आध्यात्मिक वक्त, साथ और जिंदगी.:- रामवर्मा आसबे रामवर्मा आसबे - September 28, 2021 0 वक्त से ज़्यादा ज़िंदगी में अपना और पराया कोई भी नहीं होता.. वक्त अच्छा होता है तो सब अपने होते है.. और वक्त ख़राब हो तो अपने भी पराए हो जाते है.. जैसे आपके पास पास धन हैतो आपके साथ सबका मन अच्छा और आपके पास धन नहि है तो आपके साथ कौन भि नहि है