामाय नमः । श्री कृष्ण मंत्र हो तो ॐ नमो भगवते वासुदेवाय । माँ गायत्री का मंत्र हो तो ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गोदेवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्। इस प्रकार सब मंत्रों के आगे ॐ तो जुड़ा ही है ।*
*पतंजलि महाराज ने कहा हैः तस्य वाचकः प्रणवः। ॐ (प्रणव) परमात्मा का वाचक है, उसकी स्वाभाविक ध्वनि है ।*
*🔸ॐ के रहस्य को जानने के लिए कुछ प्रयोग करने के बाद रूस के वैज्ञानिक भी आश्चर्यचकित हो उठे । उन्होंने प्रयोग करके देखा कि जब व्यक्ति बाहर एक शब्द बोले एवं अपने भीतर दूसरे शब्द का विचार करे तब उनकी सूक्ष्म मशीन में दोनों शब्द अंकित हो जाते थे । उदाहरणार्थ, बाहर के क कहा गया हो एवं भीतर से विचार ग का किया गया हो तो क और ग दोनों छप जाते थे। यदि बाहर कोई शब्द न बोले, केवल भीतर विचार करे तो विचारा गया शब्द भी अंकित हो जाता था ।*
*🔸किन्तु एकमात्र ॐ ही ऐसा शब्द था कि व्यक्ति केवल बाहर से ॐ बोले और अंदर दूसरा कोई भी शब्द विचारे फिर भी दोनों ओर का ॐ ही अंकित होता था। अथवा अंदर ॐ का विचार करे और बाहर कुछ भी बोले तब भी अंदर-बाहर का ॐ ही छपता था ।*
*🔸समस्त नामों में ॐ का प्रथम स्थान है। मुसलमान लोग भी अल्ला होssssss अकबर…….. कहकर नमाज पढ़ते हैं जिसमें ॐ की ध्वनि का हिस्सा है ।*
*🔸सिख धर्म में भी एको ओंकार सतिनामु…… कहकर उसका लाभ उठाया जाता है । सिख धर्म का पहला ग्रन्थ है, जपुजी और जपुजी का पहला वचन हैः एको ओंकार सतिनामु………*
*🔹 रविवार विशेष🔹*
*🔹 रविवार के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
*🔹 रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90)*
*🔹 रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75)*
*🔹 रविवार सूर्यदेव का दिन है, इस दिन क्षौर (बाल काटना व दाढ़ी बनवाना) कराने से धन, बुद्धि और धर्म की क्षति होती है ।*
*🔹 रविवार को आँवले का सेवन नहीं करना चाहिए ।*
*🔹 स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए । इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं ।*
*🔹 रविवार के दिन पीपल के पेड़ को स्पर्श करना निषेध है ।*
आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 22 अक्टूबर 2023
दिन – रविवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – शरद*
*⛅मास – आश्विन*
*⛅पक्ष – शुक्ल*
*⛅तिथि – अष्टमी रात्रि 09:53 तक तत्पश्चात नवमी*
*⛅नक्षत्र – उत्तराषाढ़ा शाम 06:44 तक तत्पश्चात श्रवण*
*⛅योग – धृति रात्रि 09:53 तक तत्पश्चात शूल*
*⛅राहु काल – शाम 04:43 से 06:09 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:39*
*⛅सूर्यास्त – 06:09*
*⛅दिशा शूल – पश्चिम दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:59 से 05:49 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 11:59 से 12:49 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – महाष्टमी, दुर्गाष्टमी, सरस्वती-विसर्जन, स्वामी रामतीर्थजी जयन्ती (दि. अ. )*
*⛅विशेष – अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
*🌹 नवरात्रि – दुर्गाष्टमी – 22 अक्टूबर 🌹*
*🌹 नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर माँ महागौरी की पूजा की जाती है । माँ महागौरी, माँ दुर्गा का आठवाँ स्वरूप है । इन्हें आठवीं शक्ति कहा जाता है । पुराणों के अनुसार, इनके तेज से संपूर्ण विश्व प्रकाशमान है । माँ के इस रूप के पूजन से शारीरिक क्षमता का विकास होने के साथ मानसिक शांति भी बढ़ती है ।*
*🌹 इस दिन माँ को नारियल चढ़ाया जाता है । इस दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है । अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजा करने से माँ दुर्गा का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है ।*
*🔸ॐ कार का अर्थ एवं महत्त्व🔸*
*🔹ॐ = अ+उ+म+(ँ) अर्ध तन्मात्रा । ॐ का अ कार स्थूल जगत का आधार है। उ कार सूक्ष्म जगत का आधार है । म कार कारण जगत का आधार है । अर्ध तन्मात्रा (ँ) जो इन तीनों जगत से प्रभावित नहीं होता बल्कि तीनों जगत जिससे सत्ता-स्फूर्ति लेते हैं फिर भी जिसमें तिलभर भी फर्क नहीं पड़ता, उस परमात्मा का द्योतक है ।*
*🔸ॐ आत्मिक बल देता है । ॐ के उच्चारण से जीवनशक्ति उर्ध्वगामी होती है । इसके सात बार के उच्चारण से शरीर के रोग को कीटाणु दूर होने लगते हैं एवं चित्त से हताशा-निराशा भी दूर होतीहै । यही कारण है कि ऋषि-मुनियों ने सभी मंत्रों के आगे ॐ जोड़ा है । शास्त्रों में भी ॐ की बड़ी भारी महिमा गायी गयी है ।*
*🔸भगवान शंकर का मंत्र हो तो ॐ नमः शिवाय । भगवान गणपति का मंत्र हो तो ॐ गणेशाय नमः। भगवान राम का मंत्र हो तो ॐ रामाय नमः । श्री कृष्ण मंत्र हो तो ॐ नमो भगवते वासुदेवाय । माँ गायत्री का मंत्र हो तो ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गोदेवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्। इस प्रकार सब मंत्रों के आगे ॐ तो जुड़ा ही है ।*
*पतंजलि महाराज ने कहा हैः तस्य वाचकः प्रणवः। ॐ (प्रणव) परमात्मा का वाचक है, उसकी स्वाभाविक ध्वनि है ।*
*🔸ॐ के रहस्य को जानने के लिए कुछ प्रयोग करने के बाद रूस के वैज्ञानिक भी आश्चर्यचकित हो उठे । उन्होंने प्रयोग करके देखा कि जब व्यक्ति बाहर एक शब्द बोले एवं अपने भीतर दूसरे शब्द का विचार करे तब उनकी सूक्ष्म मशीन में दोनों शब्द अंकित हो जाते थे । उदाहरणार्थ, बाहर के क कहा गया हो एवं भीतर से विचार ग का किया गया हो तो क और ग दोनों छप जाते थे। यदि बाहर कोई शब्द न बोले, केवल भीतर विचार करे तो विचारा गया शब्द भी अंकित हो जाता था ।*
*🔸किन्तु एकमात्र ॐ ही ऐसा शब्द था कि व्यक्ति केवल बाहर से ॐ बोले और अंदर दूसरा कोई भी शब्द विचारे फिर भी दोनों ओर का ॐ ही अंकित होता था। अथवा अंदर ॐ का विचार करे और बाहर कुछ भी बोले तब भी अंदर-बाहर का ॐ ही छपता था ।*
*🔸समस्त नामों में ॐ का प्रथम स्थान है। मुसलमान लोग भी अल्ला होssssss अकबर…….. कहकर नमाज पढ़ते हैं जिसमें ॐ की ध्वनि का हिस्सा है ।*
*🔸सिख धर्म में भी एको ओंकार सतिनामु…… कहकर उसका लाभ उठाया जाता है । सिख धर्म का पहला ग्रन्थ है, जपुजी और जपुजी का पहला वचन हैः एको ओंकार सतिनामु………*
*🔹 रविवार विशेष🔹*
*🔹 रविवार के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
*🔹 रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90)*
*🔹 रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75)*
*🔹 रविवार सूर्यदेव का दिन है, इस दिन क्षौर (बाल काटना व दाढ़ी बनवाना) कराने से धन, बुद्धि और धर्म की क्षति होती है ।*
*🔹 रविवार को आँवले का सेवन नहीं करना चाहिए ।*
*🔹 स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए । इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं ।*
*🔹 रविवार के दिन पीपल के पेड़ को स्पर्श करना निषेध है ।*
आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 21 अक्टूबर 2023
दिन – शनिवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – शरद*
*⛅मास – आश्विन*
*⛅पक्ष – शुक्ल*
*⛅तिथि – सप्तमी रात्रि 09:53 तक तत्पश्चात अष्टमी*
*⛅नक्षत्र – पूर्वाषाढ़ा रात्रि 07:54 तक तत्पश्चात उत्तराषाढ़ा*
*⛅योग – सुकर्मा रात्रि 12:37 तक तत्पश्चात धृति*
*⛅राहु काल – सुबह 09:31 से 10:58 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:39*
*⛅सूर्यास्त – 06:09*
*⛅दिशा शूल – पूर्व दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:59 से 05:49 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 11:59 से 12:49 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – सरस्वती पूजन*
*⛅विशेष – सप्तमी को ताड़ का फल खाया जाय तो वह रोग बढ़ानेवाला तथा शरीर का नाशक होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
*🔸नवरात्रि विशेष🔸*
*🌹 नवरात्रि के सातवें दिन माता कालरात्री की पूजा की जाती है । ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार देवी कालरात्रि शनि ग्रह को नियंत्रित करती हैं अर्थात इनकी पूजा से शनि के दुष्प्रभाव दूर होते हैं।*
*शास्त्रों के अनुसार इस दिन कालरात्री माँ को गुड़ या इससे बनी चीजों का भोग लगाना चाहिए ।*
*🔹नवरात्री के आखिर तीन दिन (21, 22 एवं 23 अक्टूबर 2023)🔹*
*🔸यदि कोई पूरे नवरात्रि के उपवास-व्रत न कर सकता हो तो सप्तमी, अष्टमी और नवमी तीन दिन उपवास करके देवी की पूजा करने से वह सम्पूर्ण नवरात्रि के उपवास के फल को प्राप्त करता है । नीच कर्मों का त्याग करना चहिये नवरात्रि में । झूट , कपट, दुसरे की वस्तु हरना, दुसरे की चीज खाना, लेना… छोड़ देना चाहिए । अपने हक और पसीने का सात्विक फल आदि जो जरुरत हैं थोडा ले लिया । बाकी का जप, मौन और व्रत रखे , बहुत लाभ होता हैं ।*
*🔹जीवन में उपयोगी नियम ( भाग – २)🔹*
*🔸11. अश्लील पुस्तक आदि न पढ़कर ज्ञानवर्धक पुस्तकों का अध्ययन करना चाहिए ।*
*🔸12. चोरी कभी न करो ।*
*🔸13. किसी की भी वस्तु लें तो उसे सँभाल कर रखो । कार्य पूरा हो फिर तुरन्त ही वापिस दे दो ।*
*🔸14. समय का महत्त्व समझो । व्यर्थ बातें, व्यर्थ काम में समय न गँवाओ । नियमित तथा समय पर काम करो ।*
*🔸15. स्वावलंबी बनो । इससे मनोबल बढ़ता है ।*
*🔸16. हमेशा सच बोलो । किसी की लालच या धमकी में आकर झूठ का आश्रय न लो ।*
*🔸17. अपने से छोटे दुर्बल बालकों को अथवा किसी को भी कभी सताओ मत । हो सके उतनी सबकी मदद करो ।*
*🔸18. अपने मन के गुलाम नहीं परन्तु मन के स्वामी बनो । तुच्छ इच्छाओं की पूर्ति के लिए कभी स्वार्थी न बनो ।*
*🔸19. किसी का तिरस्कार, उपेक्षा, हँसी-मजाक कभी न करो । किसी की निंदा न करो और न सुनो ।*
*🔸20. किसी भी व्यक्ति, परिस्थिति या मुश्किल से कभी न डरो परन्तु हिम्मत से उसका सामना करो ।*
*🌹 शनिवार के दिन विशेष प्रयोग 🌹*
*🌹 शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है । (ब्रह्म पुराण)*
*🌹 हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है । (पद्म पुराण)*
*🔹आर्थिक कष्ट निवारण हेतु🔹*
*🔹एक लोटे में जल, दूध, गुड़ और काले तिल मिलाकर हर शनिवार को पीपल के मूल में चढ़ाने तथा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र जपते हुए पीपल की ७ बार परिक्रमा करने से आर्थिक कष्ट दूर होता है ।*
आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 21 अक्टूबर 2023
दिन – शनिवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – शरद*
*⛅मास – आश्विन*
*⛅पक्ष – शुक्ल*
*⛅तिथि – सप्तमी रात्रि 09:53 तक तत्पश्चात अष्टमी*
*⛅नक्षत्र – पूर्वाषाढ़ा रात्रि 07:54 तक तत्पश्चात उत्तराषाढ़ा*
*⛅योग – सुकर्मा रात्रि 12:37 तक तत्पश्चात धृति*
*⛅राहु काल – सुबह 09:31 से 10:58 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:39*
*⛅सूर्यास्त – 06:09*
*⛅दिशा शूल – पूर्व दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:59 से 05:49 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 11:59 से 12:49 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – सरस्वती पूजन*
*⛅विशेष – सप्तमी को ताड़ का फल खाया जाय तो वह रोग बढ़ानेवाला तथा शरीर का नाशक होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
*🔸नवरात्रि विशेष🔸*
*🌹 नवरात्रि के सातवें दिन माता कालरात्री की पूजा की जाती है । ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार देवी कालरात्रि शनि ग्रह को नियंत्रित करती हैं अर्थात इनकी पूजा से शनि के दुष्प्रभाव दूर होते हैं।*
*शास्त्रों के अनुसार इस दिन कालरात्री माँ को गुड़ या इससे बनी चीजों का भोग लगाना चाहिए ।*
*🔹नवरात्री के आखिर तीन दिन (21, 22 एवं 23 अक्टूबर 2023)🔹*
*🔸यदि कोई पूरे नवरात्रि के उपवास-व्रत न कर सकता हो तो सप्तमी, अष्टमी और नवमी तीन दिन उपवास करके देवी की पूजा करने से वह सम्पूर्ण नवरात्रि के उपवास के फल को प्राप्त करता है । नीच कर्मों का त्याग करना चहिये नवरात्रि में । झूट , कपट, दुसरे की वस्तु हरना, दुसरे की चीज खाना, लेना… छोड़ देना चाहिए । अपने हक और पसीने का सात्विक फल आदि जो जरुरत हैं थोडा ले लिया । बाकी का जप, मौन और व्रत रखे , बहुत लाभ होता हैं ।*
*🔹जीवन में उपयोगी नियम ( भाग – २)🔹*
*🔸11. अश्लील पुस्तक आदि न पढ़कर ज्ञानवर्धक पुस्तकों का अध्ययन करना चाहिए ।*
*🔸12. चोरी कभी न करो ।*
*🔸13. किसी की भी वस्तु लें तो उसे सँभाल कर रखो । कार्य पूरा हो फिर तुरन्त ही वापिस दे दो ।*
*🔸14. समय का महत्त्व समझो । व्यर्थ बातें, व्यर्थ काम में समय न गँवाओ । नियमित तथा समय पर काम करो ।*
*🔸15. स्वावलंबी बनो । इससे मनोबल बढ़ता है ।*
*🔸16. हमेशा सच बोलो । किसी की लालच या धमकी में आकर झूठ का आश्रय न लो ।*
*🔸17. अपने से छोटे दुर्बल बालकों को अथवा किसी को भी कभी सताओ मत । हो सके उतनी सबकी मदद करो ।*
*🔸18. अपने मन के गुलाम नहीं परन्तु मन के स्वामी बनो । तुच्छ इच्छाओं की पूर्ति के लिए कभी स्वार्थी न बनो ।*
*🔸19. किसी का तिरस्कार, उपेक्षा, हँसी-मजाक कभी न करो । किसी की निंदा न करो और न सुनो ।*
*🔸20. किसी भी व्यक्ति, परिस्थिति या मुश्किल से कभी न डरो परन्तु हिम्मत से उसका सामना करो ।*
*🌹 शनिवार के दिन विशेष प्रयोग 🌹*
*🌹 शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है । (ब्रह्म पुराण)*
*🌹 हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है । (पद्म पुराण)*
*🔹आर्थिक कष्ट निवारण हेतु🔹*
*🔹एक लोटे में जल, दूध, गुड़ और काले तिल मिलाकर हर शनिवार को पीपल के मूल में चढ़ाने तथा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र जपते हुए पीपल की ७ बार परिक्रमा करने से आर्थिक कष्ट दूर होता है ।*
सनातन साम्राज्य का राष्ट्रिय ध्वज भगवा ध्वज,
जम्बूद्वीप स्थित पावन भूमि — भारत,
भायं रत: भारत:, भायं = ज्ञान, रत: = रतरहना भारत: = भारत,
जम्बूद्वीप का वह पावन खंड जहाँ लोग ज्ञान प्राप्त करने एवं ज्ञान देने एवं ज्ञान बाँटने में सदैव रत रहते हैं,वह पावन भूमि भारत है। जहाँ ज्ञान की देवी को माता भारती (सरस्वती) के रूप में पूजा की जाती है।
पाताललोक जम्बूद्वीप के गोलार्द्ध के नीचे स्थित था। पाताललोक का समस्त पौराणिक कथाओं में उल्लेख मिलता है। पाताललोक ही आज का अमेरिका और अफ्रीका है।
जम्बूद्वीप से प्राकृतिक कारणों से हिमखंड प्रदेशों के विलग हो जाने के पश्चात् आर्यावर्त्त शेष रहा। ईसाइयत एवं इस्लाम के अभ्युदय के पश्चातआर्यावर्त संकुचित होकर अखंड भारत शेष रहा।
ब्रिटिश अधीनता में अखंड भारत भी खंडित हुआ,
भारत शेष रहा। अब काले अंग्रेजोंने भी शेष भारत को भी खंड खंड करने का कुचक्र किया है।
हम आज भी किसी यज्ञ या पूजा अनुष्ठान में संकल्प लेते समय “जम्बू द्वीपे आर्यावर्ते भरतखंडे” का उच्चारण करते हैं। यह इस अवधारणा को सिद्ध करता है।
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क्या आप जानते हैं कि हमारे प्राचीन महादेश का नाम “भारतवर्ष” कैसे पड़ा? साथ ही क्या आप जानते हैं कि हमारे प्राचीन महादेश का नाम “जम्बूदीप” था ?
परन्तु क्या आप सच में जानते हैं, कि हमारे महादेश को “”जम्बूदीप”” क्यों कहा जाता है और, इसका अर्थ क्या होता है ?
वस्तुतः हमारे लिए यह जानना अत्यंत ही आवश्यक है कि भारतवर्ष का नाम भारतवर्ष कैसे पड़ा ?
क्योंकि एक सामान्य जनधारणा है कि महाभारत एक कुरूवंश में राजा दुष्यंत और उनकी पत्नी शकुंतला के प्रतापी पुत्र भरत के नाम पर इस देश का नाम “भारतवर्ष” पड़ा परन्तु इसका साक्ष्य उपलब्ध नहीं है!
लेकिन वहीँ हमारे पुराण इससे अलग कुछ बात पूरे साक्ष्य के साथ प्रस्तुत करते हैं।
आश्चर्यजनक रूप से इस ओर कभी हमारा ध्यान नही गया जबकि पुराणों में इतिहास ढूंढ़कर अपने इतिहास के साथऔर अपने आगत के साथ न्याय करना हमारे लिए अत्यंत ही आवश्यक है।
क्या आपने कभी इस बात को सोचा है कि जब आज के वैज्ञानिक भी इस बात को मानते हैं कि प्राचीन काल में सात भूभागों में अर्थात महाद्वीपों में भूमण्डल को बांटा गया था। लेकिन ये सात महाद्वीप किसने और क्यों तथा कब बनाए गये इस परकभी, किसी ने कुछ भी नहीं कहा।
अथवा अन्य शब्दों में कहा जा सकता है कि जान बूझकर इस से सम्बंधित अनुसंधान की दिशा मोड़ दी गयी।
परन्तु हमारा “जम्बूदीप नाम ” स्वयं में ही सारी कहानी कह जाता है जिसका अर्थ होता है, समग्र द्वीप। इसीलिए हमारे प्राचीनतम धर्म ग्रंथों तथा विभिन्न अवतारों में मात्र “जम्बूद्वीप” का ही उल्लेख है क्योंकि उस समय सिर्फ एक ही द्वीप था।
साथ ही हमारा वायु पुराण इस से सम्बंधित पूरी बात
एवं उसका साक्ष्य हमारे सामने प्रस्तुत करता है।
इस विषय में हमारा वायु पुराण कहता है।
वायु पुराण के अनुसार त्रेता युग के प्रारंभ में स्वयम्भु मनु के पौत्र और प्रियव्रत के पुत्र ने इस भरत खंड को बसाया था। चूँकि महाराज प्रियव्रत को अपना कोई पुत्र नही था अतः उन्होंने अपनी पुत्री के पुत्र अग्नीन्ध्र को गोद ले लियाथा जिसका पुत्र नाभि था!
नाभि की एक पत्नी मेरू देवी से जो पुत्र पैदा हुआ उसका नाम ऋषभ था,और, इसी ऋषभ के
पुत्र भरत थे तथा इन्ही भरत के नाम पर इस देश का नाम “भारतवर्ष” पड़ा।
उस समय के राजा प्रियव्रत ने अपनी कन्या के दस पुत्रों में से सात पुत्रों को संपूर्ण पृथ्वी के सातों महाद्वीपों के अलग-अलग राजा नियुक्त किये थे।
राजा का अर्थ उस समय धर्म,और न्यायशील राज्य के संस्थापक से लिया जाता था।
इस तरह राजा प्रियव्रत ने जम्बू द्वीप का शासक अग्नीन्ध्र को बनाया था। इसके बाद राजा भरत ने जो अपना राज्य अपने पुत्र को दिया और, वही ” भारतवर्ष” कहलाया।
ध्यान रखें कि भारतवर्ष का अर्थ है, राजा भरत का क्षेत्र और इन्ही राजा भरत के पुत्र का नाम सुमति था।
इन बातों को प्रमाणित करने के लिए अपने दैनिक कार्यों की ओर ध्यान देना आवश्यक है कि हम अपने घरों में अब भी कोई याज्ञिक कार्य कराते हैं तो, उसमें सबसे पहले पंडित जी संकल्प करवाते हैं।
हालाँकि हम सभी उस संकल्प मंत्र को बहुत हल्के में लेते हैं और,उसे पंडित जी की एक धार्मिक अनुष्ठान की एक क्रिया मात्र मानकर छोड़ देते हैं।
परन्तु यदि आप संकल्प के उस मंत्र को ध्यान से सुनेंगे तो उस संकल्प मंत्र में हमें वायु पुराण की इस साक्षी के समर्थन में बहुत कुछ मिल जाता है।
संकल्प मंत्र में यह स्पष्ट उल्लेख आता है कि जम्बू- द्वीपे, भारतखंडे, आर्याव्रत देशांतर्गते।
संकल्प के ये शब्द ध्यान देने योग्य हैं क्योंकि, इनमें जम्बूद्वीप आज के यूरेशिया के लिए प्रयुक्त किया गया है।
इस जम्बू द्वीप में भारत खण्ड अर्थात भरत का क्षेत्र अर्थात ‘भारतवर्ष’ स्थित है, जो कि आर्यावर्त्त कहलाता है।
इस संकल्प के छोटे से मंत्र के द्वारा हम अपने गौरवमयी अतीत के गौरवमयी इतिहास का व्याख्यान कर डालते हैं।
परन्तु अब एक बड़ा प्रश्न आता है कि जब सच्चाई ऐसी है तो फिर शकुंतला और दुष्यंत के पुत्र भरत से इस देश का नाम क्यों जोड़ा जाता है?
इस सम्बन्ध में ज्यादा कुछ कहने के स्थान पर सिर्फ इतना ही कहना उचित होगा कि शकुंतला,दुष्यंत के पुत्र भरत से इस देश के नाम की उत्पत्ति का प्रकरण जोडऩा संभवतः नामों के समानता का परिणाम हो सकता है या हम हिन्दुओं में अपने धार्मिक ग्रंथों के प्रति उदासीनता के कारण ऐसा हो गया होगा।
परन्तु जब हमारे पास वायु पुराण और मन्त्रों के रूप में लाखों साल पुराने साक्ष्य उपलब्ध है और,आज का आधुनिक विज्ञान भी यह मान रहा है कि धरती पर मनुष्य का आगमन करोड़ों वर्ष पूर्व हो चुका था, तो हम पांच हजार साल पुरानी किसी कहानी पर क्यों विश्वास करें?
सिर्फ इतना ही नहीं हमारे संकल्प मंत्र में पंडित जी हमें सृष्टि सम्वत के विषय में भी बताते हैं कि अभी एक अरब 96 करोड़ आठ लाख तिरेपन हजार एक सौ अट्ठारहवां वर्ष चल रहा है।
फिर यह बात तो खुद में ही हास्यास्पद है कि एक तरफ तो हम बात एक अरब 97 करोड़ से अधिक पुरानी करते हैं परन्तु, अपना इतिहास पश्चिम के लेखकों की कलम से केवल पांच हजार साल पुराना पढ़ते और मानते हैं!
आप खुद ही सोचें कि यह आत्मप्रवंचना के अतिरिक्त और क्या है?
इसीलिए जब इतिहास के लिए हमारे पास एक से एक बढ़कर साक्षी हो और प्रमाण पूर्ण तर्क के साथ उपलब्ध हों तो फिर,उन साक्षियों, प्रमाणों और तर्कों के आधार पर अपना अतीत अपने आप खंगालना हमारा उत्तरदायित्व है।
हमारे देश के बारे में वायु पुराण का यह श्लोक उल्लेखित है।
हिमालयं दक्षिणं वर्षं भरताय न्यवेदयत्।
तस्मात्तद्भारतं वर्ष तस्य नाम्ना बिदुर्बुधा:।।
यहाँ हमारा वायु पुराण साफ साफ कह रहा है कि हिमालय पर्वत से दक्षिण का वर्ष अर्थात क्षेत्र भारतवर्ष है।
★इसीलिए हमें यह कहने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए कि हमने शकुंतला और दुष्यंत पुत्र भरत के साथ अपने देश के नाम की उत्पत्ति को जोड़कर अपने इतिहास को पश्चिमी इतिहासकारों की दृष्टि से पांच हजार साल के अंतराल में समेटने का प्रयास किया है।
ऐसा इसीलिए होता है कि आज भी हम गुलामी भरी मानसिकता से आजादी नहीं पा सके हैं और, यदि किसी पश्चिमी इतिहासकार को हम अपने बोलने में या लिखने में उद्घ्रत कर दें तो यह हमारे लिये शान की बात समझी जाती है।
परन्तु, यदि हम अपने विषय में अपने ही किसी लेखक कवि या प्राचीन ग्रंथ का संदर्भ दें तो,रूढि़वादिता का प्रमाण माना जाता है। और यह भ्रांतिपूर्ण अवधारणा है।
इसे आप ठीक से ऐसे समझें कि राजस्थान के इतिहास के लिए सबसे प्रमाणित ग्रंथ कर्नल टाड का इतिहास माना जाता है। परन्तु आश्चर्य जनक रूप से हमने यह नही सोचा कि एक विदेशी व्यक्ति इतने पुराने समय में भारत में आकर साल, डेढ़ साल रहे और यहां का इतिहास तैयार कर दे,यह कैसे संभव है?
विशेषत: तब जबकि उसके आने के समय यहां यातायातके अधिक साधन नही थे, और वह राजस्थानी भाषा से भी परिचित नही था।
फिर उसने ऐसी परिस्थिति में सिर्फ इतना काम किया कि जो विभिन्न रजवाड़ों के संबंध में इतिहास संबंधी पुस्तकें उपलब्ध थीं उन सबको संहिताबद्घ कर दिया।
इसके बाद राजकीय संरक्षण में करनल टाड की पुस्तक को प्रमाणिक माना जाने लगा और, यह धारणा बलवती हो गयीं कि राजस्थान के इतिहास पर कर्नल टाड का एकाधिकार है।
और ऐसी ही धारणाएं हमें अन्य क्षेत्रों में भी परेशान करती हैं इसीलिए अपने देश के इतिहास के बारे में व्याप्त भ्रांतियों का निवारण करना हमारा ध्येय होना चाहिए।
क्योंकि इतिहास मरे गिरे लोगों का लेखाजोखा नही है जैसा कि इसके विषय में माना जाता है, बल्कि, इतिहास अतीत के गौरवमयी पृष्ठों और हमारे न्यायशील और धर्मशील राजाओं के कृत्यों का वर्णन करता है।
प्रत्यंचा सनातन संस्कृति
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इसीलिए हिन्दुओं जागो और, अपने गौरवशाली इतिहास को पहचानो! हम गौरवशाली हिन्दू सनातन धर्म का हिस्सा हैं और, हमें गर्व होना चाहिए कि हम हिन्दू हैं!
जयति पुण्य सनातन संस्कृति★
जयति पुण्य भूमि भारत★
जयतु जयतु हिन्दूराष्ट्रं★
सनातन धर्म की जय★
सनातन साम्राज्य की जय★
भगवा ध्वज की जय★
सदा सर्वदा सुमंगल★
हर हर महादेव★
वंदेभारतमातरम्★
जय भारत★
जय सनातन★
जय भवानी★
जय श्री राम★
जय श्री कृष्ण★
जय महादेव★
हर हर महादेव★