Home आध्यात्मिक रिश्तेदारी और दोस्ती में कैसा मान अपमान ?

रिश्तेदारी और दोस्ती में कैसा मान अपमान ?

रिश्तेदारी और दोस्ती में कैसा मान अपमान ?
जो ताला चाबी को एक ओर घुमाने से बंद होता है,
वही दूसरी ओर घुमाने से खुल भी जाता है !
हम अपने विचार, वाणी और व्यवहार को इस तरह घुमाएँ कि रिश्तों के बंद पडे ताले फिर से खुल जाएँ…!!!”
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चाय का कप लेकर आप खिड़की के पास बैठे हों और बाहर के सुंदर नज़ारे का आनंद लेते हुए चाय की चुस्की लेते हैं …..अरे चीनी डालना तो भूल ही गये..;
और तभी फिर से किचन मेँ जाकर चीनी डालने का आलस आ गया…. आज फीकी चाय को जैसे तैसे पी गए,कप खाली कर दिया.
तभी तभी आपकी नज़र कप के तल में पड़ी बिना घुली चीनी पर पडती है..!!
मुख पर मुस्कुराहट लिए सोच में पड गये…चम्मच होता तो मिला लेता.
हमारे जीवन मे भी कुछ ऐसा ही है…
सुख ही सुख बिखरा पड़ा है हमारे आस पास… लेकिन, बिन घुली उस चीनी की तरह !!
थोड़ा सा ध्यान दें-
किसी के साथ हँसते-हँसते उतने ही हक से रूठना भी आना चाहिए !
अपनो की आँख का पानी धीरे से पोंछना आना चाहिए !
रिश्तेदारी और दोस्ती में कैसा मान अपमान ?
बस अपनों के दिल मे रहना आना चाहिए…!
प्यार एवं सत्संग रूपी चम्मच से जीवन में मिठास घोलनी चाहिए!!

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