Home National राष्ट्रीय समाज के प्रियदर्शी चक्रवर्ती सम्राट अशोक महान की 2325 वी जंयती की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई हो

राष्ट्रीय समाज के प्रियदर्शी चक्रवर्ती सम्राट अशोक महान की 2325 वी जंयती की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई हो

🌀राष्ट्रीय आर्य वर्त के नायक, अखंड भारत निर्माता ,वसुधैव कुटुंबकम के जनक,
भारत के सभी राष्ट्रीय प्रतीकों के रचनाकार, देवों के देव देवनाम्प्रिया राष्ट्रीय समाज के प्रियदर्शी चक्रवर्ती सम्राट अशोक महान की 2325 वी जंयती की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई हो।
हम ही राष्ट्रीय समाज है हमही विश्व निर्माता हैं । ,🌿

🔷भारतीय इतिहास में अशोकाष्टमी के पावन अवसर पर हम सब मिलकर संसार को आलोकित करें❗ यही वह महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तिथि है जिस दिन राष्ट्रीय समाज के लोककल्याणकारी शासन के प्रतीक वसुधैव कुटुंबकम के जनक सर्वप्रथम अपनी सीमाओं को छोड़कर दूसरे देश में जाकर धम्म घोष की नीति अपनाया गया इन्होंने सर्वप्रथम श्रीलंका में अपने बेटा बेटी महेंद्र संघमित्रा को पीपल का वृक्ष लेकर भेजा आज भी श्रीलंका में अशोक वाटिका स्थित है❗

🔶 विश्व के महानतम सम्राट आर्य वर्त के नायक अशोक महान का जन्म आज से 2325 वर्ष पूर्व भारत ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण जम्बूद्वीप की तत्कालीन राजधानी पाटलिपुत्र के राजमहल में हुआ था। तब से उनके द्वारा राष्ट्र के संचालन हेतु स्थापित आदर्शो को ही राजधर्म की मान्यता प्राप्त है❗

कृपया आप सभी से निवेदन है हर्षोल्लास के साथ इस पर्व को मनाएं ❗

⚕️उपरोक्त सभी कार्यों को अपने घर पर ही एक दूसरे से 1 मीटर की दूरी पर रहते हुए ही मनायें⚕️

*कार्यक्रम का स्थान 👉🏻 आपका अपना निवास स्थान*

🔷पूरे अखंड भारत में एक ही ऐसा सम्राट था जिसको चक्रवर्ती की उपाधि से नवाजा गया ❗ देवों के देव देवनाम्प्रिया राष्ट्रीय समाज के प्रियदर्शी चक्रवर्ती सम्राट अशोक महान इन्होंने शिलालेखों के माध्यम से बताया समस्त प्रजा मेरे पुत्र के समान है आज ही के दिन राष्ट्रीय समाज के प्रियदर्शी सम्राट अशोक महान का जन्मोत्सव मनाया जाएगा❗

भारत के हर प्रदेश में हर जिले में हर गांव में राष्ट्रीय समाज के नायक रहे सम्राट का अशोक स्तंभ बनाने का कार्य आज से आरम्भ करना होगा❗

💢क्योंकि जब लाट थी तब राष्ट्रीय समाज सम्राट था आज लाट नहीं तो सम्राट नहीं❓

🔶सारनाथ में राष्ट्रीय समाज के अशोक ने जो स्तम्भ बनवाया था उसके शीर्ष भाग को सिंहचतुर्मुख कहते हैं❗ इस मूर्ति में चार भारतीय सिंह पीठ-से-पीठ सटाये खड़े हैं। अशोक स्तम्भ अब भी अपने मूल स्थान पर स्थित है किन्तु उसका यह शीर्ष-भाग सारनाथ के संग्रहालय में रखा हुआ है❗यह सिंहचतुर्मुख स्तम्भशीर्ष ही भारत के राष्ट्रीय चिह्न के रूप में स्वीकार किया गया है। इसके आधार के मध्यभाग में राष्ट्रीय समाज के सम्राट के अशोक चक्र को भारत के राष्ट्रीय ध्वज में बीच की सफेद पट्टी में रखा गया है❗

🇮🇳अखंड भारत की क्या पहचान❗
🇮🇳अशोक स्तंभ
और
चक्र निशान‼️

रामवर्मा आसबे

नमोन्यूजनेशन

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

error: Content is protected !!