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खासदार सांस्कृतिक महोत्सवा’ ला मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्र्यांची भेट

*देशातील प्रत्येक कलाकाराला खासदार सांस्कृतिक महोत्सवाची आतुरता – मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे*

नागपूर दि. १: शहरातील ‘खासदार सांस्कृतिक महोत्सवा’ ने देश-विदेशातील नामवंत कलाकार तसेच स्थानिक कलाकारांच्या कलाकृती नागपूरकर रसिकांना उपलब्ध करून दिल्या आहेत, ही येथील जनतेसाठी मोठी सांस्कृतिक मेजवानी असून खासदार महोत्सवाची कलाकारांप्रमाणेच जनताही आतुरतेने वाट बघत असल्याचे गौरवोद्गार मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे यांनी आज येथे काढले.

नागपूर शहरात सुरु असलेल्या खासदार सांस्कृतिक महोत्सवाला मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे यांनी आज भेट दिली. त्याप्रसंगी ते बोलत होते. महोत्सवाचे आयोजक तथा केंद्रीय रस्ते वाहतूक व महामार्ग मंत्री नितीन गडकरी, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, ज्येष्ठ संपादक श्रीपाद अपराजित, खासदार कृपाल तुमाने, आमदार प्रवीण दटके, आशिष जायस्वाल, जिल्हाधिकारी डॉ. विपीन इटनकर, नागपूर सुधार प्रन्यासचे सभापती मनोज सुर्यंवंशी, जिल्हा परिषदेच्या मुख्य कार्यकारी अधिकारी सौम्या शर्मा आदी उपस्थित होते.

नितीन गडकरी यांची ओळख विकास पुरुष म्हणून संपूर्ण देशात आहे. रस्ते, इमारती व पायाभूत सुविधांच्या निर्मितीसोबतच त्यांच्यातील कलासक्त पुरूष क्रीडा, संगीत, नृत्य आणि विविध कलांच्या माध्यमातून आपली कलासंस्कृती जोपासन्याचे काम करित असतो. महाराष्ट्राच्या सांस्कृतिक वैभवाला शोभेल असे हे आयोजन असल्याचे मुख्यमंत्र्यांनी सांगितले.

उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यावेळी म्हणाले की खासदार सांस्कृतिक महोत्सवातून विदर्भातील स्थानिक कलाकारांच्या सुप्त कलागुणांना वाव मिळत असल्याने व अन्य कलाकांरांच्या कला बघण्याची संधी मिळत असल्याने त्यांच्यासाठी हा महत्वाचा महोत्सव आहे.

नितीन गडकरी यांनी प्रास्ताविकातून सांस्कृतिक प्रगतीसाठी या महोत्सवाचे आयोजन करण्यात येत असल्याचे सांगितले.

यावेळी मान्यवरांनी ‘द पियुष मिश्रा प्रोजेक्ट बल्लीमारान’ या कार्यक्रमाचा आनंद घेतला. मुख्यमंत्र्यांच्या हस्ते पियुष मिश्रा व गितरामायण नाटीका प्रमुख अरूणा भिडे यांचा सत्कार करण्यात आला.
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आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 02 दिसम्बर 2023 दिन – शनिवार

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 02 दिसम्बर 2023 दिन – शनिवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – हेमंत*
*⛅मास – मार्गशीर्ष*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – पंचमी शाम 05:14 तक तत्पश्चात षष्ठी*
*⛅नक्षत्र – पुष्य शाम 06:54 तक तत्पश्चात अश्लेषा*
*⛅योग – ब्रह्म रात्रि 08:19 तक तत्पश्चात इन्द्र*
*⛅राहु काल – सुबह 09:47 से 11:08 तक*
*⛅सूर्योदय – 07:04*
*⛅सूर्यास्त – 05:54*
*⛅दिशा शूल – पूर्व*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:19 से 06:12 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:03 से 12:56 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण -*
*⛅विशेष – पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🔹आरती में कपूर का उपयोग क्यों ?🔹*

*🔸सनातन संस्कृति में पुरातन काल से आरती में कपूर जलाने की परम्परा है । आरती के बाद आरती के ऊपर हाथ घुमाकर अपनी आँखों पर लगाते हैं, जिससे दृष्टी -इन्द्रिय सक्रिय हो जाती है । पूज्य बापूजी के सत्संग -वचनामृत में आता है : “आरती करते हैं तो कपूर जलाते हैं । कपूर वातावरण को शुद्ध करता है, पवित्र वातावरण की आभा पैदा करता है । घर में देव-दोष है, पितृ -दोष हैं, वास्तु -दोष हैं, भूत -पिशाच का दोष है या किसीको बुरे सपने आते हैं तो कपूर की ऊर्जा उन दोषों को नष्ट कर देती है ।*

*🔸बोलते हैं कि संध्या होती है तो दैत्य-राक्षस हमला करते हैं इसलिए शंख , घंट बजाना चाहिए, कपूर जलाना चाहिए, आरती-पूजा करनी चाहिए अर्थात संध्या के समय और सुबह के समय वातावरण में विशिष्ट एवं विभिन्न प्रकार के जीवाणु होते हैं जो श्वासोच्छवास के द्वारा हमारे शरीर में प्रवेश करके हमारी जीवनरक्षक जीवनरक्षक कोशिकाओं से लड़ते हैं । तो देव-असुर संग्राम होता है, देव माने सात्त्विक कण और असुर माने तामसी कण । कपूर की सुगंधि से हानिकारक जीवाणु एवं विषाण रूपी राक्षस भाग जाते हैं ।*

*🔸वातावरण में जो अशुद्ध आभा है इससे तामसी अथवा निगुरे लोग जरा-जरा बात में खिन्न होते हैं, पीड़ित होते हैं लेकिन कपूर और आरती का उपयोग करनेवालों के घरों में ऐसे कीटाणुओं का, ऐसो हलकी आभा का प्रभाव नहीं टिक सकता है ।*

*🔸अत: घर में कभी-कभी कपूर जलाना चाहिए, गूगल का धूप करना चाहिए । कभी-कभी कपूर की १ – २ छोटी-छोटी गोली मसल के घर में छिटक देनी चाहिए । उसकी हवा से ऋणायान बनते हैं, जो हितकारी हैं । वर्तमान के माहौल में घर में दीया जलाना अथवा कपूर की कभी-कभी आरती कर लेना अच्छा है ।*

*🔹पुण्यदायी तिथियाँ व योग (भाग-२)🔹*
*👉 24 दिसम्बर – प्रदोष व्रत*
*👉 25 दिसम्बर – तुलसी पूजन दिवस, विश्वगुरु भारत कार्यक्रम (२५ दिसम्बर से १ जनवरी तक), महामना पं. मदनमोहन मालवीय जयंती (दि.अ.)*
*👉 26 दिसम्बर – मार्गशीर्ष पूर्णिमा, श्री दत्तात्रेय जयंती, जोरमेला (पंजाब)*
*👉 28 दिसम्बर – गुरुपुष्यामृत योग [रात्रि १-०५ (२९ दिसम्बर १-०५ AM) से २९ दिसम्बर सूर्योदय तक]*
*👉 30 दिसम्बर – संकष्ट चतुर्थी (चन्द्रोदय : रात्रि ९-०६), श्री रमण महर्षि जयंती (दि.अ.)*

*🌹 शनिवार के दिन विशेष प्रयोग 🌹*

*🌹 शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है । (ब्रह्म पुराण)*

*🌹 हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है । (पद्म पुराण)*

*🔹आर्थिक कष्ट निवारण हेतु🔹*
*🔹एक लोटे में जल, दूध, गुड़ और काले तिल मिलाकर हर शनिवार को पीपल के मूल में चढ़ाने तथा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र जपते हुए पीपल की ७ बार परिक्रमा करने से आर्थिक कष्ट दूर होता है ।*

*🌞🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 02 दिसम्बर 2023 दिन – शनिवार

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 02 दिसम्बर 2023 दिन – शनिवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – हेमंत*
*⛅मास – मार्गशीर्ष*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – पंचमी शाम 05:14 तक तत्पश्चात षष्ठी*
*⛅नक्षत्र – पुष्य शाम 06:54 तक तत्पश्चात अश्लेषा*
*⛅योग – ब्रह्म रात्रि 08:19 तक तत्पश्चात इन्द्र*
*⛅राहु काल – सुबह 09:47 से 11:08 तक*
*⛅सूर्योदय – 07:04*
*⛅सूर्यास्त – 05:54*
*⛅दिशा शूल – पूर्व*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:19 से 06:12 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:03 से 12:56 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण -*
*⛅विशेष – पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🔹आरती में कपूर का उपयोग क्यों ?🔹*

*🔸सनातन संस्कृति में पुरातन काल से आरती में कपूर जलाने की परम्परा है । आरती के बाद आरती के ऊपर हाथ घुमाकर अपनी आँखों पर लगाते हैं, जिससे दृष्टी -इन्द्रिय सक्रिय हो जाती है । पूज्य बापूजी के सत्संग -वचनामृत में आता है : “आरती करते हैं तो कपूर जलाते हैं । कपूर वातावरण को शुद्ध करता है, पवित्र वातावरण की आभा पैदा करता है । घर में देव-दोष है, पितृ -दोष हैं, वास्तु -दोष हैं, भूत -पिशाच का दोष है या किसीको बुरे सपने आते हैं तो कपूर की ऊर्जा उन दोषों को नष्ट कर देती है ।*

*🔸बोलते हैं कि संध्या होती है तो दैत्य-राक्षस हमला करते हैं इसलिए शंख , घंट बजाना चाहिए, कपूर जलाना चाहिए, आरती-पूजा करनी चाहिए अर्थात संध्या के समय और सुबह के समय वातावरण में विशिष्ट एवं विभिन्न प्रकार के जीवाणु होते हैं जो श्वासोच्छवास के द्वारा हमारे शरीर में प्रवेश करके हमारी जीवनरक्षक जीवनरक्षक कोशिकाओं से लड़ते हैं । तो देव-असुर संग्राम होता है, देव माने सात्त्विक कण और असुर माने तामसी कण । कपूर की सुगंधि से हानिकारक जीवाणु एवं विषाण रूपी राक्षस भाग जाते हैं ।*

*🔸वातावरण में जो अशुद्ध आभा है इससे तामसी अथवा निगुरे लोग जरा-जरा बात में खिन्न होते हैं, पीड़ित होते हैं लेकिन कपूर और आरती का उपयोग करनेवालों के घरों में ऐसे कीटाणुओं का, ऐसो हलकी आभा का प्रभाव नहीं टिक सकता है ।*

*🔸अत: घर में कभी-कभी कपूर जलाना चाहिए, गूगल का धूप करना चाहिए । कभी-कभी कपूर की १ – २ छोटी-छोटी गोली मसल के घर में छिटक देनी चाहिए । उसकी हवा से ऋणायान बनते हैं, जो हितकारी हैं । वर्तमान के माहौल में घर में दीया जलाना अथवा कपूर की कभी-कभी आरती कर लेना अच्छा है ।*

*🔹पुण्यदायी तिथियाँ व योग (भाग-२)🔹*
*👉 24 दिसम्बर – प्रदोष व्रत*
*👉 25 दिसम्बर – तुलसी पूजन दिवस, विश्वगुरु भारत कार्यक्रम (२५ दिसम्बर से १ जनवरी तक), महामना पं. मदनमोहन मालवीय जयंती (दि.अ.)*
*👉 26 दिसम्बर – मार्गशीर्ष पूर्णिमा, श्री दत्तात्रेय जयंती, जोरमेला (पंजाब)*
*👉 28 दिसम्बर – गुरुपुष्यामृत योग [रात्रि १-०५ (२९ दिसम्बर १-०५ AM) से २९ दिसम्बर सूर्योदय तक]*
*👉 30 दिसम्बर – संकष्ट चतुर्थी (चन्द्रोदय : रात्रि ९-०६), श्री रमण महर्षि जयंती (दि.अ.)*

*🌹 शनिवार के दिन विशेष प्रयोग 🌹*

*🌹 शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है । (ब्रह्म पुराण)*

*🌹 हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है । (पद्म पुराण)*

*🔹आर्थिक कष्ट निवारण हेतु🔹*
*🔹एक लोटे में जल, दूध, गुड़ और काले तिल मिलाकर हर शनिवार को पीपल के मूल में चढ़ाने तथा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र जपते हुए पीपल की ७ बार परिक्रमा करने से आर्थिक कष्ट दूर होता है ।*

*🌞🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 30 नवम्बर 2023 दिन – गुरुवार

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 30 नवम्बर 2023 दिन – गुरुवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – हेमंत*
*⛅मास – मार्गशीर्ष*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – तृतीया दोपहर 02:24 तक तत्पश्चात चतुर्थी*
*⛅नक्षत्र – आर्द्रा दोपहर 03:01 तक तत्पश्चात पुनर्वसु*
*⛅योग – शुभ रात्रि 08:15 तक तत्पश्चात शुक्ल*
*⛅राहु काल – दोपहर 01:49 से 03:11 तक*
*⛅सूर्योदय – 07:03*
*⛅सूर्यास्त – 05:53*
*⛅दिशा शूल – दक्षिण दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:18 से 06:10 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:02 से 12:55 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण -संकष्टी चतुर्थी*
*⛅विशेष – तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है । चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🔸संकष्ट चतुर्थी – 30 नवम्बर 2023🔸*

*🔹संकष्ट चतुर्थी का मतलब होता है संकट को हरने वाली चतुर्थी । संकष्ट संस्कृत भाषा से लिया गया एक शब्द है, जिसका अर्थ होता है ‘कठिन समय से मुक्ति पाना’।*
*🔹इस दिन व्यक्ति अपने दुःखों से छुटकारा पाने के लिए गणपति की अराधना करता है । पुराणों के अनुसार चतुर्थी के दिन गौरी पुत्र गणेश की पूजा करना बहुत फलदायी होता है । इस दिन लोग सूर्योदय के समय से लेकर चन्द्रमा उदय होने के समय तक उपवास रखते हैं । संकष्ट चतुर्थी को पूरे विधि-विधान से गणपति की पूजा-पाठ की जाती है ।*

*🔹अमृत – औषधि दालचीनी🔹*

*🔸दालचीनी उष्ण, पाचक, स्फूर्तिदायक, रक्तशोधक, वीर्यवर्धक व मूत्रल है । यह वायु व कफ का शमन कर उनसे उत्पन्न होनेवाले अनेक रोगों को दूर करती है ।*

*🔸यह श्वेत रक्तकणों की वृद्धि कर रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ाती है । बवासीर, कृमि, खुजली, राजयक्ष्मा ( टी,बी,), इन्फ्लूएंजा ( एक प्रकार का शीतप्रधान संक्रामक ज्वर), मूत्राशय के रोग, टायफायड, ह्रदयरोग, कैन्सर, पेट के रोग आदि में यह लाभकारी है  । संक्रामक बीमारियों की यह विशेष औषधि है ।*

*🔹दालचीनी के कुछ प्रयोग🔹*

*🔸१] पेट के रोग व सर्दी – खाँसी : १ ग्राम ( एक चने जितनी मात्रा ) दालचीनी चूर्ण में १ चम्मच शहद मिलाकर दिन में १ – २ बार चाटने से मंदाग्नि, अजीर्ण, पेट की वायु, संग्रहणी रोग, अफरा और सर्दी – खाँसी में लाभ होता है ।*

*🔸२] ह्रदयरोग : एक ग्राम दालचीनी चूर्ण २०० मि.ली. पानी में धीमी आँच पर उबालें । १०० मि.ली. पानी शेष रहने पर उसे छानकर पी लें । इसे रोज सुबह लेने से कोलेस्ट्राँल की अतिरिक्त मात्रा घटती हैं । गर्म प्रकृतिवाले लोग एवं ग्रीष्म ऋतू में इसके पानी में दूध मिलाकर उपयोग कर सकते हैं । इस प्रयोग से रक्त की शुद्धि होती है एवं ह्रदय को बल मिलता है ।*

*🔸३] स्वरभंग, खाँसी व मुँह की बदबू : दालचीनी का छोटा-सा टुकड़ा चूसने से स्वरभंग ( गला बैठना ) की विकृति नष्ट होती है व आवास खुलती है । इससे खाँसी का प्रकोप शांत होता है, मुँह की बदबू दूर होती है, मसूड़े मजबूत बनते हैं और तोतलेपन में भी लाभ होता है ।*

*🔹सावधानियाँ : गर्भवती महिलाओं के लिए दालचीनी लेना निषिद्ध है । इसकी अधिक मात्रा लेने से पित्त ( उष्ण ) प्रक्रुतिवालों को सिरदर्द होता है । अत्यधिक मात्रा में, रात को या दीर्घकाल तक इसका सेवन करना हानिकारक है ।*
*🔹गुरुवार विशेष 🔹*

*🔸हर गुरुवार को तुलसी के पौधे में शुद्ध कच्चा दूध गाय का थोड़ा-सा ही डाले तो, उस घर में लक्ष्मी स्थायी होती है और गुरूवार को व्रत उपवास करके गुरु की पूजा करने वाले के दिल में गुरु की भक्ति स्थायी हो जाती है ।*

*🔸गुरुवार के दिन देवगुरु बृहस्पति के प्रतीक आम के पेड़ की निम्न प्रकार से पूजा करें :*

*🔸एक लोटा जल लेकर उसमें चने की दाल, गुड़, कुमकुम, हल्दी व चावल डालकर निम्नलिखित मंत्र बोलते हुए आम के पेड़ की जड़ में चढ़ाएं ।*

*ॐ ऐं क्लीं बृहस्पतये नमः ।*

*🌹 फिर उपरोक्त मंत्र बोलते हुए आम के वृक्ष की पांच परिक्रमा करें और गुरुभक्ति, गुरुप्रीति बढ़े ऐसी प्रार्थना करें । थोड़ा सा गुड़ या बेसन की मिठाई चींटियों को डाल दें ।*

*🔸गुरुवार को बाल कटवाने से लक्ष्मी और मान की हानि होती है ।*
*🔸गुरुवार के दिन तेल मालिश हानि करती है । यदि निषिद्ध दिनों में मालिश करनी ही है तो ऋषियों ने उसकी भी व्यवस्था दी है । तेल में दूर्वा डाल के मालिश करें तो वह दोष चला जायेगा ।*

*🌞 🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 30 नवम्बर 2023 दिन – गुरुवार

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 30 नवम्बर 2023 दिन – गुरुवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – हेमंत*
*⛅मास – मार्गशीर्ष*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – तृतीया दोपहर 02:24 तक तत्पश्चात चतुर्थी*
*⛅नक्षत्र – आर्द्रा दोपहर 03:01 तक तत्पश्चात पुनर्वसु*
*⛅योग – शुभ रात्रि 08:15 तक तत्पश्चात शुक्ल*
*⛅राहु काल – दोपहर 01:49 से 03:11 तक*
*⛅सूर्योदय – 07:03*
*⛅सूर्यास्त – 05:53*
*⛅दिशा शूल – दक्षिण दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:18 से 06:10 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:02 से 12:55 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण -संकष्टी चतुर्थी*
*⛅विशेष – तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है । चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🔸संकष्ट चतुर्थी – 30 नवम्बर 2023🔸*

*🔹संकष्ट चतुर्थी का मतलब होता है संकट को हरने वाली चतुर्थी । संकष्ट संस्कृत भाषा से लिया गया एक शब्द है, जिसका अर्थ होता है ‘कठिन समय से मुक्ति पाना’।*
*🔹इस दिन व्यक्ति अपने दुःखों से छुटकारा पाने के लिए गणपति की अराधना करता है । पुराणों के अनुसार चतुर्थी के दिन गौरी पुत्र गणेश की पूजा करना बहुत फलदायी होता है । इस दिन लोग सूर्योदय के समय से लेकर चन्द्रमा उदय होने के समय तक उपवास रखते हैं । संकष्ट चतुर्थी को पूरे विधि-विधान से गणपति की पूजा-पाठ की जाती है ।*

*🔹अमृत – औषधि दालचीनी🔹*

*🔸दालचीनी उष्ण, पाचक, स्फूर्तिदायक, रक्तशोधक, वीर्यवर्धक व मूत्रल है । यह वायु व कफ का शमन कर उनसे उत्पन्न होनेवाले अनेक रोगों को दूर करती है ।*

*🔸यह श्वेत रक्तकणों की वृद्धि कर रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ाती है । बवासीर, कृमि, खुजली, राजयक्ष्मा ( टी,बी,), इन्फ्लूएंजा ( एक प्रकार का शीतप्रधान संक्रामक ज्वर), मूत्राशय के रोग, टायफायड, ह्रदयरोग, कैन्सर, पेट के रोग आदि में यह लाभकारी है  । संक्रामक बीमारियों की यह विशेष औषधि है ।*

*🔹दालचीनी के कुछ प्रयोग🔹*

*🔸१] पेट के रोग व सर्दी – खाँसी : १ ग्राम ( एक चने जितनी मात्रा ) दालचीनी चूर्ण में १ चम्मच शहद मिलाकर दिन में १ – २ बार चाटने से मंदाग्नि, अजीर्ण, पेट की वायु, संग्रहणी रोग, अफरा और सर्दी – खाँसी में लाभ होता है ।*

*🔸२] ह्रदयरोग : एक ग्राम दालचीनी चूर्ण २०० मि.ली. पानी में धीमी आँच पर उबालें । १०० मि.ली. पानी शेष रहने पर उसे छानकर पी लें । इसे रोज सुबह लेने से कोलेस्ट्राँल की अतिरिक्त मात्रा घटती हैं । गर्म प्रकृतिवाले लोग एवं ग्रीष्म ऋतू में इसके पानी में दूध मिलाकर उपयोग कर सकते हैं । इस प्रयोग से रक्त की शुद्धि होती है एवं ह्रदय को बल मिलता है ।*

*🔸३] स्वरभंग, खाँसी व मुँह की बदबू : दालचीनी का छोटा-सा टुकड़ा चूसने से स्वरभंग ( गला बैठना ) की विकृति नष्ट होती है व आवास खुलती है । इससे खाँसी का प्रकोप शांत होता है, मुँह की बदबू दूर होती है, मसूड़े मजबूत बनते हैं और तोतलेपन में भी लाभ होता है ।*

*🔹सावधानियाँ : गर्भवती महिलाओं के लिए दालचीनी लेना निषिद्ध है । इसकी अधिक मात्रा लेने से पित्त ( उष्ण ) प्रक्रुतिवालों को सिरदर्द होता है । अत्यधिक मात्रा में, रात को या दीर्घकाल तक इसका सेवन करना हानिकारक है ।*
*🔹गुरुवार विशेष 🔹*

*🔸हर गुरुवार को तुलसी के पौधे में शुद्ध कच्चा दूध गाय का थोड़ा-सा ही डाले तो, उस घर में लक्ष्मी स्थायी होती है और गुरूवार को व्रत उपवास करके गुरु की पूजा करने वाले के दिल में गुरु की भक्ति स्थायी हो जाती है ।*

*🔸गुरुवार के दिन देवगुरु बृहस्पति के प्रतीक आम के पेड़ की निम्न प्रकार से पूजा करें :*

*🔸एक लोटा जल लेकर उसमें चने की दाल, गुड़, कुमकुम, हल्दी व चावल डालकर निम्नलिखित मंत्र बोलते हुए आम के पेड़ की जड़ में चढ़ाएं ।*

*ॐ ऐं क्लीं बृहस्पतये नमः ।*

*🌹 फिर उपरोक्त मंत्र बोलते हुए आम के वृक्ष की पांच परिक्रमा करें और गुरुभक्ति, गुरुप्रीति बढ़े ऐसी प्रार्थना करें । थोड़ा सा गुड़ या बेसन की मिठाई चींटियों को डाल दें ।*

*🔸गुरुवार को बाल कटवाने से लक्ष्मी और मान की हानि होती है ।*
*🔸गुरुवार के दिन तेल मालिश हानि करती है । यदि निषिद्ध दिनों में मालिश करनी ही है तो ऋषियों ने उसकी भी व्यवस्था दी है । तेल में दूर्वा डाल के मालिश करें तो वह दोष चला जायेगा ।*

*🌞 🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 29 नवम्बर 2023 दिन – बुधवार

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 29 नवम्बर 2023 दिन – बुधवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – हेमंत*
*⛅मास – मार्गशीर्ष*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – द्वितीया दोपहर 01:56 तक तत्पश्चात तृतीया*
*⛅नक्षत्र – मृगशिरा दोपहर 01:59 तक तत्पश्चात आर्द्रा*
*⛅योग – साध्य रात्रि 08:55 तक तत्पश्चात शुभ*
*⛅राहु काल – दोपहर 12:28 से 01:49 तक*
*⛅सूर्योदय – 07:02*
*⛅सूर्यास्त – 05:53*
*⛅दिशा शूल – उत्तर दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:17 से 06:10 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:02 से 12:54 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण -*
*⛅विशेष – द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है । तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🔹मंत्रजप – संबंधी सावधानियाँ🔹*

*🔸१] माला हेतु स्वच्छता: जूठे मुँह, जूठे हाथ या मल-मूत्र या किसी विवशता में साधना से उठना पड़े तो माला लेकर बैठ गये, नहीं । हाथ-पैर धोकर या स्नान करके मंत्रजप करें । माला पहनकर शौचालय में नहीं जाना चाहिए, अगर चले गये तो मालासहित स्नान कर लें और माला धो के पहन लें । स्त्रियों को रात्रि में मासिक धर्म हो गया हो तो स्नान जरुर कर लेना चाहिए ।*

*🔸२] मासिक धर्म में : महिलाओं को मासिक धर्म में न तो माला पहननी चाहिए न माला घुमानी चाहिए और न ॐकार मंत्र जपना चाहिए । जैसे ‘हरि ॐ’ मंत्र है तो ‘हरि, हरि’ जपें, ‘ॐ नम:शिवाय’ मंत्र है तो ‘नम:शिवाय’ जपें ।’ॐ ऐं नम:’ है तो ‘ऐं नम:’ जपें ।*

*🔸३] जननाशौच व मरणाशौच में : जननाशौच (संतान – जन्म के समय लगनेवाला अशौच अर्थात सूतक ) के समय प्रसूतिका स्त्री (संतान की माता ) ४० दिन तक व संतान का पिता १० दिन तक माला लेकर जप न करें । इसी प्रकार मरणाशौच (मृत्यु के समय लगनेवाला अशौच अर्थात पातक) में १३ दिन तक माला लेकर जप नहीं किया जा सकता किंतु मानसिक जप तो प्रत्येक अवस्था में किया जा सकता है ।*

*🔹पौष्टिक एवं बलवर्धक मूँगफली🔹*

*🔸मूँगफली मधुर, स्निग्ध, पौष्टिक व बलवर्धक है ।इसका तेल वात-कफनाशक, घाव को भरनेवाला, कांतिवर्धक, पौष्टिक, मधुमेह में लाभकारी, आँतों के लिए बलकारक तथा खाने में तिल के तेल के समान गुणकारी होता है ।*

*🔸मूँगफली में मौजूद पोषक तत्त्व शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं । इसमें कार्बोहाइड्रेटस रेशे, प्रोटीन, कैल्शियम, लौह, मॅग्नेशियम फॉस्फोरस, पोटैशियम, सोडियम, जिंक, ताँबा, मैगनीज एवं विटामिन बी-१, बी-२, बी-६, ई आदि तत्त्व पायें जाते हैं ।*

*🔸मूँगफली के नियमित सेवन से स्मृतिशक्ति की वृद्धि होती है । इसका सेवन समझना, याद रखना, सोचना, वैचारिक शक्ति आदि बौद्धिक क्षमताएँ विकसित करने में मूँगफली और बादाम बराबरी से सहायक होते हैं ।*

*🔸कच्ची मूँगफली दुग्धवर्धक होती है । जिन माताओं को अपने बच्चों के लिए पर्याप्त मात्रा में दूध नहीं उतरता हो वे यदि कच्ची मूँगफली को पानी में भिगोकर सेवन करती है तो दूध खुल के उतरने लगता है ।*

*🔹मूँगफली है शक्तिवर्धक आहार🔹*

*🔸मूँगफली का सेवन शरीर को शक्ति प्रदान करता है । बच्चों को यदि प्रतिदिन २०-२५ ग्राम मूँगफली खिला दी जाय तो उन्हें पोषक आहार की कमी का अनुभव नहीं होगा । बच्चों के विकास के लिए मूँगफली, चने, मूँग आदि प्रोटीनयुक्त आहार उचित मात्रा में खिलाने चाहिए । इन्हें रात में भिगोकर सुबह बच्चों कि पाचनशक्ति के अनुसार देना चाहिए । पाचनशक्ति कमजोर होने पर इन्हें उबालकर भी खाया जा सकता है । इनके सेवन से कमजोरी दूर होती है एवं शरीर में शक्ति-संचय होता है । ये अधिक श्रम एवं व्यायाम करनेवालों के लिए विशेष लाभदायी हैं ।*

*🔹मूँगफली के लड्डू🔹*

*🔹४०० ग्राम मूँगफली को धीमी आँच पर अच्छे-से-अच्छे सेंक लें । छिलके उतारकर दरदरा कूट लें । इसमें १०० ग्राम पुराना गुड़ व थोड़ी-सी इलायची मिलाकर इसके लड्डू बना लें । सर्दियों में इन लड्डुओं का सेवन रक्तवर्धक, हड्डियों को मजबूत करनेवाला व शरीर में गर्मी उत्पन्न करनेवाला हैं । मूँगफली का गजक या चिक्की भी सर्दियों में सेवनिय है ।*

*🔹ध्यान दें : मूँगफली का सेवन अधिक मात्रा में न करें तथा मूँगफली खाने के तुरंत बाद पानी न पियें ।इसे चबा-चबाकर, सेंक के अथवा पानी में भिगो के खाने से यह सुपाच्य हो जाती है । मूँगफली पानी भिगोकर खाने से उसकी गर्म तासीर भी कम हो जाती है । मूँगफली के तेल के जो गुण इस लेख में दिए गये है वे कच्ची घानी के तेल के हैं, न कि रिफाइंड तेल के । रिफाइंड तेल यहाँ दिए गये गुणों से विपरीत गुणोवाला होता है ।*

*🌞🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 29 नवम्बर 2023 दिन – बुधवार

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 29 नवम्बर 2023 दिन – बुधवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – हेमंत*
*⛅मास – मार्गशीर्ष*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – द्वितीया दोपहर 01:56 तक तत्पश्चात तृतीया*
*⛅नक्षत्र – मृगशिरा दोपहर 01:59 तक तत्पश्चात आर्द्रा*
*⛅योग – साध्य रात्रि 08:55 तक तत्पश्चात शुभ*
*⛅राहु काल – दोपहर 12:28 से 01:49 तक*
*⛅सूर्योदय – 07:02*
*⛅सूर्यास्त – 05:53*
*⛅दिशा शूल – उत्तर दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:17 से 06:10 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:02 से 12:54 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण -*
*⛅विशेष – द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है । तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🔹मंत्रजप – संबंधी सावधानियाँ🔹*

*🔸१] माला हेतु स्वच्छता: जूठे मुँह, जूठे हाथ या मल-मूत्र या किसी विवशता में साधना से उठना पड़े तो माला लेकर बैठ गये, नहीं । हाथ-पैर धोकर या स्नान करके मंत्रजप करें । माला पहनकर शौचालय में नहीं जाना चाहिए, अगर चले गये तो मालासहित स्नान कर लें और माला धो के पहन लें । स्त्रियों को रात्रि में मासिक धर्म हो गया हो तो स्नान जरुर कर लेना चाहिए ।*

*🔸२] मासिक धर्म में : महिलाओं को मासिक धर्म में न तो माला पहननी चाहिए न माला घुमानी चाहिए और न ॐकार मंत्र जपना चाहिए । जैसे ‘हरि ॐ’ मंत्र है तो ‘हरि, हरि’ जपें, ‘ॐ नम:शिवाय’ मंत्र है तो ‘नम:शिवाय’ जपें ।’ॐ ऐं नम:’ है तो ‘ऐं नम:’ जपें ।*

*🔸३] जननाशौच व मरणाशौच में : जननाशौच (संतान – जन्म के समय लगनेवाला अशौच अर्थात सूतक ) के समय प्रसूतिका स्त्री (संतान की माता ) ४० दिन तक व संतान का पिता १० दिन तक माला लेकर जप न करें । इसी प्रकार मरणाशौच (मृत्यु के समय लगनेवाला अशौच अर्थात पातक) में १३ दिन तक माला लेकर जप नहीं किया जा सकता किंतु मानसिक जप तो प्रत्येक अवस्था में किया जा सकता है ।*

*🔹पौष्टिक एवं बलवर्धक मूँगफली🔹*

*🔸मूँगफली मधुर, स्निग्ध, पौष्टिक व बलवर्धक है ।इसका तेल वात-कफनाशक, घाव को भरनेवाला, कांतिवर्धक, पौष्टिक, मधुमेह में लाभकारी, आँतों के लिए बलकारक तथा खाने में तिल के तेल के समान गुणकारी होता है ।*

*🔸मूँगफली में मौजूद पोषक तत्त्व शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं । इसमें कार्बोहाइड्रेटस रेशे, प्रोटीन, कैल्शियम, लौह, मॅग्नेशियम फॉस्फोरस, पोटैशियम, सोडियम, जिंक, ताँबा, मैगनीज एवं विटामिन बी-१, बी-२, बी-६, ई आदि तत्त्व पायें जाते हैं ।*

*🔸मूँगफली के नियमित सेवन से स्मृतिशक्ति की वृद्धि होती है । इसका सेवन समझना, याद रखना, सोचना, वैचारिक शक्ति आदि बौद्धिक क्षमताएँ विकसित करने में मूँगफली और बादाम बराबरी से सहायक होते हैं ।*

*🔸कच्ची मूँगफली दुग्धवर्धक होती है । जिन माताओं को अपने बच्चों के लिए पर्याप्त मात्रा में दूध नहीं उतरता हो वे यदि कच्ची मूँगफली को पानी में भिगोकर सेवन करती है तो दूध खुल के उतरने लगता है ।*

*🔹मूँगफली है शक्तिवर्धक आहार🔹*

*🔸मूँगफली का सेवन शरीर को शक्ति प्रदान करता है । बच्चों को यदि प्रतिदिन २०-२५ ग्राम मूँगफली खिला दी जाय तो उन्हें पोषक आहार की कमी का अनुभव नहीं होगा । बच्चों के विकास के लिए मूँगफली, चने, मूँग आदि प्रोटीनयुक्त आहार उचित मात्रा में खिलाने चाहिए । इन्हें रात में भिगोकर सुबह बच्चों कि पाचनशक्ति के अनुसार देना चाहिए । पाचनशक्ति कमजोर होने पर इन्हें उबालकर भी खाया जा सकता है । इनके सेवन से कमजोरी दूर होती है एवं शरीर में शक्ति-संचय होता है । ये अधिक श्रम एवं व्यायाम करनेवालों के लिए विशेष लाभदायी हैं ।*

*🔹मूँगफली के लड्डू🔹*

*🔹४०० ग्राम मूँगफली को धीमी आँच पर अच्छे-से-अच्छे सेंक लें । छिलके उतारकर दरदरा कूट लें । इसमें १०० ग्राम पुराना गुड़ व थोड़ी-सी इलायची मिलाकर इसके लड्डू बना लें । सर्दियों में इन लड्डुओं का सेवन रक्तवर्धक, हड्डियों को मजबूत करनेवाला व शरीर में गर्मी उत्पन्न करनेवाला हैं । मूँगफली का गजक या चिक्की भी सर्दियों में सेवनिय है ।*

*🔹ध्यान दें : मूँगफली का सेवन अधिक मात्रा में न करें तथा मूँगफली खाने के तुरंत बाद पानी न पियें ।इसे चबा-चबाकर, सेंक के अथवा पानी में भिगो के खाने से यह सुपाच्य हो जाती है । मूँगफली पानी भिगोकर खाने से उसकी गर्म तासीर भी कम हो जाती है । मूँगफली के तेल के जो गुण इस लेख में दिए गये है वे कच्ची घानी के तेल के हैं, न कि रिफाइंड तेल के । रिफाइंड तेल यहाँ दिए गये गुणों से विपरीत गुणोवाला होता है ।*

*🌞🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

ग्रामविकास व पंचायत राज विभागातर्फे राज्यस्तरीय प्रशिक्षण व कार्यशाळेचे आयोजन ग्रामीण भागाच्या सर्वांगीण विकासासाठी संवेदनशीलतेने प्रयत्न करा-ग्रामविकास मंत्री गिरीष महाजन

ग्रामविकास व पंचायत राज विभागातर्फे राज्यस्तरीय प्रशिक्षण व कार्यशाळेचे आयोजन

*ग्रामीण भागाच्या सर्वांगीण विकासासाठी संवेदनशीलतेने प्रयत्न करा-ग्रामविकास मंत्री गिरीष महाजन*

पुणे दि.२४: ग्रामीण भागाच्या सर्वांगीण विकासासाठी शासनातर्फे अनेक योजना राबविण्यात येत असून अधिकाऱ्यांनी संवेदनशीलतेने आणि पूर्ण क्षमतेने या योजनांची अंमलबजावणी करावी, असे आवाहन राज्याचे ग्रामविकास मंत्री गिरीष महाजन यांनी केले.

यशवंतराव चव्हाण विकास प्रशासन प्रबोधिनी येथे ग्रामविकास व पंचायतराज विभागातर्फे मुख्य कार्यकारी अधिकारी, उपायुक्त (आस्थापना/विकास), अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी आणि प्रकल्प संचालकांसाठी आयोजित राज्यस्तरीय प्रशिक्षण व कार्यशाळेच्या उद्घाटन प्रसंगी ते बोलत होते.

कार्यक्रमाला यशदाचे महासंचालक एस.चोक्कलिंगम, ग्रामविकास व पंचायत राज विभागाचे प्रधान सचिव एकनाथ डवले, प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना सचिव के.टी. पाटील, एमएसआरएलएमचे मुख्य कार्यकारी अधिकारी रुचेश जयवंशी, पंचायत राज संचालक आनंद भंडारी, ग्रामीण गृहनिर्माण संचालक डॉ.राजाराम दिघे, यशदाचे उपसंचालक मल्लिनाथ कलशेट्टी, विविध जिल्ह्यातील मुख्य कार्यकारी अधिकारी उपस्थित होते.

मंत्री श्री.महाजन म्हणाले, ग्रामीण भागातील लोकांचे जीवन सुसह्य करण्यासाठी केंद्र व राज्य शासनाच्या अनेक योजना आहेत. या योजनांसाठी मोठ्या प्रमाणात निधी दिला जात असताना अजूनही ग्रामीण भागातील शिक्षण, आरोग्याचे प्रश्न पूर्णतः सुटलेले नाही. ते सोडविण्यासाठी अधिकाऱ्यांनी संवेदनशीलतेने आणि कल्पकतेने काम करावे. गाव स्वच्छ आणि सुंदर होईल यासाठी गांभीर्याने प्रयत्न करावे. ग्रामीण भागातील विद्यार्थ्याला गुणवत्तापूर्ण शिक्षण देण्याचा प्रयत्न व्हावा. गावातील शैक्षणिक सुविधा आणि विद्यार्थ्यांच्या उपस्थितीविषयी अधिकाऱ्यांनी नियमित आढावा घ्यावा, असे त्यांनी सांगितले.

पंचायत राज विभाग ग्रामीण भागाचा आत्मा असल्याचे नमूद करून श्री. महाजन म्हणाले, मुख्य कार्यकारी अधिकाऱ्यांकडून मोठ्या अपेक्षा आहेत. तंत्रज्ञानामुळे कामकाजात सुलभता येत असताना शाश्वत विकासाचे उद्दिष्ट गाठण्यासाठी सुलभता झाली आहे. या तंत्रज्ञानाचा उपयोग करीत समाज आणि देशासाठी आपण काय योगदान देऊ शकू या भावनेने ग्रामीण माणसाचे जीवन सुसह्य करण्यासाठी अधिकाऱ्यांनी काम करावे. कार्यशाळेच्या माध्यमातून विचारांचे आदानप्रदान होईल आणि त्याचा फायदा ग्रामीण भागासाठी होईल असा विश्वास त्यांनी व्यक्त केला. मुख्य कार्यकारी अधिकाऱ्यांच्या अभिनव कल्पना राज्यस्तरावर राबविण्यासाठी सर्व सहकार्य करण्यात येईल, अशी ग्वाही श्री.महाजन यांनी दिली.

महिलांचे सक्षमीकरण करण्यासाठी ‘उमेद’सारखी महत्वाची योजना राबविण्यात येत आहे. महिला बचत गटांच्या माध्यमातून चांगले काम होत आहे. गरीब माणसाला हक्काचे घर देण्यासाठी घरकुल योजना आहे. अशा विविध योजनांचा माध्यमातून शेवटच्या माणसापर्यंत पोहोचण्याचे, त्याला त्याच्या हक्कच्या मूलभूत सुविधा आणि त्याचे जीवनमान उंचाण्याचे कार्य ग्रामविकास आणि पंचायत राज विभागाच्या माध्यमातून व्हावे, अशी अपेक्षा मंत्री श्री.महाजन यांनी व्यक्त केली.

प्रधान सचिव श्री.डवले यांनी कार्यशाळेविषयी माहिती दिली. ते म्हणाले, ग्रामविकास विभागाच्या कामकाजात येणाऱ्या अडचणी सोडविण्यासाठी शिकण्याची प्रक्रिया सुलभ करण्याच्यादृष्टीने कार्यशाळेचे आयोजन करण्यात आले आहे. कामकाज सुलभीकरण, संगणकीकरण आणि विविध शासकीय योजनांच्या अभिसरणाबाबतही चर्चा करण्यात येणार असल्याचे त्यांनी सांगितले. समाजातील शेवटच्या माणसाला शासकीय योजनांचा लाभ देण्याची भावना विकसित करण्याच्यादृष्टीने कार्यशाळेकडे पाहावे, असे आवाहन त्यांनी केले.

तीन दिवस चालणाऱ्या या कार्यशाळेत महाराष्ट्र राज्य ग्रामीण जीवनोन्नती अभियान (उमेद), ग्रामीण गृहनिर्माण, पंचायतराज, राष्ट्रीय ग्राम स्वराज्य अभियान, त्रिस्तरीय विकास आराखडे, विविध योजनांचे अभिसरण-महाराष्ट्र ग्रामीण रोजगार हमी योजना, राज्यस्तरीय व जिल्हास्तरीय योजना, प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री ग्रामीण सडक योजना व इतर योजनांची अंमलबजावणी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, स्वच्छ शाळा-सुंदर शाळा, शाळा विकासासाठी नाविन्यपूर्ण उपक्रम, शाश्वत विकास ध्येये, पंचायत विकास निर्देशांक, पर्यावरणपुरक ग्रामीण विकास, प्रशासनातील नैतिकता व नितीमत्ता आदी विविध विषयांवर चर्चा करण्यात येणार आहे. विविध जिल्ह्यांचे नाविन्यपूर्ण उपक्रम व यशोगाथांचे सादरीकरणही यादरम्यान करण्यात येईल. जिल्हा परिषदेतील प्रशासकीय बाबींसंदर्भातही कार्यशाळेत विचारमंथन करण्यात येणार आहे.
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ग्रामविकास व पंचायत राज विभागातर्फे राज्यस्तरीय प्रशिक्षण व कार्यशाळेचे आयोजन ग्रामीण भागाच्या सर्वांगीण विकासासाठी संवेदनशीलतेने प्रयत्न करा-ग्रामविकास मंत्री गिरीष महाजन

ग्रामविकास व पंचायत राज विभागातर्फे राज्यस्तरीय प्रशिक्षण व कार्यशाळेचे आयोजन

*ग्रामीण भागाच्या सर्वांगीण विकासासाठी संवेदनशीलतेने प्रयत्न करा-ग्रामविकास मंत्री गिरीष महाजन*

पुणे दि.२४: ग्रामीण भागाच्या सर्वांगीण विकासासाठी शासनातर्फे अनेक योजना राबविण्यात येत असून अधिकाऱ्यांनी संवेदनशीलतेने आणि पूर्ण क्षमतेने या योजनांची अंमलबजावणी करावी, असे आवाहन राज्याचे ग्रामविकास मंत्री गिरीष महाजन यांनी केले.

यशवंतराव चव्हाण विकास प्रशासन प्रबोधिनी येथे ग्रामविकास व पंचायतराज विभागातर्फे मुख्य कार्यकारी अधिकारी, उपायुक्त (आस्थापना/विकास), अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी आणि प्रकल्प संचालकांसाठी आयोजित राज्यस्तरीय प्रशिक्षण व कार्यशाळेच्या उद्घाटन प्रसंगी ते बोलत होते.

कार्यक्रमाला यशदाचे महासंचालक एस.चोक्कलिंगम, ग्रामविकास व पंचायत राज विभागाचे प्रधान सचिव एकनाथ डवले, प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना सचिव के.टी. पाटील, एमएसआरएलएमचे मुख्य कार्यकारी अधिकारी रुचेश जयवंशी, पंचायत राज संचालक आनंद भंडारी, ग्रामीण गृहनिर्माण संचालक डॉ.राजाराम दिघे, यशदाचे उपसंचालक मल्लिनाथ कलशेट्टी, विविध जिल्ह्यातील मुख्य कार्यकारी अधिकारी उपस्थित होते.

मंत्री श्री.महाजन म्हणाले, ग्रामीण भागातील लोकांचे जीवन सुसह्य करण्यासाठी केंद्र व राज्य शासनाच्या अनेक योजना आहेत. या योजनांसाठी मोठ्या प्रमाणात निधी दिला जात असताना अजूनही ग्रामीण भागातील शिक्षण, आरोग्याचे प्रश्न पूर्णतः सुटलेले नाही. ते सोडविण्यासाठी अधिकाऱ्यांनी संवेदनशीलतेने आणि कल्पकतेने काम करावे. गाव स्वच्छ आणि सुंदर होईल यासाठी गांभीर्याने प्रयत्न करावे. ग्रामीण भागातील विद्यार्थ्याला गुणवत्तापूर्ण शिक्षण देण्याचा प्रयत्न व्हावा. गावातील शैक्षणिक सुविधा आणि विद्यार्थ्यांच्या उपस्थितीविषयी अधिकाऱ्यांनी नियमित आढावा घ्यावा, असे त्यांनी सांगितले.

पंचायत राज विभाग ग्रामीण भागाचा आत्मा असल्याचे नमूद करून श्री. महाजन म्हणाले, मुख्य कार्यकारी अधिकाऱ्यांकडून मोठ्या अपेक्षा आहेत. तंत्रज्ञानामुळे कामकाजात सुलभता येत असताना शाश्वत विकासाचे उद्दिष्ट गाठण्यासाठी सुलभता झाली आहे. या तंत्रज्ञानाचा उपयोग करीत समाज आणि देशासाठी आपण काय योगदान देऊ शकू या भावनेने ग्रामीण माणसाचे जीवन सुसह्य करण्यासाठी अधिकाऱ्यांनी काम करावे. कार्यशाळेच्या माध्यमातून विचारांचे आदानप्रदान होईल आणि त्याचा फायदा ग्रामीण भागासाठी होईल असा विश्वास त्यांनी व्यक्त केला. मुख्य कार्यकारी अधिकाऱ्यांच्या अभिनव कल्पना राज्यस्तरावर राबविण्यासाठी सर्व सहकार्य करण्यात येईल, अशी ग्वाही श्री.महाजन यांनी दिली.

महिलांचे सक्षमीकरण करण्यासाठी ‘उमेद’सारखी महत्वाची योजना राबविण्यात येत आहे. महिला बचत गटांच्या माध्यमातून चांगले काम होत आहे. गरीब माणसाला हक्काचे घर देण्यासाठी घरकुल योजना आहे. अशा विविध योजनांचा माध्यमातून शेवटच्या माणसापर्यंत पोहोचण्याचे, त्याला त्याच्या हक्कच्या मूलभूत सुविधा आणि त्याचे जीवनमान उंचाण्याचे कार्य ग्रामविकास आणि पंचायत राज विभागाच्या माध्यमातून व्हावे, अशी अपेक्षा मंत्री श्री.महाजन यांनी व्यक्त केली.

प्रधान सचिव श्री.डवले यांनी कार्यशाळेविषयी माहिती दिली. ते म्हणाले, ग्रामविकास विभागाच्या कामकाजात येणाऱ्या अडचणी सोडविण्यासाठी शिकण्याची प्रक्रिया सुलभ करण्याच्यादृष्टीने कार्यशाळेचे आयोजन करण्यात आले आहे. कामकाज सुलभीकरण, संगणकीकरण आणि विविध शासकीय योजनांच्या अभिसरणाबाबतही चर्चा करण्यात येणार असल्याचे त्यांनी सांगितले. समाजातील शेवटच्या माणसाला शासकीय योजनांचा लाभ देण्याची भावना विकसित करण्याच्यादृष्टीने कार्यशाळेकडे पाहावे, असे आवाहन त्यांनी केले.

तीन दिवस चालणाऱ्या या कार्यशाळेत महाराष्ट्र राज्य ग्रामीण जीवनोन्नती अभियान (उमेद), ग्रामीण गृहनिर्माण, पंचायतराज, राष्ट्रीय ग्राम स्वराज्य अभियान, त्रिस्तरीय विकास आराखडे, विविध योजनांचे अभिसरण-महाराष्ट्र ग्रामीण रोजगार हमी योजना, राज्यस्तरीय व जिल्हास्तरीय योजना, प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री ग्रामीण सडक योजना व इतर योजनांची अंमलबजावणी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, स्वच्छ शाळा-सुंदर शाळा, शाळा विकासासाठी नाविन्यपूर्ण उपक्रम, शाश्वत विकास ध्येये, पंचायत विकास निर्देशांक, पर्यावरणपुरक ग्रामीण विकास, प्रशासनातील नैतिकता व नितीमत्ता आदी विविध विषयांवर चर्चा करण्यात येणार आहे. विविध जिल्ह्यांचे नाविन्यपूर्ण उपक्रम व यशोगाथांचे सादरीकरणही यादरम्यान करण्यात येईल. जिल्हा परिषदेतील प्रशासकीय बाबींसंदर्भातही कार्यशाळेत विचारमंथन करण्यात येणार आहे.
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आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 26 नवम्बर 2023 दिन – रविवार

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 26 नवम्बर 2023
दिन – रविवार
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – हेमंत*
*⛅मास – कार्तिक*
*⛅पक्ष – शुक्ल*
*⛅तिथि – चतुर्दशी शाम 03:53 तक तत्पश्चात पूर्णिमा*
*⛅नक्षत्र – भरणी दोपहर 02:05 तक तत्पश्चात कृतिका*
*⛅योग – परिघ रात्रि 01:37 तक तत्पश्चात शिव*
*⛅राहु काल – शाम 04:32 से 05:53 तक*
*⛅सूर्योदय – 07:00*
*⛅सूर्यास्त – 05:53*
*⛅दिशा शूल – पश्चिम दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:15 से 06:08 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:01 से 12:53 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – वैकुंठ चतुर्दशी, पूर्णिमा, देव दीवाली*
*⛅विशेष – चतुर्दशी के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🌹देव दिवाली-कार्तिक पूर्णिमा – 26/27 नवम्बर 2023 🌹*

*🔹सुख-समृद्धि हेतु देव दिवाली – कार्तिक पूर्णिमा पर करें ये उपाय*

*🔸इन दिनों में लक्ष्मीजी के स्वागत के लिए घर के अंदर-बाहर अच्छे से साफ-सफाई करें । जिस घर में गंदगी होती है वहाँ लक्ष्मीजी का निवास नहीं होता है । अतः आम दिनों में भी इसका ध्यान रखें । कभी-कभी गोमूत्र, नमक का पोता लगायें ।*

*🔸 घर के मुख्य द्वार पर आम के पत्तों का तोरण लगाने और घर के अंदर गंगाजल का छिड़काव करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है व लक्ष्मीजी प्रसन्न होती हैं ।*

*🔸धन की परेशानियों से बचने के लिए इस दिन न किसीसे कर्ज लें और न किसीको कर्ज दें ।*

*🔸कार्तिक पूर्णिमा में किये गये स्नान, दान, होम, यज्ञ और उपासना, ध्यान, जप आदि का अनंत फल होता है । इस दिन सायं संध्या के समय दीपदान का विशेष महत्त्व है । पद्म पुराण में आता है: ‘कार्तिक पूर्णिमा के दिन किये गये दान, जप आदि का दस यज्ञों के समान फल होता है ।’*

*🔹औषधीय गुणों से भरपूर गाजर🔹*

*🔸’भावप्रकाश निघंटु’ के अनुसार यह मधुर तथा तिक्त रस युक्त, तीक्ष्ण, उष्ण व भूख बढ़ानेवाली है । यह रक्त व कांति वर्धक, कृमिनाशक, कफ को निकालनेवाली व वात को दूर करनेवाली है। । इसमें विटामिन ‘ए’, ‘बी’, ‘सी’, ‘डी’, प्रोटीन्स, कार्बोहाइड्रेट्स, फॉस्फोरस, लौह तत्त्व, रेशे (fibres) आदि पाये जाते हैं । यह रोगप्रतिकारक शक्ति (immunity) बढ़ाती है व विटामिन ‘ए’ की प्रचुरता होने से नेत्रज्योति की वृद्धि करती है ।*

*🔸गाजर में मूँग या चने की दाल डालकर घी में जीरा, हींग, अदरक, हल्दी, कढीपत्ता आदि की छौंक लगा के बनायी गयी सब्जी खाने से चिड़चिड़ापन, मानसिक तनाव आदि विकार दूर होते हैं तथा शरीर को पुष्टि मिलती है ।*

*🔸गाजर के टुकड़ों में सेंधा नमक, कटा पुदीना, टमाटर, अदरक तथा नींबू का रस मिलाकर सलाद के रूप में सेवन करने से पाचनशक्ति की वृद्धि होती है, भोजन में अरुचि, अफरा (gas) आदि का निवारण होता है । आटे में कद्दूकश की हुई गाजर, कटा हरा धनिया, हल्दी, अजवायन, नमक और मिर्च मिला के रोटी बना सकते हैं ।*

*🔸स्वास्थ्यप्रद गाजर रस🔸*
*🔸गाजर का रस रक्तशुद्धिकर होने से कील- मुँहासे, फोड़े-फुंसी आदि में लाभकारी है । यह रक्ताल्पता (anaemia) को दूर करता है, वर्ण में निखार लाता है व यकृत (liver) की कार्यक्षमता को बढ़ाने में मददरूप हैं ।*

*🔹औषधीय प्रयोग🔹*

*🔸गाजर का रस दिन में १-२ बार पीने से हृदय-दौर्बल्य में लाभ होता है ।*

*🔸इसके रस में १-२ चम्मच शहद मिलाकर सेवन करना छाती के दर्द में हितकारी है । इस प्रयोग में गाजर को पहले उबाल लें फिर रस निकालें ।*

*🔸 इसके रस में चुकंदर का २५ मि.ली. रस मिलाकर दिन में १-२ बार पीने से मासिक धर्म की अनियमितता तथा अवरोध में लाभ होता है ।*
*🔸गाजर-रस की मात्रा : ४०-५० मि.ली.*

*🔹 रविवार विशेष🔹*
*🔹 रविवार के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*

*🔹 रविवार के दिन आँवला, मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90)*

*🔹 रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75)*

*🔹 रविवार सूर्यदेव का दिन है, इस दिन क्षौर (बाल काटना व दाढ़ी बनवाना) कराने से धन, बुद्धि और धर्म की क्षति होती है ।*

*🔹 स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए । इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं ।*

*🔹 रविवार के दिन तुलसी पत्ता तोड़ना एवं पीपल के पेड़ को स्पर्श करना निषेध है ।*

*🌞🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

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